उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि BJP में RSS-समर्थित नेताओं — नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस — को पार्टी हाई कमान जानबूझकर किनारे कर रही है। गडकरी को 2022 में BJP संसदीय बोर्ड से बाहर किया गया; अब उद्धव का दावा है कि फडणवीस भी इसी राह पर हैं।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस, RSS, BJP हाई कमान
  • क्या: उद्धव ने कहा कि RSS की पसंद के नेताओं को BJP में व्यवस्थित रूप से हाशिये पर धकेला जा रहा है — पहले गडकरी, अब फडणवीस
  • कब: जुलाई 2025, ताज़ा बयान
  • कहाँ: महाराष्ट्र — राष्ट्रीय गूँज
  • क्यों: उद्धव का मक़सद BJP के भीतर संघ बनाम दिल्ली दरबार की फॉल्ट-लाइन को भुनाना और महाराष्ट्र में अपनी प्रासंगिकता बहाल करना
  • कैसे: दो बड़े RSS-linked नेताओं — गडकरी और फडणवीस — के उदाहरण देकर एक पैटर्न की ओर इशारा किया, जिससे नागपुर-दिल्ली तनाव की बहस राष्ट्रीय हो गई

दो नाम, एक पैटर्न, और एक सवाल जो BJP को भीतर से चुभता है — लेकिन बाहर कोई पूछने की हिम्मत नहीं करता।

  • नितिन गडकरी — संघ की नर्सरी के सबसे चमकदार छात्र, जिन्हें 2022 में BJP संसदीय बोर्ड से बाहर किया गया। गडकरी केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री बने रहे, लेकिन पार्टी के सर्वोच्च निर्णायक मंच से उनका हटाया जाना राजनीतिक हलकों में एक स्पष्ट संकेत माना गया।
  • देवेंद्र फडणवीस — महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, जिनकी कुर्सी पर बैठे-बैठे भी पैरों तले ज़मीन कभी पक्की नहीं दिखती।

और अब उद्धव ठाकरे ने इन दोनों को एक ही वाक्य में जोड़कर वो बात कह दी है जो नागपुर के गलियारों में फुसफुसाहट में कही जाती थी, पर माइक पर कभी नहीं आई।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सीधे कहा — "पहले गडकरी, अब फडणवीस" — और आरोप लगाया कि BJP में RSS-समर्थित नेताओं को पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व व्यवस्थित तरीक़े से किनारे कर रहा है। यह महज़ एक विपक्षी तंज नहीं — यह उस फॉल्ट-लाइन पर उंगली है जिसे BJP "परिवार का अंदरूनी मामला" कहकर टालती रही है।

नागपुर बनाम दिल्ली: वो दरार जो हर कोई जानता है, कोई नहीं मानता

पृष्ठभूमि स्पष्ट है। 2022 में जब BJP ने अपने संसदीय बोर्ड का पुनर्गठन किया, तो नितिन गडकरी को इस सर्वोच्च निर्णायक निकाय से बाहर किया गया। गडकरी सड़क-परिवहन मंत्री के रूप में BJP का सबसे "काम करके दिखाने वाला" चेहरा माने जाते रहे हैं और कैबिनेट में बने रहे, लेकिन पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक ढाँचे से उनका हटना राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एक बड़ा संकेत था। हलकों में यह बात आम रही कि गडकरी की स्वतंत्र छवि और नागपुर-संघ कनेक्शन दिल्ली के केंद्रीकृत नियंत्रण मॉडल में फ़िट नहीं बैठते।

अब फडणवीस की स्थिति देखिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन गठबंधन सरकार में एकनाथ शिंदे और अजित पवार के बीच सैंडविच। हर बड़ा फ़ैसला दिल्ली की स्वीकृति का मोहताज। हिंदुस्तान टाइम्स के हवाले से उद्धव ठाकरे का कहना है कि फडणवीस को भी वही रास्ता दिखाया जा रहा है जो गडकरी को दिखाया गया — बस तरीक़ा अलग है। गडकरी को संगठनात्मक शक्ति से वंचित किया, फडणवीस को धीरे-धीरे, प्रशासनिक स्वायत्तता छीनकर।

BJP का पक्ष: 'बेबुनियाद आरोप'

BJP ने ऐसे आरोपों को बार-बार ख़ारिज किया है। पार्टी का आधिकारिक रुख रहा है कि संगठनात्मक फेरबदल "सामान्य प्रक्रिया" हैं और किसी भी नेता को "किनारे" नहीं किया गया है। BJP प्रवक्ताओं ने अतीत में इसी तरह के आरोपों को "विपक्ष की हताशा" और "भ्रम फैलाने का प्रयास" बताया है। पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा जाता है कि गडकरी अभी भी कैबिनेट में एक वरिष्ठ मंत्री हैं और फडणवीस को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री पद देना ही उनपर भरोसे का सबूत है। हालाँकि, इंडिया हेराल्ड को इस विशिष्ट बयान पर BJP की ओर से कोई ताज़ा आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।

उद्धव का गणित: तंज नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक

यहाँ ठहरकर सोचने की ज़रूरत है — उद्धव ठाकरे को BJP के भीतरी मामलों से सरोकार क्यों? वो तो विपक्ष में हैं, महाराष्ट्र में अपनी ही पार्टी की ज़मीन वापस बनाने की जद्दोजहद में हैं। तो फिर "गडकरी-फडणवीस" का ज़िक्र क्यों?

जवाब चुनावी गणित में है। महाराष्ट्र का राजनीतिक मानचित्र मराठा-ब्राह्मण समीकरण पर टिका है। फडणवीस ब्राह्मण हैं, गडकरी भी। दोनों नागपुर (विदर्भ) की ज़मीन से आते हैं — वही नागपुर जो RSS का मुख्यालय है। उद्धव ठाकरे जब कहते हैं कि "संघ के अपनों" को BJP हटा रही है, तो वो असल में महाराष्ट्र के उस तबक़े — ख़ासकर ब्राह्मण मतदाता और संघ-सहानुभूति रखने वाले वर्ग — से बात कर रहे हैं जो BJP का कोर वोटबैंक है।

सियासी गलियारों में यह अटकल भी है कि उद्धव का यह दांव सिर्फ़ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं। जब वो "नागपुर बनाम दिल्ली" की भाषा बोलते हैं, तो पूरे हिंदी बेल्ट में — UP से लेकर MP तक — वो उस RSS कैडर तक संदेश पहुँचाने की कोशिश करते दिखते हैं जो कई राज्यों में पार्टी के "केंद्रीकृत" फ़ैसलों से कथित रूप से असहज रहा है। (यह राजनीतिक अटकलों और गलियारा-चर्चा पर आधारित मूल्यांकन है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

पॉलिटिकल पल्स: पार्टी के भीतर दो धाराएँ

BJP के भीतर की बात करें तो दो अलग-अलग धाराएँ रही हैं — एक जो मानती है कि पार्टी का केंद्रीकरण ज़रूरी है क्योंकि इसी से चुनाव जीते जाते हैं, और दूसरी जो कहती है कि "ज़मीनी नेता" को कमज़ोर करना आत्मघाती है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में उद्धव के बयान का सबसे पैना हिस्सा यही है — उन्होंने "RSS-backed" शब्द इस्तेमाल किया, जो सीधे संघ परिवार के अंदरूनी ढाँचे पर सवाल उठाता है।

कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि गडकरी जैसे "संगठन-निर्मित" नेता का संसदीय बोर्ड से बाहर होना एक "संकेत" था। लेकिन BJP समर्थक इसे "सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया" बताते हैं और इंगित करते हैं कि गडकरी कैबिनेट में बने रहे — जो उन पर भरोसे का प्रमाण है। सच शायद दोनों पक्षों के बीच कहीं है।

असली सवाल: क्या BJP का केंद्रीकरण मॉडल टिकाऊ है?

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि उद्धव ठाकरे ने जो किया वो सिर्फ़ "तंज" की श्रेणी में नहीं आता — यह एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है जो BJP की सबसे संवेदनशील नस पर है। गडकरी और फडणवीस को एक ही वाक्य में जोड़ना एक "पैटर्न" गढ़ता है — और राजनीति में एक बार पैटर्न बन जाए तो उसे तोड़ना बयानों से नहीं, कामों से होता है।

BJP के लिए चुनौती यह नहीं कि उद्धव क्या कह रहे हैं — चुनौती यह है कि क्या पार्टी के भीतर और संघ परिवार में भी कुछ लोग ऐसा सोचते हैं? जब विपक्षी नेता आपकी पार्टी के अंदर की कथित भाषा बोलने लगे, तो यह कम से कम एक सवाल तो खड़ा करता ही है।

आने वाले महीनों में दो बातें देखने लायक़ होंगी:

  • पहली: क्या RSS का नेतृत्व इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया देता है — या फिर अपनी पारंपरिक "चुप्पी" बनाए रखता है (जो अपने-आप में एक संदेश होगी)।
  • दूसरी: क्या फडणवीस को आने वाले समय में कोई बड़ा राजनीतिक "प्रमोशन" मिलता है जो इस "किनारे करने" की कथा को काट सके — जैसा कि अतीत में BJP ने कई बार किया है, जब किसी नेता के "बाहर" होने की अटकलें चरम पर पहुँचती हैं तो उन्हें अचानक ऊँचा पद देकर कहानी पलट दी जाती है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है — जिस पार्टी की ताक़त संघ के संगठनात्मक ढाँचे से आती है, वो पार्टी कब तक संघ के अपने लोगों को "अपनी शर्तों" पर रख सकती है? उद्धव ठाकरे ने यह सवाल पूछा ज़रूर है विपक्षी मंच से — लेकिन इसका जवाब भाजपा को अपने भीतर खोजना होगा।

आँकड़ों में

  • नितिन गडकरी को 2022 में BJP संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन में बाहर किया गया; वे केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री बने रहे
  • उद्धव ठाकरे ने गडकरी और फडणवीस दोनों को 'RSS-backed' बताकर एक 'पैटर्न' की ओर इशारा किया — हिंदुस्तान टाइम्स

मुख्य बातें

  • उद्धव ठाकरे ने 'पहले गडकरी, अब फडणवीस' कहकर BJP में RSS-समर्थित नेताओं के किनारे किए जाने का एक पैटर्न गढ़ा — हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार
  • गडकरी को 2022 में BJP संसदीय बोर्ड से हटाया गया था (वे केंद्रीय मंत्री बने रहे); उद्धव का दावा है कि फडणवीस को भी 'धीरे-धीरे' किनारे किया जा रहा है
  • BJP ने ऐसे आरोपों को बार-बार 'बेबुनियाद' और 'विपक्ष की हताशा' बताकर ख़ारिज किया है
  • उद्धव का असली निशाना महाराष्ट्र का ब्राह्मण वोटबैंक और संघ-सहानुभूति रखने वाला वर्ग प्रतीत होता है — यह तंज से ज़्यादा चुनावी रणनीति दिखती है
  • आने वाले महीनों में RSS की चुप्पी या प्रतिक्रिया और फडणवीस को कोई बड़ा 'प्रमोशन' — दोनों watchpoints होंगे

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उद्धव ठाकरे ने 'पहले गडकरी, अब फडणवीस' क्यों कहा?

उद्धव ने आरोप लगाया कि BJP हाई कमान RSS-समर्थित नेताओं को व्यवस्थित रूप से किनारे कर रही है। गडकरी को 2022 में BJP संसदीय बोर्ड से बाहर किया गया (वे कैबिनेट मंत्री बने रहे), और उद्धव का दावा है कि अब फडणवीस को भी इसी तरह हाशिये पर धकेला जा रहा है — हिंदुस्तान टाइम्स।

क्या BJP में RSS और दिल्ली हाई कमान के बीच सच में तनाव है?

दोनों पक्ष इसे नकारते हैं। BJP ने ऐसे आरोपों को बार-बार 'बेबुनियाद' बताया है। हालाँकि, गडकरी का संसदीय बोर्ड से बाहर होना और फडणवीस की गठबंधन सरकार में कथित सीमित स्वायत्तता — ये घटनाक्रम कुछ राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नागपुर-दिल्ली तनाव के संकेत माने जाते हैं।

उद्धव ठाकरे को इस बयान से क्या राजनीतिक फ़ायदा हो सकता है?

महाराष्ट्र में ब्राह्मण वोटबैंक और संघ-सहानुभूति रखने वाला वर्ग BJP का कोर है। उद्धव इस फॉल्ट-लाइन को उभारकर इसी वर्ग में असंतोष पैदा करने और अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बहाल करने का प्रयास कर रहे प्रतीत होते हैं।

क्या नितिन गडकरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाया गया था?

नहीं। नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क-परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बने रहे। उन्हें 2022 में BJP संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन के दौरान इस शीर्ष संगठनात्मक निकाय से बाहर किया गया — जिसे राजनीतिक हलकों में एक बड़ा संकेत माना गया।

क्या देवेंद्र फडणवीस को BJP से हटाया जा सकता है?

अभी ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं है। BJP ने इन अटकलों को ख़ारिज किया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में फडणवीस को कोई बड़ा 'प्रमोशन' मिलता है या नहीं — यह तय करेगा कि 'किनारे करने' की कथा कितनी टिकती है।

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