AIADMK के दो पूर्व मंत्री, कम से कम 15 पूर्व विधायक और 15 हज़ार समर्थक विजय की तमिलग वेट्टी काड़गम (TVK) में शामिल हो रहे हैं। नवभारत टाइम्स और दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, यह AIADMK के इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक विदाई है जो द्रविड़ राजनीति के पूरे समीकरण को बदल सकती है।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: AIADMK के दो पूर्व मंत्री, 15 पूर्व विधायक और लगभग 15,000 कार्यकर्ता — TVK प्रमुख अभिनेता-राजनेता विजय (तळपति) के नेतृत्व में शामिल
- क्या: AIADMK से बड़े पैमाने पर नेताओं-कार्यकर्ताओं का TVK में सामूहिक पलायन, जिसे पार्टी इतिहास की सबसे बड़ी टूट बताया जा रहा है
- कब: जून 2025 — दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार शामिल होने की प्रक्रिया आज हो रही है
- कहाँ: तमिलनाडु — TVK का केंद्रीय आयोजन स्थल; प्रभाव पूरे राज्य की राजनीति पर
- क्यों: AIADMK में एडप्पाडी पलानीस्वामी के नेतृत्व से असंतोष, पार्टी की चुनावी गिरावट और विजय के नई राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने से नेताओं ने 'विजेता पक्ष' चुना
- कैसे: 200 कारों और 600 बसों के विशाल काफ़िले में 15,000 समर्थकों के साथ पूर्व मंत्री और विधायक TVK मुख्यालय पहुँचे — संगठित और नियोजित तरीके से पार्टी-बदल
200 कारें। 600 बसें। 15 हज़ार लोग। एक काफ़िला जो किसी शादी के बाराती जुलूस जैसा दिखता है — लेकिन यह बारात नहीं, यह AIADMK का जनाज़ा-ए-इज़्ज़त है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, दो पूर्व कैबिनेट मंत्री और कम से कम 15 पूर्व विधायक आज अपने हज़ारों समर्थकों के साथ विजय की तमिलग वेट्टी काड़गम (TVK) में शामिल हो रहे हैं। यह तमिलनाडु की सबसे पुरानी द्रविड़ पार्टियों में से एक की दीवार में अब तक की सबसे चौड़ी दरार है।
लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि यह महज़ एक और 'नेता-शॉपिंग' है, तो ठहरिए। इस टूट के पीछे की कहानी उससे कहीं गहरी है जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखेगी।
काफ़िले का हिसाब — ये संख्याएँ क्या कहती हैं?
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि इस 'महापलायन' में शामिल दो पूर्व मंत्री AIADMK के जयललिता दौर के वरिष्ठ चेहरे हैं। 15 पूर्व विधायकों का मतलब है कि AIADMK के पिछले विधानसभा प्रतिनिधित्व का एक बड़ा हिस्सा अब विजय के झंडे तले खड़ा है। 15,000 कार्यकर्ता — अगर यह संख्या सटीक भी है तो — बूथ-लेवल की ज़मीनी ताकत है, सिर्फ़ भीड़ नहीं। ये वो लोग हैं जो चुनाव के दिन बूथ पर खड़े होते हैं, मतदाता सूचियाँ पढ़ते हैं, और 'स्लिप बाँटते' हैं।
दैनिक जागरण ने 200 कारों और 600 बसों का विवरण दिया है। ज़रा सोचिए — 600 बसें किराए पर लेना, रूट तय करना, लोगों को इकट्ठा करना — यह अनायास नहीं होता। यह संगठन है, और संगठन ही वह चीज़ है जो एक स्टार-पावर पार्टी को असली राजनीतिक मशीन में बदलती है।
पलानीस्वामी का 'खोखला किला' — AIADMK में क्या बचा?
AIADMK की त्रासदी समझने के लिए 2021 पर नज़र डालिए। पार्टी सत्ता गँवा चुकी थी। फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में ज़ीरो सीटें। एडप्पाडी पलानीस्वामी ने पार्टी पर अपनी पकड़ मज़बूत की — ओ. पनीरसेल्वम को बाहर किया, शशिकला को दूर रखा — लेकिन इस 'शुद्धि अभियान' की क़ीमत यह हुई कि पार्टी के अंदर वफ़ादारों का दायरा सिकुड़ता गया। जो नेता ख़ुद को हाशिए पर महसूस कर रहे थे, उन्हें अब एक नया पता मिल गया है — TVK।
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि पलानीस्वामी की 'एक-व्यक्ति नियंत्रण' शैली ने AIADMK के ज़िला-स्तरीय नेताओं को इतना विमुख कर दिया कि TVK का न्योता उन्हें मुक्ति जैसा लगा। एक पूर्व विधायक ने कथित तौर पर कहा — "पार्टी में रहकर हम चुनाव हार रहे थे, कम से कम TVK में जीत की उम्मीद तो है।"
विजय का 'NTR मॉडल' — इतिहास ख़ुद को दोहरा रहा है?
हिंदी बेल्ट के पाठक के लिए सबसे दिलचस्प सवाल यही है — क्या विजय वही कर रहे हैं जो 1982 में एन.टी. रामाराव ने आंध्र प्रदेश में किया था? NTR ने कांग्रेस-शासित आंध्र में तेलुगु देशम पार्टी बनाई, फ़िल्मी करिश्मे को राजनीतिक संगठन में बदला, और नौ महीने में सत्ता पलट दी। उनसे पहले, तमिलनाडु में ख़ुद MGR ने यही किया — DMK से निकलकर AIADMK बनाई और 1977 में सरकार बना ली।
विजय की TVK इसी परंपरा की अगली कड़ी लगती है। लेकिन एक अहम फ़र्क़ है — NTR और MGR के सामने शासक दल के ख़िलाफ़ 'सत्ता-विरोधी लहर' थी। विजय के सामने DMK की MK स्टालिन सरकार है जो अभी अपेक्षाकृत मज़बूत है। ऐसे में TVK का रास्ता 'सत्ता-विरोधी लहर' से नहीं, बल्कि 'विपक्ष-खाली जगह भरने' से होकर गुज़रता है — और AIADMK की यह टूट ठीक वही जगह ख़ाली कर रही है।
पॉलिटिकल पल्स
तमिलनाडु के सियासी गलियारों में जो बात सबसे ज़्यादा चर्चा में है, वह प्रेस रिलीज़ में नहीं मिलेगी। ट्रेड-पंडितों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच दो धाराएँ हैं। पहली — कि TVK में AIADMK नेताओं का शामिल होना BJP की 'प्रॉक्सी स्ट्रैटेजी' का हिस्सा है। तर्क यह है कि BJP तमिलनाडु में सीधे जीत नहीं सकती, लेकिन अगर TVK 'थर्ड फ़ोर्स' बनकर DMK की वोट काटे, तो BJP को गठबंधन का एक नया — और ज़्यादा ताक़तवर — विकल्प मिल जाता है।
दूसरी धारा कहती है कि विजय ख़ुद को किसी गठबंधन में बाँधने से इनकार कर रहे हैं और TVK की 'अकेला चलो' नीति BJP के लिए फ़ायदे से ज़्यादा जोख़िम है — क्योंकि TVK AIADMK-BJP के संयुक्त वोट-बैंक को भी तोड़ती है। सच शायद दोनों के बीच कहीं है, और यही अनिश्चितता TVK को 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा 'एक्स-फ़ैक्टर' बनाती है।
(यह इंडस्ट्री और राजनीतिक हलकों की चर्चा पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
BJP का असली दांव कहाँ है?
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि BJP के लिए तमिलनाडु 'जीतने' का खेल नहीं, 'बिगाड़ने' का खेल है — और TVK इस बिसात पर सबसे ताज़ा मोहरा है। 2024 में BJP ने AIADMK के साथ गठबंधन किया, नतीजा शून्य रहा। अब अगर AIADMK और कमज़ोर होती है और TVK मज़बूत, तो BJP के पास विकल्प खुलते हैं — या तो TVK के साथ 'इवेंट-बेस्ड' तालमेल, या फिर 'तीनों विपक्षी ताकतें DMK के वोट काटें' की उम्मीद में अकेले मैदान।
लेकिन यहाँ एक पेंच है। विजय ने अब तक BJP से दूरी ही बनाई है। TVK की सार्वजनिक स्थिति 'सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता' की है — जो BJP की हिंदुत्व-लाइन से मेल नहीं खाती। तो क्या BJP विजय को 'उपयोगी प्रतिद्वंद्वी' की तरह देख रही है — जो DMK को कमज़ोर करे, चाहे ख़ुद BJP का सहयोगी न बने? यह सवाल 2026 की चुनावी रणनीति का केंद्र बिंदु है।
आगे क्या देखें — असली परीक्षा कब है?
AIADMK से TVK में नेताओं का आना अभी शुरुआत है। असली सवाल तीन हैं। पहला — क्या TVK इन 'आयातित' नेताओं को असली ज़िम्मेदारी देगी या सिर्फ़ 'भीड़ का हिस्सा' बनाकर रखेगी? अगर इन पूर्व विधायकों को टिकट और संगठनात्मक पद नहीं मिले, तो यह 'शोपीस जॉइनिंग' से ज़्यादा कुछ नहीं होगी। दूसरा — AIADMK में और कितने नेता बचे हैं जो जाने को तैयार हैं? अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो 2026 तक AIADMK तमिलनाडु में तीसरे या चौथे नंबर की पार्टी बन सकती है। तीसरा — और सबसे बड़ा — DMK की प्रतिक्रिया क्या होगी? MK स्टालिन की पार्टी अभी तक TVK को गंभीरता से नहीं ले रही दिखती है, लेकिन AIADMK के बूथ-लेवल कार्यकर्ताओं का TVK में जाना DMK के लिए भी ख़तरे की घंटी है — क्योंकि चुनाव मैदान में तीन-कोणीय लड़ाई हमेशा शासक दल के ख़िलाफ़ जाती है।
[EMBED-SUGGESTION:tweet]
द्रविड़ राजनीति का इतिहास बताता है कि हर बड़ा बदलाव एक 'स्टार' के इर्द-गिर्द शुरू हुआ — अन्नादुरई, MGR, जयललिता, करुणानिधि। विजय उस परंपरा में अगला नाम बनना चाहते हैं। लेकिन स्टार-पावर पार्टी खड़ी करती है, चलाती नहीं — उसके लिए संगठन चाहिए, कैडर चाहिए, और बूथ-लेवल की मशीनरी चाहिए। AIADMK से आ रहे ये 15 विधायक और हज़ारों कार्यकर्ता ठीक वही मशीनरी हैं।
सवाल यह नहीं कि TVK ताक़तवर हो रही है — वह साफ़ दिख रहा है। असली सवाल यह है कि जब 2026 में तमिलनाडु वोट डालेगा, तो क्या यह ताक़त सिर्फ़ AIADMK की क़ब्र खोदेगी, या DMK के किले में भी सेंध लगाएगी? इसका जवाब तय करेगा कि विजय इतिहास में MGR की तरह याद किए जाएँगे — या फिर कैप्टन विजयकांत की तरह।
आँकड़ों में
- 200 कारें और 600 बसें — AIADMK से TVK में शामिल होने वालों का काफ़िला (दैनिक जागरण)
- 15,000 कार्यकर्ता, 2 पूर्व मंत्री, 15 पूर्व विधायक — एक दिन में TVK में शामिल (नवभारत टाइम्स)
- 2024 लोकसभा में AIADMK को 0 सीटें — पार्टी की चुनावी गिरावट का सबसे बड़ा सबूत
मुख्य बातें
- AIADMK के 2 पूर्व मंत्री, 15 पूर्व विधायक और 15,000 कार्यकर्ता TVK में शामिल — 200 कारों और 600 बसों का काफ़िला पार्टी इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक विदाई है (दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स)
- एडप्पाडी पलानीस्वामी की 'एक-व्यक्ति नियंत्रण' शैली और लगातार चुनावी हार ने AIADMK के ज़िला-स्तरीय नेताओं को विमुख किया — TVK ने यही ख़ालीपन भरा
- विजय का मॉडल NTR (1982, आंध्र) और MGR (1977, तमिलनाडु) जैसा है — स्टार-पावर + विपक्ष से कैडर आयात, लेकिन फ़र्क़ यह है कि यहाँ सत्ता-विरोधी लहर अभी कमज़ोर है
- BJP के लिए TVK 'उपयोगी प्रतिद्वंद्वी' है — DMK का वोट काटने वाली ताक़त, चाहे सीधे सहयोगी न बने; 2026 विधानसभा में यह 'एक्स-फ़ैक्टर' होगा
- असली परीक्षा: TVK इन 'आयातित' नेताओं को टिकट-संगठन देती है या सिर्फ़ 'भीड़' बनाए रखती है — और DMK तीन-कोणीय लड़ाई को कैसे हैंडल करती है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
TVK क्या है और इसकी स्थापना किसने की?
तमिलग वेट्टी काड़गम (TVK) तमिल फ़िल्म सुपरस्टार विजय (तळपति) द्वारा स्थापित राजनीतिक पार्टी है, जो तमिलनाडु में 'तीसरी ताक़त' के रूप में उभरने का दावा करती है।
AIADMK से TVK में कितने नेता शामिल हुए?
नवभारत टाइम्स और दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, 2 पूर्व कैबिनेट मंत्री, 15 पूर्व विधायक और लगभग 15,000 कार्यकर्ता TVK में शामिल हो रहे हैं।
क्या विजय का तरीक़ा NTR जैसा है?
समानता है — दोनों ने फ़िल्मी लोकप्रियता को राजनीतिक पार्टी में बदला और स्थापित विपक्ष से कैडर आयात किया। लेकिन NTR के सामने सत्ता-विरोधी लहर थी, जबकि विजय के सामने DMK अभी अपेक्षाकृत मज़बूत है — इसलिए TVK का रास्ता 'विपक्षी ख़ालीपन भरने' से होकर जाता है।
इस टूट का BJP पर क्या असर होगा?
BJP के लिए TVK 'उपयोगी प्रतिद्वंद्वी' हो सकती है — अगर TVK मज़बूत होकर DMK का वोट काटे तो BJP को फ़ायदा, लेकिन TVK AIADMK-BJP के संयुक्त वोट-बैंक को भी तोड़ सकती है। 2026 विधानसभा में यह सबसे बड़ा एक्स-फ़ैक्टर होगा।
AIADMK का भविष्य क्या है?
अगर नेताओं का TVK में पलायन जारी रहा, तो 2026 तक AIADMK तमिलनाडु में तीसरे या चौथे नंबर की पार्टी बन सकती है। एडप्पाडी पलानीस्वामी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बचे हुए कैडर को रोकने और चुनावी विश्वसनीयता बहाल करने की है।



click and follow Indiaherald WhatsApp channel