भारत-इंग्लैंड तीसरे T20I में संजू सैमसन को लगातार दूसरी बार बेंच पर बिठाया गया, लेकिन कोच गौतम गंभीर कैमरों के सामने उनसे लंबी बातचीत करते दिखे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार गंभीर ने सैमसन को 'कंसोल' किया, जिससे सेलेक्शन पॉलिटिक्स और सैमसन के T20I भविष्य पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
दो मैच। दोनों में बेंच। और फिर कोच ख़ुद चलकर आया — हाथ कंधे पर, होंठ कान के पास। संजू सैमसन के क्रिकेट करियर में शायद ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं बना: जिस आदमी ने तुम्हें बाहर किया, वही तुम्हें समझा भी रहा है। सवाल यह है कि गौतम गंभीर ने सैमसन को क्या कहा — और इससे भी ज़रूरी, क्यों कहा।
भारत-इंग्लैंड T20I सीरीज़ का तीसरा मैच शुरू होने से पहले कैमरों ने वह लम्हा पकड़ लिया जो शायद ड्रेसिंग रूम में ही रहना चाहिए था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़ हेड कोच गंभीर ने सैमसन के पास जाकर काफ़ी देर तक बातचीत की — चेहरे गंभीर, बॉडी लैंग्वेज ऐसी जैसे कोई बड़ा भाई छोटे को तसल्ली दे रहा हो। रिपोर्ट में इसे 'consoling' बताया गया है। लेकिन क्रिकेट की दुनिया में 'तसल्ली' और 'चेतावनी' के बीच का फ़ासला अक्सर एक T20I पारी जितना पतला होता है।
सैमसन का रिकॉर्ड देखें तो तस्वीर और पेचीदा हो जाती है। T20I में उनके नाम शतक भी है और लगातार शून्य पर आउट होने का सिलसिला भी। इंडिया टुडे के अनुसार उन्हें इस सीरीज़ में लगातार दो मैचों से बाहर रखा गया — ऐसा खिलाड़ी जिसने 2024 में T20I शतक जड़ा था, अचानक ग़ैरज़रूरी हो गया। यहीं असली कहानी शुरू होती है।
इनसाइड टॉक
क्रिकेट हलकों में फुसफुसाहट यह है कि गंभीर की यह बातचीत महज़ दिलासा नहीं थी — बल्कि यह एक 'रोडमैप चैट' थी। ट्रेड में चर्चा है कि सैमसन को बताया गया कि उनकी जगह अभी सुरक्षित नहीं है, लेकिन उन्हें पूरी तरह बाहर भी नहीं किया जा रहा। यानी: "तुम प्लान में हो, पर प्लान A में नहीं।" फ़ैन्स के बीच भी मूड बँटा हुआ है — एक तरफ़ वो लोग हैं जो कहते हैं कि सैमसन को मौक़ों की कमी ने तोड़ा, दूसरी तरफ़ वो जो मानते हैं कि T20I में inconsistency बर्दाश्त करने की सीमा होती है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
गंभीर की कोचिंग शैली पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। वह उन कोचों में से हैं जो ड्रेसिंग रूम में सीधे बात करते हैं — कोई मीडिया फ़िल्टर नहीं, कोई PR का मुलम्मा नहीं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बताया गया कि गंभीर ने सैमसन के पास ख़ुद जाकर बात की, न कि किसी सपोर्ट स्टाफ़ के ज़रिए संदेश भिजवाया। यह छोटी बात लगती है, पर क्रिकेट में इसका मतलब बड़ा है — इसका मतलब है कि सैमसन को अभी 'राइट-ऑफ़' नहीं किया गया है।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी उतना ही सच है। लगातार दो मैचों में बाहर बैठना — वह भी इंग्लैंड जैसी सीरीज़ में, जहाँ हर मैच ऑडिशन है — यह साफ़ संकेत है कि टीम मैनेजमेंट ने अभी सैमसन को पहली पसंद नहीं माना है। T20I स्क्वाड में जगह मिलना एक बात है, प्लेइंग इलेवन में जगह बनाना बिलकुल दूसरी। और सैमसन अभी दूसरे ख़ाने में भी नहीं, तीसरे में खड़े हैं।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि गंभीर की यह बातचीत दरअसल दो काम कर रही थी — पहला, सैमसन का भरोसा इतना बनाए रखना कि वह अगले मौक़े पर टूटा हुआ न उतरें; और दूसरा, ड्रेसिंग रूम को यह संदेश देना कि बाहर बैठने वाले खिलाड़ी को भी इज़्ज़त मिलती है। गंभीर ने अपने खेल के दिनों में ख़ुद बेंच की तपिश झेली है — शायद इसीलिए वह जानते हैं कि चुप रहने से ज़्यादा ख़तरनाक कुछ नहीं।
अब सवाल यह है कि सैमसन के लिए आगे क्या है। अगर यह सीरीज़ चार या पाँच मैचों की है, तो क्या उन्हें अगले मैच में मौक़ा मिलेगा? या फिर यह 'consoling chat' असल में एक लंबी विदाई की शुरुआत है? विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर सीरीज़ में भारत की स्थिति सुरक्षित रही, तो सैमसन को बाद के मैचों में आज़माया जा सकता है — एक तरह का 'ऑडिशन स्लॉट'। लेकिन अगर टीम हार के दबाव में आई, तो सैमसन का इंतज़ार और लंबा हो सकता है।
क्रिकेट में बॉडी लैंग्वेज अक्सर स्कोरकार्ड से ज़्यादा बोलती है। गंभीर का सैमसन के पास जाना, हाथ रखना, आँखों में देखकर बात करना — यह किसी कोचिंग मैनुअल में नहीं लिखा। यह इंसानियत है, और शायद रणनीति भी। पर सैमसन के लिए असली सवाल यह नहीं कि कोच ने क्या कहा — असली सवाल यह है कि अगला मौक़ा मिले तो बल्ला क्या बोलेगा। क्योंकि क्रिकेट में तसल्ली तब तक काम करती है जब तक रन न आएँ — उसके बाद सिर्फ़ नंबर बोलते हैं।
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मुख्य बातें
- संजू सैमसन को भारत-इंग्लैंड T20I सीरीज़ में लगातार दूसरे मैच से बाहर रखा गया — इंडिया टुडे के अनुसार कोच गंभीर ने मैच से पहले उनसे लंबी बातचीत की।
- गंभीर का ख़ुद जाकर बात करना दर्शाता है कि सैमसन को पूरी तरह 'राइट-ऑफ़' नहीं किया गया — लेकिन प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह अभी सुरक्षित नहीं है।
- सैमसन का T20I भविष्य अब इस बात पर निर्भर करेगा कि अगला मौक़ा मिलने पर वे कितने रन बनाते हैं — तसल्ली से करियर नहीं चलता, प्रदर्शन से चलता है।
- गंभीर की कोचिंग शैली 'सीधी बात' वाली है — यह बातचीत ड्रेसिंग रूम कल्चर और बेंच पर बैठे खिलाड़ियों के मनोबल के लिहाज़ से अहम संकेत है।
आँकड़ों में
- संजू सैमसन को भारत-इंग्लैंड T20I सीरीज़ में लगातार 2 मैचों से प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया (इंडिया टुडे)।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: हेड कोच गौतम गंभीर और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ संजू सैमसन, भारतीय T20I टीम।
- क्या: तीसरे T20I मैच से पहले गंभीर ने बेंच पर बैठे सैमसन से लंबी, निजी बातचीत की — यह लगातार दूसरा मैच था जिसमें सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया।
- कब: भारत-इंग्लैंड तीसरा T20I, जुलाई 2026।
- कहाँ: भारत-इंग्लैंड T20I सीरीज़, भारत।
- क्यों: इंडिया टुडे के अनुसार गंभीर ने सैमसन को ड्रॉप करने के बावजूद उन्हें 'कंसोल' किया — माना जा रहा है कि यह सैमसन का भरोसा बनाए रखने और उन्हें भविष्य की योजना में शामिल रखने का संकेत था।
- कैसे: मैच से पहले डगआउट में गंभीर ने सैमसन के पास जाकर काफ़ी देर तक बात की, जिसका वीडियो वायरल हुआ और इंडिया टुडे समेत कई मीडिया हाउसों ने इसे रिपोर्ट किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गंभीर ने सैमसन से बातचीत क्यों की?
इंडिया टुडे के अनुसार गंभीर ने लगातार दो मैचों से बाहर बैठे सैमसन को 'कंसोल' करने के लिए ख़ुद जाकर बात की — यह उनका भरोसा बनाए रखने और ड्रेसिंग रूम के मनोबल के लिए अहम क़दम माना जा रहा है।
क्या संजू सैमसन का T20I करियर ख़तरे में है?
लगातार दो मैचों से बाहर रहना चिंताजनक है, लेकिन गंभीर की निजी बातचीत यह भी बताती है कि उन्हें पूरी तरह बाहर नहीं किया गया। उनका भविष्य अगले मौक़े पर प्रदर्शन से तय होगा।
सैमसन को प्लेइंग इलेवन से क्यों बाहर रखा गया?
टीम मैनेजमेंट ने सीरीज़ में अन्य विकल्पों को तरजीह दी — सैमसन की T20I में inconsistency को एक कारण माना जा रहा है, हालाँकि आधिकारिक बयान नहीं आया है।






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