भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद पाकिस्तान इससे बुरी तरह बौखला गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत की ओर से कश्मीर के संवैधानिक इतिहास में सोमवार को किए गए बदलाव को अमेरिका ने उनका आंतरिक मामला बताते हुए इसमें किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। दरअसल अभी तक पाकिस्तान कश्मीर के मामले में अमेरिका से मध्यस्थ की भूमिका निभाकर इस मामले को निपटाने के लिए कह रहा था। इस दिशा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की एक बार उनसे मीटिंग भी हुई थी मगर उस मीटिंग का कोई खास मतलब नहीं निकला। जिसके बाद बता दें कि पाकिस्तान में यूएन में भी जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया। हालांकि यहां भी उसे निराशा ही हाथ लगी है।

दरअसल यूएन में भारत को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक मास्टरस्ट्रोक का फायदा मिल रहा है, जो कि उन्होंने शिमला समझौते के तहत चला था। दरअसल यूएन में पाकिस्तान की उच्चायुक्त मलीहा लोधी ने यूएन से जम्मू कश्मीर के मसले में दखल देने की अपील की थी।

इस पर यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफेन जैरिक ने एक बयान में कहा कि “महासचिव ने 1972 में हुए शिमला समझौते का उल्लेख किया है जिसमें कहा गया है कि जम्मू कश्मीर मसले का हल द्विपक्षीय और शांतिपूर्ण तरीके से होगा।” यूएन ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि वह भारतीय कश्मीर में प्रतिबंध को लेकर चिंतित है।
यूएन ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की कार्रवाई मानवाधिकारों के लिए खतरनाक हो सकती है। इससे पहले अमेरिका के विदेश विभाग के दो सदस्यों ने भी एक बयान जारी कर पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर के मसले पर संयम बरतने को कहा था और उसकी सरजमीं पर चलने वाले आतंकी गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने की नसीहत दी थी।


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