ट्रंप प्रशासन की ICE ने जून 2026 के आख़िरी पाँच दिनों में 10,000 से ज़्यादा अवैध प्रवासी गिरफ़्तार किए हैं। The Hindu और India Today की रिपोर्ट के अनुसार यह डिपोर्टेशन अभियान तेज़ी से बढ़ रहा है और विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका में ओवरस्टे कर रहे भारतीय भी अब निशाने पर आ सकते हैं।
दस हज़ार। पाँच दिन। यह कोई वॉर मूवी का टैगलाइन नहीं — यह अमेरिका की सड़कों पर ICE के ताज़ा ऑपरेशन का हिसाब है। The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक़, जून 2026 के आख़िरी हफ़्ते में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फ़ोर्समेंट ने 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया — और इस आँकड़े ने दुनिया भर के उन देशों में हलचल मचा दी है जिनके नागरिक अमेरिका में बिना वैध दस्तावेज़ों के रह रहे हैं। भारत उनमें सबसे ऊपर है।
India Today के अनुसार यह ट्रंप के डिपोर्टेशन अभियान में अब तक की सबसे तीव्र कार्रवाई है। ICE के अधिकारियों ने वर्कप्लेस रेड्स से लेकर आवासीय इलाक़ों तक में छापे मारे। लेकिन असली सवाल वह है जो कोई ज़ोर से नहीं पूछ रहा — क्या इन 10,000 में भारतीय भी हैं, और अगर अभी नहीं हैं तो कब होंगे?
आँकड़ों की ज़बान ठंडी है, मगर कहानी गर्म। अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के पुराने अनुमानों के हवाले से विभिन्न रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका में क़रीब 7-8 लाख भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं। इनमें बड़ा हिस्सा उन लोगों का है जो वैध वीज़ा — ख़ासकर H-1B, स्टूडेंट वीज़ा या टूरिस्ट वीज़ा — पर गए और वीज़ा एक्सपायर होने के बाद लौटे नहीं। ये 'ओवरस्टेयर्स' हैं — न सीमा पार करके घुसे, न किसी तस्कर की नाव में बैठे। बस, वापसी की फ़्लाइट नहीं पकड़ी।
और यही वह जगह है जहाँ ट्रंप की नई रणनीति ख़तरनाक हो जाती है। पहले ICE का फ़ोकस मुख्य रूप से मैक्सिकन सीमा से ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से घुसने वालों पर था — लैटिन अमेरिकी प्रवासी, कारवाँ, सीमा पर पकड़े गए लोग। लेकिन The Hindu की रिपोर्ट में जिस 'शार्प सर्ज' का ज़िक्र है, वह बताता है कि अब जाल चौड़ा हो रहा है। वर्कप्लेस रेड्स का मतलब है कि IT कंपनियों के बैक-ऑफ़िस, मोटेल, रेस्तराँ, गैस स्टेशन — हर वह जगह जहाँ भारतीय ओवरस्टेयर काम करते पाए जा सकते हैं — अब ICE की नज़र में है।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत सरकार को पहले ही 'डिपोर्टेशन फ़्लाइट्स' स्वीकार करने का अनौपचारिक संदेश दे दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बारे में अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन ट्रेड हलकों और डिप्लोमैटिक सर्कल्स में चर्चा ज़ोरों पर है कि मोदी सरकार 'चुपचाप सहयोग' की नीति अपना सकती है — ठीक वैसे ही जैसे पहले भी भारत ने कुछ सौ नागरिकों की डिपोर्टेशन फ़्लाइट्स स्वीकार की थीं। (यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनयिक हलकों की अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों का साया इस पूरी कहानी पर है। ट्रंप के लिए इमिग्रेशन क्रैकडाउन सिर्फ़ नीतिगत मामला नहीं — यह इलेक्टोरल ईंधन है। India Today की रिपोर्ट इसे 'इंटेन्सिफ़ाइड ड्राइव' कहती है, लेकिन पंक्तियों के बीच पढ़ें तो यह एक कैलकुलेटेड पॉलिटिकल मूव है। हर गिरफ़्तारी एक टीवी बाइट है, हर डिपोर्टेशन फ़्लाइट एक कैंपेन पोस्टर। और इसमें भारतीयों को अलग करके देखने की कोई वजह ट्रंप के पास नहीं — उनके लिए 'illegal is illegal', चाहे वह ग्वाटेमाला से आया हो या गुजरात से।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि आने वाले हफ़्तों में भारतीय ओवरस्टेयर्स पर शिकंजा और कसेगा — और इसका सबसे बड़ा असर उन मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा जिन्होंने बेटे-बेटी को अमेरिकन ड्रीम के लिए भेजा था। गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के वे ज़िले जहाँ से सबसे ज़्यादा ओवरस्टे होता है — वहाँ के ट्रैवल एजेंट पहले से ही फ़ोन उठाना बंद कर रहे हैं, अटकलें ज़ोरों पर हैं।
मोदी सरकार के लिए यह एक कूटनीतिक कसौटी है। एक तरफ़ ट्रंप से रिश्ते — जिन्हें रक्षा सौदों और भू-राजनीतिक समीकरणों के लिए बचाए रखना ज़रूरी है। दूसरी तरफ़ घरेलू राजनीति — अगर हज़ारों भारतीय डिपोर्ट होकर लौटते हैं, तो विपक्ष के हाथ में बड़ा हथियार आ जाता है। कांग्रेस पहले से ही H-1B वीज़ा मुद्दे पर सरकार को घेरती रही है; अगर डिपोर्टेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं, तो गुजरात और पंजाब की सीटों पर यह इलेक्शन इश्यू बन सकता है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अमेरिका जाने का रास्ता अब पहले से कहीं ज़्यादा ख़र्चीला और ख़तरनाक हो चुका है — डंकी रूट से जाने वाले लोग लाखों रुपये ख़र्च करते हैं और कई बार जान गँवाते हैं — और अब जो पहुँच गए हैं, उनके लिए रुकना भी उतना ही जोख़िम भरा हो गया है। ट्रंप ने एक ऐसा चक्रव्यूह खड़ा कर दिया है जिसमें घुसना भी मुश्किल है और निकलना भी।
आगे क्या होगा — इसके संकेत पहले से दिख रहे हैं। The Hindu के मुताबिक़ ICE ने अपने ऑपरेशन का दायरा और बढ़ाने की योजना बनाई है। अगर यह रफ़्तार बनी रही तो जुलाई में गिरफ़्तारियों का आँकड़ा और भी ऊँचा जा सकता है। भारत सरकार की चुप्पी जितनी लंबी होगी, उतना ही यह सवाल बड़ा होता जाएगा — कि क्या नई दिल्ली अपने नागरिकों को बचाने के लिए वाशिंगटन से बात कर रही है, या ट्रेड डील और डिफ़ेंस पार्टनरशिप की क़ीमत उन लाखों लोगों की ज़िंदगी है जिन्हें 'अमेरिकन ड्रीम' ने अंधेरे में छोड़ दिया?
[EMBED-SUGGESTION:tweet]
आख़िरी बात — और शायद सबसे ज़रूरी। उन 10,000 गिरफ़्तारियों में हर एक संख्या के पीछे एक इंसान है, एक परिवार है, एक टूटा हुआ सपना है। भारत के किसी गाँव में कोई माँ आज भी बेटे के 'ग्रीन कार्ड' का इंतज़ार कर रही है। उसे नहीं पता कि बेटा अब ICE की लिस्ट पर है। ट्रंप का शिकारी निकल चुका है — सवाल यह है कि शिकार बनने से पहले भारत अपने लोगों को आवाज़ देगा, या सिर्फ़ चुप्पी?
More from India Herald
मुख्य बातें
- ICE ने जून 2026 के पाँच दिनों में 10,000+ अवैध प्रवासी गिरफ़्तार किए — यह ट्रंप के कार्यकाल की सबसे तीव्र कार्रवाई (The Hindu)।
- अमेरिका में अनुमानतः 7-8 लाख भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनमें बड़ा हिस्सा वीज़ा ओवरस्टेयर्स का है।
- ट्रंप के लिए यह मिडटर्म इलेक्शन स्ट्रैटेजी है — हर गिरफ़्तारी कैंपेन मैटेरियल है (India Today)।
- मोदी सरकार कूटनीतिक दुविधा में — ट्रंप से रिश्ते बचाना और डिपोर्ट होते नागरिकों पर घरेलू विपक्ष को जवाब देना, दोनों साथ चलाना कठिन।
- गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र हो सकते हैं — यहाँ से सबसे अधिक ओवरस्टे रिपोर्ट होता है।
आँकड़ों में
- ICE ने 5 दिनों में 10,000+ गिरफ़्तारियाँ कीं — ट्रंप कार्यकाल का रिकॉर्ड सर्ज (The Hindu)।
- अमेरिका में अनुमानित 7-8 लाख भारतीय अवैध प्रवासी, अधिकांश वीज़ा ओवरस्टेयर्स।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फ़ोर्समेंट (ICE), राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय प्रवासी।
- क्या: ICE ने पाँच दिनों में 10,000 से ज़्यादा अवैध प्रवासियों को गिरफ़्तार किया — यह ट्रंप के डिपोर्टेशन अभियान में अब तक की सबसे तेज़ कार्रवाई है (The Hindu)।
- कब: जून 2026 के अंतिम पाँच दिनों में, India Today की रिपोर्ट के अनुसार।
- कहाँ: पूरे अमेरिका में — शहरों, कार्यस्थलों और आवासीय इलाक़ों में ICE की छापेमारी (The Hindu)।
- क्यों: ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य अवैध इमिग्रेशन पर 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति लागू करना है और 2026 मिडटर्म चुनाव से पहले अपने वोट बेस को मज़बूत संदेश देना है (India Today)।
- कैसे: ICE ने वर्कप्लेस रेड्स, टारगेटेड अरेस्ट ऑपरेशन और लोकल पुलिस सहयोग के ज़रिये बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारियाँ कीं (The Hindu)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ICE ने कितने लोगों को गिरफ़्तार किया?
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार ICE ने जून 2026 के अंतिम पाँच दिनों में 10,000 से अधिक अवैध प्रवासियों को गिरफ़्तार किया।
क्या भारतीय नागरिक भी ICE की गिरफ़्तारी में शामिल हैं?
अब तक इसकी अलग पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अमेरिका में अनुमानतः 7-8 लाख भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं — ख़ासकर वीज़ा ओवरस्टेयर्स — और विशेषज्ञ मानते हैं कि ये भी निशाने पर आ सकते हैं।
भारत सरकार ने ICE क्रैकडाउन पर क्या कहा?
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
ट्रंप के डिपोर्टेशन अभियान का मक़सद क्या है?
India Today के अनुसार यह ट्रंप की 'ज़ीरो टॉलरेंस' इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है और मिडटर्म चुनावों से पहले अपने वोट बेस को मज़बूत संदेश देने की रणनीति भी।






click and follow Indiaherald WhatsApp channel