तेलंगाना सरकार की नई EV सब्सिडी पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदारों को लगभग ₹5,000–₹10,000 तक की सीधी सब्सिडी और रजिस्ट्रेशन-रोड टैक्स छूट मिलने का प्रावधान है। लेकिन पेट्रोल वाहनों से मिलने वाले टैक्स राजस्व में कमी राज्य के वित्तीय संतुलन पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: तेलंगाना सरकार का परिवहन एवं ऊर्जा विभाग, राज्य के दोपहिया EV खरीदार, और EV निर्माता कंपनियाँ।
  • क्या: इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सीधी सब्सिडी, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट की नई नीति की घोषणा।
  • कब: 2025-26 के वित्तीय वर्ष में लागू, 2026 की पहली तिमाही से प्रभावी।
  • कहाँ: तेलंगाना राज्य — हैदराबाद, वारंगल, करीमनगर सहित सभी ज़िलों में लागू।
  • क्यों: केंद्र सरकार की FAME-III योजना के साथ तालमेल, राज्य में EV अपनाने की दर बढ़ाना, और वायु प्रदूषण घटाना।
  • कैसे: सब्सिडी सीधे खरीद के समय डीलर-लेवल पर अप-फ़्रंट डिस्काउंट के रूप में दी जाएगी, रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स RTO स्तर पर माफ़ होगा — राशि DBT या डीलर-क्लेम मॉडल से निपटाई जाएगी।

हैदराबाद की सड़कों पर एक अजीब-सी खामोशी तैरने लगी है — पेट्रोल पंप पर कतारें कुछ छोटी दिखती हैं, और शोरूम में चमचमाती इलेक्ट्रिक स्कूटरों के सामने भीड़ बढ़ रही है। तेलंगाना सरकार ने जब अपनी नई EV सब्सिडी पॉलिसी का ऐलान किया, तो सरकारी प्रेस रिलीज़ में "हरित क्रांति" और "जनता को राहत" जैसी भव्य पंक्तियाँ थीं। लेकिन असली कहानी प्रेस नोट के बाहर शुरू होती है — वहाँ जहाँ राज्य का खजाना, मध्यवर्ग की जेब, और ऑटो इंडस्ट्री का दबाव एक साथ टकराते हैं।

तेलंगाना सरकार के परिवहन विभाग के अनुसार, नई पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वाले हर व्यक्ति को ₹5,000 से ₹10,000 तक की सीधी सब्सिडी मिलेगी — यह राशि वाहन की बैटरी क्षमता और कीमत के हिसाब से तय होगी। इसके ऊपर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क पूरी तरह माफ़ कर दिया गया है। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, इससे एक औसत इलेक्ट्रिक स्कूटर की ऑन-रोड कीमत में कुल मिलाकर ₹12,000 से ₹18,000 तक की कमी आ सकती है। एक ₹1.1 लाख की Ola S1 Air या TVS iQube पर यह लगभग 12-16% की बचत है — कोई छोटी रकम नहीं उस शख़्स के लिए जो रोज़ 30 किलोमीटर ऑफ़िस आता-जाता है।

केंद्र सरकार की FAME-III (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles) योजना से मिलने वाली सब्सिडी पहले से मौजूद है। तेलंगाना की राज्य सब्सिडी इसके ऊपर "टॉप-अप" की तरह काम करती है। यानी एक ख़रीदार को केंद्र और राज्य, दोनों की सब्सिडी साथ-साथ मिल सकती है — बशर्ते वाहन FAME-III के तहत रजिस्टर्ड हो। NITI Aayog की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में EV दोपहिया की बिक्री 2024-25 में लगभग 11 लाख यूनिट रही, जिसमें तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 5-6% थी। नई सब्सिडी का मकसद इस हिस्सेदारी को 10% से ऊपर ले जाना है।

लेकिन यहीं कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है जो किसी सरकारी विज्ञापन में नहीं दिखेगा।

तेलंगाना का राजस्व ढाँचा समझिए: राज्य सरकार को वाहन बिक्री से तीन बड़े स्रोतों से पैसा मिलता है — रजिस्ट्रेशन फ़ीस, रोड टैक्स, और पेट्रोल-डीज़ल पर वैट/सेस। CAG (Comptroller and Auditor General) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना को वाहन रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स से सालाना लगभग ₹4,500-₹5,000 करोड़ का राजस्व मिलता है। इसमें दोपहिया वाहनों का हिस्सा क़रीब 35-40% है। अब अगर इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री तेज़ी से बढ़ती है और रजिस्ट्रेशन-रोड टैक्स माफ़ रहता है, तो इस मद में ₹500 करोड़ से अधिक का सालाना राजस्व नुकसान हो सकता है — और यह एक रूढ़िवादी अनुमान है।

पेट्रोल वैट की बात करें तो तस्वीर और भी पेचीदा है। तेलंगाना पेट्रोल पर लगभग 35.2% वैट वसूलता है — जो देश के सबसे ऊँचे स्लैब में से एक है। राज्य सरकार के बजट दस्तावेज़ों के मुताबिक, पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाला वैट राजस्व सालाना ₹15,000 करोड़ से अधिक है। हर इलेक्ट्रिक दोपहिया जो पेट्रोल स्कूटर की जगह लेता है, वह राज्य को हर साल लगभग ₹5,000-₹8,000 के पेट्रोल वैट राजस्व से वंचित करता है। अगर अगले तीन साल में 5 लाख पेट्रोल दोपहिया EV से रिप्लेस होते हैं, तो यह ₹250-₹400 करोड़ का अतिरिक्त सालाना नुकसान है।

कुल मिलाकर — रजिस्ट्रेशन छूट, रोड टैक्स माफ़ी, सीधी सब्सिडी का बोझ, और पेट्रोल वैट का क्षरण — राज्य के वित्त मंत्रालय को अगले 3-5 साल में ₹1,500-₹2,500 करोड़ के संचयी राजस्व गैप से जूझना पड़ सकता है।

सवाल यह है कि इस गैप को भरेगा कौन? राज्य सरकार के पास विकल्प सीमित हैं: या तो बिजली पर सेस बढ़ाओ (जो EV चार्जिंग को महँगा बनाकर सब्सिडी का मकसद ही बेकार कर देगा), या प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य स्थानीय करों पर दबाव बढ़ाओ, या केंद्र से अतिरिक्त ग्रांट की उम्मीद करो।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि तेलंगाना की यह सब्सिडी पॉलिसी जितनी ग्रीन-मोबिलिटी के बारे में है, उतनी ही चुनावी अंकगणित के बारे में भी है। तेलंगाना में अगले नगर निकाय और ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनाव नज़दीक हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया ख़रीदने वाला तबका — मध्यवर्ग, नौकरीपेशा, छोटे शहर का युवा — वही वोट बैंक है जो 2024 के बाद BRS और कांग्रेस दोनों के लिए निर्णायक बना है। ₹15,000 की बचत का वादा शोरूम में नहीं, बैलट बॉक्स पर कैश होता है। दिल्ली में AAP ने मुफ़्त बिजली-पानी से जो सियासी फ़ॉर्मूला बनाया, तेलंगाना में कांग्रेस उसी का EV-संस्करण आज़मा रही है।

इंडस्ट्री के नज़रिए से भी इसमें एक अनकही कहानी छिपी है। Society of Manufacturers of Electric Vehicles (SMEV) के अनुसार, राज्य-स्तरीय सब्सिडी से EV अपनाने की दर 25-40% तक बढ़ सकती है। लेकिन SMEV ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सब्सिडी अचानक बंद हो जाए — जैसा FAME-II के अंत में हुआ था — तो "डिमांड क्लिफ़" पैदा होता है: बिक्री रातोंरात गिर जाती है क्योंकि ख़रीदार सब्सिडी पर निर्भर हो चुके होते हैं, असली मार्केट प्राइसिंग पर नहीं।

तेलंगाना की पॉलिसी में सब्सिडी की अवधि 2028 तक रखी गई है — लेकिन कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है कि 2028 के बाद क्या होगा। क्या सब्सिडी धीरे-धीरे कम होगी (phased sunset), या एक दिन अचानक बंद? FAME-II का अनुभव बताता है कि अचानक बंद होने पर उद्योग और उपभोक्ता दोनों को झटका लगता है।

उपभोक्ता के लिए तात्कालिक गणित साफ़ है और आकर्षक है। एक ₹1 लाख की इलेक्ट्रिक स्कूटर पर — FAME-III की केंद्रीय सब्सिडी (₹10,000-₹15,000) + तेलंगाना की राज्य सब्सिडी (₹5,000-₹10,000) + रजिस्ट्रेशन-रोड टैक्स छूट (₹3,000-₹5,000) — कुल बचत ₹18,000 से ₹30,000 तक पहुँच सकती है। यह एक एंट्री-लेवल पेट्रोल स्कूटर और EV के बीच की कीमत का अंतर लगभग ख़त्म कर देता है।

लेकिन एक पहलू जो कोई सरकारी दस्तावेज़ नहीं बताता: चार्जिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर। Bureau of Energy Efficiency (BEE) के आँकड़ों के अनुसार, तेलंगाना में सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशनों की संख्या अभी 800 के आसपास है — जबकि राज्य में रजिस्टर्ड दोपहिया वाहनों की संख्या 1.5 करोड़ से ऊपर है। अगर EV अपनाने की दर सरकार के लक्ष्य के मुताबिक बढ़ती है, तो चार्जिंग इंफ़्रा में कम से कम ₹2,000-₹3,000 करोड़ का निवेश ज़रूरी होगा — जो अभी पॉलिसी में कहीं नहीं है।

आने वाले महीनों में देखने लायक़ कई बातें हैं। पहला, क्या तेलंगाना सरकार बिजली पर "ग्रीन सेस" जैसा कोई नया कर लगाकर राजस्व की भरपाई करेगी — महाराष्ट्र में इस पर चर्चा पहले से चल रही है। दूसरा, BRS विपक्ष में बैठकर इस पॉलिसी को "रेवड़ी" बताएगी या ख़ुद को इसकी "असली जनक" साबित करने की कोशिश करेगी — क्योंकि KCR सरकार ने 2021 में शुरुआती EV पॉलिसी ड्राफ़्ट तैयार किया था। तीसरा, और शायद सबसे अहम — क्या यह मॉडल अन्य राज्यों (विशेषकर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र) के लिए ब्लूप्रिंट बनेगा, या तेलंगाना अकेला यह प्रयोग करता रहेगा।

असली सवाल सब्सिडी का नहीं, टिकाऊपन का है। क्या कोई भी राज्य सरकार अनिश्चित काल तक ख़रीदारों को रियायत देकर EV अपनाने की दर बनाए रख सकती है — बिना यह तय किए कि जब पेट्रोल का राजस्व सूखे, तो कौन-सा नया स्रोत उसकी जगह लेगा? तेलंगाना ने दरवाज़ा खोल दिया है, लेकिन दरवाज़े के पीछे का कमरा अभी ख़ाली है।

यह रिपोर्ट पत्रकारिता है, निवेश या वित्तीय सलाह नहीं।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

आँकड़ों में

  • तेलंगाना को वाहन रजिस्ट्रेशन-रोड टैक्स से सालाना ₹4,500-₹5,000 करोड़ का राजस्व मिलता है — CAG रिपोर्ट।
  • तेलंगाना पेट्रोल पर 35.2% वैट वसूलता है — देश के सबसे ऊँचे स्लैब में।
  • तेलंगाना में सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशन लगभग 800 — BEE के आँकड़े।
  • FAME-III + राज्य सब्सिडी + टैक्स छूट मिलाकर ₹1 लाख की EV स्कूटर पर ₹18,000-₹30,000 की कुल बचत संभव।
  • भारत में EV दोपहिया बिक्री 2024-25 में लगभग 11 लाख यूनिट — NITI Aayog रिपोर्ट।

मुख्य बातें

  • तेलंगाना की नई EV सब्सिडी से इलेक्ट्रिक दोपहिया की ऑन-रोड कीमत में ₹18,000-₹30,000 तक की कमी संभव — एंट्री-लेवल पेट्रोल स्कूटर से प्राइस गैप लगभग ख़त्म।
  • रजिस्ट्रेशन-रोड टैक्स छूट और पेट्रोल वैट क्षरण मिलाकर राज्य को अगले 3-5 साल में ₹1,500-₹2,500 करोड़ का संचयी राजस्व नुकसान हो सकता है।
  • FAME-II का अनुभव बताता है कि सब्सिडी अचानक बंद होने पर 'डिमांड क्लिफ़' बनता है — तेलंगाना पॉलिसी में 2028 के बाद का रोडमैप ग़ायब है।
  • चार्जिंग इंफ़्रा में ₹2,000-₹3,000 करोड़ का निवेश ज़रूरी, पर पॉलिसी में इसका कोई ज़िक्र नहीं।
  • यह पॉलिसी जितनी ग्रीन मोबिलिटी के लिए है, उतनी ही निकाय चुनावों से पहले मध्यवर्गीय वोट बैंक साधने की सियासी चाल भी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तेलंगाना EV सब्सिडी के तहत दोपहिया पर कितनी बचत होगी?

केंद्रीय FAME-III सब्सिडी, तेलंगाना राज्य सब्सिडी (₹5,000-₹10,000), और रजिस्ट्रेशन-रोड टैक्स छूट मिलाकर एक ₹1 लाख की EV स्कूटर पर कुल ₹18,000-₹30,000 तक की बचत हो सकती है।

क्या तेलंगाना EV सब्सिडी FAME-III के साथ मिल सकती है?

हाँ, तेलंगाना की सब्सिडी केंद्र की FAME-III योजना के ऊपर 'टॉप-अप' के रूप में काम करती है — दोनों का लाभ एक साथ लिया जा सकता है, बशर्ते वाहन FAME-III के तहत पंजीकृत हो।

तेलंगाना EV सब्सिडी कब तक मान्य है?

पॉलिसी में सब्सिडी की अवधि 2028 तक रखी गई है, लेकिन 2028 के बाद सब्सिडी में कटौती (phased sunset) का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया है।

राज्य सरकार को EV सब्सिडी से कितना राजस्व नुकसान होगा?

रजिस्ट्रेशन-रोड टैक्स छूट, सीधी सब्सिडी और पेट्रोल वैट क्षरण मिलाकर अगले 3-5 साल में ₹1,500-₹2,500 करोड़ का संचयी राजस्व गैप बन सकता है — CAG और राज्य बजट दस्तावेज़ों पर आधारित अनुमान।

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