दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने संसद में बताया कि Coal India और सहायक कंपनियों में 2019-20 से 2023-24 के बीच कुल 12,595 कर्मचारियों की मृत्यु हुई। इस आँकड़े में खदान दुर्घटनाएँ, व्यावसायिक बीमारियाँ और प्राकृतिक कारणों से हुई मौतें शामिल हो सकती हैं। सरकार का दावा है कि मौतों का ट्रेंड घट रहा है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: Coal India Limited और उसकी सहायक कंपनियों (ECL, BCCL, CCL, NCL, SECL, MCL, WCL) के कर्मचारी — खासकर झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की खदानों में कार्यरत श्रमिक।
  • क्या: पाँच वित्तीय वर्षों (2019-20 से 2023-24) में कुल 12,595 कर्मचारियों की मृत्यु — जिसमें खदान दुर्घटनाएँ, व्यावसायिक बीमारियाँ और अन्य कारण शामिल हो सकते हैं। सरकार ने संसद में स्वीकार करते हुए दावा किया कि मृत्यु का ट्रेंड 'घट रहा है'।
  • कब: 2019-20 से 2023-24 तक का पाँच साल का आँकड़ा; सरकार का संसदीय जवाब 2025 के सत्र में दिया गया।
  • कहाँ: Coal India की सहायक कंपनियों की खदानें, मुख्यतः झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में।
  • क्यों: माइन सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में कम निवेश, ठेका श्रमिकों की बढ़ती हिस्सेदारी, पुरानी तकनीक, और सुरक्षा मानकों के अनुपालन में कथित ढिलाई को श्रमिक संगठन प्रमुख कारण मानते हैं।
  • कैसे: दैनिक जागरण के अनुसार सरकार ने संसदीय प्रश्न के जवाब में यह डेटा प्रस्तुत किया; मृत्यु के कारणों में खदान दुर्घटनाएँ (छत धँसना, गैस रिसाव, मशीनरी दुर्घटना, बाढ़), व्यावसायिक बीमारियाँ और प्राकृतिक कारण शामिल हो सकते हैं।

एक ज़रूरी स्पष्टीकरण सबसे पहले: दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने संसद में बताया कि 2019-20 से 2023-24 के बीच Coal India Limited और उसकी सहायक कंपनियों में कुल 12,595 कर्मचारियों की मृत्यु हुई। यह आँकड़ा सभी कारणों — खदान दुर्घटनाएँ, व्यावसायिक बीमारियाँ (जैसे सिलिकोसिस, ब्लैक लंग डिज़ीज़) और प्राकृतिक कारणों — को मिलाकर हो सकता है। संसदीय जवाब में इनका विस्तृत ब्रेकडाउन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, और यह पारदर्शिता की कमी अपने आप में एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।

Key Takeaways — मुख्य बातें

  • Coal India में 5 वर्षों (2019-24) में 12,595 कर्मचारी मृत्यु — इसमें खदान हादसे, व्यावसायिक बीमारियाँ और प्राकृतिक कारण सभी शामिल हो सकते हैं।
  • सरकार का 'मौतें घट रही हैं' दावा — लेकिन कर्मचारी संख्या भी लगातार घट रही है; प्रति हज़ार कर्मचारी मृत्यु दर का पारदर्शी डेटा ज़रूरी है।
  • Coal India की ESG रिपोर्ट में माइन सेफ्टी ख़र्च का अलग ब्रेकडाउन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं।
  • ठेका श्रमिकों की मौतों को इस आँकड़े में किस हद तक शामिल किया गया है, यह स्पष्ट नहीं।
  • इंडिया हेराल्ड ने प्रकाशन से पूर्व Coal India से आधिकारिक प्रतिक्रिया माँगी है; प्रतिक्रिया मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

"घट रहा है" — लेकिन किस पैमाने पर?

सरकार जब कहती है मौतें "घट रही हैं", तो वह एक सांख्यिकीय ट्रेंड की बात करती है — पिछले दशक की तुलना में। लेकिन यहाँ एक बुनियादी सवाल छूट जाता है: Coal India की कुल कर्मचारी संख्या भी लगातार घट रही है। कंपनी की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों की संख्या अब लगभग 2.28 लाख है, जबकि एक दशक पहले यह ढाई लाख से ऊपर थी। जब काम करने वाले ही कम हों, तो कुल मृत्यु संख्या का घटना अपने आप में कोई उपलब्धि नहीं — यह गणितीय स्वाभाविकता है। असली पैमाना है मृत्यु दर प्रति हज़ार कर्मचारी, और उस पैमाने पर सरकार ने विस्तृत डेटा सार्वजनिक नहीं किया है।

दूसरा कोण और भी महत्वपूर्ण है। ठेका श्रमिकों (contract workers) की मौतें इस 12,595 के आँकड़े में किस हद तक शामिल हैं, यह लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। खदानों में बढ़ती आउटसोर्सिंग का मतलब है कि ज़मीन पर काम करने वालों का एक बड़ा हिस्सा "Coal India का कर्मचारी" की औपचारिक परिभाषा में नहीं आता — लेकिन ख़तरा वही झेलता है।

12,595 का आँकड़ा — समझिए क्या शामिल है और क्या नहीं

यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि 12,595 कर्मचारी मृत्यु का मतलब यह नहीं कि ये सभी खदान दुर्घटनाओं में हुई हैं। Coal India में लगभग 2.28 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं (2023-24 वार्षिक रिपोर्ट अनुसार), और इतने बड़े कार्यबल में प्राकृतिक कारणों (हृदय रोग, बीमारी, उम्र) से भी मृत्यु होना स्वाभाविक है। हालाँकि, यहाँ असली मुद्दा यह है: संसदीय जवाब में सभी कारणों को मिलाकर एक संख्या दी गई है, अलग-अलग कैटेगरी — खदान दुर्घटना, व्यावसायिक बीमारी, प्राकृतिक मृत्यु — का ब्रेकडाउन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं दिखता।

यह पारदर्शिता की कमी अपने आप में चिंता का विषय है। जब तक यह साफ़ न हो कि इनमें कितनी मौतें कार्यस्थल की असुरक्षा से जुड़ी हैं और कितनी प्राकृतिक, तब तक न तो सरकार का "सुधार" दावा पूरी तरह विश्वसनीय है, न ही कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था का सही मूल्यांकन संभव है।

₹2.5 लाख करोड़ का मार्केट कैप — सुरक्षा निवेश कितना?

Coal India का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन BSE डेटा के अनुसार जून 2025 तक लगभग ₹2.5 लाख करोड़ के आसपास रहा है (बाज़ार भाव के अनुसार उतार-चढ़ाव स्वाभाविक)। कंपनी हर साल हज़ारों करोड़ का मुनाफ़ा कमाती है और सरकार को भारी डिविडेंड देती है। लेकिन इस चमचमाते बैलेंस शीट के नीचे एक सवाल दबा है: माइन सेफ्टी पर ख़र्च कुल राजस्व का कितना हिस्सा है?

कंपनी की सार्वजनिक रिपोर्ट्स में सुरक्षा ख़र्च का अलग से स्पष्ट ब्रेकडाउन मिलना मुश्किल है — यह अपने आप में एक लाल झंडी है। जब ग्लोबल माइनिंग दिग्गज जैसे BHP, Rio Tinto और Glencore अपनी ESG रिपोर्ट में प्रति कर्मचारी सुरक्षा निवेश, Lost Time Injury Frequency Rate (LTIFR) और फ़ैटैलिटी रेट को अलग से हाइलाइट करते हैं, तब Coal India की ESG डिस्क्लोज़र में यह स्तर की पारदर्शिता काफ़ी कम दिखती है।

ESG रेटिंग और विदेशी निवेश पर असर

ESG-फ़ोकस्ड फ़ंड्स — जो ग्लोबल सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट एलायंस (GSIA) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में $30 ट्रिलियन से अधिक एसेट्स मैनेज करते हैं — कंपनियों की सेफ्टी मेट्रिक्स को गंभीरता से देखते हैं। MSCI और Sustainalytics जैसी ESG रेटिंग एजेंसियाँ अपनी उपलब्ध रिपोर्ट्स में Coal India को 'high risk' या 'severe' कैटेगरी में रेट करती आई हैं (MSCI ESG Ratings और Sustainalytics की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कंपनी प्रोफ़ाइल्स के अनुसार; सटीक रेटिंग समय-समय पर अपडेट होती है)।

इसका सीधा असर यह है कि जब तक सेफ्टी मेट्रिक्स में ठोस सुधार और पारदर्शी डिस्क्लोज़र नहीं आता, ग्लोबल पैसिव ESG फ़ंड्स का बड़ा हिस्सा इस काउंटर से दूर रहने की संभावना है — और यह कंपनी के लॉन्ग-टर्म वैल्यूएशन की छत तय कर सकता है।

ज़मीनी तस्वीर — ट्रेड यूनियनों और श्रमिकों की आवाज़

⚠️ नोट: यह खंड ट्रेड यूनियनों, श्रमिक संगठनों और उद्योग हलकों में होने वाली चर्चा पर आधारित है। ये दावे स्वतंत्र रूप से पुष्ट ऑडिट रिपोर्ट से सत्यापित नहीं हैं। इंडिया हेराल्ड ने Coal India से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया माँगी है; प्रकाशन तक प्रतिक्रिया नहीं मिली। मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।

झारखंड और छत्तीसगढ़ की खदानों से जुड़े श्रमिक संगठनों का आरोप है कि कई खदानों में सेफ्टी ऑडिट प्रक्रिया औपचारिकता बनकर रह गई है। उद्योग हलकों में चर्चा है कि कुछ सहायक कंपनियों में सेफ्टी ऑफ़िसर का पद लंबे समय से रिक्त पड़ा हो सकता है — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

श्रमिक परिवारों की शिकायत है कि मुआवज़े की प्रक्रिया लंबी और जटिल है। ट्रेड यूनियन नेताओं का कहना है: "मुआवज़ा ₹10-15 लाख के आसपास मिलता है, और वह भी लंबी प्रक्रिया के बाद। कंपनी का रोज़ाना मुनाफ़ा ₹80-100 करोड़ के क़रीब बताया जाता है।" (यह यूनियनों का दावा है; Coal India ने इस पर अब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।)

रिपोर्टिंग का गैप — आँकड़ा 'बेहतर' कैसे दिखता है?

इंडिया हेराल्ड का विश्लेषण तीन सांख्यिकीय गैप्स को रेखांकित करता है जो "मौतें घट रही हैं" दावे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं:

  • घटती कर्मचारी संख्या: जब कार्यबल ही कम हो रहा हो, तो कुल मृत्यु संख्या का घटना स्वाभाविक है — यह सुरक्षा सुधार का प्रमाण नहीं।
  • ठेका श्रमिकों का दायरा: यदि ठेका मज़दूरों की मौतें "Coal India कर्मचारी" की परिभाषा से बाहर हैं, तो आँकड़ा अधूरा है।
  • व्यावसायिक बीमारियों का वर्गीकरण: सिलिकोसिस और ब्लैक लंग डिज़ीज़ जैसी बीमारियाँ खदान के काम का सीधा नतीजा हैं, लेकिन इन्हें "खदान दुर्घटना" में नहीं गिना जाता। यह एक ऐसा धीमा ज़हर है जो आँकड़ों से ग़ायब रहता है।

ये तीनों मिलकर एक ऐसा सांख्यिकीय ढाँचा बनाते हैं जहाँ आँकड़ा "बेहतर" दिख सकता है, बिना ज़मीनी हक़ीक़त ज़रूरी रूप से बदले।

Coal India शेयर — निवेशक के लिए ESG क्यों मायने रखता है

Coal India का शेयर निवेशकों के बीच कोयले की माँग और डिविडेंड यील्ड के कारण लोकप्रिय बना हुआ है। लेकिन लॉन्ग-टर्म वैल्यूएशन के लिए ESG स्कोरिंग अब सिर्फ़ "अच्छा दिखने" का मामला नहीं रही — यह सीधे फ़ंड एलोकेशन तय करती है।

कोल इंडिया का 2026 का शेयर मूल्य लक्ष्य ब्रोकरेज से ब्रोकरेज अलग है, लेकिन एक बात कई विश्लेषक मानते हैं: बिना ESG मेट्रिक्स में सुधार — ख़ासकर कर्मचारी सुरक्षा और पारदर्शिता पर — ग्लोबल पैसिव फ़ंड्स का बड़ा हिस्सा इस काउंटर से दूर रह सकता है। यह कंपनी के वैल्यूएशन की ऊपरी सीमा तय करने वाला कारक बन सकता है।

Coal India की आधिकारिक प्रतिक्रिया

इंडिया हेराल्ड ने इस रिपोर्ट में उठाए गए सवालों — मृत्यु के कारणों का ब्रेकडाउन, सेफ्टी ख़र्च का विवरण, ठेका श्रमिकों की मौतों की गणना, और यूनियनों के आरोपों — पर Coal India Limited से आधिकारिक प्रतिक्रिया माँगी है। प्रकाशन तक कंपनी की ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। प्रतिक्रिया मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

आगे क्या देखें — तीन Litmus Tests

आने वाले महीनों में तीन चीज़ें देखने लायक हैं:

  • ESG रिपोर्ट में सेफ्टी ब्रेकडाउन: Coal India की अगली ESG/सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में माइन सेफ्टी ख़र्च का अलग ब्रेकडाउन आता है या नहीं — यह पारदर्शिता का litmus test होगा।
  • DGMS इंस्पेक्शन रिपोर्ट: DGMS (Directorate General of Mines Safety) की रिपोर्ट्स में ठेका श्रमिकों की मौतों को अलग से रिपोर्ट किया जाएगा या नहीं — यह रिपोर्टिंग गैप बंद करने की दिशा में पहला कदम होगा।
  • JBCCI बैठकें: Coal India की JBCCI (Joint Bipartite Committee for Coal Industry) बैठकों में यूनियनें सुरक्षा ख़र्च को वेतन वार्ता से जोड़ पाती हैं या नहीं — यह बताएगा कि श्रमिकों की आवाज़ बोर्डरूम तक पहुँच रही है या नहीं।

असली सवाल यह नहीं है कि कुल मौतें "घट" रही हैं या नहीं। असली सवाल यह है: इन 12,595 मौतों में कितनी रोकी जा सकती थीं? जब तक सरकार और Coal India इस सवाल का जवाब पारदर्शी डेटा के साथ नहीं देतीं — कारण-वार ब्रेकडाउन, सुरक्षा निवेश का हिसाब, ठेका श्रमिकों की अलग गणना — तब तक "घट रहा है" सिर्फ़ एक अधूरा आँकड़ा रहेगा, जवाब नहीं।

आँकड़ों में

  • Coal India में 5 वर्षों (2019-24) में 12,595 कर्मचारी मृत्यु — सभी कारणों सहित (दैनिक जागरण / संसदीय जवाब)
  • Coal India कर्मचारी संख्या 2023-24 वार्षिक रिपोर्ट अनुसार ~2.28 लाख
  • Coal India मार्केट कैप ~₹2.5 लाख करोड़ (BSE डेटा, जून 2025 अनुमानित)
  • ग्लोबल ESG-फ़ोकस्ड फ़ंड्स $30 ट्रिलियन+ एसेट्स मैनेज करते हैं (GSIA 2022 रिपोर्ट)

मुख्य बातें

  • दैनिक जागरण के अनुसार सरकार ने संसद में बताया कि Coal India में 2019-20 से 2023-24 के बीच 12,595 कर्मचारियों की मृत्यु हुई — इसमें खदान दुर्घटनाएँ, व्यावसायिक बीमारियाँ और प्राकृतिक कारण सभी शामिल हो सकते हैं।
  • सरकार का 'मौतें घट रही हैं' दावा — लेकिन कर्मचारी संख्या भी घटी है; प्रति हज़ार कर्मचारी मृत्यु दर का पारदर्शी डेटा सार्वजनिक नहीं।
  • Coal India की ESG रिपोर्ट में माइन सेफ्टी ख़र्च का स्पष्ट ब्रेकडाउन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं — MSCI और Sustainalytics जैसी एजेंसियाँ कंपनी को 'high risk' कैटेगरी में रेट करती आई हैं।
  • ठेका श्रमिकों की मौतों को इस आँकड़े में किस हद तक शामिल किया गया है, यह स्पष्ट नहीं — रिपोर्टिंग गैप एक गंभीर मुद्दा।
  • इंडिया हेराल्ड ने Coal India से प्रतिक्रिया माँगी है; प्रकाशन तक जवाब नहीं मिला।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Coal India में 5 साल में कितने कर्मचारियों की मृत्यु हुई?

दैनिक जागरण और सरकार के संसदीय जवाब के अनुसार 2019-20 से 2023-24 के बीच Coal India और सहायक कंपनियों में कुल 12,595 कर्मचारियों की मृत्यु हुई। इसमें खदान दुर्घटनाएँ, व्यावसायिक बीमारियाँ और प्राकृतिक कारण सभी शामिल हो सकते हैं — विस्तृत ब्रेकडाउन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

कोल इंडिया शेयर का भविष्य ESG से कैसे जुड़ा है?

Coal India का शेयर वैल्यूएशन कोयले की माँग के साथ-साथ ESG अनुपालन पर निर्भर करता है। MSCI और Sustainalytics जैसी एजेंसियाँ कंपनी को 'high risk' रेट करती आई हैं, जिससे ग्लोबल पैसिव ESG फ़ंड्स से बड़ा निवेश सीमित रहता है और लॉन्ग-टर्म वैल्यूएशन पर दबाव बन सकता है।

Coal India में माइन सेफ्टी पर कितना ख़र्च होता है?

Coal India की सार्वजनिक रिपोर्ट्स में माइन सेफ्टी ख़र्च का अलग से स्पष्ट ब्रेकडाउन आसानी से उपलब्ध नहीं है — यह पारदर्शिता की कमी अपने आप में चिंता का विषय है। BHP और Rio Tinto जैसी ग्लोबल माइनिंग कंपनियाँ यह डेटा ESG रिपोर्ट में अलग से प्रकाशित करती हैं।

12,595 मौतों में खदान दुर्घटनाएँ कितनी और प्राकृतिक मौतें कितनी हैं?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है और इसका जवाब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। संसदीय जवाब में कारण-वार ब्रेकडाउन नहीं दिया गया। जब तक यह डेटा पारदर्शी न हो, Coal India की सुरक्षा व्यवस्था का सही मूल्यांकन और सरकार के 'सुधार' दावे की पुष्टि संभव नहीं है।

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