भारतीय सेना ने अग्निवीर योजना के तहत चार साल बाद महज़ 25% जवानों को बनाए रखने के मौजूदा कोटे को नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाने की सिफारिश की है। News18 के अनुसार तीनों सेनाएँ अब अधिकतर अग्निवीरों को सेवा में बनाए रखना चाहती हैं क्योंकि पहला बैच 2025 के अंत तक सेवा पूरी कर रहा है।
एक फ़ौजी जब चार साल की ट्रेनिंग और तैनाती के बाद 'रेडी' होता है, तो उसे घर भेज दो — यह कौन-सी रणनीति है? भारतीय सेना ने ख़ुद यह सवाल उठा दिया है। News18 की रिपोर्ट के अनुसार तीनों सशस्त्र बलों ने रक्षा मंत्रालय को साफ़ संकेत दिया है कि अग्निवीर योजना का 25% रिटेंशन कोटा ज़मीनी हक़ीक़त से मेल नहीं खाता — और अधिकतर अग्निवीरों को चार साल बाद भी सेवा में बनाए रखने की ज़रूरत है।
यह कोई मामूली 'सुझाव' नहीं है। जब एक सेना अपनी ही सरकार से कहे कि आपकी स्कीम का गणित ग़लत है, तो समझिए कि बात ऑपरेशनल रेडीनेस के उस मुक़ाम पर पहुँच गई है जहाँ चुप रहना ख़तरनाक है।
25% का गणित कहाँ टूटता है?
Zee News Hindi के अनुसार सेना का तर्क सीधा है: एक अग्निवीर को ट्रेनिंग में पहले डेढ़ से दो साल लगते हैं, फिर जब वह ठीक से काम करने लायक़ होता है तो उसकी सेवा ख़त्म हो जाती है। चार में से सिर्फ़ एक को रखना — बाक़ी तीन को बाहर करना — मतलब हर चार साल में 75% प्रशिक्षित जवानों का अनुभव शून्य हो जाना। किसी भी सैन्य रणनीतिकार से पूछिए, यह 'लीन आर्मी' नहीं, 'ब्लीडिंग आर्मी' है।
News18 की रिपोर्ट बताती है कि पहला अग्निवीर बैच 2025 के अंत तक सेवा पूरी कर रहा है और तीनों सेनाएँ इस बात से चिंतित हैं कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में तैयार जवानों की विदाई से यूनिट-लेवल कॉहेशन — यानी इकाई स्तर पर तालमेल — बुरी तरह प्रभावित होगा। ख़ासकर सीमावर्ती इलाक़ों में, जहाँ LAC और LOC पर चीन और पाकिस्तान की चुनौतियाँ कम नहीं हुई हैं, यह जोख़िम कोई सैद्धांतिक बहस नहीं बल्कि ज़मीनी ख़तरा है।
पॉलिटिकल पल्स
दिल्ली के सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि रक्षा मंत्रालय के भीतर भी एक धड़ा मानता है कि अग्निवीर को मूल रूप में जारी रखना 2027 के UP चुनाव से पहले BJP के लिए 'इलेक्टोरल लायबिलिटी' बन सकता है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।) हिंदी बेल्ट — UP, बिहार, राजस्थान, MP — से अग्निवीर भर्ती में सबसे ज़्यादा नौजवान आए हैं। अगर इनमें से 75% चार साल बाद बिना स्थायी नौकरी, बिना पर्याप्त पेंशन, और 'सेवानिवृत्त सैनिक' का तमग़ा भी बिना लिए बाहर आते हैं, तो यह असंतोष किसी भी विपक्षी दल के लिए सोने की खान है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पहले से अग्निवीर को 'यूज़ एंड थ्रो सैनिक' कहकर हमला कर रही हैं। अगर ख़ुद सेना के जनरल कह रहे हैं कि यह काफ़ी नहीं, तो विपक्ष के हाथ में असलहा आ गया है — वह भी सरकार की अपनी बंदूक़ से।
असली सवाल: सुधार या U-टर्न?
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि मोदी सरकार के सामने अब दो रास्ते हैं — और दोनों में राजनीतिक क़ीमत है। पहला: रिटेंशन कोटा चुपचाप 50-60% या उससे ऊपर ले जाना, जिसका मतलब होगा कि मूल अग्निवीर मॉडल — लीन, यंग, रोटेशनल फ़ोर्स — का दर्शन ही बदल गया। यह सुधार कम, U-टर्न ज़्यादा दिखेगा। दूसरा: 25% पर अड़े रहना और सेना की ऑपरेशनल चिंताओं को नज़रअंदाज़ करना — जो न सैन्य रूप से सुरक्षित है, न चुनावी रूप से।
Zee News Hindi के अनुसार रक्षा मंत्रालय ने अभी तक कोटा बढ़ाने पर कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है, लेकिन तीनों सेनाओं की सिफारिश अब आधिकारिक रूप से सरकार के पास है। जानकारों का मानना है कि आने वाले हफ़्तों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में इस पर बैठक संभव है।
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आगे क्या देखें
अगर सरकार कोटा बढ़ाती है — जिसकी संभावना अब पहले से कहीं ज़्यादा है — तो देखने वाली बात यह होगी कि बढ़ा हुआ कोटा कितना है। 50% तक गया तो 'ट्वीक' कहा जा सकता है; 75% या उससे ऊपर गया तो अग्निवीर वस्तुतः पुरानी शॉर्ट-सर्विस कमीशन का नया नाम भर रह जाएगा। विपक्ष के लिए इसे 'सरकार ने ग़लती मानी' के नैरेटिव में ढालना आसान होगा — और 2027 UP चुनाव के मैदान में यह नैरेटिव ज़हरीला साबित हो सकता है।
एक बात तय है: जो योजना 'क्रांतिकारी सुधार' के तौर पर लाई गई थी, वह अब अपने ही जनरलों की रिपोर्ट कार्ड में फ़ेल हो रही है। असली सवाल यह नहीं कि कोटा बढ़ेगा या नहीं — असली सवाल यह है कि जब सेना और सरकार दोनों जानती हैं कि 25% काम नहीं करता, तो उन लाखों नौजवानों से क्या कहेंगे जिन्हें चार साल का सपना दिखाकर बुलाया गया था?
आरोप और दावे यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से प्रस्तुत हैं और जब तक न्यायालय का निर्णय न हो, अप्रमाणित हैं; विचाराधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- तीनों सशस्त्र बलों ने 25% अग्निवीर रिटेंशन कोटे को नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाने की सिफारिश रक्षा मंत्रालय को भेजी है (News18)
- पहला अग्निवीर बैच 2025 के अंत तक सेवा पूरी कर रहा है — 75% प्रशिक्षित जवानों की एकसाथ विदाई से सीमावर्ती इकाइयों का तालमेल बिगड़ने का डर है
- हिंदी बेल्ट से सबसे ज़्यादा भर्ती हुई — 2027 UP चुनाव से पहले लाखों बेरोज़गार पूर्व-अग्निवीर BJP के लिए चुनावी बोझ बन सकते हैं
- अगर कोटा 50% से ऊपर गया तो यह मूल अग्निवीर मॉडल का U-टर्न माना जाएगा — विपक्ष इसे 'सरकार ने ग़लती मानी' के नैरेटिव में ढालेगा
- रक्षा मंत्रालय ने अभी अंतिम फ़ैसला नहीं लिया — आने वाले हफ़्तों में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में बैठक संभावित (Zee News Hindi)
आँकड़ों में
- 75% प्रशिक्षित अग्निवीर हर चार साल में सेवा से बाहर — तीनों सेनाओं ने इसे ऑपरेशनल रिस्क बताया (News18)
- मौजूदा रिटेंशन कोटा सिर्फ 25% — यानी चार में से तीन अग्निवीर बिना स्थायी नौकरी बाहर (Zee News Hindi)
- पहला अग्निवीर बैच 2025 अंत तक सेवा पूरी करेगा — यह योजना का पहला रियलिटी टेस्ट (News18)
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना — तीनों सशस्त्र बल (News18 रिपोर्ट के अनुसार)
- क्या: अग्निवीर योजना के 25% रिटेंशन कोटे को नाकाफी मानते हुए अधिकतर अग्निवीरों को चार साल बाद भी सेवा में बनाए रखने का प्रस्ताव
- कब: 2025-26 — पहला अग्निवीर बैच अपनी चार साल की सेवा पूरी करने के करीब (Zee News Hindi)
- कहाँ: भारत — रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के मुख्यालय स्तर पर विचार-विमर्श
- क्यों: ऑपरेशनल रेडीनेस, प्रशिक्षित जवानों का अनुभव खोने का डर और 75% अग्निवीरों की एक साथ विदाई से पैदा होने वाला मानव-संसाधन संकट (News18)
- कैसे: सेनाओं ने रक्षा मंत्रालय को रिटेंशन कोटा बढ़ाने की औपचारिक सिफारिश भेजी है; अंतिम फैसला सरकार के पास (Zee News Hindi)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अग्निवीर योजना में रिटेंशन कोटा 25% ही क्यों रखा गया था?
मूल अग्निवीर मॉडल का विचार था कि सेना को 'लीन और यंग' रखा जाए — हर चार साल में 75% जवान बदले जाएँ ताकि औसत उम्र कम रहे और पेंशन बिल घटे। लेकिन अब तीनों सेनाओं ने माना है कि यह अनुपात ज़मीनी ऑपरेशन के लिए अव्यावहारिक है (News18, Zee News Hindi)।
अगर कोटा बढ़ा तो क्या अग्निवीर योजना ख़त्म हो जाएगी?
औपचारिक रूप से योजना ख़त्म नहीं होगी, लेकिन अगर रिटेंशन 75% या उससे ऊपर जाता है तो व्यावहारिक रूप से यह पुरानी शॉर्ट-सर्विस भर्ती का री-ब्रांडेड रूप बन जाएगी — विपक्ष इसे 'U-टर्न' कहेगा।
2027 UP चुनाव पर अग्निवीर मुद्दे का क्या असर पड़ सकता है?
हिंदी बेल्ट — ख़ासकर UP, बिहार, MP — से सबसे ज़्यादा अग्निवीर भर्ती हुई है। अगर 75% बिना स्थायी रोज़गार बाहर आते हैं तो यह असंतोष विपक्षी दलों के लिए शक्तिशाली चुनावी मुद्दा बन सकता है।






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