अक्षय कुमार की 'वेलकम टू द जंगल' ने 5 दिनों में ₹81 करोड़ कमाए हैं। इससे पहले 'भूत बंगला' ने ₹143 करोड़ पार किए। हिंदुस्तान टाइम्स और पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, यह ट्रेंड साफ़ बताता है कि दर्शक अक्षय से 'देशभक्ति' नहीं, 'हँसी' चाहते हैं।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: अक्षय कुमार और 'वेलकम टू द जंगल' की मल्टीस्टारर कास्ट
  • क्या: फ़िल्म ने 5 दिनों में भारत में ₹81 करोड़ की बॉक्स ऑफ़िस कमाई की, मंगलवार को उछाल के साथ — हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार
  • कब: जुलाई 2025 में रिलीज़ के बाद, पाँचवें दिन तक का आँकड़ा
  • कहाँ: भारत भर के सिनेमाघरों में
  • क्यों: मल्टीस्टारर कॉमेडी फ़ॉर्मूला और 'वेलकम' फ़्रैंचाइज़ी की ब्रांड वैल्यू ने दर्शकों को खींचा; अक्षय की हालिया देशभक्ति फ़िल्मों की लगातार विफलता ने कॉमेडी को 'सेफ़ ज़ोन' बना दिया
  • कैसे: ओपनिंग वीकेंड की मज़बूत शुरुआत के बाद मंगलवार को वर्ड-ऑफ़-माउथ और पॉज़िटिव रिव्यूज़ से कलेक्शन में उछाल आया — हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार

एक वक़्त था जब अक्षय कुमार का नाम स्क्रीन पर आते ही दर्शक जानते थे — या तो हँसी आएगी, या रोंगटे खड़े होंगे। पिछले कुछ सालों में उन्होंने रोंगटे वाला रास्ता इतनी बार चुना कि दर्शकों के रोंगटे खड़े होना तो दूर, वे सीट से ही खड़े होकर चले गए। अब 2025 में दो फ़िल्में — 'वेलकम टू द जंगल' और 'भूत बंगला' — एक साथ चिल्लाकर कह रही हैं: अक्षय कुमार, तुम्हारी असली ताक़त तिरंगे में नहीं, ठहाकों में है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर कॉमेडी 'वेलकम टू द जंगल' ने रिलीज़ के पाँचवें दिन तक भारत में ₹81 करोड़ की कमाई कर ली है। ख़ास बात यह कि मंगलवार को कलेक्शन में उछाल आया — जो वर्ड-ऑफ़-माउथ की ताक़त का सबूत है। वीकेंड के बाद वीकडे पर गिरावट आम बात है, लेकिन जब मंगलवार को ग्राफ़ ऊपर जाए तो समझिए कि फ़िल्म ने 'रिपीट ऑडियंस' बना लिया है।

और यह अक्षय की अकेली कॉमेडी हिट नहीं। पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, 'भूत बंगला' — जो हॉरर-कॉमेडी है — ने तीसरे हफ़्ते में भी कमाई जारी रखी और ₹143 करोड़ का आँकड़ा पार कर लिया है। तीसरे मंगलवार को ₹2 करोड़, बुधवार को ₹1.50 करोड़, और गुरुवार को ₹1.40 करोड़ — यानी तीसरे हफ़्ते में भी फ़िल्म रोज़ाना डेढ़ करोड़ के आसपास कमा रही है। ₹150 करोड़ का क्लब अब बस हाथ भर दूर है।

नंबरों की ज़ुबान — कॉमेडी बनाम बाक़ी सब

ज़रा पिछले कुछ सालों पर नज़र डालें। 'सम्राट पृथ्वीराज', 'बच्चन पांडे', 'राम सेतु', 'सेल्फ़ी', 'कैप्सूल गिल', 'बड़े मियाँ छोटे मियाँ', 'खेल खेल में', 'स्काईफ़ोर्स' — इन सबमें एक चीज़ कॉमन थी: या तो देशभक्ति का ओवरडोज़, या गंभीर सोशल मैसेज, या एक्शन ड्रामा। और एक चीज़ और कॉमन थी — बॉक्स ऑफ़िस पर औंधे मुँह। ट्रेड अनुमानों के मुताबिक़ इनमें से अधिकतर ने अपनी लागत भी नहीं निकाली।

अब तुलना कीजिए: 'भूत बंगला' — ₹143 करोड़ और बढ़ रही है। 'वेलकम टू द जंगल' — 5 दिनों में ₹81 करोड़, और ट्रैजेक्टरी बता रही है कि ₹150 करोड़ से आगे जा सकती है। दोनों कॉमेडी। दोनों हिट। पैटर्न इतना साफ़ है कि अब किसी ट्रेड एनालिस्ट को समझाने की ज़रूरत नहीं।

इनसाइड टॉक

इंडस्ट्री के गलियारों में एक बात ज़ोरों से चल रही है — ट्रेड हलकों में चर्चा है कि अक्षय कुमार की टीम ने अब 'देशभक्ति स्लॉट' से लगभग किनारा कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक़ उनकी आने वाली कम से कम तीन-चार फ़िल्में कॉमेडी या लाइट-हार्टेड स्पेस में हैं। फ़ैन्स का मूड भी यही कह रहा है — सोशल मीडिया पर 'वेलकम टू द जंगल' की रिलीज़ के बाद सबसे ज़्यादा ट्रेंड करने वाला कमेंट था: "यही अक्षय चाहिए था, वो वाला नहीं जो हर फ़िल्म में तिरंगा लहराता था।" इंडस्ट्री की बात यह है कि कुछ बड़े प्रोडक्शन हाउसेज़ ने भी अक्षय को 'सीरियस प्रोजेक्ट्स' ऑफ़र करना बंद कर दिया है — क्योंकि रिस्क बहुत ज़्यादा हो गया था। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

वो फ़ॉर्मूला जो हमेशा से काम करता था

अगर ईमानदारी से देखें तो अक्षय कुमार का करियर ग्राफ़ एक सीधी कहानी कहता है। 'हेरा फेरी', 'भूल भुलैया', 'वेलकम', 'सिंह इज़ किंग', 'हाउसफ़ुल' सीरीज़, 'गुड न्यूज़' — उनकी सबसे बड़ी कमर्शियल हिट्स में से 80 प्रतिशत कॉमेडी हैं। 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' और 'पैडमैन' जैसी सोशल फ़िल्में ज़रूर चलीं, लेकिन वो भी इसलिए क्योंकि उनमें अक्षय का हल्का-फुल्का टच था — वे 'लेक्चर' नहीं बनीं।

समस्या तब शुरू हुई जब हर दूसरी फ़िल्म में वे या तो सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे थे, या किसी ऐतिहासिक किरदार में ढले हुए थे, या देश के लिए रॉकेट उड़ा रहे थे। दर्शकों ने पहली-दूसरी बार तालियाँ बजाईं, लेकिन जब यही 'देशभक्ति मेनू' हर तीन महीने में परोसा जाने लगा, तो पेट भर गया। बॉक्स ऑफ़िस ने वही कहा जो दर्शक कह रहे थे — "भाई, अब हँसाओ।"

₹81 करोड़ का असली मतलब — इंडिया हेराल्ड का विश्लेषण

'वेलकम टू द जंगल' का ₹81 करोड़ का आँकड़ा सिर्फ़ एक नंबर नहीं है — यह अक्षय कुमार के करियर का GPS रीकैलिब्रेशन है। इंडिया हेराल्ड का आकलन यह है कि यह ट्रेंड सिर्फ़ अक्षय तक सीमित नहीं रहेगा — यह पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री को एक सबक दे रहा है।

2023-24 में बॉलीवुड ने 'देशभक्ति थकान' का अनुभव किया। दर्शक OTT पर इंटरनेशनल कंटेंट देख रहे थे, और थिएटर में वे वही आने लगे जो उन्हें 'एक्सपीरियंस' दे — या तो विज़ुअल स्पेक्टेकल ('पुष्पा', 'RRR', 'पठान'), या शुद्ध एंटरटेनमेंट। अक्षय की देशभक्ति फ़िल्में न स्पेक्टेकल थीं, न एंटरटेनमेंट — वे बीच में फँसी 'लेक्चर' बन गई थीं। अब कॉमेडी ने उन्हें वापस उस ज़ोन में लाया है जहाँ दर्शक उन्हें सबसे ज़्यादा प्यार करता है।

आगे देखें तो अगर 'वेलकम टू द जंगल' ₹150 करोड़ पार करती है — जो मौजूदा ट्रैजेक्टरी से मुमकिन लग रहा है — तो यह 2025 में अक्षय की दूसरी ₹150 करोड़ क्लब फ़िल्म होगी, और दोनों कॉमेडी। ट्रेड विश्लेषकों का अनुमान है कि इसके बाद प्रोड्यूसर्स अक्षय को कॉमेडी के अलावा कुछ ऑफ़र करने से पहले दो बार सोचेंगे। 'हेरा फेरी 3' की अटकलें पहले से हैं — अगर वो बनती है, तो समझिए कॉमेडी कमबैक सील हो गया।

क्या देशभक्ति का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद?

ज़रूरी नहीं — लेकिन शर्तें बदल गई हैं। दर्शक देशभक्ति के ख़िलाफ़ नहीं है; वह 'लेज़ी देशभक्ति' के ख़िलाफ़ है। 'उरी' इसलिए चली क्योंकि वह कसी हुई थ्रिलर थी। 'पठान' इसलिए चली क्योंकि वह मसाला एंटरटेनर थी जिसमें देशभक्ति स्वाद था, मेनू नहीं। अक्षय की देशभक्ति फ़िल्मों की समस्या 'देशभक्ति' नहीं थी — 'आलस' थी। कमज़ोर स्क्रिप्ट, टेम्पलेट ट्रीटमेंट, और "तिरंगा दिखा दो, कलेक्शन आ जाएगा" वाली सोच।

अगर अक्षय कभी वापस इस ज़ोन में आते हैं, तो उन्हें वही करना होगा जो कॉमेडी में कर रहे हैं — असली मेहनत। अभी तो बॉक्स ऑफ़िस साफ़ बोल रहा है: भारत का दर्शक थिएटर में हँसने आता है, लेक्चर सुनने नहीं।

और शायद यही वो सबक़ है जो ₹81 करोड़ और ₹143 करोड़ मिलकर पढ़ा रहे हैं — कि स्टार तब तक ही स्टार है जब तक वह दर्शक की भाषा बोले, अपनी नहीं। अक्षय कुमार ने वो भाषा बदली है। सवाल यह है — क्या बॉलीवुड के बाक़ी स्टार्स भी सुन रहे हैं?

आँकड़ों में

  • 'वेलकम टू द जंगल' — 5 दिनों में ₹81 करोड़ (हिंदुस्तान टाइम्स)
  • 'भूत बंगला' — तीसरे हफ़्ते तक ₹143 करोड़, ₹150 करोड़ के क़रीब (पिंकविला)
  • 'भूत बंगला' तीसरे मंगलवार को ₹2 करोड़, बुधवार ₹1.50 करोड़, गुरुवार ₹1.40 करोड़ (पिंकविला)

मुख्य बातें

  • 'वेलकम टू द जंगल' ने 5 दिनों में ₹81 करोड़ कमाए, मंगलवार को उछाल आया — हिंदुस्तान टाइम्स
  • 'भूत बंगला' ने तीसरे हफ़्ते में ₹143 करोड़ पार किए, ₹150 करोड़ की ओर — पिंकविला
  • अक्षय की पिछले 3 साल की लगभग सभी देशभक्ति/गंभीर फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर फ्लॉप रहीं
  • करियर की 80% सबसे बड़ी हिट्स कॉमेडी जॉनर से हैं — हेरा फेरी से लेकर हाउसफ़ुल तक
  • ट्रेड हलकों में चर्चा है कि अक्षय की आने वाली अधिकतर फ़िल्में कॉमेडी स्पेस में हैं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

'वेलकम टू द जंगल' ने अब तक कितनी कमाई की है?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ़िल्म ने 5 दिनों में भारत में ₹81 करोड़ की कमाई की है, जिसमें मंगलवार को कलेक्शन में उछाल दर्ज किया गया।

'भूत बंगला' का कुल बॉक्स ऑफ़िस कलेक्शन कितना है?

पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी 'भूत बंगला' ने तीसरे हफ़्ते में ₹143 करोड़ पार कर लिए हैं और ₹150 करोड़ की ओर बढ़ रही है।

अक्षय कुमार की देशभक्ति फ़िल्में क्यों फ्लॉप हो रही हैं?

ट्रेड विश्लेषकों के अनुसार, दर्शकों में 'देशभक्ति थकान' आ गई है। बार-बार एक ही फ़ॉर्मूले से बनी कमज़ोर स्क्रिप्ट वाली देशभक्ति फ़िल्मों ने दर्शकों का भरोसा तोड़ा, जबकि कॉमेडी में अक्षय का नैचुरल कनेक्ट बरक़रार रहा।

क्या अक्षय कुमार अब सिर्फ़ कॉमेडी फ़िल्में करेंगे?

इंडस्ट्री चर्चा के मुताबिक़ अक्षय की आने वाली अधिकतर फ़िल्में कॉमेडी या लाइट-हार्टेड स्पेस में हैं। हालाँकि, देशभक्ति का दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं है — शर्त यह है कि स्क्रिप्ट मज़बूत हो, टेम्पलेट न हो।

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