सलमान खुर्शीद की खामेनेई जनाज़ा यात्रा कांग्रेस को चुनावी नुकसान पहुँचा सकती है क्योंकि इसने BJP को हिंदी बेल्ट में 'मुस्लिम तुष्टीकरण' का सबसे ताज़ा और ताकतवर नैरेटिव दे दिया है — ठीक उस समय जब उत्तर प्रदेश में ज़मीनी लड़ाई तेज़ हो रही है।
एक तस्वीर। बस एक तस्वीर — सलमान खुर्शीद तेहरान की उस भीड़ में खड़े हैं जहाँ अयातुल्ला अली खामेनेई की नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ी जा रही है, और हज़ारों किलोमीटर दूर दिल्ली में कांग्रेस का वॉर रूम बेचैन हो उठा है। यह तस्वीर श्रद्धांजलि की है या सियासी हत्या की — यह सवाल अब भारतीय चुनावी बिसात का सबसे गरम मोहरा बन चुका है।
हिंदुस्तान टाइम्स और NDTV के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती जून 2026 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम प्रार्थना में शामिल हुए। तेहरान में लाखों शोक मनाने वालों के बीच ये दो भारतीय चेहरे — एक पूर्व विदेश मंत्री, दूसरी कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री — 'व्यक्तिगत क्षमता' में पहुँचे थे। News18 ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार ने कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा।
लेकिन राजनीति में 'व्यक्तिगत' जैसा कुछ नहीं होता — खासकर तब जब आप उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद से दो बार सांसद रह चुके हों और अपनी ज़मीन तलाश रहे हों।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यही है कि खुर्शीद का यह कदम कांग्रेस आलाकमान की मंज़ूरी के बिना उठाया गया। पार्टी के भीतर के सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी की टीम इस यात्रा से 'अनकम्फर्टेबल' है — लेकिन खुलकर खुर्शीद को रोकना भी मुश्किल है, क्योंकि वे 'अपनी कैपेसिटी' का तर्क दे रहे हैं। ट्रेड हलकों में चर्चा है कि खुर्शीद यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का एक नया 'स्पेस' बनाना चाहते हैं — खासतौर पर तब जब समाजवादी पार्टी और AIMIM दोनों इसी ज़मीन पर दावा ठोक रहे हैं।
(यह राजनीतिक गलियारों में प्रचलित चर्चा और विश्लेषण पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
खुर्शीद की गणित — यूपी की ज़मीन और वोटबैंक का लालच
इंडियन एक्सप्रेस ने इस यात्रा को 'राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण' बताते हुए लिखा कि महबूबा मुफ्ती के लिए यह कश्मीर की शिया आबादी और ईरान-कनेक्शन को मज़बूत करने का मौका है, जबकि खुर्शीद के लिए दांव अलग है। खुर्शीद यूपी के उस मुस्लिम वोट ब्लॉक पर नज़र गड़ाए हैं जो पिछले कई चुनावों में कांग्रेस से दूर जा चुका है। 2024 लोकसभा में यूपी की 80 सीटों में कांग्रेस ने INDIA गठबंधन में रहकर मुश्किल से कुछ सीटें जीतीं — लेकिन अकेले दम पर मुस्लिम इलाकों में पार्टी का वज़ूद लगभग ख़त्म हो चुका है।
खुर्शीद जानते हैं कि एक 'अंतरराष्ट्रीय शिया कनेक्शन' उन्हें फ़र्रुख़ाबाद-रामपुर बेल्ट में एक अलग पहचान दे सकता है। लेकिन यह 'पहचान' किस क़ीमत पर?
BJP का 'गोल्डन गिफ़्ट' — हिंदी बेल्ट में नैरेटिव सेट
ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP के IT सेल ने इस तस्वीर को मिनटों में वायरल कर दिया — कैप्शन था: 'देखिए, कांग्रेस के नेता किसकी नमाज़ पढ़ रहे हैं।' यह वही ईरान है जिस पर अमेरिका ने दशकों तक प्रतिबंध लगाए, जिसके 'मौत को अमेरिका' के नारे अंतरराष्ट्रीय सुर्खियाँ बने, और जिसके परमाणु कार्यक्रम पर भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में वोट दिया था। BJP का तर्क सीधा है: कांग्रेस नेता उस शासन को श्रद्धांजलि दे रहे हैं जिसे पश्चिमी दुनिया 'थियोक्रेटिक ऑथॉरिटेरियनिज़्म' कहती है।
India Today ने एक अलग रिपोर्ट में सवाल उठाया कि क्या ईरान ने कुछ अंतरराष्ट्रीय शख़्सियतों पर जनाज़े में आने का दबाव डाला — हालाँकि खुर्शीद और मुफ्ती के संदर्भ में ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि यह एक तस्वीर नहीं, एक चुनावी हथियार है — और इसका असली निशाना 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव है। BJP को हिंदी बेल्ट में जो 'मुस्लिम तुष्टीकरण' का नैरेटिव चाहिए, वह अब तक बनावटी ट्वीट्स और पुराने बयानों से चलता था। अब उनके पास एक ताज़ा, असली तस्वीर है — एक कांग्रेसी नेता, ईरान की धरती पर, एक 'सुप्रीम लीडर' के जनाज़े में। इससे बेहतर 'ऑप्टिक्स' BJP की प्रचार मशीनरी को मिल ही नहीं सकती थी।
कांग्रेस का दोहरा संकट — बोलें तो फँसें, चुप रहें तो और फँसें
द वायर ने खुर्शीद को 'एक सम्मानित नेता' बताते हुए उनकी यात्रा को रिपोर्ट किया, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई है। पार्टी का यह मौन ही सबसे बड़ा बयान है। अगर कांग्रेस खुर्शीद का बचाव करती है, तो BJP कहेगी 'देखा, पार्टी का आधिकारिक रुख यही है।' अगर दूरी बनाती है, तो मुस्लिम वोटर को संदेश जाएगा कि कांग्रेस 'अपनों' को भी छोड़ देती है।
यह वही जाल है जो 2019 में बालाकोट के बाद कांग्रेस को फँसा चुका है — जब 'सर्जिकल स्ट्राइक' पर सवाल उठाने की कोशिश ने पार्टी को 'राष्ट्रविरोधी' के टैग से लाद दिया। अब तस्वीर अलग है, लेकिन BJP की प्लेबुक वही है।
आगे क्या — 2027 की बिसात पर यह मोहरा कहाँ गिरेगा?
अगले कुछ हफ़्तों में देखने लायक यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान खुर्शीद से 'स्पष्टीकरण' माँगती है या नहीं। अगर राहुल गांधी चुप रहते हैं, तो यह तस्वीर BJP के हर रैली पोस्टर पर दिखेगी — 2027 तक। अगर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है, तो खुर्शीद के अपना गुट बनाकर अलग होने की अटकलें और तेज़ होंगी।
महबूबा मुफ्ती का दांव अलग है — कश्मीर में शिया-सुन्नी समीकरण पर उनकी पकड़ मज़बूत करने का मौका है। लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में उनकी यात्रा का असर सीमित रहेगा।
असली सवाल यह है: क्या कांग्रेस के पास अब इतनी ताक़त बची है कि वह इस नैरेटिव को पलट सके, या हर बार की तरह BJP की प्रचार मशीनरी इसे 'सच' बना देगी — और कांग्रेस सफ़ाई देते-देते अगला चुनाव भी गँवा बैठेगी?
आरोप और अटकलें नामित स्रोतों और राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित हैं; उप-न्यायिक मामलों को बिना पूर्वाग्रह के रिपोर्ट किया गया है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- सलमान खुर्शीद और महबूबा मुफ्ती 'व्यक्तिगत क्षमता' में तेहरान गए — भारत सरकार का कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं था (News18)
- BJP IT सेल ने इस तस्वीर को मिनटों में 'मुस्लिम तुष्टीकरण' के नैरेटिव में बदल दिया — 2027 यूपी चुनाव तक इसका इस्तेमाल होने की संभावना
- कांग्रेस आलाकमान की आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई — यह मौन पार्टी के दोहरे संकट को उजागर करता है
- खुर्शीद का दांव यूपी के मुस्लिम वोट ब्लॉक पर कब्ज़े का है — जहाँ SP और AIMIM पहले से सक्रिय हैं
- इंडियन एक्सप्रेस ने इस यात्रा को 'राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण' बताया — कश्मीर और यूपी दोनों के समीकरणों पर असर पड़ेगा
आँकड़ों में
- भारत सरकार ने खामेनेई जनाज़े के लिए कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा (News18)
- 2024 लोकसभा में यूपी की 80 सीटों पर कांग्रेस का अकेले दम पर मुस्लिम इलाकों में वज़ूद लगभग ख़त्म
- तेहरान में लाखों शोक मनाने वाले जनाज़े में शामिल हुए (NDTV, ज़ी न्यूज़)
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती (हिंदुस्तान टाइम्स, द वायर के अनुसार)
- क्या: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की नमाज़-ए-जनाज़ा में शामिल हुए (NDTV, इंडिया टुडे)
- कब: जून 2026, जनाज़ा प्रार्थना तेहरान में सम्पन्न (NDTV लाइव अपडेट्स)
- कहाँ: तेहरान, ईरान (ज़ी न्यूज़, हिंदुस्तान टाइम्स)
- क्यों: खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए — लेकिन भारतीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसमें वोटबैंक पॉलिटिक्स की गहरी परत है (इंडियन एक्सप्रेस)
- कैसे: व्यक्तिगत क्षमता में तेहरान पहुँचे, भारत सरकार का कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा गया (News18)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सलमान खुर्शीद ईरान में खामेनेई के जनाज़े में क्यों गए?
खुर्शीद 'व्यक्तिगत क्षमता' में तेहरान गए — लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह यूपी में मुस्लिम वोटबैंक पर अपनी पकड़ मज़बूत करने का कदम है (इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स)।
क्या भारत सरकार ने खामेनेई के जनाज़े में कोई प्रतिनिधि भेजा?
नहीं, भारत सरकार ने कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा। खुर्शीद और महबूबा मुफ्ती व्यक्तिगत रूप से गए (News18)।
इस यात्रा से कांग्रेस को क्या नुकसान हो सकता है?
BJP को 'मुस्लिम तुष्टीकरण' का ताज़ा नैरेटिव मिला है जो 2027 यूपी विधानसभा चुनाव तक इस्तेमाल हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान अभी तक चुप है — बचाव करें तो BJP का तर्क मज़बूत, दूरी बनाएँ तो मुस्लिम वोटर नाराज़।
महबूबा मुफ्ती ईरान क्यों गईं?
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, महबूबा मुफ्ती के लिए यह कश्मीर की शिया आबादी और ईरान-कनेक्शन को मज़बूत करने का अवसर है।





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