केंद्रीय गृह मंत्रालय ने UAPA की चौथी अनुसूची के तहत जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 व्यक्तियों को 'आतंकवादी' घोषित किया है। यह कदम जम्मू-कश्मीर में हालिया हमलों के बाद आया है और NIA को इनकी संपत्तियों की कुर्की का सीधा रास्ता देता है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: गृह मंत्रालय (MHA) ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 ऑपरेटिव्स को नामित किया — द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार।
  • क्या: इन 23 व्यक्तियों को UAPA (गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम) की चौथी अनुसूची में 'व्यक्तिगत आतंकवादी' के रूप में शामिल किया गया।
  • कब: 2025 में जम्मू-कश्मीर में बढ़े आतंकी हमलों के संदर्भ में यह अधिसूचना जारी की गई।
  • कहाँ: यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर केंद्रित है, लेकिन नामित व्यक्तियों में PoK और पाकिस्तान में बैठे कमांडर भी शामिल हैं।
  • क्यों: MHA ने इन्हें J&K में हालिया आतंकी हमलों से सीधा जोड़ते हुए नामित किया — इससे NIA को संपत्ति कुर्की और वित्तीय नेटवर्क तोड़ने का कानूनी आधार मिलता है।
  • कैसे: UAPA की धारा 35 और 36 के तहत MHA ने इन्हें अधिसूचित किया; अब NIA इनकी भारत में मौजूद संपत्तियों, बैंक खातों और हवाला नेटवर्क पर कार्रवाई कर सकती है।

तेईस नाम। एक सरकारी गज़ट। और एक संदेश जो श्रीनगर से रावलपिंडी तक गूँजने के लिए बनाया गया है। केंद्र सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 23 ऑपरेटिव्स को UAPA की चौथी अनुसूची में 'व्यक्तिगत आतंकवादी' के रूप में नामित कर दिया है — द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इनमें से कई का सीधा संबंध जम्मू-कश्मीर में हालिया हमलों से जोड़ा गया है। लेकिन सवाल यह नहीं कि ये 23 नाम कौन हैं — असली सवाल यह है कि ये नाम अभी क्यों, और इस तरीके से क्यों।

पहले यह समझिए कि UAPA की चौथी अनुसूची में किसी व्यक्ति का नाम डलने का मतलब क्या होता है। यह कोई मामूली ब्लैकलिस्ट नहीं है। जब तक कोई संगठन ही प्रतिबंधित होता है, उसके 'सुरक्षित दूरी' पर खड़े सदस्य कानूनी तौर पर बचते रहते हैं — उनके बैंक खाते चलते हैं, ज़मीनें उनके नाम पर रहती हैं, हवाला का पैसा उन तक पहुँचता रहता है। लेकिन जिस क्षण कोई व्यक्ति चौथी अनुसूची में आता है, NIA को सीधा कानूनी अधिकार मिल जाता है — संपत्ति कुर्की, बैंक खाते फ्रीज़, पासपोर्ट रद्द, और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पाबंदी। यह गिरफ्तारी से भी ज़्यादा गहरी चोट है — यह किसी आतंकी के पूरे इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से बर्बाद करने का हथियार है।

23 नाम — एक नंबर नहीं, एक रणनीति

अब तक UAPA के तहत व्यक्तिगत नामांकन छिटपुट रहे हैं — एक-दो नाम, चुनिंदा मामलों में। एक साथ 23 नामों की अधिसूचना अपने आप में एक बयान है। सुरक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार इसमें दो तरह के प्रोफ़ाइल हैं: पहला, वे कमांडर जो PoK और पाकिस्तान में बैठकर कश्मीर में ऑपरेशन डिज़ाइन करते हैं — जिन तक भारतीय सुरक्षा बल शारीरिक रूप से पहुँच नहीं सकते। दूसरा, और यह ज़्यादा अहम है — वे ओवर-ग्राउंड वर्कर (OGW) जो कश्मीर घाटी के भीतर रहकर लॉजिस्टिक्स चलाते हैं, शेल्टर देते हैं, फंडिंग करते हैं, और रेकी की जानकारी पहुँचाते हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच यह बात लंबे समय से चर्चा में रही है कि एक सक्रिय आतंकी के पीछे कम से कम चार-पाँच OGW खड़े होते हैं। आतंकी को मारना या पकड़ना तात्कालिक राहत देता है, लेकिन जब तक OGW नेटवर्क सलामत है, नया आतंकी भर्ती होता रहता है। UAPA की चौथी अनुसूची इसी जड़ पर हमला करती है — आतंकी को नहीं, उसके पूरे सपोर्ट सिस्टम को आर्थिक रूप से खत्म करने की कोशिश।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि यह कदम सिर्फ़ सुरक्षा की ज़रूरत नहीं, बल्कि गृह मंत्री अमित शाह की एक बड़ी रणनीतिक चाल का हिस्सा है। पहलगाम हमले के बाद से कश्मीर में सुरक्षा स्थिति पर सवाल उठ रहे थे — विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा था कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी आतंकवाद क्यों रुका नहीं। ऐसे में 23 नामों की एक साथ अधिसूचना एक राजनीतिक संदेश भी है: सरकार न केवल सक्रिय है, बल्कि अब वह 'नेम एंड शेम' की बजाय 'नेम एंड सीज़' की रणनीति पर चल रही है।

ट्रेड हलकों में चर्चा यह भी है कि इस सूची का समय कश्मीर में ओमर अब्दुल्ला सरकार के लिए भी एक राजनीतिक संकेत है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने हाल ही में पाकिस्तान से बातचीत की वकालत की थी — केंद्र का यह कदम एक तरह से उस नैरेटिव को काउंटर करता है: 'हम बात नहीं करते, कार्रवाई करते हैं।' हालाँकि J&K सरकार की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

(यह खंड राजनीतिक हलकों की चर्चा और विश्लेषण पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

NIA का 'संपत्ति युद्ध' — असली धार यहाँ है

इस पूरी कवायद की सबसे तेज़ धार संपत्ति कुर्की में छुपी है। NIA ने पिछले दो वर्षों में आतंक-वित्तपोषण मामलों में करोड़ों की संपत्ति कुर्क की है — लेकिन कानूनी आधार हमेशा मज़बूत नहीं होता था क्योंकि कई आरोपी 'व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित नहीं थे। अब UAPA की चौथी अनुसूची में नाम आने के बाद NIA के पास सीधा वैधानिक अधिकार है। रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें से कई नामित व्यक्तियों की कश्मीर घाटी में ज़मीनें, दुकानें और बैंक खाते हैं — जो अब तक 'परिवार की संपत्ति' के नाम पर सुरक्षित थे।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि यह 23 नामों की सूची दरअसल एक बड़े ऑपरेशनल ब्लूप्रिंट की शुरुआती कड़ी है — आने वाले हफ्तों में NIA की कुर्की कार्रवाई, ED की मनी ट्रेल जाँच, और संभवतः FATF के ग्रे लिस्ट रिव्यू में पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने के लिए इन नामों का इस्तेमाल — ये सब एक ही सिक्के के अलग-अलग पहलू हैं।

PoK कनेक्शन — जहाँ हाथ नहीं पहुँचता, वहाँ पैसा पहुँचता है

नामित व्यक्तियों में PoK और पाकिस्तान में बैठे कमांडरों को शामिल करना एक और गणना है। भारत इन लोगों को गिरफ्तार नहीं कर सकता — लेकिन UAPA की चौथी अनुसूची में नाम आने से भारत अब इन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर — UN Security Council 1267 Committee, FATF — 'designated individual terrorist' के रूप में पेश कर सकता है। यह डिप्लोमैटिक दबाव का हथियार है। पाकिस्तान जो लगातार कहता रहा है कि 'ये लोग हमारी ज़मीन पर नहीं हैं', उसे अब हर अंतरराष्ट्रीय फोरम में भारत 23 नामों की ठोस सूची दिखा सकता है।

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि PoK में बैठे कमांडरों के भारत में रिश्तेदारों की संपत्ति कुर्की भी अब NIA के रडार पर आ सकती है — यह 'बेनामी' क़ानून और UAPA का मिला-जुला इस्तेमाल होगा जो पहले इस पैमाने पर नहीं देखा गया। [EMBED-SUGGESTION:tweet]

आगे क्या — वॉच लिस्ट

अगले कुछ हफ़्ते निर्णायक हैं। पहला, NIA की कुर्की की रफ़्तार — अगर अधिसूचना के 30 दिन के भीतर बड़े पैमाने पर संपत्ति कुर्की होती है, तो यह पुष्टि होगी कि सूची पहले से तैयार ऑपरेशनल प्लान का हिस्सा थी। दूसरा, ओमर अब्दुल्ला सरकार की प्रतिक्रिया — क्या वे इसे केंद्र का 'ओवररीच' बताते हैं या चुपचाप सहयोग करते हैं, यह कश्मीर की आंतरिक राजनीति की दिशा तय करेगा। तीसरा, पाकिस्तान का FATF रिव्यू — भारत इन 23 नामों को वहाँ इस्तेमाल करेगा, यह तय है।

जो बात सबसे गौर करने लायक है वह यह: क्या यह सूची और बड़ी होगी? सूत्रों के अनुसार MHA के पास 50 से अधिक नामों की एक 'वेटिंग लिस्ट' है — 23 नाम सिर्फ़ पहला बैच हो सकते हैं। अगर ऐसा है, तो कश्मीर में आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई एक नए चरण में प्रवेश कर रही है — जहाँ गोली नहीं, गज़ट मुख्य हथियार है।

और यही वह सवाल है जो हर किसी को पूछना चाहिए: क्या 'गज़ट की गोली' उतनी ही कारगर होगी जितनी दिखती है — या यह भी उन दर्जनों सूचियों की तरह फ़ाइलों में दबकर रह जाएगी जो पहले भी बनी थीं?

यहाँ रिपोर्ट किए गए आरोप नामित स्रोतों पर आधारित हैं और जब तक अदालत फ़ैसला नहीं करती, अप्रमाणित हैं; न्यायालय के अधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

आँकड़ों में

  • 23 — एक साथ UAPA चौथी अनुसूची में नामित जैश और लश्कर ऑपरेटिव्स की संख्या, जो इस तरह की अब तक की सबसे बड़ी एकल अधिसूचना मानी जा रही है।
  • 50+ — MHA की 'वेटिंग लिस्ट' में मौजूद संभावित नामों की संख्या, सूत्रों के अनुसार।

मुख्य बातें

  • UAPA की चौथी अनुसूची में नाम आने से NIA को सीधे संपत्ति कुर्की, बैंक खाते फ्रीज़ और पासपोर्ट रद्द करने का कानूनी अधिकार मिलता है — यह गिरफ्तारी से भी गहरी चोट है।
  • 23 नामों में PoK-पाकिस्तान के कमांडर और कश्मीर के OGW दोनों शामिल हैं — लक्ष्य आतंकी नहीं, उसका पूरा इकोसिस्टम तोड़ना है।
  • यह सूची FATF और UN 1267 Committee में पाकिस्तान पर डिप्लोमैटिक दबाव बढ़ाने का हथियार भी बनेगी।
  • MHA के पास 50 से अधिक नामों की 'वेटिंग लिस्ट' होने की चर्चा है — 23 सिर्फ़ पहला बैच हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

UAPA की चौथी अनुसूची में नाम आने का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि उस व्यक्ति को कानूनी रूप से 'आतंकवादी' घोषित किया गया है। NIA को उसकी संपत्ति कुर्क करने, बैंक खाते फ्रीज़ करने और पासपोर्ट रद्द करने का सीधा अधिकार मिल जाता है — बिना अलग से अदालती आदेश लिए।

23 नामों में किस तरह के लोग शामिल हैं?

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय कमांडर, PoK-पाकिस्तान में बैठे ऑपरेशनल हेड, और कश्मीर घाटी में लॉजिस्टिक्स-फंडिंग चलाने वाले ओवर-ग्राउंड वर्कर शामिल हैं।

यह कदम पाकिस्तान पर कैसे दबाव बनाता है?

UAPA के तहत नामित व्यक्तियों को भारत अब UN 1267 Committee और FATF जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'designated individual terrorist' के रूप में पेश कर सकता है, जिससे पाकिस्तान पर इन्हें शरण देने का सीधा सवाल खड़ा होता है।

क्या ओमर अब्दुल्ला सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी?

अब तक J&K की ओमर अब्दुल्ला सरकार की ओर से इस अधिसूचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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