भारत जहाँ एक ओर पतंत्रता का दंश झेल रहा था वहीं सामाजिक स्तर पर भी पिछड़नेपन से जूझ रहा था। एक ओर औरतों को देवी बना कर उन्हें पूजनीय माना जाता था, वहीं इसका दूसरा पहलू था कि लड़कियों अभिशाप मानी जाती थीं। एक ओर जहाँ महिलाओं के सामने अपने ही समाज से लड़ने की चुनौती थी, तो दूसरी ओर स्वतंत्रता की लड़ाई में महती भूमिका निभाने की प्रबल इच्छा। ऐसे में अगर कोई स्त्री पूरी तरह से देश की स्वतंत्रता को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना ले तो इसे अप्रतीम उदाहरण माना जाएगा।
क्या आप जानते हैं कि आजादी से चार दशक पहले विदेश में किस भारतीय महिला ने पहली बार भारत का झंडा फहराकर गौरवान्वित किया था। यदि आपको उनके बारे में जानकारी नहीं है तो आपको ये खबर जरूर पढ़नी चाहिए। हम आपको बता रहे हैं उस भारतीय महिला का नाम। अब से 4 दशक पहले 1907 में 46 साल की पारसी महिला भीकाजी कामा ने जर्मनी ये झंडा फहराया था। उन्होंने ये झंडा जर्मनी के स्टुटगार्ट में हुई दूसरी 'इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस' में फहराया था। उस समय ये झंडा भारत के आज के झंडे से अलग था।
भीकाजी रुस्तो कामा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की मुख्य केंद्र बिंदु और पहली महिला क्रांतिकारी थी। भीकाजी कामा का जन्म 24 सितम्बर 1861 को बम्बई में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनमें लोगों की मदद और सेवा करने की भावना कूट−कूट कर भरी थी। वर्ष 1896 में मुम्बई में प्लेग फैलने के बाद भीकाजी ने इसके मरीजों की सेवा की थी। बाद में वह खुद भी इस बीमारी की चपेट में आ गई थीं। इलाज के बाद वह ठीक हो गई थीं लेकिन उन्हें आराम और आगे के इलाज के लिए यूरोप जाने की सलाह दी गई थी। वर्ष 1902 में वह इसी सिलसिले में लंदन गईं और वहां भी उन्होंने भारतीय स्वाधीनता संघर्ष के लिए काम जारी रखा। भीकाजी ने वर्ष 1907 में अपने सहयोगी विनायक दामोदर सावरकर की मदद से भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज का पहला डिजाइन तैयार किया था।