शाहिद कपूर अक्टूबर 2025 से अमित रविंद्रनाथ शर्मा की 'अदल-बदल' की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रोजेक्ट प्री-प्रोडक्शन में है। 'मैदान' के डिज़ास्टर के बावजूद शाहिद का यह दांव उनकी स्क्रिप्ट-फ़र्स्ट स्ट्रैटेजी और अमित शर्मा की 'बदला' सेट-अप कहानी पर भरोसे को दर्शाता है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: शाहिद कपूर (लीड एक्टर) और डायरेक्टर अमित रविंद्रनाथ शर्मा ('बधाई हो' फ़ेम)
  • क्या: दोनों की पहली कोलैबोरेशन — फ़िल्म 'अदल-बदल', जो कथित तौर पर एक कॉमेडी-ड्रामा है
  • कब: टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार शूटिंग अक्टूबर 2025 में शुरू होने की संभावना है
  • कहाँ: भारत में शूट होगी, सटीक लोकेशन की पुष्टि अभी बाक़ी
  • क्यों: 'मैदान' के सुपरफ़्लॉप के बाद अमित शर्मा को A-लिस्ट प्रोजेक्ट की ज़रूरत थी; शाहिद को एक ऐसी शैली चाहिए जो उनके स्क्रिप्ट-फ़र्स्ट ब्रांड को मज़बूत करे
  • कैसे: रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रोजेक्ट प्री-प्रोडक्शन में है, कास्टिंग और क्रू फ़ाइनल हो रही है

बॉलीवुड में एक अनलिखा नियम है — अगर आपकी पिछली फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर ज़मीन चूमी, तो अगला प्रोजेक्ट साइन करने में पसीने छूट जाते हैं। अमित रविंद्रनाथ शर्मा 2024 से इसी ज़मीन पर खड़े हैं — 'मैदान' ने अजय देवगन जैसे भरोसेमंद नाम के बावजूद थिएटर में क़रीब-क़रीब ख़ाली सीटें देखीं। ऐसे में जब ख़बर आती है कि शाहिद कपूर ने उन्हीं अमित शर्मा के साथ 'अदल-बदल' साइन कर ली है, तो सवाल सीधा है: बॉलीवुड का सबसे कैलकुलेटेड एक्टर एक 'रिस्की' डायरेक्टर पर भरोसा क्यों जता रहा है?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार शाहिद कपूर अक्टूबर 2025 से 'अदल-बदल' की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। फ़िल्म फ़िलहाल प्री-प्रोडक्शन में है। टाइटल से ज़ाहिर है कि यह किसी स्वैप या रोल-रिवर्सल पर बनी कॉमेडी-ड्रामा हो सकती है — हालांकि प्लॉट की आधिकारिक पुष्टि अभी बाक़ी है।

लेकिन इस कहानी की असली दिलचस्पी टाइटल या शूटिंग डेट में नहीं — इसमें है कि शाहिद कपूर ने यह फ़ैसला किस हिसाब-किताब से लिया।

अमित शर्मा: '₹200 करोड़' से 'डिज़ास्टर' तक

2018 में 'बधाई हो' ने अमित रविंद्रनाथ शर्मा को बॉलीवुड की उस दुर्लभ सूची में डाल दिया था जहाँ डायरेक्टर ₹200 करोड़ से ज़्यादा कमाने वाली मिड-बजट फ़िल्म देकर रातोंरात 'सेफ़ बेट' बन जाते हैं। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 'बधाई हो' ने ₹30 करोड़ से भी कम बजट में ₹200 करोड़ से ऊपर का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया — ROI के लिहाज़ से साल की सबसे प्रॉफ़िटेबल फ़िल्मों में से एक। प्रोड्यूसर्स ने लाइन लगा दी।

फिर आई 'मैदान'। अजय देवगन, बड़ा बजट, स्पोर्ट्स ड्रामा — और थिएटर में सन्नाटा। बॉक्स ऑफ़िस इंडिया के आँकड़ों के हिसाब से 'मैदान' अपनी लागत का एक तिहाई भी रिकवर नहीं कर पाई। इसने अमित शर्मा को उस ख़तरनाक ज़ोन में धकेल दिया जहाँ बॉलीवुड डायरेक्टर्स का फ़ोन बजना बंद हो जाता है — 'वन-हिट वंडर' का टैग। ट्रेड हलकों में माना गया कि शर्मा की ताक़त इंटिमेट फ़ैमिली ड्रामा में है, स्पेक्टेकल में नहीं।

शाहिद कपूर की स्क्रिप्ट-पिकिंग रणनीति

शाहिद कपूर पिछले सात-आठ सालों में बॉलीवुड के सबसे कैलकुलेटेड स्क्रिप्ट-पिकर्स में से एक बन गए हैं। 'कबीर सिंह' (2019) के ₹379 करोड़ के धमाके के बाद उन्होंने हर प्रोजेक्ट को एक ब्रांड डिसीज़न की तरह ट्रीट किया। 'जर्सी' (2022) में उन्होंने तेलुगु रीमेक का रिस्क लिया — फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर नहीं चली, लेकिन क्रिटिक्स ने शाहिद की परफ़ॉर्मेंस की तारीफ़ की। OTT पर 'फ़र्ज़ी' (2023) ने उन्हें वेब ऑडियंस में एस्टैब्लिश किया। 'देवा' (2025) में एक्शन-ड्रामा ज़ोन भी टेस्ट किया।

पैटर्न साफ़ है: शाहिद डायरेक्टर की 'लास्ट फ़िल्म' से ज़्यादा स्क्रिप्ट और कॉन्सेप्ट पर भरोसा करते हैं। 'कबीर सिंह' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने उससे पहले केवल एक तेलुगु फ़िल्म बनाई थी — बॉलीवुड में कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं। शाहिद ने तब भी साइन किया, और नतीजा इतिहास बन गया।

इनसाइड टॉक

इंडस्ट्री के अंदरूनी हलकों में 'अदल-बदल' को लेकर दो तरह की फुसफुसाहट चल रही है। पहली — कि शाहिद ने यह प्रोजेक्ट तब साइन किया जब कई बड़े स्टार्स ने अमित शर्मा से दूरी बना ली थी। ट्रेड सूत्रों का कहना है कि 'मैदान' के बाद शर्मा को कम से कम दो बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर किया गया। ऐसे में शाहिद का आना उनके करियर के लिए लाइफ़लाइन जैसा है।

दूसरी चर्चा ज़्यादा दिलचस्प है — कि 'अदल-बदल' की स्क्रिप्ट में कुछ ऐसा है जिसने शाहिद को इतना कन्विंस कर दिया कि उन्होंने डायरेक्टर के 'फ़्लॉप टैग' को नज़रअंदाज़ कर दिया। सूत्रों के मुताबिक़ स्क्रिप्ट में एक डबल-रोल या आइडेंटिटी-स्वैप कॉन्सेप्ट है जो शाहिद को 'कबीर सिंह' और 'जब वी मेट' दोनों शेड्स दिखाने का मौक़ा देता है। अगर यह सच है, तो शाहिद के लिए यह एक एक्टर्स प्रोजेक्ट है — वह ज़ोन जहाँ वो सबसे कम्फ़र्टेबल हैं।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

फ़ैन्स के बीच उत्साह मिला-जुला है। सोशल मीडिया पर एक धड़ा कह रहा है कि शाहिद को 'कबीर सिंह 2' जैसा शूअर-शॉट करना चाहिए था, दूसरा मान रहा है कि शाहिद की ताक़त ही उनका अनप्रेडिक्टेबल होना है।

बॉक्स ऑफ़िस इकोनॉमिक्स: रिस्क कितना बड़ा है?

इंडिया हेराल्ड की नज़र में इस कोलैबोरेशन का सबसे दिलचस्प पहलू इसकी इकोनॉमिक्स है। 'बधाई हो' की सफ़लता का फ़ॉर्मूला क्या था? कम बजट, रिलेटेबल कहानी, शानदार एंसेम्बल। 'मैदान' कहाँ चूकी? बड़ा बजट, निश बनाम मास अपील, लंबी डिले।

अगर 'अदल-बदल' को 'बधाई हो' मॉडल पर — ₹40-50 करोड़ के दायरे में — बनाया जाता है, तो रिस्क काफ़ी कम हो जाता है। शाहिद कपूर का नाम अकेला ₹8-10 करोड़ की ओपनिंग गारंटी करता है। ट्रेड विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर फ़िल्म 'बधाई हो' जैसी वर्ड-ऑफ़-माउथ पकड़ लेती है, तो ₹150-200 करोड़ का लाइफ़टाइम कलेक्शन सम्भव है। लेकिन अगर स्केल बढ़ाया गया — जैसा 'मैदान' में हुआ — तो वही जाल दोबारा बिछ सकता है।

आगे क्या देखें?

यह प्रोजेक्ट दो करियर के लिए डिसाइडिंग मूमेंट है। अमित शर्मा के लिए यह 'सेकेंड चांस' है — बॉलीवुड में जहाँ दो लगातार फ़्लॉप्स के बाद डायरेक्टर को भूल जाने का रिवाज़ है, वहाँ शाहिद कपूर का नाम अटैच होना ही अपने आप में एक वोट-ऑफ़-कॉन्फ़िडेंस है। शाहिद के लिए यह उनकी उस 'अनकन्वेंशनल पिक्स' स्ट्रैटेजी की अगली कड़ी है जो 'कबीर सिंह' से शुरू हुई थी।

आने वाले हफ़्तों में देखने वाली बात यह होगी कि प्रोडक्शन हाउस कौन-सा है, बजट स्केल क्या रखा गया है, और क्या OTT राइट्स पहले से बिके हैं — अगर बिके हैं, तो रिस्क और भी कम हो जाता है। ट्रेड में बात घूम रही है कि कम से कम एक बड़ा OTT प्लेटफ़ॉर्म शाहिद के नाम पर ही डील फ़ाइनल करने को तैयार है।

सवाल यह नहीं है कि शाहिद ने रिस्क लिया — सवाल यह है कि क्या शाहिद का स्क्रिप्ट-रीडिंग ट्रैक रिकॉर्ड इतना मज़बूत है कि वो एक फ़्लॉप डायरेक्टर को भी हिट में बदल दे? 'कबीर सिंह' से पहले यही सवाल था। जवाब इतिहास है। 'अदल-बदल' का जवाब अभी लिखा जा रहा है।

आँकड़ों में

  • 'बधाई हो' (2018) ने ₹30 करोड़ से कम बजट में ₹200 करोड़+ वर्ल्डवाइड कमाए — ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार
  • 'कबीर सिंह' (2019) ने ₹379 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया — बॉक्स ऑफ़िस इंडिया के अनुसार
  • 'मैदान' अपनी लागत का एक तिहाई भी रिकवर नहीं कर पाई — बॉक्स ऑफ़िस इंडिया के आँकड़ों के मुताबिक़

मुख्य बातें

  • 'मैदान' के बॉक्स ऑफ़िस डिज़ास्टर के बाद अमित शर्मा को कई बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर किया गया — 'अदल-बदल' उनके करियर की लाइफ़लाइन है
  • शाहिद कपूर की स्क्रिप्ट-पिकिंग स्ट्रैटेजी डायरेक्टर के लास्ट रिज़ल्ट से ज़्यादा कॉन्सेप्ट पर टिकी है — 'कबीर सिंह' इसी मॉडल की सबसे बड़ी सफ़लता थी
  • इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक़ 'अदल-बदल' की स्क्रिप्ट में डबल-रोल या आइडेंटिटी-स्वैप कॉन्सेप्ट है जिसने शाहिद को कन्विंस किया
  • अगर फ़िल्म 'बधाई हो' मॉडल (₹40-50 करोड़ बजट) पर बनती है तो रिस्क बहुत कम है — शाहिद का नाम अकेला ₹8-10 करोड़ ओपनिंग गारंटी करता है
  • OTT प्री-सेल डील अगर पहले हो गई तो थिएट्रिकल रिस्क और भी कम होगा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

'अदल-बदल' की शूटिंग कब शुरू होगी?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार शाहिद कपूर अक्टूबर 2025 से 'अदल-बदल' की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। फ़िल्म फ़िलहाल प्री-प्रोडक्शन स्टेज में है।

अमित शर्मा की पिछली फ़िल्म 'मैदान' क्यों फ़्लॉप हुई?

'मैदान' एक बड़े बजट की स्पोर्ट्स ड्रामा थी जो अजय देवगन के बावजूद बॉक्स ऑफ़िस पर अपनी लागत का एक तिहाई भी रिकवर नहीं कर पाई। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि फ़ुटबॉल जैसे निश स्पोर्ट्स का मास अपील कम रहा और फ़िल्म की रिलीज़ में लंबी देरी ने भी नुक़सान पहुँचाया।

शाहिद कपूर ने फ़्लॉप डायरेक्टर के साथ क्यों साइन किया?

शाहिद कपूर की स्क्रिप्ट-पिकिंग स्ट्रैटेजी डायरेक्टर की लास्ट फ़िल्म के रिज़ल्ट से ज़्यादा कॉन्सेप्ट और स्क्रिप्ट पर आधारित है। 'कबीर सिंह' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा का भी बॉलीवुड में कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं था — शाहिद ने तब भी भरोसा किया और फ़िल्म ₹379 करोड़ कमा गई।

Find out more: