प्रधानमंत्री मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके विज़न को आज भी प्रासंगिक बताया। Livemint की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी ने कहा कि मुखर्जी का दृष्टिकोण आज भी भारत का मार्गदर्शन कर रहा है — एक ऐसा संदेश जिसकी राजनीतिक गूँज सीधे बंगाल तक पहुँचती है।

6 जुलाई, 1901 — कलकत्ता के एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में एक बच्चे का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर भारतीय राजनीति का नक्शा बदल दिया। 125 साल बाद, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस बच्चे — श्यामा प्रसाद मुखर्जी — को श्रद्धांजलि देते हैं, तो यह महज़ एक जयंती समारोह नहीं रह जाता। Livemint की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी ने कहा कि मुखर्जी का विज़न आज भी भारत का मार्गदर्शन कर रहा है। लेकिन असली सवाल यह है — किस भारत का, और किस दिशा में?

इस सवाल का जवाब ढूँढने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। मुखर्जी का वह मशहूर नारा — 'एक विधान, एक निशान, एक प्रधान' — दशकों तक बीजेपी और संघ परिवार की वैचारिक रीढ़ रहा। इस नारे का सबसे बड़ा अधूरा वादा था कश्मीर — धारा 370 और 35A। 5 अगस्त 2019 को जब मोदी सरकार ने वह अनुच्छेद हटाया, तो संघ परिवार ने इसे मुखर्जी के सपने की पूर्ति बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में खुद कहा था कि यह मुखर्जी के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है।

तो अब सवाल उठता है — कश्मीर 'फ़तह' हो चुका, मुखर्जी का वह एजेंडा पूरा हो गया, फिर 125वीं जयंती पर इतना ज़ोर किसलिए? क्योंकि मुखर्जी की विरासत सिर्फ़ कश्मीर तक सीमित नहीं थी। वे बंगाल के थे — कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति, नेहरू कैबिनेट छोड़कर विपक्ष में उतरने वाले बागी। उनका दूसरा बड़ा सपना था बंगाल की राजनीतिक ज़मीन पर हिंदू राष्ट्रवादी राजनीति को जड़ें देना। और ठीक यही वह लड़ाई है जो बीजेपी अभी तक जीत नहीं पाई है।

2021 के बंगाल चुनाव याद कीजिए। बीजेपी ने 77 सीटें जीतीं — अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा — लेकिन ममता बनर्जी की तृणमूल ने 213 सीटें लेकर दो-तिहाई बहुमत कायम रखा। मोदी और शाह ने ख़ुद 30 से ज़्यादा रैलियाँ कीं, 'जय श्री राम' के नारे गूँजे, नंदीग्राम ट्रम्प कार्ड खेला गया — लेकिन ममता का 'बांग्ला अस्मिता' का कार्ड भारी पड़ा। 'बाहरी' बनाम 'अपना' की लड़ाई में बीजेपी 'दिल्ली का दल' बनकर रह गई।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि 2026 में बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुखर्जी की 125वीं जयंती बीजेपी के लिए 'गॉड-सेंट टाइमिंग' है। पार्टी के अंदर की चर्चा यह है कि इस बार 'बाहरी' का ठप्पा हटाने के लिए मुखर्जी को 'बंगाल का अपना बेटा' के रूप में प्रोजेक्ट किया जाएगा — वही शख़्स जिसने कलकत्ता की गलियों से उठकर दिल्ली में नेहरू को चुनौती दी। ट्रेड हलकों में यह भी अटकलें हैं कि संघ, बंगाल में मुखर्जी के नाम पर बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला चलाएगा — ठीक वैसे ही जैसे राम मंदिर अभियान के दौरान शिला पूजन यात्राएँ हुई थीं। (यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

इसे और गहराई से समझें तो बीजेपी की बंगाल रणनीति में एक बुनियादी बदलाव दिख रहा है। 2021 में पार्टी ने 'कश्मीर मॉडल' चलाया — ध्रुवीकरण, धार्मिक पहचान, और केंद्रीय नेतृत्व की ताक़त। वह हारा। अब जो कोण उभर रहा है वह है 'बंगाल के अपने नायक' का — मुखर्जी, विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर — इन नामों को संघ-बीजेपी की वैचारिक छतरी के नीचे लाना। प्रधानमंत्री ने ख़ुद हाल ही में स्वामी विवेकानंद को भी श्रद्धांजलि दी थी — Telangana Today की रिपोर्ट के अनुसार मोदी ने विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। यह कोई संयोग नहीं — यह एक सोचा-समझा पैटर्न है।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि मोदी की यह श्रद्धांजलि सिर्फ़ 'इतिहास का सम्मान' नहीं — यह बंगाल के चुनावी मैदान के लिए वैचारिक ज़मीन तैयार करने की शुरुआत है। मुखर्जी का नाम वह पुल है जो बीजेपी को 'बाहरी पार्टी' के ठप्पे से मुक्त कर सकता है। जब आप कहते हैं कि 'हमारे संस्थापक कलकत्ता के थे', तो 'बांग्ला अस्मिता' का हथियार कुंद हो जाता है — कम से कम सिद्धांत में।

लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इतनी सरल नहीं। ममता बनर्जी ने अपना जवाबी दाँव पहले से तैयार रखा है — 'बंगाल की बेटी' बनाम 'दिल्ली की सत्ता' की लड़ाई में वे माहिर हैं। तृणमूल का तर्क सीधा होगा: मुखर्जी भले बंगाल के थे, लेकिन उन्होंने बंगाल छोड़कर दिल्ली की राजनीति की — ठीक वैसे ही जैसे बीजेपी बंगाल को दिल्ली से चलाना चाहती है। यह काउंटर-नैरेटिव कितना असरदार होगा, यह देखना बाक़ी है।

एक और पहलू है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। बीजेपी के 77 विधायकों में से कई तृणमूल छोड़कर आए थे — दलबदलू, जिनकी ज़मीनी पकड़ कमज़ोर है। पार्टी को बंगाल में जो चाहिए वह है एक 'विचारधारा' — सिर्फ़ चुनावी गणित नहीं। मुखर्जी की विरासत ठीक वही विचारधारा देती है: बंगाली गर्व और हिंदू राष्ट्रवाद का मिलन बिंदु। यह वही फ़ॉर्मूला है जो राम मंदिर ने उत्तर भारत में दिया — एक भावनात्मक लंगर जो वोट बैंक से ऊपर उठकर 'आंदोलन' बन जाए।

आने वाले महीनों में देखिए — मुखर्जी के नाम पर कितनी योजनाएँ, कितनी छात्रवृत्तियाँ, कितने स्मारक बंगाल में घोषित होते हैं। अगर केंद्र सरकार बंगाल में मुखर्जी के नाम पर कोई बड़ा राष्ट्रीय संस्थान या स्मारक घोषित करती है, तो समझिए कि 'मिशन बंगाल' सिर्फ़ चुनावी नारा नहीं, एक पूरी रणनीतिक चाल है।

सवाल यह नहीं कि मोदी मुखर्जी को याद कर रहे हैं — वे हमेशा करते हैं। सवाल यह है कि इस बार यह याद करना इतना ज़ोरदार, इतना सार्वजनिक, इतना 'विज़नरी' क्यों है। जवाब शायद बंगाल की गलियों में मिलेगा — जहाँ 2026 में वोट पड़ेंगे, और जहाँ मुखर्जी का नाम या तो बीजेपी का सबसे ताक़तवर हथियार बनेगा, या फिर ममता की 'बांग्ला अस्मिता' की दीवार से टकराकर एक और बार लौट आएगा।

More from India Herald

Netanyahu Invokes '1.4 Billion Indians' to Rebuff JD Vance — Is India a Strategic Ally or a Diplomatic Shield?PoliticsNetanyahu Invokes '1.4 Billion Indians' to Rebuff JD Vance — Is India a Strategic Ally or a Diplomatic Shield?JD Vance called the US Israel's only powerful ally. Netanyahu fired back by invoking India and its 1.4 billion people. The exchange is flatt…Stones at Trump, Flowers for Khamenei — Can Modi Walk Iran's Funeral Tightrope Without Losing Washington or Chabahar?PoliticsStones at Trump, Flowers for Khamenei — Can Modi Walk Iran's Funeral Tightrope Without Losing Washington or Chabahar?Millions mourn Iran's Supreme Leader while pelting Trump's image with stones. India sent a dignitary, but the anti-American fury on Tehran's…A Child Spoke in Class and India Lost Its Mind — When Did We Start Fearing What Students Say?EducationA Child Spoke in Class and India Lost Its Mind — When Did We Start Fearing What Students Say?A student's remark during a school session triggered a firestorm online. India Herald unpacks why a nation of 260 million schoolchildren is …250 Years of America, One Ex-President's Mic Drop — Why Does Bill Clinton's July 4 Blast at Trump Matter More in Delhi Than in DC?Viral250 Years of America, One Ex-President's Mic Drop — Why Does Bill Clinton's July 4 Blast at Trump Matter More in Delhi Than in DC?As America turns 250, a former president uses the nation's birthday to deliver a pointed rebuke of the current one — and the shockwaves reac…BrahMos, Nickel, and a Shared Ramayana — Why Modi's Indonesia Gambit Is the One Move Beijing Cannot Counter-Script?PoliticsBrahMos, Nickel, and a Shared Ramayana — Why Modi's Indonesia Gambit Is the One Move Beijing Cannot Counter-Script?PM Modi lands in Jakarta with a BrahMos missile deal, a $100-billion trade target, and a Hindu temple visit — stitching civilizational memor…

मुख्य बातें

  • धारा 370 हटने के बाद मुखर्जी की विरासत का 'कश्मीर अध्याय' पूरा — अब बीजेपी का फोकस उनके दूसरे अधूरे मिशन, बंगाल पर शिफ्ट हो रहा है।
  • मोदी द्वारा मुखर्जी और विवेकानंद दोनों को एक ही दौर में श्रद्धांजलि — बंगाल के 'अपने नायकों' को बीजेपी की छतरी में लाने का सोचा-समझा पैटर्न है।
  • 2021 में 77 सीटों के बावजूद बीजेपी 'बाहरी पार्टी' का ठप्पा नहीं हटा पाई — मुखर्जी को 'बंगाल का बेटा' बनाना इसी ठप्पे को तोड़ने की रणनीति है।
  • असली लड़ाई वैचारिक है: बंगाली गर्व और हिंदू राष्ट्रवाद का मिलन बिंदु खोजना — वही फ़ॉर्मूला जो राम मंदिर ने उत्तर भारत में दिया।

आँकड़ों में

  • 2021 बंगाल चुनाव: बीजेपी 77 सीटें, तृणमूल 213 सीटें — दो-तिहाई बहुमत ममता के पास।
  • मुखर्जी की 125वीं जयंती 2026 में पड़ रही है — ठीक बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले।
  • 2021 में मोदी-शाह ने बंगाल में 30 से अधिक रैलियाँ कीं, फिर भी ममता की 'बांग्ला अस्मिता' भारी पड़ी।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी (Livemint)।
  • क्या: मुखर्जी की 125वीं जयंती पर मोदी ने कहा कि उनका विज़न आज भी भारत का मार्गदर्शन कर रहा है (Livemint)।
  • कब: जुलाई 2026 — मुखर्जी की 125वीं जन्मतिथि के अवसर पर।
  • कहाँ: भारत — प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि दी; मुखर्जी का गृह राज्य पश्चिम बंगाल है।
  • क्यों: मुखर्जी के 'एक विधान, एक निशान, एक प्रधान' का नारा धारा 370 हटने के बाद आंशिक रूप से पूरा हुआ; अब बीजेपी उनकी विरासत को बंगाल में विस्तार से जोड़ रही है।
  • कैसे: प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया के ज़रिए श्रद्धांजलि दी, मुखर्जी के राष्ट्रवादी विज़न को पार्टी के वर्तमान एजेंडे से सीधे जोड़ा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे और उनका नारा क्या था?

श्यामा प्रसाद मुखर्जी (1901–1953) भारतीय जन संघ के संस्थापक थे, जो आगे चलकर बीजेपी बनी। उनका प्रसिद्ध नारा था 'एक विधान, एक निशान, एक प्रधान' — जिसका मतलब था जम्मू-कश्मीर को भारत के बाक़ी हिस्सों जैसा दर्जा मिले।

मुखर्जी की जयंती का बंगाल चुनाव 2026 से क्या संबंध है?

मुखर्जी बंगाल के थे और उनकी 125वीं जयंती 2026 के बंगाल चुनाव से ठीक पहले पड़ रही है। बीजेपी उनकी विरासत का इस्तेमाल 'बाहरी पार्टी' का ठप्पा हटाने और बंगाली अस्मिता से जुड़ने के लिए कर सकती है।

धारा 370 हटने के बाद बीजेपी का अगला बड़ा एजेंडा क्या है?

कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद मुखर्जी की विरासत का वह अध्याय पूरा हो गया। अब बीजेपी का फोकस बंगाल की राजनीतिक ज़मीन जीतने पर है — जो मुखर्जी का गृह राज्य भी था और जहाँ पार्टी अब तक सत्ता नहीं बना पाई।

More from India Herald

कॉन्स्टेंटिनोव्का पर पुतिन का झंडा — क्या अमेरिका के अरबों डॉलर भी ज़ेलेंस्की को बचा पाएँगे?Politicsकॉन्स्टेंटिनोव्का पर पुतिन का झंडा — क्या अमेरिका के अरबों डॉलर भी ज़ेलेंस्की को बचा पाएँगे?पुतिन ने खुद कहा 'एक्सीलेंट' — कॉन्स्टेंटिनोव्का का गिरना सिर्फ़ नक्शे पर एक बिंदु नहीं, ज़ेलेंस्की के पूर्वी रक्षा कवच में सबसे बड़ी दरार ह…राज्यसभा में BJP को बिना लड़े 3 सीटें — विपक्ष ने मैदान क्यों छोड़ा और ऊपरी सदन का गणित किसके हाथ?Politicsराज्यसभा में BJP को बिना लड़े 3 सीटें — विपक्ष ने मैदान क्यों छोड़ा और ऊपरी सदन का गणित किसके हाथ?विपक्ष की ख़ामोशी रणनीतिक है या मजबूरी — 3 निर्विरोध सीटों से BJP का राज्यसभा गणित कैसे बदलेगा, इंडिया हेराल्ड का गहरा विश्लेषण।…DMK बाहर, 'थलपति' विजय अंदर — क्या INDIA ब्लॉक का दक्षिण-उत्तर समीकरण पूरी तरह पलटने वाला है?PoliticsDMK बाहर, 'थलपति' विजय अंदर — क्या INDIA ब्लॉक का दक्षिण-उत्तर समीकरण पूरी तरह पलटने वाला है?तमिलनाडु में DMK की 'दक्षिण एंकर' वाली भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं — और सुपरस्टार विजय की राजनीतिक एंट्री ने कांग्रेस को एक नया दक्षिणी चेहरा …

Find out more: