राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी दलितों के मुद्दों को लेकर विरोध के बाद दलित नेताओं से पार्टी ने उनके समुदाय के बीच एक आक्रामक अभियान शुरू करने को कहा है| पार्टी का यह मानना है कि दलितों के एक वर्ग को अपने पक्ष में करने में उसकी 'सफलता' ने बीएसपी और कांग्रेस को उसके विरुद्ध 'दुष्प्रचार' अभियान शुरू करने के लिए प्रेरित किया है| मंगलवार शाम को बीजेपी के दलित सांसदों और पदाधिकारियों के अलावा पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों की बैठक हुई|
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी और बीजेपी भी बैठक में शामिल हुए, कृष्ण गोपाल संघ के बीच समन्वय का कामकाज देखने वाले भी बैठक में जुड़े, पार्टी महासचिव रामलाल और भूपेंद्र यादव ने उनसे बात की| यह बैठक उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बहुत महत्व रखती है, क्योंकि दलितों को बीजेपी आकर्षित करने के लिए काफी प्रयत्न कर रही ह| दलितों की संख्या मतदाताओं में लगभग 20 प्रतिशत है| कहा जा रहा है कि हाल के मामलों से अभियान को नुकसान पहुंचा है|
अब आशा है की दलित सांसद और अन्य नेता कई राज्यों में गौरक्षकों द्वारा दलितों पर आक्रमण के बाद वाली परिस्तिथि को लेकर पार्टी का पक्ष रखने के लिए उन क्षेत्रों में जाएंगे, जहां दलितों की संख्या बड़ी तादाद में है| विजय सोनकर शास्त्री बीजेपी प्रवक्ता एवं दलित नेता ने कहा, "विपक्ष ने हमारे खिलाफ दुष्प्रचार अभियान शुरू किया है| कांग्रेस और बसपा साथ हैं, क्योंकि वे हमारे द्वारा दलितों को अपने समर्थन में करने को लेकर घबरायी हुई है| हमारे वरिष्ठ नेताओं के बयानों को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है| हमें इसका आक्रामक और प्रभावी तरीके से मुकाबला करना होगा|"