विदेश मंत्री जयशंकर रविवार से छह देशों के दौरे पर निकल रहे हैं जिसमें न्यूयॉर्क में UNSC 2028-29 की अस्थायी सीट के लिए भारत का औपचारिक अभियान शुरू होगा। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, यह यात्रा द्विपक्षीय संबंध मज़बूत करने और बहुपक्षीय मंचों पर भारत की उम्मीदवारी को धार देने के लिए है।

193 देशों की महासभा, पाँच स्थायी सदस्य जिनके पास वीटो, और दस अस्थायी सीटें जिनके लिए हर दो साल में ख़ूनी राजनयिक जंग — संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक सीट सिर्फ़ कुर्सी नहीं, दुनिया की सबसे ताक़तवर टेबल पर दो साल का निमंत्रण है। और इसी निमंत्रण को पक्का करने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से छह देशों के दौरे पर निकल रहे हैं।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जयशंकर की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के साथ-साथ UNSC 2028-29 की अस्थायी सीट के लिए भारत के औपचारिक चुनाव अभियान की शुरुआत है। मनीकंट्रोल ने इसे भारत के बहुपक्षीय राजनयिक अभियान का सबसे अहम चरण बताया है। न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय पहला बड़ा पड़ाव होगा, जहाँ जयशंकर संभवतः अफ़्रीकी, कैरिबियन और प्रशांत द्वीपीय देशों के राजनयिकों से सीधा संपर्क साधेंगे — वही देश जिनका वोट इस चुनाव में निर्णायक होता है।

लेकिन यहीं कहानी दिलचस्प होती है। UNSC की अस्थायी सीट का चुनाव UN महासभा में गुप्त मतदान से होता है — यानी कोई देश सामने मुस्कुराकर समर्थन का वादा करे और पीठ पीछे दूसरे को वोट दे, कोई रोक नहीं सकता। भारत इस खेल का पुराना खिलाड़ी है — 2020 में एशिया-प्रशांत स्लॉट से 184 वोट हासिल कर भारत ने UNSC की 2021-22 की सीट जीती थी। लेकिन 2028-29 के लिए लड़ाई उतनी आसान नहीं होगी।

एशिया-प्रशांत ग्रुप में सीटें सीमित हैं और प्रतिस्पर्धा कड़ी। चीन — जो P5 (स्थायी पाँच) का सदस्य है — हमेशा से भारत की UNSC महत्वाकांक्षाओं पर अघोषित ब्रेक लगाता रहा है। स्थायी सदस्यता की बात तो दूर, अस्थायी सीट के चुनाव में भी बीजिंग चुपचाप अपने प्रभाव क्षेत्र — अफ़्रीका, मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया — में काउंटर-लॉबिंग चलाता है। पाकिस्तान इस खेल में चीन का स्वाभाविक साथी बना रहता है — OIC (ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन) के 57 सदस्य देशों को एकजुट करने की कोशिश इस्लामाबाद की सबसे पुरानी UNSC रणनीति है।

पॉलिटिकल पल्स

राजनयिक गलियारों में चर्चा यह है कि जयशंकर का यह दौरा सिर्फ़ UNSC सीट के लिए नहीं, बल्कि 2025-26 में बदली हुई भू-राजनीतिक बिसात पर भारत की 'स्वीकार्यता' का लिटमस टेस्ट है। अमेरिका-चीन तनाव के बीच कई छोटे देश 'न इधर, न उधर' की स्थिति में हैं — और भारत को ठीक इसी 'मिडिल ग्राउंड' वाली छवि भुनानी है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि भारत ने अफ़्रीकी यूनियन के कई देशों से पिछले साल से ही 'सॉफ्ट कमिटमेंट' ली है, लेकिन UN में गुप्त मतदान में 'सॉफ्ट कमिटमेंट' का मतलब ज़ीरो भी हो सकता है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनयिक हलकों की अपुष्ट सूचनाओं पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

भारत की UNSC लॉबिंग असल में कैसे चलती है?

UNSC की अस्थायी सीट जीतने का फ़ॉर्मूला सीधा है — 193 में से कम से कम दो-तिहाई (128+) वोट चाहिए। भारत इसके लिए तीन स्तरों पर काम करता है। पहला — 'ग्रुप एंडोर्समेंट': एशिया-प्रशांत ग्रुप से सहमति, जिसमें अगर कोई प्रतिद्वंद्वी ही न हो तो चुनाव एकतरफ़ा हो जाता है। दूसरा — द्विपक्षीय 'वोट-फ़ॉर-वोट' सौदे, जहाँ भारत दूसरे देशों को किसी और मंच पर समर्थन के बदले UNSC वोट माँगता है। तीसरा — प्रधानमंत्री स्तर की सीधी फ़ोन कूटनीति, ख़ासकर चुनाव से ठीक पहले। जयशंकर का यह दौरा दूसरे और तीसरे स्तर का काम कर रहा है।

इस पूरी बिसात के पीछे की असली चाल को इंडिया हेराल्ड ने क़रीब से भाँपा है: जयशंकर का यह दौरा सिर्फ़ UNSC सीट नहीं, बल्कि 2028 तक भारत के 'ग्लोबल साउथ लीडर' ब्रांड की परीक्षा है। मोदी सरकार ने पिछले दो साल में G20 अध्यक्षता और अफ़्रीकी यूनियन को G20 में शामिल कराने जैसे क़दमों से विकासशील देशों में जो पूँजी बनाई है, उसका सबसे ठोस रिटर्न UNSC वोट में दिखना चाहिए — अगर नहीं दिखा, तो 'ग्लोबल साउथ की आवाज़' बयानबाज़ी भर रह जाएगी।

चीन-पाक गुट: असली रोड़ा कहाँ है?

चीन की काउंटर-स्ट्रैटेजी सूक्ष्म मगर प्रभावी है। बीजिंग सीधे भारत का विरोध नहीं करता — वह 'वैकल्पिक उम्मीदवार' खड़ा कराता है। अगर एशिया-प्रशांत ग्रुप से कोई और देश भी उम्मीदवारी दाख़िल करे, तो भारत को सीधे मुक़ाबले में जाना पड़ता है — और वहाँ चीन का अफ़्रीकी-मध्य एशियाई वोट बैंक सक्रिय हो जाता है। पाकिस्तान की भूमिका OIC के ज़रिए एक 'ब्लॉक वोट' जुटाने की रहती है — 57 देशों का यह ग्रुप अगर एकजुट हो जाए तो किसी भी उम्मीदवार को दो-तिहाई बहुमत से रोक सकता है।

लेकिन यहाँ एक अहम बात जो अक्सर नज़रअंदाज़ होती है: OIC कभी पूरी तरह एकजुट नहीं रहा। सऊदी अरब, UAE, इंडोनेशिया जैसे देश भारत के क़रीबी आर्थिक साझेदार हैं और इस्लामाबाद की हर बात नहीं मानते। जयशंकर के दौरे में ख़ाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क इसी दरार को चौड़ा करने की रणनीति का हिस्सा है।

आगे क्या देखना है?

अगले कुछ महीनों में तीन चीज़ें देखने लायक़ होंगी। पहला — क्या एशिया-प्रशांत ग्रुप से कोई प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार उभरता है; अगर नहीं, तो भारत का रास्ता काफ़ी आसान हो जाएगा। दूसरा — प्रधानमंत्री मोदी की आगामी अफ़्रीकी और कैरिबियन यात्राओं का शेड्यूल; ये UNSC लॉबिंग से सीधे जुड़ी होंगी। तीसरा — चीन की प्रतिक्रिया; अगर बीजिंग ने किसी 'फ़ेवर्ड कैंडिडेट' को मैदान में उतारा, तो जंग शुरू समझिए।

एक बात साफ़ है: भारत के लिए UNSC की अस्थायी सीट जीतना अब सिर्फ़ राजनयिक सम्मान का सवाल नहीं रहा — यह मोदी सरकार के पूरे 'विश्वगुरु' नैरेटिव की विश्वसनीयता का इम्तिहान है। और इम्तिहान में नकल नहीं चलती — असली दोस्त वोट के दिन पता चलते हैं।

आरोप यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से रिपोर्ट किए गए हैं और जब तक कोई न्यायालय निर्णय न दे, अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामले बिना पूर्वाग्रह रिपोर्ट किए गए हैं।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

More from India Herald

Trichy ROB Bollards Crumble Within Months — Is Tamil Nadu Building Roads or Laundering Public Money Through Concrete?PoliticsTrichy ROB Bollards Crumble Within Months — Is Tamil Nadu Building Roads or Laundering Public Money Through Concrete?Freshly installed bollards on a Trichy road over-bridge are already crumbling — and the pattern of premature infra decay across India raises…Abe's 'Iron Lady' Heir in Delhi, $42 Billion in Pledges — Is Takaichi Quietly Building the Anti-China Tech Wall Modi Needs?PoliticsAbe's 'Iron Lady' Heir in Delhi, $42 Billion in Pledges — Is Takaichi Quietly Building the Anti-China Tech Wall Modi Needs?Japan's first female PM arrives with stealth warships, semiconductor pledges, and a $42 billion investment target — but the real cargo is a …Trudeau Fumes, Albanese Embraces — Why Australia Just Broke the 'Five Eyes' Front Against ModiPoliticsTrudeau Fumes, Albanese Embraces — Why Australia Just Broke the 'Five Eyes' Front Against ModiAs Ottawa and Washington tighten the screws over alleged Indian covert ops abroad, Anthony Albanese rolls out Melbourne's red carpet for Mod…Nitish's 'Marine Drive' Cleared the View — But Who Cleared Out the People Who Built It?PoliticsNitish's 'Marine Drive' Cleared the View — But Who Cleared Out the People Who Built It?Hundreds of street vendors who fed Patna's showpiece riverfront for years now have no stalls, no rehab timeline, and no answers — while Biha…Karnataka's Mobile-Link Mandate for Voters — Is a 'Digital Clean-Up' Quietly Erasing the People It Claims to Protect?PoliticsKarnataka's Mobile-Link Mandate for Voters — Is a 'Digital Clean-Up' Quietly Erasing the People It Claims to Protect?The Election Commission's mandatory mobile-number linking for voter-roll revisions in Karnataka is being sold as a fraud-proof upgrade. But …

मुख्य बातें

  • जयशंकर रविवार से छह देशों के दौरे पर — न्यूयॉर्क में UNSC 2028-29 अस्थायी सीट का अभियान औपचारिक रूप से शुरू होगा।
  • UNSC अस्थायी सीट के लिए UN महासभा में 193 में से दो-तिहाई (128+) गुप्त वोट चाहिए — चीन चुपचाप काउंटर-लॉबिंग चलाता है।
  • भारत का 'ग्लोबल साउथ लीडर' ब्रांड दांव पर — G20 अध्यक्षता से बनी राजनयिक पूँजी का असली रिटर्न UNSC वोट में दिखना ज़रूरी।
  • OIC के 57 देश पाकिस्तान के इशारे पर एकजुट नहीं — सऊदी, UAE, इंडोनेशिया भारत के आर्थिक साझेदार हैं।

आँकड़ों में

  • भारत ने 2020 में 184 वोटों से UNSC 2021-22 की अस्थायी सीट जीती थी।
  • UNSC अस्थायी सीट चुनाव में 193 सदस्य देशों में से कम से कम 128 वोट (दो-तिहाई बहुमत) ज़रूरी।
  • OIC के 57 सदस्य देश — पाकिस्तान की सबसे पुरानी काउंटर-लॉबिंग रणनीति का आधार।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: विदेश मंत्री एस. जयशंकर — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
  • क्या: छह देशों का दौरा, जिसमें न्यूयॉर्क में UNSC 2028-29 अस्थायी सीट के लिए भारत का चुनाव अभियान शुरू होगा — मनीकंट्रोल के अनुसार।
  • कब: रविवार से दौरा शुरू — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
  • कहाँ: छह देश, जिनमें न्यूयॉर्क (UN मुख्यालय) प्रमुख पड़ाव — मनीकंट्रोल के अनुसार।
  • क्यों: UNSC की अस्थायी सीट 2028-29 के लिए भारत की उम्मीदवारी को औपचारिक समर्थन जुटाना और द्विपक्षीय संबंध मज़बूत करना — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
  • कैसे: राजनयिक यात्राओं, द्विपक्षीय बैठकों और UN मुख्यालय में सीधी लॉबिंग के ज़रिए — मनीकंट्रोल के अनुसार।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

UNSC 2028-29 अस्थायी सीट के लिए भारत का चुनाव कब होगा?

UNSC अस्थायी सदस्यों का चुनाव UN महासभा में सामान्यतः कार्यकाल शुरू होने से एक साल पहले होता है — 2028-29 सीट के लिए चुनाव 2027 में अपेक्षित है। जयशंकर का मौजूदा दौरा इसी अभियान की शुरुआत है।

UNSC अस्थायी सीट जीतने के लिए कितने वोट चाहिए?

UN महासभा के 193 सदस्य देशों में से कम से कम दो-तिहाई बहुमत यानी 128+ वोट गुप्त मतदान में हासिल करने होते हैं।

चीन भारत की UNSC उम्मीदवारी को कैसे रोकता है?

चीन सीधे विरोध करने के बजाय एशिया-प्रशांत ग्रुप से वैकल्पिक उम्मीदवार खड़ा कराने और अफ़्रीकी-मध्य एशियाई देशों में काउंटर-लॉबिंग चलाने की रणनीति अपनाता है।

More from India Herald

हिमाचल कैबिनेट विस्तार की आहट — क्या सुक्खू 'हॉली लॉज' गुट के पंख कतरने की तैयारी में हैं?Politicsहिमाचल कैबिनेट विस्तार की आहट — क्या सुक्खू 'हॉली लॉज' गुट के पंख कतरने की तैयारी में हैं?कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने हिमाचल कैबिनेट में बदलाव के संकेत दिए — लेकिन यह फेरबदल शासन सुधार है या सुक्खू सरकार के भीतर 'हॉली लॉज' गुट …हिमाचल में 14 मौतें, ₹16 करोड़ स्वाहा — 'कुदरत का कहर' या पहाड़ काटने वाले 'विकास' का खूनी बिल?Politicsहिमाचल में 14 मौतें, ₹16 करोड़ स्वाहा — 'कुदरत का कहर' या पहाड़ काटने वाले 'विकास' का खूनी बिल?हिमाचल में मॉनसून ने फिर 14 ज़िंदगियाँ लीलीं और ₹16 करोड़ का नुकसान किया — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ़ बारिश है, या उन सड़कों, स…खामेनेई के जनाज़े में जयशंकर नहीं, बिहार के राज्यपाल क्यों? — मोदी के इस 'कैलिब्रेटेड दांव' का असली हिसाबPoliticsखामेनेई के जनाज़े में जयशंकर नहीं, बिहार के राज्यपाल क्यों? — मोदी के इस 'कैलिब्रेटेड दांव' का असली हिसाबईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत ने विदेश मंत्री या रक्षा मंत्री को नहीं, बल्कि बिहार के राज्यपाल और ए…

Find out more: