'सतलुज' के विवाद के बीच डायरेक्टर छेत्तन DK ने बताया कि उनकी फ़िल्म 'द इंडिया स्टोरी' को CBFC से सर्टिफिकेट मिलने में असामान्य देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि 'असहज सच्चाइयों' पर बनी फ़िल्मों के लिए यह बेहद मुश्किल दौर है — जो सेंसर बोर्ड पर अप्रत्यक्ष सरकारी दबाव की ओर इशारा करता है।

एक फ़िल्म को रोकने के दो तरीक़े हैं — पहला, खुलेआम बैन कर दो और विवाद झेलो; दूसरा, फ़ाइल को इतने चक्करों में डाल दो कि फ़िल्मकार थककर ख़ुद पीछे हट जाए। 2026 में भारतीय सिनेमा में दूसरा तरीक़ा ज़्यादा चल रहा है — और 'द इंडिया स्टोरी' इसकी ताज़ा मिसाल है।

बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक़, डायरेक्टर छेत्तन DK ने खुलकर कहा है कि उनकी फ़िल्म 'द इंडिया स्टोरी' महीनों से CBFC के दफ़्तरों में अटकी पड़ी है। न कोई साफ़ इनकार आया, न कट्स की फ़ेहरिस्त — बस एक अनंत इंतज़ार, जिसका कोई आख़िरी पन्ना नज़र नहीं आता। छेत्तन DK के शब्दों में: "It's a difficult time for films that speak about uncomfortable realities" — यानी असहज सच्चाइयों पर बोलने वाली फ़िल्मों के लिए यह बेहद कठिन दौर है।

अब इस बयान को अकेला मत पढ़िए। इसे उस माहौल में रखिए जहाँ दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' — जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी पर बनी फ़िल्म — ZEE5 पर आते ही 48 घंटों में गायब हो गई। 'सतलुज' को थिएटर रिलीज़ कभी मिली ही नहीं, और OTT पर भी उसकी ज़िंदगी एक छोटे से वीकेंड जितनी रही। दो अलग-अलग फ़िल्में, दो अलग डायरेक्टर — लेकिन एक ही पैटर्न: सेंसिटिव सब्जेक्ट + सरकारी असहजता = दरवाज़ा बंद।

इनसाइड टॉक

इंडस्ट्री हलकों में फुसफुसाहट यह है कि CBFC को कोई लिखित आदेश नहीं दिया जाता — बस एक 'ऊपर से इशारा' काफ़ी है। ट्रेड सर्कल में चर्चा है कि जब कोई फ़िल्म सतलुज जल-विवाद, सीमा विवाद, या किसी संवेदनशील ऐतिहासिक शख़्सियत को छूती है, तो CBFC की फ़ाइल अचानक 'प्रोसेसिंग' में अटक जाती है — न हाँ, न ना। एक बड़े प्रोडक्शन हाउस से जुड़े सूत्रों के हवाले से बात यह भी चल रही है कि कई फ़िल्मकार अब स्क्रिप्ट स्टेज पर ही ऐसे विषयों से कतरा रहे हैं — सेल्फ़-सेंसरशिप का यह अघोषित दौर शायद किसी सरकारी बैन से ज़्यादा ख़तरनाक है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

CBFC का 'साइलेंट होल्ड' — बैन से ज़्यादा ख़तरनाक

सोचिए, अगर CBFC साफ़ तौर पर कहे कि फ़िल्म बैन है — तो कम से कम फ़िल्मकार ट्रिब्यूनल जा सकता है, कोर्ट में चुनौती दे सकता है, मीडिया में शोर मचा सकता है। लेकिन जब फ़ाइल बस 'लंबित' रहती है — न हाँ, न ना — तो लड़ने का रास्ता ही नहीं बचता। यह एक तरह की नौकरशाही चुप्पी है जो क़ानूनी रूप से बेदाग़ है लेकिन असर में बैन से कम नहीं। 'द इंडिया स्टोरी' के मामले में यही हो रहा है — बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के अनुसार, सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में कोई ठोस आपत्ति दर्ज नहीं की गई, लेकिन क्लियरेंस भी नहीं आया।

ठीक वैसे ही जैसे पहले 'पंजाब 95' (जो बाद में 'सतलुज' बनी) को सालों तक अँधेरे में रखा गया। दिलजीत दोसांझ जैसा बड़ा नाम भी उस दीवार को नहीं तोड़ पाया — तो छेत्तन DK जैसे इंडिपेंडेंट फ़िल्मकार के लिए रास्ता कितना मुश्किल होगा, अंदाज़ा लगाइए।

क्या यह सरकारी दबाव है या स्मार्ट PR?

एक सवाल ज़रूर उठता है — क्या छेत्तन DK का यह बयान जेनुइन फ्रस्ट्रेशन है, या रिलीज़ से पहले फ़िल्म के लिए विवाद का तड़का लगाने की चालाक रणनीति? इंडस्ट्री में दोनों तरह की मिसालें हैं। 'उड़ता पंजाब' के मेकर्स ने CBFC से लड़ाई को मार्केटिंग में बदल दिया था — और फ़िल्म ने फ़ायदा उठाया। लेकिन 'सतलुज' के मामले में जो हुआ — OTT से अचानक ग़ायब होना — वह PR स्टंट नहीं, असली सेंसरशिप थी। इसलिए इंडिया हेराल्ड का आकलन यह है कि छेत्तन DK का बयान महज़ प्रमोशनल नहीं — यह एक ऐसे पैटर्न का हिस्सा है जो भारतीय सिनेमा में चुपचाप जड़ें जमा रहा है।

आगे क्या होगा — नज़र किस पर रखें?

अगर 'द इंडिया स्टोरी' को अगले कुछ हफ़्तों में CBFC क्लियरेंस मिल जाती है, तो समझिए कि मीडिया दबाव ने काम किया — जैसा 'उड़ता पंजाब' में हुआ था। लेकिन अगर फ़ाइल वैसी ही अटकी रही, तो यह 2026 का सबसे बड़ा सेंसरशिप केस बन सकता है। ध्यान रखिए — 'सतलुज' का विवाद अभी ठंडा नहीं हुआ है; सतलुज नदी जल-बँटवारे का मुद्दा पंजाब-हरियाणा राजनीति में ज़िंदा है, और ऐसे माहौल में कोई भी सरकार नहीं चाहेगी कि एक और फ़िल्म उस घाव को कुरेदे।

फ़िल्मकारों के लिए असली डर यह नहीं कि CBFC 'नहीं' कहेगा — असली डर यह है कि वो कुछ कहेगा ही नहीं। और जब चुप्पी ही सबसे बड़ा हथियार बन जाए, तो सिनेमा की आज़ादी किस अदालत में लड़ी जाए?

मुख्य बातें

  • CBFC ने 'द इंडिया स्टोरी' को न रिजेक्ट किया न अप्रूव — 'साइलेंट होल्ड' बैन से ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है — बॉलीवुड हंगामा
  • दिलजीत की 'सतलुज' OTT से 48 घंटों में गायब + 'द इंडिया स्टोरी' CBFC में अटकी — दोनों में एक ही पैटर्न दिखता है
  • डायरेक्टर छेत्तन DK ने कहा: 'असहज सच्चाइयों पर बनी फ़िल्मों के लिए यह बेहद मुश्किल दौर है' — बॉलीवुड हंगामा
  • इंडस्ट्री चर्चा: कई फ़िल्मकार स्क्रिप्ट स्टेज पर ही संवेदनशील विषयों से कतरा रहे हैं — सेल्फ़-सेंसरशिप का अघोषित दौर
  • अगर जल्दी क्लियरेंस मिली तो मीडिया दबाव का नतीजा, नहीं मिली तो 2026 का सबसे बड़ा सेंसरशिप विवाद

आँकड़ों में

  • 'सतलुज' ZEE5 पर आने के 48 घंटों के भीतर हटा दी गई — रिपोर्ट्स के अनुसार
  • डायरेक्टर छेत्तन DK के अनुसार 'द इंडिया स्टोरी' महीनों से CBFC क्लियरेंस का इंतज़ार कर रही है — बॉलीवुड हंगामा

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