पाकिस्तान से बातचीत के ऑफर को भारत ने पिछले 12 दिनों में दूसरी बार नकार दिया है| भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के हवाले से कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के विदेश सचिव की 19 अगस्त की चिट्ठी का जवाब दे दिया है| उन्होंने कहा, "अपनी चिट्ठी में विदेश सचिव ने पाकिस्तान को कहा है कि भारत सरकार इस मसले पर किसी नतीजे पर पहुंचनेवाला संवाद करना चाहती है|" विकास स्वरूप ने कहा कि विदेश सचिव ने पाकिस्तान से कह दिया है कि कश्मीर विषय पर आगे की वार्तालाप 1972 के शिमला समझौते, 1999 के लाहौर और 2004 के संयुक्त घोषणापत्र के आधार पर ही होगी|

विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा है कि, "जहां तक चरमपंथ का ताल्लुक़ है, भारत ही नहीं बल्कि पूरा क्षेत्र जानता है कि पाकिस्तान ही इसे बढ़ावा देता है|" विदेश मंत्रालय के अनुसार एस जयशंकर ने ये भी कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच आज सबसे अहम विषय ये है कि पाकिस्तान सीमा पार से चरमपंथ और हिंसा को बढ़ावा देना बंद करे| जाहिर सी बात है कि पाकिस्तान के विदेश सचिव ऐजाज़ अहमद चौधरी ने 19 अगस्त को भारतीय विदेश सचिव को चिट्ठि लिखी थी और कश्मीर सिलसिले पर बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया था|

उस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि दोनों देशों के बीच वार्तालाप संयुक्त राष्ट्र के प्रोविजन्स के तहत होनी चाहिए| दोनों देशों के सम्बन्ध भारत प्रशासित कश्मीर में हो रही हिंसा और तनाव के कारण से बिगड़ गए हैं| भारत ने कश्मीर के वर्तमान हालात के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया था| कश्मीर के हालात पर चर्चा के लिए राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करनेवाली हैं|

इससे पहले भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य का दो दिवसीय दौरा किया था| भारत को पाकिस्तान की तरफ़ से कश्मीर पर वार्तालाप करने का पहला निमंत्रण 15 अगस्त को भेजा गया था|