मान्यता है कि सूर्योदय से पहले स्नान किया जाता है। गंगा स्नान करना और भी शुभ माना जाता है। इससे पहले शरीर की तिल के तेल से मालिश करते हैं। माना जाता है कि इस तेल में लक्ष्मी और घर के जल में गंगा का निवास होता है।
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य ने बताया कि दीपक, जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन में ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। दीपावली के दिन परंपरा के अनुसार तिल के तेल के सात, 11, 21 या इनसे अधिक दीपक प्रज्वलित करके एक थाली में रखकर पूजन करने का विधान है।
इसके बाद घर की महिलाएं अपने हाथ से सोने—चांदी के आभूषण आदि सुहाग की संपूर्ण सामग्री लेकर मां लक्ष्मी को अर्पित करती हैं। उन्होंने कहा कि दीवाली की रात लक्ष्मी माता के सामने साबुत धनिया रखकर पूजा की जाती है।
अगले दिन इस साबुत धनिया को गमले में या बाग में बिखेरे ने की परंपरा है। माना जाता है कि साबुत धनिये से स्वस्थ पौधा निकल आता है। जिससे आर्थिक स्थिति उत्तम होती है।
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