युवराज सिंह ने कहा, “मुझे पंजाब के इन युवा खिलाड़ियों के साथ समय बिताना पसंद है और खेल के विभिन्न पहलुओं के बारे में उनसे बात करने पर मुझे एहसास हुआ कि मैं उनकी काफी मदद कर सकता हूं.
मुझे इस बात पर सुखद आश्चर्य हुआ कि मैं गेंद को कितनी अच्छी तरह से मार रहा था, भले ही मैंने वास्तव में लंबे समय से बल्ला नहीं पकड़ा था, लेकिन जब मैंने अभ्यास किया, तो गेंद मेरे बल्ले से अच्छी तरह से निकल रही थी.”
युवराज सिंह ने आगे अपनी बात को बढ़ाते हुए कहा, “मैंने ऑफ-सीज़न शिविर में बल्लेबाजी करना शुरू कर दिया था. मैंने कुछ अभ्यास मैचों में रन बनाए. पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव श्री पुनीत बाली ने मुझसे संपर्क किया और मुझसे पूछा कि क्या मैं रिटायरमेंट से बाहर आने पर पुनर्विचार करूंगा.
शुरू में मुझे यकीन नहीं था कि मैं इस प्रस्ताव को लू या नहीं, क्योंकि मैं बीसीसीआई से अनुमति मिलने पर मैं दुनिया भर में अन्य घरेलू फ्रेंचाइजी-आधारित लीगों में खेलना जारी रखना चाहता था, लेकिन मैं श्री बाली के अनुरोध को भी अनदेखा नहीं कर सकता था. मैंने इसे बहुत सोचा, लगभग तीन या चार सप्ताह तक सोचा और अंत मैं मैंने हां कहकर एक सचेत निर्णय लिया.”
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