भारत में लगभग 70-90% आबादी में विटामिन D का स्तर अपर्याप्त पाया गया है। The Lancet में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, शहरी जीवनशैली, गहरे रंग की त्वचा में कम अवशोषण और ऑफ़िस कल्चर मिलकर इस कमी को भारत की सबसे उपेक्षित स्वास्थ्य चुनौती बना रहे हैं।

विटामिन D की कमी भारत में एक चुपचाप फैलती महामारी बन चुकी है — और विडंबना यह कि यह वही देश है जहाँ साल में 300 दिन से ज़्यादा धूप खिलती है। The Lancet Global Health में प्रकाशित मेटा-एनालिसिस के अनुसार, भारत की लगभग 70 से 90 प्रतिशत आबादी में विटामिन D का स्तर 20 ng/mL से कम मिला — यानी चिकित्सकीय रूप से अपर्याप्त। यह आँकड़ा किसी ठंडे स्कैंडिनेवियन देश का नहीं, उष्णकटिबंधीय भारत का है।

इसे ऐसे समझिए: आपके ऑफ़िस में बैठे दस लोगों में से सात को शायद पता भी नहीं कि उनकी हड्डियाँ भीतर से खोखली हो रही हैं, उनकी इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ रही है, और वह बेवजह की थकान जो वे 'बिज़ी लाइफ़' का हिस्सा मानते हैं — दरअसल एक पोषण की कमी की चीख़ है।

धूप है, तो कमी कैसी?

यही वह सवाल है जो अक्सर लोगों को भ्रम में डालता है। AIIMS दिल्ली के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत में विटामिन D की कमी के पीछे कई कारक एक साथ काम करते हैं और इनमें से कोई भी अकेला 'विलेन' नहीं है — बल्कि सबका मिला-जुला असर घातक है।

पहला और सबसे बड़ा कारण है शहरी जीवनशैली का पूर्ण बदलाव। ICMR के राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षणों के अनुसार, दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में काम करने वाले पेशेवर सुबह 9 बजे AC ऑफ़िस में घुसते हैं और शाम 7 बजे बाहर निकलते हैं — जब UVB किरणें लगभग ग़ायब हो चुकी होती हैं। विटामिन D बनाने के लिए ज़रूरी UVB विकिरण दोपहर 11 से 2 बजे के बीच सबसे प्रभावी होता है, और यही वह समय है जब अधिकांश भारतीय किसी बंद इमारत के अंदर होते हैं।

मेलानिन: जो बचाता है, वही रोकता भी है

दूसरा कारण जैविक है और इस पर बहुत कम चर्चा होती है। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, गहरे रंग की त्वचा में मेलानिन की अधिक मात्रा UVB किरणों को त्वचा की गहरी परतों तक पहुँचने से रोकती है। भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश लोगों की त्वचा का रंग गहरा है — जो विकासवादी रूप से तो सूर्य से सुरक्षा का कवच है, लेकिन विटामिन D उत्पादन के लिए एक बाधा भी बन जाता है। नतीजा: एक भारतीय को उतनी ही विटामिन D बनाने के लिए किसी गोरी त्वचा वाले यूरोपीय की तुलना में 3 से 5 गुना ज़्यादा धूप चाहिए।

सनस्क्रीन और प्रदूषण — दोहरी दीवार

Indian Journal of Endocrinology and Metabolism में प्रकाशित अध्ययन बताते हैं कि SPF 30 का सनस्क्रीन विटामिन D उत्पादन को 95% तक कम कर देता है। त्वचा विशेषज्ञ सनस्क्रीन की सलाह देते हैं — और ठीक भी है, क्योंकि यह त्वचा कैंसर से बचाता है — लेकिन इसका एक अनकहा दुष्प्रभाव यह है कि विटामिन D सिंथेसिस लगभग ठप हो जाता है। इसके ऊपर दिल्ली-NCR जैसे प्रदूषित शहरों में वायु प्रदूषण की परत ही एक प्राकृतिक 'सनस्क्रीन' का काम करती है — Central Pollution Control Board के आँकड़ों के अनुसार, सर्दियों में दिल्ली का AQI लगातार 300 से ऊपर रहता है, जो UVB किरणों को और कमज़ोर करता है।

शाकाहार का पोषण गणित

तीसरा कारक आहार है। भारत की लगभग 40% आबादी शाकाहारी है — ICMR के अनुसार यह दुनिया का सबसे बड़ा शाकाहारी समुदाय है। विटामिन D के प्राकृतिक खाद्य स्रोत बेहद सीमित हैं: फ़ैटी मछली (सैल्मन, मैकरल), अंडे की जर्दी, और लिवर। शाकाहारी विकल्पों में मशरूम और फ़ोर्टिफ़ाइड दूध हैं, लेकिन इनमें मात्रा इतनी कम होती है कि सिर्फ़ आहार से रोज़ाना की ज़रूरत (600-800 IU) पूरी करना लगभग असंभव है।

चुपचाप टूटती हड्डियाँ, ख़ामोशी से गिरती इम्यूनिटी

सबसे ख़तरनाक बात यह है कि विटामिन D की कमी के लक्षण शुरू में लगभग अदृश्य होते हैं। AIIMS के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट के अनुसार, मरीज़ सालों तक थकान, कमर दर्द और मूड स्विंग्स को 'सामान्य' मानते रहते हैं। जब तक जाँच होती है, तब तक ऑस्टियोपीनिया या ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत हो चुकी होती है। Indian Journal of Medical Research के अनुसार, 50 साल से ऊपर की भारतीय महिलाओं में हर तीसरी को ऑस्टियोपोरोसिस है — और इसका सीधा संबंध विटामिन D की दीर्घकालिक कमी से है।

लेकिन हड्डियों से परे भी कहानी है। हाल के अध्ययन — जिनमें The BMJ और Nature में प्रकाशित शोध शामिल हैं — बताते हैं कि विटामिन D इम्यून सिस्टम के रेगुलेशन, हृदय स्वास्थ्य और यहाँ तक कि मानसिक स्वास्थ्य में भूमिका निभाता है। कोविड-19 के दौरान कई अध्ययनों ने विटामिन D के निम्न स्तर और गंभीर संक्रमण के बीच संबंध पाया — हालाँकि यह कारण-प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है, सहसंबंध चिंताजनक है।

क्या करें — और क्या न करें

ICMR और WHO दोनों की सिफ़ारिश स्पष्ट है: रोज़ 15-20 मिनट दोपहर की धूप (बिना सनस्क्रीन, बाहें और पैर खुले) विटामिन D का सबसे सस्ता और प्रभावी स्रोत है। लेकिन इंडिया हेराल्ड की पड़ताल का सबसे ज़रूरी निष्कर्ष यह है: बिना ब्लड टेस्ट (25-hydroxy Vitamin D) के विटामिन D सप्लीमेंट शुरू करना ख़तरनाक हो सकता है। अत्यधिक विटामिन D (हाइपरविटामिनोसिस D) किडनी में कैल्शियम जमाव, उल्टी और यहाँ तक कि किडनी फ़ेल्योर का कारण बन सकता है — यह किसी भी 'हेल्थ इन्फ़्लुएंसर' की सलाह से पहले डॉक्टर से जाँच कराने की अपील है।

असली सवाल नीतिगत भी है। भारत सरकार की फ़ूड फ़ोर्टिफ़िकेशन पॉलिसी — जो दूध और तेल में विटामिन D मिलाने की बात करती है — अभी भी व्यापक ज़मीनी क्रियान्वयन से कोसों दूर है। FSSAI ने 2024 में फ़ोर्टिफ़ाइड खाद्य पदार्थों के मानक अपडेट किए, लेकिन ग्रामीण भारत तक इनकी पहुँच सीमित बनी हुई है।

आने वाले महीनों में देखने लायक़ यह होगा कि क्या ICMR का प्रस्तावित राष्ट्रीय विटामिन D स्क्रीनिंग कार्यक्रम — जो स्कूलों और आँगनवाड़ियों में जाँच शुरू करने की बात करता है — सचमुच ज़मीन पर उतरता है, या फ़ाइलों में धूल खाता रहता है। जब तक यह न हो, तब तक भारत उस अजीब विडंबना में फँसा रहेगा जहाँ धूप तो छतों पर बरसती है, लेकिन हड्डियाँ अँधेरे में टूटती हैं।

यह रिपोर्ट पत्रकारिता उद्देश्य से है, चिकित्सा सलाह नहीं; कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

मुख्य बातें

  • भारत की 70-90% आबादी में विटामिन D का स्तर चिकित्सकीय रूप से अपर्याप्त है — The Lancet Global Health के अनुसार
  • गहरे रंग की त्वचा वाले भारतीय को गोरी त्वचा वाले यूरोपीय की तुलना में 3-5 गुना ज़्यादा धूप चाहिए — WHO रिपोर्ट
  • SPF 30 सनस्क्रीन विटामिन D उत्पादन को 95% तक रोक देता है — Indian Journal of Endocrinology and Metabolism
  • बिना ब्लड टेस्ट के विटामिन D सप्लीमेंट लेना किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है — AIIMS विशेषज्ञ
  • FSSAI ने 2024 में फ़ोर्टिफ़िकेशन मानक अपडेट किए, लेकिन ग्रामीण भारत तक पहुँच सीमित — ICMR

आँकड़ों में

  • भारत की 70-90% आबादी में विटामिन D स्तर 20 ng/mL से कम — The Lancet Global Health
  • SPF 30 सनस्क्रीन विटामिन D सिंथेसिस 95% तक कम करता है — Indian Journal of Endocrinology and Metabolism
  • 50+ उम्र की भारतीय महिलाओं में हर तीसरी को ऑस्टियोपोरोसिस — Indian Journal of Medical Research
  • भारतीय को यूरोपीय की तुलना में 3-5 गुना ज़्यादा धूप चाहिए विटामिन D के लिए — WHO
  • भारत की 40% आबादी शाकाहारी, प्राकृतिक विटामिन D स्रोत सीमित — ICMR

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