अमेरिकी सांसद रिप. अन्ना पॉलिना लूना ने कांग्रेसनल हियरिंग में CIA के MKUltra प्रोजेक्ट के दस्तावेज़ पेश किए, जिसमें $375,000 के बजट से नागरिकों पर माइंड-कंट्रोल प्रयोग और उनकी मौतों का ख़ुलासा हुआ। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, लूना ने कहा — 'CIA ने अमेरिकियों को मारा'।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: अमेरिकी सांसद (रिपब्लिकन) अन्ना पॉलिना लूना (Rep. Anna Paulina Luna) और CIA — अमेरिका की सबसे शक्तिशाली खुफिया एजेंसी।
- क्या: लूना ने कांग्रेसनल हियरिंग में CIA के MKUltra माइंड-कंट्रोल प्रोजेक्ट के दस्तावेज़ सार्वजनिक किए, जिनमें $375,000 के बजट से नागरिकों पर LSD और अन्य ड्रग्स के प्रयोग और उनकी मौतों का ब्योरा है।
- कब: 2025-2026 की कांग्रेसनल हियरिंग में — मूल MKUltra प्रोजेक्ट 1953 से 1973 तक चला था।
- कहाँ: अमेरिकी संसद (US Congress), वॉशिंगटन D.C. — मूल प्रयोग अमेरिका और कनाडा की विभिन्न प्रयोगशालाओं, अस्पतालों और जेलों में हुए।
- क्यों: शीत युद्ध के दौर में सोवियत संघ के 'ब्रेनवॉशिंग' कार्यक्रमों का जवाब देने के लिए CIA ने बिना सहमति के नागरिकों पर माइंड-कंट्रोल प्रयोग शुरू किए थे।
- कैसे: CIA ने MKUltra के तहत $375,000 का बजट आवंटित कर LSD, मेस्कलीन और अन्य हैलुसिनोजेनिक ड्रग्स अनजान नागरिकों को दिए, उन पर मनोवैज्ञानिक यातना के प्रयोग किए, और बाद में अधिकांश दस्तावेज़ नष्ट करवा दिए — अब रिप. लूना ने बचे हुए दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया।
कल्पना कीजिए — आप एक सामान्य अमेरिकी नागरिक हैं। आप अस्पताल गए एक मामूली इलाज के लिए, और बिना आपकी जानकारी या सहमति के आपके शरीर में LSD इंजेक्ट कर दिया गया। आपका दिमाग़ तोड़ने की कोशिश की गई — 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के नाम पर। कुछ लोग इस प्रयोग से बच गए, कुछ पागल हो गए, और कुछ ने जान दे दी। यह किसी हॉलीवुड थ्रिलर की स्क्रिप्ट नहीं — यह CIA का असली प्रोजेक्ट था, जिसका नाम था MKUltra। और दशकों तक इसे 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' कहकर ख़ारिज किया जाता रहा।
अब अमेरिकी सांसद अन्ना पॉलिना लूना (Rep. Anna Paulina Luna) ने एक विस्फोटक कांग्रेसनल हियरिंग में वह दस्तावेज़ सामने रखे हैं, जो इस ख़ौफ़नाक सच को 'कॉन्सपिरेसी' से 'आधिकारिक रिकॉर्ड' में बदल रहे हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लूना ने सीधे शब्दों में कहा — "CIA ने अमेरिकियों को मारा।"
MKUltra — वह प्रोजेक्ट जिसे CIA ने ख़ुद दफ़नाने की कोशिश की
MKUltra कोई रातोंरात बनी योजना नहीं थी। 1953 में, जब शीत युद्ध अपने चरम पर था और अमेरिका को डर था कि सोवियत संघ 'ब्रेनवॉशिंग' तकनीक विकसित कर रहा है, CIA ने अपना जवाबी हथियार तैयार किया — प्रोजेक्ट MKUltra। मक़सद था 'माइंड-कंट्रोल' की तकनीक खोजना — ऐसी विधि जिससे किसी इंसान के दिमाग़ पर पूरा नियंत्रण किया जा सके। ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 1953 से 1973 तक, यानी लगभग दो दशकों तक चला।
इसके तहत 150 से ज़्यादा सब-प्रोजेक्ट्स संचालित किए गए। अमेरिका और कनाडा की यूनिवर्सिटीज़, अस्पतालों, जेलों और गुप्त प्रयोगशालाओं में आम लोगों को — बिना उनकी सहमति के — LSD, मेस्कलीन और दूसरी हैलुसिनोजेनिक ड्रग्स दी गईं। कुछ मामलों में लोगों को हफ़्तों तक बिजली के झटके दिए गए, सेंसरी डेप्रिवेशन (इंद्रियों से पूरी तरह काट देना) में रखा गया, और हिप्नोसिस के प्रयोग किए गए।
1973 में, जब वॉटरगेट कांड के बाद सरकारी एजेंसियों पर जाँच का दबाव बढ़ा, तत्कालीन CIA निदेशक रिचर्ड हेल्म्स ने MKUltra से जुड़े अधिकांश दस्तावेज़ नष्ट करवा दिए। लेकिन कुछ फ़ाइलें बच गईं — ग़लत जगह दर्ज होने की वजह से। और वही फ़ाइलें आज दशकों बाद अमेरिकी संसद की हियरिंग में धमाका कर रही हैं।
$375,000 का 'मौत का बजट' — Rep. लूना ने क्या-क्या सामने रखा?
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, रिप. अन्ना पॉलिना लूना ने हियरिंग में विशेष रूप से एक दस्तावेज़ का हवाला दिया जिसमें MKUltra के एक सब-प्रोजेक्ट के लिए $375,000 का बजट आवंटित किया गया था। यह रक़म 1950-60 के दशक की है — आज के मूल्य में यह करोड़ों डॉलर के बराबर होगी।
लूना ने बताया कि इस पैसे से अमेरिकी नागरिकों पर माइंड-कंट्रोल के प्रयोग किए गए, जिनमें कई लोगों की मौत हुई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह कोई 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' नहीं है — ये दस्तावेज़ CIA के अपने रिकॉर्ड हैं।
इस हियरिंग का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि लूना ने सार्वजनिक मंच से — अमेरिकी संसद के फ़र्श से — कहा कि CIA ने जानबूझकर अपने ही देश के नागरिकों को नुक़सान पहुँचाया और उनमें से कुछ को मौत के घाट उतार दिया। यह वाक्य — "CIA killed Americans" — किसी ट्विटर ट्रोल का नहीं, एक निर्वाचित सांसद का है, अमेरिकी कांग्रेस के रिकॉर्ड पर।
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कॉन्सपिरेसी थ्योरी जो आधिकारिक रिकॉर्ड बन गई
MKUltra की कहानी में सबसे अहम सबक़ यही है — कि दशकों तक जिसे 'पागलपन' और 'षड्यंत्र सिद्धांत' कहकर ख़ारिज किया गया, वह एक-एक कर सच साबित हो रहा है। 1975 में अमेरिकी सीनेट की चर्च कमेटी ने पहली बार MKUltra की पुष्टि की थी। उसके बाद 1977 में सीनेट की सुनवाई में और ब्योरे सामने आए। लेकिन हर बार एक बड़ा हिस्सा 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के नाम पर गोपनीय रखा गया।
अब, दशकों बाद, रिप. लूना जैसे सांसद उन बचे हुए दस्तावेज़ों को ज़बरदस्ती सार्वजनिक करवा रहे हैं। और जो तस्वीर उभर रही है, वह किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है — एक सरकारी एजेंसी ने अपने ही नागरिकों को प्रयोगशाला का चूहा बनाया, और जब पकड़े जाने का डर हुआ तो सबूत जला दिए।
पॉलिटिकल पल्स — परदे के पीछे की असली गणित
यह सवाल पूछना ज़रूरी है कि रिप. लूना यह हियरिंग अभी क्यों ला रही हैं? अमेरिकी राजनीति के जानकारों के बीच चर्चा है कि ट्रम्प समर्थक रिपब्लिकन गुट 'डीप स्टेट' (स्थायी नौकरशाही और खुफ़िया एजेंसियों) को निशाना बनाने की एक बड़ी रणनीति चला रहा है। MKUltra जैसे ऐतिहासिक कांडों को उजागर करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है — मक़सद है यह साबित करना कि अमेरिकी खुफ़िया एजेंसियाँ जवाबदेही से परे काम करती रही हैं, और उन पर लगाम ज़रूरी है।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि लूना की हियरिंग को केवल ऐतिहासिक खुलासे के तौर पर देखना भोलापन होगा। यह 2026 के अमेरिकी राजनीतिक माहौल में — जहाँ FBI, CIA और NSA पर दोनों पार्टियों के बीच विश्वास का भारी संकट है — एक सुनियोजित राजनीतिक चाल है। रिपब्लिकन इन हियरिंग्स को 'सरकारी पारदर्शिता' का मुद्दा बनाकर पेश कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रैट्स इसे 'ध्यान भटकाने की रणनीति' बता रहे हैं।
(यह इंडस्ट्री और राजनीतिक गलियारों की चर्चा पर आधारित विश्लेषण है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
भारत के लिए सबक़ — लोकतंत्र और खुफ़िया एजेंसियों की जवाबदेही
भारतीय पाठक इसे दूर की कहानी समझकर स्क्रॉल करने की ग़लती न करें। MKUltra का सबक़ सार्वभौमिक है — जब खुफ़िया एजेंसियों पर संसदीय निगरानी कमज़ोर होती है, तो सत्ता का दुरुपयोग अपरिहार्य हो जाता है। भारत में RAW और IB जैसी एजेंसियाँ किसी विशिष्ट संसदीय समिति को रिपोर्ट नहीं करतीं — यह बहस वर्षों से चल रही है। अमेरिका में कम-से-कम चर्च कमेटी जैसे तंत्र ने दशकों बाद ही सही, सच सामने लाया। भारत में ऐसा कोई तंत्र होने पर भी उसकी प्रभावशीलता एक खुला सवाल है।
फ्रैंक चर्च से लेकर अन्ना पॉलिना लूना तक — अमेरिकी लोकतंत्र की ताक़त यह रही है कि वहाँ के निर्वाचित प्रतिनिधि सबसे शक्तिशाली एजेंसी के ख़िलाफ़ भी सवाल उठा सकते हैं। MKUltra की फ़ाइलें जलाई गईं, लेकिन सच पूरी तरह नहीं जलता — कहीं-न-कहीं एक कॉपी बच जाती है, कोई गवाह बोल उठता है, और दशकों बाद सच संसद के फ़र्श पर पहुँच ही जाता है।
आगे क्या? — देखने लायक़ बातें
रिप. लूना ने संकेत दिए हैं कि MKUltra केवल शुरुआत है — आने वाले हफ़्तों में CIA के अन्य वर्गीकृत (classified) प्रोजेक्ट्स पर भी हियरिंग हो सकती हैं। अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर रिपब्लिकन बहुमत इन हियरिंग्स को जारी रखता है, तो CIA को पहली बार व्यापक स्तर पर अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने पड़ सकते हैं। यह अमेरिकी खुफ़िया तंत्र के इतिहास में एक अभूतपूर्व मोड़ होगा।
और भारत के लिए? अगर दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र अपनी सबसे ताक़तवर एजेंसी से जवाब माँग सकता है — तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को यह सवाल क्यों नहीं पूछना चाहिए कि उसकी खुफ़िया एजेंसियाँ किसे जवाब देती हैं? MKUltra का सबक़ यह नहीं है कि CIA बुरी है — सबक़ यह है कि बिना निगरानी के कोई भी एजेंसी, किसी भी देश में, अपनी शक्ति की सीमा ख़ुद तय करने लगती है। और तब नागरिक प्रयोगशाला का चूहा बन जाता है — चाहे वॉशिंगटन हो या कोई और राजधानी।
आँकड़ों में
- MKUltra: $375,000 का दस्तावेज़ी बजट (1950-60 के दशक, आज करोड़ों डॉलर के बराबर) — रिप. लूना द्वारा कांग्रेसनल हियरिंग में प्रस्तुत
- MKUltra अवधि: 1953 से 1973 — लगभग 20 वर्ष, 150 से अधिक सब-प्रोजेक्ट्स
- 1973 में CIA निदेशक हेल्म्स के आदेश पर अधिकांश दस्तावेज़ नष्ट — बचे हुए दस्तावेज़ ग़लत फ़ाइलिंग के कारण सुरक्षित रहे
मुख्य बातें
- CIA का MKUltra प्रोजेक्ट 1953-1973 तक चला, जिसमें 150+ सब-प्रोजेक्ट्स के तहत अमेरिकी-कनाडाई नागरिकों पर बिना सहमति के LSD और माइंड-कंट्रोल प्रयोग किए गए।
- रिप. अन्ना पॉलिना लूना ने कांग्रेसनल हियरिंग में $375,000 बजट का दस्तावेज़ सामने रखा और कहा — 'CIA ने अमेरिकियों को मारा' — यह अमेरिकी संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड पर है।
- 1973 में CIA निदेशक रिचर्ड हेल्म्स ने अधिकांश MKUltra दस्तावेज़ नष्ट करवा दिए थे — बचे हुए दस्तावेज़ ही आज विस्फोटक खुलासों का आधार हैं।
- दशकों तक 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' कही जाने वाली बातें अब आधिकारिक सुनवाइयों में पुष्ट हो रही हैं — यह लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है।
- भारत में RAW और IB जैसी एजेंसियों पर विशिष्ट संसदीय निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति MKUltra जैसे मामलों की प्रासंगिकता भारतीय संदर्भ में भी बनाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
MKUltra प्रोजेक्ट क्या था और कब चला?
MKUltra अमेरिकी खुफ़िया एजेंसी CIA का एक गोपनीय माइंड-कंट्रोल प्रोजेक्ट था जो 1953 से 1973 तक चला। इसके तहत 150 से ज़्यादा सब-प्रोजेक्ट्स में अमेरिकी और कनाडाई नागरिकों पर बिना उनकी सहमति के LSD, मेस्कलीन जैसी ड्रग्स, हिप्नोसिस, बिजली के झटके और सेंसरी डेप्रिवेशन जैसे प्रयोग किए गए। शीत युद्ध के दौरान सोवियत 'ब्रेनवॉशिंग' का जवाब देना इसका मूल उद्देश्य था।
Rep. अन्ना पॉलिना लूना ने क्या खुलासा किया?
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, रिपब्लिकन सांसद लूना ने अमेरिकी कांग्रेस की हियरिंग में MKUltra के दस्तावेज़ पेश किए, जिनमें $375,000 के बजट आवंटन का ब्योरा था। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि 'CIA ने अमेरिकियों को मारा' — यह बयान अमेरिकी संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन गया है।
MKUltra के दस्तावेज़ नष्ट क्यों किए गए थे?
1973 में, वॉटरगेट कांड के बाद जब सरकारी एजेंसियों पर जाँच का दबाव बढ़ा, तत्कालीन CIA निदेशक रिचर्ड हेल्म्स ने MKUltra से जुड़े अधिकांश दस्तावेज़ नष्ट करवा दिए। हालाँकि, कुछ फ़ाइलें ग़लत स्थान पर दर्ज होने के कारण बच गईं, जो बाद में 1977 की सीनेट सुनवाई और अब लूना की हियरिंग का आधार बनीं।
भारत के लिए MKUltra से क्या सबक़ है?
MKUltra का सबक़ सार्वभौमिक है — खुफ़िया एजेंसियों पर प्रभावी संसदीय निगरानी के बिना सत्ता का दुरुपयोग संभव है। भारत में RAW और IB जैसी प्रमुख एजेंसियाँ किसी विशिष्ट संसदीय समिति को सीधे रिपोर्ट नहीं करतीं, जो लोकतांत्रिक जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल है।



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