रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने एक्टर आमिर खान को निशाना बनाते हुए जो विवादास्पद बयान दिया था उस पर राज्यसभा में सोमवार को काफी हंगामा हुआ| स्पीकर की बात को बीच से काटते हुए भारी शोर शराबे के बीच सांसदों ने पर्रिकर के लिए कहा कि "वह रक्षामंत्री हैं, रक्षा कहा हैं|" सीताराम येचूरी सीपीएम के नेता  ने कहा कि "रक्षामंत्री डर का माहौल पैदा कर रहे हैं", वहीं गुलाम नबी आज़ाद के मुताबिक "पूरे देश को पता लगना चाहिए कि पर्रिकर देश के अल्पसंख्यकों को किस तरह का सबक सिखाना चाहते हैं|" 
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पर्रिकर ने राज्यसभा में कहा कि "सदस्य पहले वीडियो देखें उसके बाद ही किसी भी तरह के फैसले पर पहुंचे|" उन्होंने यह भी कहा कि "मैंने किसी का नाम नहीं लिया और न ही किसी को धमकाया|" बसपा सांसद मायावती ने इसी बीच अपनी बात रखते हुए कहा कि "बड़े दुख के साथ यह कहना पड़ता है कि जब से केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनी है धार्मिक अल्पसंख्यक समाज खासतौर पर मुस्लिम अस्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है|"  
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अपनी बात पूरी करते हुए  मायावती ने कहा कि "पीएम अपने मंत्रियों पर लगाम क्यों नहीं कसते, मंत्री मुस्लमानों के बारे में, दलितों के बारे में जिस तरह की भाषा बोलते हैं, उस पर प्रधानमंत्री को सदन में आकर सफाई देनी चाहिए|" दरअसल मनोहर पर्रिकर ने शनिवार एक कार्यक्रम के वक्त आमिर खान के पिछले साल दिए गए एक बयान पर टिप्पणी की थी। आमिर खान का नाम लिए बिना रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि "कैसे कुछ लोगों को देश के विरोध में बोलने का साहस हो जाता है| 
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ऐसे लोग जो देश के खिलाफ बोलते हैं, उन्हें इस देश के लोगों द्वारा सबक सिखाए जाने की जरूरत है|" पिछले साल नवंबर में आमिर खान ने कहा था कि "वह महसूस करते हैं कि पिछले छह से आठ महीने में देश में असुरक्षा और भय की भावना बढ़ी है।" उन्होंने कहा था कि "मैं जब घर पर किरण के साथ बात करता हूं, वह कहती हैं कि क्या हमें भारत से बाहर चले जाना चाहिए?"


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