अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ISIS ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, यह पाकिस्तान की अपनी हालिया अफ़ग़ान एयरस्ट्राइक के जवाब में हुआ। इससे पाकिस्तानी सेना पश्चिमी सीमा पर एक नए सैन्य मोर्चे में उलझ गई है, जो भारत के लिए कूटनीतिक फ़ायदे का मौक़ा खोलता है।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ISIS ठिकानों पर हमला किया — India Today के अनुसार।
- क्या: अफ़ग़ान सेना ने बलूचिस्तान में ISIS-खुरासान के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की — Times of India के अनुसार।
- कब: पाकिस्तान की अफ़ग़ानिस्तान पर एयरस्ट्राइक के कुछ ही दिनों बाद यह जवाबी कार्रवाई हुई — Times of India रिपोर्ट।
- कहाँ: पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत, जो अफ़ग़ान सीमा से लगता है — News18 के अनुसार।
- क्यों: तालिबान सरकार ने कहा कि वे 'हर ख़तरे को निशाना बनाएँगे' और पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक का जवाब अनिवार्य था — News18 रिपोर्ट।
- कैसे: अफ़ग़ान सेना ने बलूचिस्तान के भीतर ISIS ठिकानों को हवाई हमलों से नष्ट किया, जो पाकिस्तान की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है — India Today के अनुसार।
जिसे पालो, वही काटे — यह कहावत पाकिस्तान के लिए अब किसी किताबी मुहावरे से ज़्यादा, ज़मीनी हक़ीक़त बन चुकी है। अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में घुसकर ISIS ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर दी है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान पर की गई हालिया एयरस्ट्राइक के महज़ कुछ दिनों बाद हुई है। तालिबान सरकार ने साफ़ चेतावनी दी है — 'हम हर ख़तरे को निशाना बनाएँगे', News18 ने रिपोर्ट किया।
ज़रा सोचिए — जिस तालिबान को इस्लामाबाद ने दशकों तक 'स्ट्रैटेजिक एसेट' मानकर पाला-पोसा, पैसा दिया, हथियार दिए, सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराए — उसी तालिबान के लड़ाकू जेट अब पाकिस्तानी ज़मीन पर बम गिरा रहे हैं। यह किसी फ़िल्मी ट्विस्ट से कम नहीं, बस फ़र्क़ इतना है कि इसमें जान-माल असली है।
स्ट्रैटेजिक डेप्थ का दिवालियापन
पाकिस्तान की सैन्य नीति का मूल सिद्धांत रहा — 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ'। यानी अफ़ग़ानिस्तान में एक मित्र सरकार बनाओ ताकि भारत के ख़िलाफ़ पश्चिमी सीमा सुरक्षित रहे और सारी ताक़त पूर्वी मोर्चे (कश्मीर, LoC) पर लगा सको। ISI ने तालिबान को इसी मक़सद से खड़ा किया था। लेकिन 2021 में काबुल पर दोबारा क़ब्ज़े के बाद तालिबान ने इस्लामाबाद के रिमोट कंट्रोल से ख़ुद को आज़ाद कर लिया। India Today की रिपोर्ट बताती है कि अफ़ग़ान तालिबान ने अब ख़ुद को एक 'संप्रभु सरकार' के तौर पर स्थापित किया है जो पाकिस्तान के आदेश नहीं मानती।
नतीजा? जिस पश्चिमी सीमा को पाकिस्तान 'सुरक्षित पिछवाड़ा' समझता था, वह अब एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र बन गई है। बलूचिस्तान में TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के हमले पहले से जारी थे, अब ऊपर से अफ़ग़ान एयरस्ट्राइक — पाकिस्तानी सेना दो आग के बीच फँस गई है।
डबल फ्रंट का जाल — और भारत को फ़ायदा
यहाँ वह कोण है जो बाक़ी मीडिया से छूट रहा है। पाकिस्तान की सेना के लिए दो-मोर्चा युद्ध किसी बुरे सपने से कम नहीं। पश्चिम में अफ़ग़ान सीमा पर तालिबान और TTP से लड़ाई, बलूचिस्तान में बलूच विद्रोह, और अब अफ़ग़ान सरकार की सीधी सैन्य कार्रवाई — ये सब मिलकर पाक सेना के संसाधनों को खींच रहे हैं। हर बटालियन जो ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा या बलूचिस्तान में तैनात होती है, वह LoC या कश्मीर के मोर्चे से हटती है।
इंडिया हेराल्ड का स्पष्ट आकलन यह है कि पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर बढ़ती उलझन भारत के लिए एक अघोषित कूटनीतिक और सैन्य लाभ है। जब पाक सेना की ऊर्जा, बजट और जवान पश्चिम में फँसे हों, तो पूर्व में — LoC पर, कश्मीर में — आतंकी घुसपैठ और सैन्य दुस्साहस की क्षमता ख़ुद-ब-ख़ुद सिकुड़ती है।
पॉलिटिकल पल्स
इस्लामाबाद के सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि रावलपिंडी (पाक सेना मुख्यालय) इस वक़्त गहरे असमंजस में है। एक तरफ़ अफ़ग़ान सरहद पर बढ़ती हिंसा, दूसरी तरफ़ बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे समूहों की बग़ावत — और ऊपर से भारत के साथ तनाव। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि पाकिस्तानी जनरलों को पहली बार यह अहसास हो रहा है कि 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' ने असल में 'स्ट्रैटेजिक ट्रैप' का काम किया है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और विश्लेषकों के अनुमान पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
तालिबान का संदेश — 'हम किसी के ताबेदार नहीं'
News18 की रिपोर्ट में तालिबान सरकार के प्रवक्ता का बयान उद्धृत किया गया — 'हम अपनी सरहदों के पास के हर ख़तरे को निशाना बनाएँगे।' यह भाषा महत्वपूर्ण है। तालिबान ने ISIS-खुरासान को निशाना बनाकर दो संदेश एक साथ दिए — पहला, कि वे ख़ुद को ISIS से अलग एक 'ज़िम्मेदार' सत्ता के रूप में पेश करना चाहते हैं (अंतरराष्ट्रीय मान्यता की तलाश); दूसरा, कि वे पाकिस्तान की संप्रभुता की कोई परवाह नहीं करते — ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान ने उनकी नहीं की।
India Today के अनुसार, इस एयरस्ट्राइक ने पाकिस्तान की संप्रभुता को गहरा धक्का पहुँचाया है। जिस देश ने दशकों तक दूसरों की संप्रभुता (अफ़ग़ानिस्तान, भारत — 26/11 याद कीजिए) का मज़ाक़ उड़ाया, उसकी अपनी ज़मीन पर अब दूसरा देश बम गिरा रहा है। इतिहास का यह व्यंग्य किसी ने लिखा नहीं — ख़ुद बना है।
आंकड़ों में समझें — पाक सेना का संकट
पाकिस्तान की कुल सैन्य ताक़त का अनुमानित 30-40% हिस्सा पहले से पश्चिमी सीमा और बलूचिस्तान में तैनात माना जाता है, विश्लेषकों के अनुसार। बलूचिस्तान अकेले पाकिस्तान के कुल भूभाग का 44% है — लेकिन यहाँ सबसे कम जनसंख्या, सबसे ज़्यादा विद्रोह, और अब बाहरी सैन्य हमले भी। यह किसी भी सेना के लिए संसाधनों का बॉटमलेस पिट है।
भारत को क्या करना चाहिए — और क्या नहीं
भारत के लिए सबसे समझदारी भरी रणनीति यही है — चुप रहो और देखो। पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा का यह संकट जितना लंबा खिंचेगा, LoC पर भारत उतना सुरक्षित रहेगा। लेकिन सावधानी ज़रूरी है — ISIS-खुरासान का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए भी एक दीर्घकालिक ख़तरा है। अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में अस्थिरता कभी भी एक-दिशा में नहीं बहती — वह आस-पास के हर देश को छूती है।
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अब सवाल यह है — क्या इस्लामाबाद इस डबल फ्रंट जाल से निकलने के लिए भारत के साथ डी-एस्केलेशन का रास्ता चुनेगा, या अपनी पुरानी आदत के मुताबिक़ कश्मीर कार्ड खेलकर ध्यान भटकाने की कोशिश करेगा? इतिहास बताता है कि जब भी पाकिस्तानी फ़ौज घरेलू मोर्चे पर फँसी है, उसने बाहर एक नया शोर खड़ा किया है। लेकिन इस बार शोर खड़ा करने की गुंजाइश भी सिकुड़ रही है — क्योंकि जो तालिबान कभी उसका 'बी-टीम' था, वह अब उसका सबसे बड़ा सिरदर्द है। अपने ही बिछाए जाल में फँसने की इससे बड़ी विडंबना क्या होगी?
आँकड़ों में
- बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल भूभाग का 44% है — सबसे बड़ा प्रांत, सबसे कम जनसंख्या, सबसे ज़्यादा विद्रोह
- विश्लेषकों के अनुसार पाक सेना की अनुमानित 30-40% ताक़त पश्चिमी सीमा और बलूचिस्तान में तैनात है
- पाकिस्तान की अफ़ग़ान एयरस्ट्राइक के कुछ ही दिनों बाद तालिबान ने जवाबी कार्रवाई की — Times of India
मुख्य बातें
- पाकिस्तान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान पर एयरस्ट्राइक के कुछ दिनों बाद ही तालिबान सरकार ने बलूचिस्तान में ISIS ठिकानों पर जवाबी हमला किया — Times of India रिपोर्ट।
- पाकिस्तान की दशकों पुरानी 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' नीति उलटी पड़ गई है — जिसे एसेट समझा, वह अब सबसे बड़ा ख़तरा बना।
- पाक सेना अब पश्चिम (अफ़ग़ान सीमा + बलूचिस्तान विद्रोह) और पूर्व (भारत-LoC) दोनों मोर्चों पर दबाव में है — संसाधन बँटने से पूर्वी मोर्चे पर उसकी क्षमता सीमित हो रही है।
- तालिबान ने ISIS को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय मान्यता का रास्ता बनाने और पाकिस्तान की संप्रभुता को चुनौती देने — दोनों काम एक साथ किए।
- भारत के लिए यह कूटनीतिक फ़ायदे का मौक़ा है, लेकिन ISIS-खुरासान की बढ़ती ताक़त एक दीर्घकालिक क्षेत्रीय ख़तरा भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अफ़ग़ानिस्तान ने बलूचिस्तान में एयरस्ट्राइक क्यों की?
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, पाकिस्तान ने कुछ दिन पहले अफ़ग़ानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की थी। तालिबान सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन माना और जवाबी कार्रवाई के तौर पर बलूचिस्तान में ISIS-खुरासान के ठिकानों पर हमला किया। News18 के अनुसार, तालिबान ने कहा कि वे 'हर ख़तरे को निशाना बनाएँगे'।
पाकिस्तान की 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' नीति क्या है और यह कैसे विफल हुई?
पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान जैसे गुटों को इसलिए पाला ताकि पश्चिमी सीमा पर एक मित्र सरकार रहे और सारी सैन्य ताक़त भारत के ख़िलाफ़ लगा सकें। लेकिन 2021 में काबुल पर दोबारा क़ब्ज़े के बाद तालिबान ने पाकिस्तान का नियंत्रण नहीं माना, और अब तो पाकिस्तानी ज़मीन पर ही बम गिरा रहा है — नीति पूरी तरह उलटी पड़ गई।
इस संकट का भारत पर क्या असर है?
पाक सेना की ताक़त पश्चिमी सीमा (अफ़ग़ानिस्तान-बलूचिस्तान) में बँटने से LoC और कश्मीर मोर्चे पर उसकी क्षमता कम होती है — यह भारत के लिए अघोषित सैन्य और कूटनीतिक लाभ है। हालाँकि, ISIS-खुरासान की बढ़ती ताक़त पूरे क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक ख़तरा भी है।
क्या तालिबान और पाकिस्तान के बीच पूर्ण युद्ध हो सकता है?
पूर्ण युद्ध की संभावना फ़िलहाल कम मानी जा रही है, लेकिन सीमावर्ती सैन्य टकराव और आपसी एयरस्ट्राइक का सिलसिला जारी रह सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्षों की सैन्य और आर्थिक क्षमता लंबे युद्ध की इजाज़त नहीं देती, लेकिन यह low-intensity conflict भी पाकिस्तान के लिए बेहद महँगा साबित होगा।



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