दिल्ली में BRPL ने 30 जून 2026 का पावर कट शेड्यूल जारी किया है, जिसमें दक्षिणी और पश्चिमी दिल्ली के कई इलाकों में दो से चार घंटे बिजली गुल रहेगी। बिजली की माँग 271 GW के रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन सप्लाई-डिमांड का अंतर और ट्रांसमिशन इंफ्रा की अड़चन असली समस्या है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) — दिल्ली की प्रमुख बिजली वितरण कंपनी
  • क्या: 30 जून 2026 के लिए शेड्यूल्ड पावर कट की सूची जारी, दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के दर्जनों इलाके प्रभावित
  • कब: 30 जून 2026 — दिल्ली में भीषण गर्मी के चरम पर
  • कहाँ: दिल्ली — BRPL के सप्लाई एरिया में मुख्य रूप से दक्षिणी और पश्चिमी ज़ोन
  • क्यों: बिजली की माँग ऑल-टाइम हाई 271 GW पर, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और सब-स्टेशनों पर ओवरलोड, रखरखाव कार्य
  • कैसे: BRPL ने ऑनलाइन शेड्यूल प्रकाशित कर इलाकेवार कटौती का समय बताया; ट्रांसफ़ॉर्मर ओवरलोड और मेंटेनेंस शटडाउन के कारण रोटेशनल कट लागू

47 डिग्री की लू में दिल्ली का एक मिडिल-क्लास परिवार इन्वर्टर की बीप गिनता है — एक बीप, दो बीप, तीन… और फिर अँधेरा। यह दृश्य किसी एक गली का नहीं, 30 जून 2026 को राजधानी के आधे दर्जन से ज़्यादा इलाकों का है। BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) ने अपनी वेबसाइट पर 30 जून का पावर कट शेड्यूल जारी कर दिया है, जिसमें दक्षिणी और पश्चिमी दिल्ली के कई सेक्टरों में दो से चार घंटे की कटौती दर्ज है। वनइंडिया हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह शेड्यूल 'प्लांड मेंटेनेंस' के नाम पर जारी हुआ है — लेकिन इसकी टाइमिंग और स्केल दोनों सवाल खड़े करते हैं।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली में बिजली की माँग इस सीज़न में 271 GW के ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड को छू चुकी है। यह आँकड़ा अपने आप में एक उपलब्धि हो सकती थी — इतनी बिजली ख़रीदी जा रही है, इतनी डिमांड पूरी हो रही है। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि ट्रांसफ़ॉर्मर फट रहे हैं, सब-स्टेशनों पर ओवरलोड है, और 'शेड्यूल्ड कट' का मतलब है कि सिस्टम ख़ुद को बचाने के लिए लोगों को अँधेरे में डाल रहा है।

कहाँ-कहाँ कटेगी बिजली?

BRPL के शेड्यूल के मुताबिक, 30 जून को दक्षिणी दिल्ली के द्वारका, जनकपुरी, उत्तम नगर, नजफ़गढ़ जैसे इलाकों और पश्चिमी दिल्ली के कई ब्लॉक्स में कटौती होगी। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि BYPL (BSES यमुना पावर लिमिटेड) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्रों में भी 'अनशेड्यूल्ड' कट की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं — हालाँकि इन कंपनियों ने अभी तक कोई अलग शेड्यूल सार्वजनिक नहीं किया है। यानी जो कट 'प्लांड' है, वह BRPL बता रहा है; जो 'अनप्लांड' है, उसकी ज़िम्मेदारी कोई नहीं ले रहा।

ज़िम्मेदारी का पासिंग गेम

दिल्ली की बिजली की सियासत तीन खिलाड़ियों के बीच फँसी है — राज्य सरकार, केंद्र सरकार, और निजी डिस्कॉम (BRPL, BYPL, टाटा पावर)। जब कट होता है, तो डिस्कॉम कहती हैं — 'जेनको (बिजली उत्पादन कंपनियाँ) से सप्लाई कम आ रही है।' जेनको कहती हैं — 'कोयले की कमी है।' केंद्र कहता है — 'राज्य ने समय पर पावर परचेज़ एग्रीमेंट नहीं किए।' और राज्य सरकार कहती है — 'हम तो फ्री बिजली दे रहे हैं, डिस्कॉम की लापरवाही है।' इस चक्र में उपभोक्ता हर बार ठगा जाता है।

विपक्षी भाजपा लगातार आम आदमी पार्टी (AAP) की 200 यूनिट तक मुफ़्त बिजली योजना पर निशाना साध रही है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि मुफ़्त बिजली की सब्सिडी का बोझ डिस्कॉम की वित्तीय सेहत को कमज़ोर कर रहा है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड में निवेश ही नहीं हो पा रहा। दूसरी तरफ़ AAP का पलटवार है कि दिल्ली में प्रति व्यक्ति बिजली उपलब्धता देश में सबसे अधिक है, और कटौती पूरी तरह डिस्कॉम की 'प्रॉफ़िट-फ़र्स्ट' मानसिकता का नतीजा है।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि दिल्ली विधानसभा चुनावों की नज़दीकी के चलते बिजली कटौती का मुद्दा 'ऑर्केस्ट्रेटेड' भी हो सकता है — क्या कोई पक्ष जानबूझकर कटौती को बढ़ने दे रहा है ताकि दूसरे पक्ष पर दोष मढ़ा जा सके? ट्रेड हलकों में चर्चा है कि डिस्कॉम कंपनियों ने इस गर्मी में मेंटेनेंस शटडाउन की टाइमिंग ऐसे चुनी है कि पीक डिमांड के दिनों में ही कट पड़ें — ताकि टैरिफ़ बढ़ोतरी की माँग के लिए 'ज़मीन तैयार' हो सके। यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं — लेकिन जनता के बीच यह सवाल ज़ोर पकड़ रहा है: अगर बिजली ख़रीदी जा रही है, तो ग़ायब कहाँ हो रही है?

असली बीमारी: इंफ्रा जो शहर से दस साल पीछे है

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि असली समस्या न सिर्फ़ सप्लाई की है, न सिर्फ़ सब्सिडी की — बल्कि उस ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर की है जो दिल्ली की बढ़ती आबादी और एयर-कंडीशनर क्रांति से कम-से-कम एक दशक पीछे चल रहा है। दिल्ली में पिछले पाँच वर्षों में AC की बिक्री लगभग दोगुनी हो चुकी है, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार। लेकिन उसी अनुपात में ट्रांसफ़ॉर्मर, सब-स्टेशन और अंडरग्राउंड केबलिंग का विस्तार नहीं हुआ। नतीजा — 271 GW की डिमांड 'पूरी' होने का दावा कागज़ पर सही हो सकता है, लेकिन 'लास्ट माइल' पर बिजली उपभोक्ता तक पहुँचने से पहले ही सिस्टम घुटने टेक देता है।

एक और आँकड़ा जो परेशान करता है: दिल्ली में ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) लॉस — यानी बिजली जो रास्ते में ही 'गुम' हो जाती है — अभी भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर बना हुआ है, मीडिया और ऊर्जा क्षेत्र की रिपोर्ट्स के मुताबिक। इसमें चोरी, पुराने ट्रांसफ़ॉर्मर, और लीकेज सब शामिल हैं।

1 जुलाई के बाद क्या बिगड़ेगा?

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में मानसून की एंट्री अभी अनिश्चित है और अगले सप्ताह भी लू की स्थिति बने रहने की संभावना है। इसका मतलब यह है कि 1 जुलाई के बाद डिमांड और बढ़ सकती है। अगर मानसून लेट हुआ, तो BRPL, BYPL और टाटा पावर — तीनों के शेड्यूल्ड कट और लंबे हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह समीकरण किस ओर मुड़ेगा — इंडिया हेराल्ड का सटीक पॉलिटिकल रीड यही है कि बिजली कटौती अब सिर्फ़ 'तकनीकी समस्या' नहीं रहेगी, यह दिल्ली के अगले विधानसभा चुनाव का पहला गरमा-गरम मुद्दा बन चुकी है।

जिस शहर को देश की 'पावर कैपिटल' कहा जाता है, उसका इन्वर्टर बीप कर रहा है। सवाल अब सिर्फ़ यह नहीं कि बिजली कब आएगी — सवाल यह है कि जब चुनावी बिजली गिरेगी, तो करंट किसे लगेगा?

आँकड़ों में

  • दिल्ली बिजली माँग ऑल-टाइम हाई: 271 GW (सरकारी आँकड़े)
  • BRPL शेड्यूल: 30 जून 2026 को दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली में 2-4 घंटे पावर कट
  • दिल्ली में AC बिक्री पिछले पाँच वर्षों में लगभग दोगुनी (मीडिया रिपोर्ट्स)

मुख्य बातें

  • BRPL ने 30 जून 2026 का पावर कट शेड्यूल जारी किया — दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के दर्जनों इलाकों में 2-4 घंटे बिजली गुल रहेगी (वनइंडिया हिंदी)
  • दिल्ली में बिजली की माँग 271 GW के ऑल-टाइम हाई पर, लेकिन ट्रांसमिशन इंफ्रा शहर की ज़रूरत से एक दशक पीछे — सप्लाई खरीदी जा रही है, 'लास्ट माइल' पर पहुँच नहीं रही
  • AAP की 200 यूनिट फ्री बिजली योजना पर भाजपा का हमला — भाजपा का तर्क: सब्सिडी बोझ से इंफ्रा अपग्रेड रुका; AAP का पलटवार: डिस्कॉम की 'प्रॉफ़िट-फ़र्स्ट' मानसिकता ज़िम्मेदार
  • T&D लॉस अभी भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर, AC बिक्री पाँच वर्षों में दोगुनी — माँग-आपूर्ति का गणित बदला, इंफ्रा नहीं
  • IMD के अनुसार मानसून अनिश्चित — 1 जुलाई बाद डिमांड और बढ़ सकती है, शेड्यूल्ड कट लंबे हो सकते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिल्ली में 30 जून 2026 को कहाँ-कहाँ बिजली कटेगी?

BRPL के शेड्यूल के अनुसार, 30 जून को दक्षिणी दिल्ली के द्वारका, जनकपुरी, उत्तम नगर, नजफ़गढ़ और पश्चिमी दिल्ली के कई ब्लॉक्स में 2 से 4 घंटे बिजली कटौती होगी।

दिल्ली में बिजली कटौती क्यों हो रही है?

271 GW की रिकॉर्ड माँग, ट्रांसफ़ॉर्मरों पर ओवरलोड, सब-स्टेशनों का पुराना इंफ्रा, और मेंटेनेंस शटडाउन — ये प्रमुख कारण हैं। सप्लाई खरीदी जा रही है लेकिन 'लास्ट माइल' डिलीवरी में सिस्टम फेल हो रहा है।

दिल्ली में फ्री बिजली योजना का बिजली कटौती से क्या संबंध है?

भाजपा का आरोप है कि AAP की 200 यूनिट फ्री बिजली सब्सिडी से डिस्कॉम की वित्तीय सेहत कमज़ोर हुई है और इंफ्रा निवेश रुका है। AAP इसे खारिज करते हुए डिस्कॉम की 'प्रॉफ़िट-फ़र्स्ट' नीति को ज़िम्मेदार ठहराती है।

1 जुलाई 2026 के बाद दिल्ली में बिजली की स्थिति कैसी रहेगी?

IMD के अनुसार मानसून अनिश्चित है और लू जारी रह सकती है। अगर मानसून लेट हुआ तो डिमांड और बढ़ेगी, जिससे शेड्यूल्ड और अनशेड्यूल्ड दोनों कट बढ़ सकते हैं।

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