टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशनल तैयारी बढ़ाने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हाल के जम्मू हमलों और LoC पर बढ़ती घुसपैठ के बीच यह ड्रिल रूटीन नहीं बल्कि एक स्पष्ट सामरिक और कूटनीतिक संदेश है।

जब कोई सेना अचानक ड्रिल करती है, तो दुनिया सुनती है — भले ही वह एक गोली न चलाए। जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की ताज़ा मॉक ड्रिल ठीक ऐसी ही है: एक ऐसा सैन्य अभ्यास जिसकी गूँज इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक पहुँचती है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशनल प्रिपेयर्डनेस बढ़ाने के मक़सद से यह मॉक ड्रिल आयोजित की। सतही तौर पर यह एक रूटीन सैन्य अभ्यास लगता है — लेकिन इसकी टाइमिंग, स्केल और संदर्भ कुछ और ही कहानी कहते हैं।

पिछले कुछ हफ़्तों में जम्मू क्षेत्र आतंकी हमलों से दहला है। 2024 से शुरू हुई रियासी, कठुआ और पुंछ जैसे इलाकों में हमलों की शृंखला 2026 में भी थमी नहीं है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार इन हमलों ने एक पैटर्न उजागर किया है — आतंकी अब घाटी से हटकर जम्मू डिवीज़न को निशाना बना रहे हैं, जहाँ सुरक्षा ग्रिड परंपरागत रूप से कश्मीर जितना कड़ा नहीं रहा। यही वजह है कि सेना की यह ड्रिल केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि एक रणनीतिक रिकैलिब्रेशन है।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि मोदी सरकार ने LoC पर ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी को एक और पायदान ऊपर चढ़ा दिया है। ट्रेड हलकों और रक्षा मामलों के जानकारों में चर्चा है कि यह मॉक ड्रिल वास्तव में एक 'शो ऑफ़ फ़ोर्स' है — 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद जिस तरह के ऑपरेशनल रेडीनेस का सिग्नल दिया जाता है, यह उसी कड़ी में है। विश्लेषकों का अनुमान है कि सेना के भीतर 'प्रोएक्टिव डिफ़ेंस' डॉक्ट्रिन को और मज़बूत किया जा रहा है — जहाँ हमले का इंतज़ार करने की बजाय पहले से तैयार रहकर दुश्मन को उसके इरादों से पहले रोका जाए।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और रक्षा विश्लेषकों के आकलन पर आधारित है, पुष्ट आधिकारिक बयान नहीं।)

कूटनीतिक संदेश — बंदूक़ की नोक पर कूटनीति

सैन्य ड्रिल सिर्फ़ सैनिकों की कसरत नहीं होती — यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक भाषा है। भारत-पाकिस्तान संबंधों के इतिहास में हर बड़ी ड्रिल एक कूटनीतिक पैग़ाम रही है। 2019 में 'हिम विजय' अभ्यास चीन को संदेश था, 2024 में LoC के पास की ड्रिल पाकिस्तान को। इस बार भी संदेश दोतरफ़ा है — पाकिस्तान को कि घुसपैठ की कोई भी कोशिश भारी पड़ेगी, और चीन को कि भारत अपने उत्तरी-पश्चिमी मोर्चे पर किसी भी अवसरवादी चाल के लिए तैयार है।

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ इस बात पर भी ध्यान दिला रहे हैं कि यह ड्रिल एक ऐसे समय पर हुई जब पाकिस्तान की आर्थिक हालत नाज़ुक है और उसकी सेना आंतरिक रूप से दबाव में है। ऐसे में भारत का यह अभ्यास पाकिस्तान को एक और मोर्चे पर संसाधन लगाने पर मजबूर करता है — यह बिना गोली चलाए की जाने वाली एट्रिशन वॉरफ़ेयर है।

मोदी सरकार का चुनावी गणित — सुरक्षा ही ब्रांड

इसमें एक राजनीतिक आयाम भी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी सबसे बड़ी ब्रांडिंग बनाया है। 2019 में बालाकोट ने चुनावी नतीजे पलटे थे — और 2029 की ओर बढ़ती हर गतिविधि में इस नैरेटिव को ज़िंदा रखने की ज़रूरत है। हर ऐसी ड्रिल जो मीडिया में आती है, वह सरकार के 'मज़बूत नेता' के इमेज को रिफ़्रेश करती है। विपक्ष इसे 'चुनावी स्टंट' कह सकता है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि जम्मू के हमलों ने सरकार को सुरक्षा पर सवालों के कटघरे में भी खड़ा किया है — और यह ड्रिल उसका जवाब भी है।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यही है कि यह ड्रिल तीन चीज़ों का संगम है — सामरिक ज़रूरत, कूटनीतिक सिग्नलिंग, और राजनीतिक नैरेटिव बिल्डिंग। तीनों एक-दूसरे को फ़ीड कर रही हैं।

आगे क्या — किस ओर मुड़ेगा पहिया?

अगर पिछले पैटर्न कोई संकेत हैं, तो ऐसी ड्रिल्स के बाद अक्सर दो में से एक चीज़ होती है — या तो LoC पर कोई ठोस कार्रवाई, या फिर सैन्य तैनाती में स्थायी बदलाव जो आने वाले महीनों में नई काउंटर-इन्सर्जेंसी रणनीति के तौर पर सामने आए। जम्मू डिवीज़न में नए काउंटर-टेरर ग्रिड की ख़बरें पहले से आ रही हैं — यह ड्रिल उसी दिशा में अगला कदम लगती है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भी देखने लायक होगी। पाक विदेश मंत्रालय की ओर से इस ड्रिल पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन अगर इतिहास गवाह है तो ISPR (पाक सेना का मीडिया विंग) जल्द ही अपनी 'काउंटर-ड्रिल' की घोषणा कर सकता है — और फिर यह दोनों देशों के बीच एक और 'ड्रिल डिप्लोमेसी' का दौर बन जाएगा।

लेकिन असली सवाल वह है जो कोई आधिकारिक बयान नहीं देगा: क्या यह ड्रिल किसी बड़े ऑपरेशन की ड्रेस रिहर्सल है, या यह अपने आप में मैसेज है? जवाब शायद अगले कुछ हफ़्तों में LoC की ख़ामोशी — या उसकी गूँज — से मिलेगा।

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आरोप और दावे यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से प्रस्तुत किए गए हैं और जब तक न्यायालय का निर्णय न हो, अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामले बिना पूर्वाग्रह रिपोर्ट किए गए हैं।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

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मुख्य बातें

  • भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशनल रेडीनेस के लिए मॉक ड्रिल की — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार यह तैयारी बढ़ाने का अभ्यास है।
  • हाल के जम्मू हमलों ने उजागर किया कि आतंकी अब घाटी से हटकर जम्मू डिवीज़न को निशाना बना रहे हैं — यह ड्रिल उसी सुरक्षा गैप को भरने की कोशिश है।
  • कूटनीतिक स्तर पर यह ड्रिल पाकिस्तान और चीन दोनों को संदेश है — बिना गोली चलाए की गई एट्रिशन वॉरफ़ेयर।
  • राजनीतिक रूप से यह मोदी सरकार के 'मज़बूत सुरक्षा' नैरेटिव को रिफ़्रेश करती है — 2029 की दिशा में हर ऐसा अभ्यास ब्रांडिंग भी है।
  • आने वाले हफ़्तों में LoC पर ठोस कार्रवाई या जम्मू में नए काउंटर-टेरर ग्रिड की घोषणा संभव है।

आँकड़ों में

  • 2016 सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत की 'प्रोएक्टिव डिफ़ेंस' डॉक्ट्रिन लगातार मज़बूत हो रही है।
  • जम्मू डिवीज़न में 2024 से आतंकी हमलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी — रियासी, कठुआ, पुंछ जैसे इलाके नए हॉटस्पॉट बने।
  • पाकिस्तान की ओर से इस ड्रिल पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: भारतीय सेना (Indian Army) ने जम्मू-कश्मीर में तैनात फ़ॉर्मेशन्स के साथ मॉक ड्रिल आयोजित की।
  • क्या: ऑपरेशनल रेडीनेस बढ़ाने के लिए एक व्यापक मॉक ड्रिल — जिसमें रियल-टाइम वॉर-गेमिंग और कॉर्डन-एंड-सर्च सिमुलेशन शामिल बताए जा रहे हैं।
  • कब: जून 2026 में — हाल के जम्मू आतंकी हमलों के कुछ ही सप्ताह बाद।
  • कहाँ: जम्मू-कश्मीर — विशेषकर LoC के निकटवर्ती और आंतरिक सुरक्षा के लिहाज़ से संवेदनशील क्षेत्रों में।
  • क्यों: हाल में जम्मू क्षेत्र में बढ़ी आतंकी घटनाओं, LoC पर घुसपैठ के प्रयासों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच तत्परता सुनिश्चित करने के लिए।
  • कैसे: सेना ने सिमुलेटेड अटैक और काउंटर-ऑपरेशन परिदृश्यों में मल्टी-लेयर रिस्पॉन्स का अभ्यास किया, जिसमें विभिन्न यूनिट्स के बीच कोऑर्डिनेशन टेस्ट किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जम्मू-कश्मीर में सेना की मॉक ड्रिल क्या है?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार भारतीय सेना ने ऑपरेशनल रेडीनेस बढ़ाने के लिए जम्मू-कश्मीर में सिमुलेटेड अटैक-काउंटर अटैक परिदृश्यों पर आधारित एक व्यापक सैन्य अभ्यास किया।

यह मॉक ड्रिल अभी क्यों की गई?

हाल के महीनों में जम्मू डिवीज़न में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी और LoC पर घुसपैठ के प्रयासों ने सुरक्षा ग्रिड में गैप उजागर किए — यह ड्रिल उसी का सामरिक जवाब मानी जा रही है।

क्या यह सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी है?

अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। रक्षा विश्लेषकों का आकलन है कि यह ड्रिल अपने आप में एक कूटनीतिक संदेश है, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसी ड्रिल्स के बाद LoC पर ठोस कार्रवाई या तैनाती में बदलाव संभव होता है।

इस ड्रिल का पाकिस्तान पर क्या असर होगा?

विश्लेषकों के अनुसार यह पाकिस्तान को एक और मोर्चे पर संसाधन लगाने पर मजबूर करती है — बिना गोली चलाए एट्रिशन वॉरफ़ेयर। पाक ISPR की काउंटर-ड्रिल घोषणा संभव है।

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