CAG ऑडिट में पाया गया कि छत्तीसगढ़ का DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) फंड, जो खदान-प्रभावित आदिवासी इलाकों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल पर खर्च होना था, बड़े पैमाने पर अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और गैर-प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया गया — द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार।

एक आदिवासी गाँव की कल्पना कीजिए — जहाँ की ज़मीन से कोयला निकाला जाता है, जहाँ के जंगल खदानों के लिए काटे जाते हैं, जहाँ के लोग विस्थापन झेलते हैं। बदले में उन्हें क्या मिलना था? स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, साफ़ पानी — DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) के ज़रिए। लेकिन CAG की ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि वो पैसा उन गाँवों तक पहुँचा ही नहीं — वो शहर की चमचमाती सड़कों और भवनों की नींव में दब गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में DMF फंड अपने मूल उद्देश्य से भटककर गैर-कोर प्रोजेक्ट्स में बहा दिया गया।

यह कोई मामूली लेखा-जोखा की गड़बड़ी नहीं है। यह उस पूरे सिस्टम पर सवाल है जो 2015 में MMDR (Mines and Minerals Development and Regulation) संशोधन के बाद बना था — ताकि खनन से होने वाली कमाई का एक तय हिस्सा सीधे प्रभावित समुदायों तक पहुँचे। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट के विशाल भंडार हैं, DMF में हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये जमा होते हैं। PMKKKY (प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना) के दिशानिर्देशों के मुताबिक इस राशि का कम से कम 60% 'हाई प्रायोरिटी' मदों — पेयजल, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और पर्यावरण — पर खर्च होना अनिवार्य है।

लेकिन CAG ने जो पाया, वो इस भावना के ठीक उलट है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी रकम सड़क निर्माण, सरकारी भवनों, और ऐसे अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लगाई गई जिनका खदान-प्रभावित गाँवों से कोई सीधा संबंध नहीं। कुछ ज़िलों में तो DMF का पैसा ज़िला मुख्यालयों की सुंदरता बढ़ाने में ख़र्च हुआ — जबकि वही ज़िले के दूरदराज़ के आदिवासी टोलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं, स्कूलों में छत नहीं है।

वो लूपहोल जो राजनेताओं का 'स्लश फंड' बन गया

असली खेल है 'अन्य प्रायोरिटी' की अस्पष्ट परिभाषा में। PMKKKY गाइडलाइन्स कहती हैं कि 40% तक राशि 'अन्य प्रायोरिटी' पर खर्च हो सकती है — जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, ऊर्जा जैसी मदें शामिल हैं। यही वो दरवाज़ा है जिसे खोलकर स्थानीय प्रशासन और राजनेता अपनी पसंद के प्रोजेक्ट्स को DMF से फंड करा लेते हैं। एक ज़िले में सड़क बनवाना ज़्यादा 'दिखता' है बनिस्बत आदिवासी बच्चों के पोषण कार्यक्रम के — और चुनाव में वोट भी उसी से कटते हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि DMF की गवर्निंग बॉडी में जनप्रतिनिधियों की भूमिका निर्णायक होती है। ज़िलाधिकारी अध्यक्ष होते हैं, लेकिन सांसद और विधायक सदस्य होते हैं — और प्रोजेक्ट चयन में उनका दबाव किसी से छिपा नहीं। नतीजा? पैसा वहाँ जाता है जहाँ 'राजनीतिक ज़रूरत' है, न कि जहाँ 'सामाजिक ज़रूरत'। यही कारण है कि कई विश्लेषक DMF को 'लीगलाइज़्ड स्लश फंड' कहने से नहीं हिचकते।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट है कि यह CAG रिपोर्ट दोनों दलों के लिए बराबर असुविधाजनक है। छत्तीसगढ़ में 2018-2023 के बीच कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार थी — DMF खर्च का बड़ा हिस्सा उसी दौर का है। लेकिन 2023 के बाद से सत्ता में आई भाजपा सरकार ने भी इस सिस्टम में कोई संरचनात्मक सुधार नहीं किया। ट्रेड हलकों में चर्चा है कि दोनों दलों के विधायक DMF को अपने 'विधायक निधि' (MLA LAD Fund) का विस्तार मानकर चलते रहे हैं — जहाँ पैसा आता है, वहाँ राजनीतिक नियंत्रण भी आता है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा नुकसान किसका है? छत्तीसगढ़ के उन 44 लाख से ज़्यादा अनुसूचित जनजाति आबादी का, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 30% है — भारत की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार। ये वो लोग हैं जिनकी ज़मीन से खनिज निकाला जाता है, जिनके जंगल कटते हैं, और जिनके नाम पर फंड बनता है — लेकिन जिनके गाँवों तक वो पैसा पहुँचता नहीं। हसदेव अरण्य जैसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में जहाँ कोयला खदानों के लिए पर्यावरणीय मंज़ूरी दी गई है — द इंडियन एक्सप्रेस ने हाल ही में केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मिली मंज़ूरी की रिपोर्ट की है — वहाँ DMF का पैसा ठीक उन्हीं विस्थापित समुदायों के पुनर्वास और कल्याण पर खर्च होना चाहिए था।

आगे क्या? — आदिवासी वोटबैंक का सवाल

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि यह CAG रिपोर्ट सिर्फ़ एक ऑडिट दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक बारूद है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी वोटबैंक निर्णायक है — राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 29 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। कोई भी दल इस आबादी को नाराज़ करके सत्ता में नहीं रह सकता। अब जबकि CAG ने काला-चिट्ठा खोल दिया है, विपक्ष (कांग्रेस) के लिए यह हथियार है कि वो सत्ताधारी भाजपा से पूछे — "आपने सत्ता में आने के बाद DMF में क्या बदला?" और भाजपा के लिए यह मौका है कि वो पिछली कांग्रेस सरकार पर ठीकरा फोड़े।

लेकिन असली सवाल दोनों से बड़ा है: क्या कोई भी सरकार DMF की गवर्नेंस संरचना में वो सुधार करेगी जिसकी ज़रूरत CAG बार-बार बता रहा है? जब तक 'अन्य प्रायोरिटी' का लूपहोल खुला है, जब तक प्रोजेक्ट चयन में जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप बेरोकटोक है, और जब तक DMF खर्च की सोशल ऑडिट अनिवार्य नहीं होती — तब तक हर ऑडिट रिपोर्ट में यही कहानी दोहराई जाएगी।

आने वाले हफ़्तों में देखने लायक यह होगा कि क्या छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह रिपोर्ट चर्चा का विषय बनती है, क्या केंद्र सरकार PMKKKY गाइडलाइन्स को और सख़्त करती है, और क्या आदिवासी संगठन इस मुद्दे को ज़मीनी आंदोलन में बदलते हैं। जिस ज़मीन से खनिज निकलता है, उसी ज़मीन के लोग अगर यह पूछने लगें कि "हमारा पैसा कहाँ गया?" — तो जवाब देना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

More from India Herald

Bihar Panchayats Get Taxing Powers, 8,300 Mukhiyas Get a War Chest — Is Nitish Building His 2025 Ground Army One Village at a Time?PoliticsBihar Panchayats Get Taxing Powers, 8,300 Mukhiyas Get a War Chest — Is Nitish Building His 2025 Ground Army One Village at a Time?The Bihar Cabinet has cleared rules empowering panchayats to raise their own revenue — but the real story is what Nitish Kumar's NDA gains w…₹35,000 Crore, 36 Projects, One Empty Treasury — Is Chandrababu Naidu Cashing In His Kingmaker Chips With Delhi?Politics₹35,000 Crore, 36 Projects, One Empty Treasury — Is Chandrababu Naidu Cashing In His Kingmaker Chips With Delhi?Andhra Pradesh's coffers are strained, its debt ballooning — yet Chandrababu Naidu has just unveiled the most ambitious irrigation blueprint…Amaravati 2.0: Singapore Returns With a Masterplan — But Who Bankrolls a Dream City When AP's Treasury Is Running on Fumes?PoliticsAmaravati 2.0: Singapore Returns With a Masterplan — But Who Bankrolls a Dream City When AP's Treasury Is Running on Fumes?Chandrababu Naidu's revival of the Singapore partnership for Amaravati is less about urban planning and more about political identity — but …Supriya Sule's Midnight Denial, Pawar MPs at Fadnavis's Door — Is NCP(SP) Running a Two-Track Game Only Sharad Pawar Understands?PoliticsSupriya Sule's Midnight Denial, Pawar MPs at Fadnavis's Door — Is NCP(SP) Running a Two-Track Game Only Sharad Pawar Understands?Supriya Sule's emphatic 'No to NDA' lands hours after NCP(SP) MPs were seen at Devendra Fadnavis's residence — and the Delimitation Bill fen…42 Narendra Modi Stadiums Worth of Railway Land Gone — Who Is Running India's Biggest Land Mafia Under the Centre's Own Nose?Politics42 Narendra Modi Stadiums Worth of Railway Land Gone — Who Is Running India's Biggest Land Mafia Under the Centre's Own Nose?India's railway network sits on some of the most valuable real estate in the country — and an area equivalent to 42 Narendra Modi Stadiums h…

मुख्य बातें

  • CAG ऑडिट में पाया गया कि छत्तीसगढ़ का DMF फंड खदान-प्रभावित आदिवासी कल्याण की बजाय अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और गैर-कोर प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया गया — द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार।
  • PMKKKY गाइडलाइन्स में 'अन्य प्रायोरिटी' की अस्पष्ट परिभाषा ही वो लूपहोल है जिसका राजनीतिक फ़ायदा उठाया गया — DMF को 'लीगलाइज़्ड स्लश फंड' कहा जा रहा है।
  • छत्तीसगढ़ की 90 में से 29 विधानसभा सीटें ST आरक्षित हैं — आदिवासी वोटबैंक की नाराज़गी दोनों दलों के लिए ख़तरनाक।
  • हसदेव अरण्य में नई खनन मंज़ूरियों के बीच DMF डायवर्शन का खुलासा विस्थापन और पुनर्वास के सवालों को और तीखा करता है।
  • जब तक DMF खर्च की अनिवार्य सोशल ऑडिट और प्रोजेक्ट चयन में पारदर्शिता नहीं आती, यह समस्या बनी रहेगी।

आँकड़ों में

  • छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजाति आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 30% (44 लाख+) है — भारत जनगणना।
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 में से 29 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
  • PMKKKY के अनुसार DMF फंड का न्यूनतम 60% 'हाई प्रायोरिटी' मदों (स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पोषण) पर खर्च होना अनिवार्य है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ सरकार के DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) खर्च की ऑडिट रिपोर्ट जारी की।
  • क्या: CAG ने पाया कि DMF फंड को उसके मूल उद्देश्य — खदान-प्रभावित आदिवासी समुदायों के कल्याण — से हटाकर गैर-कोर प्रोजेक्ट्स और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च किया गया।
  • कब: 2026 में CAG की ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट सामने आई, जो पिछले कई वर्षों के DMF खर्च की समीक्षा करती है।
  • कहाँ: छत्तीसगढ़ के खनिज-समृद्ध ज़िलों में, विशेषकर आदिवासी बहुल कोरबा, रायगढ़, सरगुजा और बलरामपुर जैसे इलाकों में।
  • क्यों: DMF नियमों में 'हाई प्रायोरिटी' और 'अन्य प्रायोरिटी' की अस्पष्ट परिभाषा ने राजनेताओं और नौकरशाहों को फंड डायवर्शन का रास्ता दिया।
  • कैसे: DMF के तहत खनन रॉयल्टी का एक हिस्सा ज़िला स्तर पर इकट्ठा होता है; स्थानीय प्रशासन ने इसे स्वास्थ्य-शिक्षा की बजाय सड़कों, भवनों और शहरी सुविधाओं पर खर्च किया — द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) क्या है और इसका पैसा कहाँ से आता है?

DMF 2015 के MMDR संशोधन के तहत बना एक ज़िला-स्तरीय फंड है। खनन कंपनियाँ रॉयल्टी का एक तय हिस्सा DMF में जमा करती हैं, जिसे खदान-प्रभावित इलाकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और पर्यावरण पर खर्च किया जाना चाहिए।

CAG ने छत्तीसगढ़ DMF में क्या गड़बड़ी पाई?

CAG ने पाया कि DMF का पैसा मूल उद्देश्य — आदिवासी कल्याण — से हटाकर अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़कों और सरकारी भवनों जैसे गैर-कोर प्रोजेक्ट्स में खर्च किया गया — द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार।

DMF फंड डायवर्शन का आदिवासी वोटबैंक पर क्या असर पड़ेगा?

छत्तीसगढ़ में 29 ST आरक्षित विधानसभा सीटें हैं। आदिवासी समुदायों में बढ़ती नाराज़गी दोनों प्रमुख दलों — भाजपा और कांग्रेस — के लिए चुनावी चुनौती बन सकती है।

PMKKKY गाइडलाइन्स में 'हाई प्रायोरिटी' और 'अन्य प्रायोरिटी' का क्या मतलब है?

PMKKKY के तहत DMF फंड का 60% 'हाई प्रायोरिटी' (स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पोषण, पर्यावरण) पर खर्च होना चाहिए। बाकी 40% 'अन्य प्रायोरिटी' (इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, ऊर्जा) पर खर्च हो सकता है — यही अस्पष्ट श्रेणी डायवर्शन का रास्ता बनती है।

More from India Herald

₹7.5 लाख कर्मचारियों का DA रोका, मुफ्त बिजली जारी — भगवंत मान ने प्राथमिकता चुनी या मजबूरी?Politics₹7.5 लाख कर्मचारियों का DA रोका, मुफ्त बिजली जारी — भगवंत मान ने प्राथमिकता चुनी या मजबूरी?मुफ्त बिजली पर सालाना ₹20,000 करोड़ ख़र्च, लेकिन कर्मचारियों का DA रोक दिया — पंजाब का खजाना खाली है या रेवड़ी पॉलिटिक्स ने प्राथमिकताएँ ही …नायब सैनी की 5 'खुशखबरी' — जाट लैंड में BJP का मास्टरस्ट्रोक या आखिरी डैमेज कंट्रोल?Politicsनायब सैनी की 5 'खुशखबरी' — जाट लैंड में BJP का मास्टरस्ट्रोक या आखिरी डैमेज कंट्रोल?गुरुग्राम को मेट्रो, हिसार को एम्स, सरकारी कर्मचारियों को तोहफ़ा — सीएम सैनी ने एक हफ़्ते में पाँच बड़ी घोषणाएं दागी हैं। लेकिन इंडिया हेराल…अन्नपूर्णा भंडार योजना — 'फ्री राशन' का नया लेबल या 2027 से पहले सरकार का असली मास्टरस्ट्रोक?Politicsअन्नपूर्णा भंडार योजना — 'फ्री राशन' का नया लेबल या 2027 से पहले सरकार का असली मास्टरस्ट्रोक?80 करोड़ लोगों को मुफ़्त राशन देने वाली योजनाओं की कड़ी में अन्नपूर्णा भंडार योजना नया नाम है — लेकिन क्या यह ज़मीन पर कुछ बदलेगी, या सिर्फ़…

Find out more: