बॉलीवुड में 2026-27 में 12 से अधिक बायोपिक्स अनाउंस हो चुकी हैं — सुभाष चंद्र बोस से लेकर डॉन दाऊद इब्राहिम तक। Zee News की रिपोर्ट के मुताबिक अक्षय कुमार, विक्की कौशल, रणबीर कपूर जैसे बड़े सितारे इसमें शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या यह ट्रेंड ऑडियंस की माँग है या ओरिजिनल स्क्रिप्ट्स का अकाल।
बारह। पूरी बारह बायोपिक्स। एक-दो नहीं, दर्जन भर 'असली ज़िंदगियाँ' जो 2026-27 में बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर धमाकेदार एंट्री करने की तैयारी में हैं। Zee News की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक सुभाष चंद्र बोस से लेकर किशोर कुमार, दाऊद इब्राहिम से लेकर धीरूभाई अंबानी तक — हर बड़ा स्टार किसी न किसी 'रियल लाइफ हीरो' (या विलेन) की खाल में घुसने को बेताब है। और जब इतने सारे सितारे एक ही फॉर्मूले पर दाँव लगा रहे हों, तो सवाल सीधा है: क्या बॉलीवुड ने ओरिजिनल कहानियाँ लिखना ही बंद कर दिया?
ज़रा लिस्ट पर नज़र डालिए। Zee News रिपोर्ट करता है कि अक्षय कुमार सुभाष चंद्र बोस की भूमिका में दिखेंगे, विक्की कौशल किशोर कुमार बनेंगे, कार्तिक आर्यन कैप्टन अमरिंदर सिंह की बायोपिक में हैं, ऋतिक रोशन का नाम एक बड़ी बायोपिक से जुड़ रहा है, और रजनीकांत अपनी खुद की ज़िंदगी पर बन रही फिल्म में शामिल बताए जा रहे हैं। रणबीर कपूर पहले से ही एक महत्वाकांक्षी बायोपिक प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। यह सूची और लंबी है — लेकिन पैटर्न एक ही है: हर बड़ा स्टार, एक 'ट्रांसफॉर्मेशन लुक', और रिलीज़ से महीनों पहले पहला-लुक वायरल।
लेकिन रुकिए — अगर बायोपिक सच में 'गारंटीड हिट' होती, तो पिछले दो-तीन साल का ट्रैक रिकॉर्ड कुछ और ही कहता। याद कीजिए — 2024-25 में कई बायोपिक्स बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम गिरीं। दर्शकों ने टिकट नहीं ख़रीदे, क्रिटिक्स ने सवाल उठाए, और OTT पर भी इन फिल्मों को वो व्यूज़ नहीं मिले जिनकी उम्मीद थी। ट्रेड हलकों में माना जाता है कि बायोपिक का 'सक्सेस रेट' अब 30% से भी नीचे आ गया है — यानी हर दस में से सात बायोपिक्स अपना बजट भी नहीं निकाल पातीं।
इनसाइड टॉक
इंडस्ट्री की गलियारों में एक और बात ज़ोरों पर है — कास्टिंग की पॉलिटिक्स। ट्रेड सूत्रों के मुताबिक कई बायोपिक्स में असली शख्सियत के परिवार ने स्टार कास्टिंग पर आपत्ति जताई है। किसी ने कहा 'यह एक्टर हमारे इंसान को न्याय नहीं दे पाएगा', किसी ने राइट्स ही नहीं दिए। चर्चा है कि कम से कम दो-तीन बायोपिक्स ऐसी हैं जो कोर्ट-केस में फँस सकती हैं क्योंकि या तो लाइफ राइट्स का विवाद है या फिल्म में दिखाई गई घटनाओं पर विवाद। इंडस्ट्री इनसाइडर्स का कहना है कि एक बड़ी बायोपिक में लीड एक्टर को तीन बार बदला गया — पहले जिसे साइन किया गया उसने 'क्रिएटिव डिफरेंसेज़' का हवाला देकर छोड़ दिया।
(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
बायोपिक क्यों है 'सेफ बेट' — और क्यों नहीं
प्रोड्यूसर्स के लिए बायोपिक का गणित सीधा है: रेडीमेड स्क्रिप्ट (ज़िंदगी ख़ुद कहानी लिख देती है), बिल्ट-इन ऑडियंस (जिस शख्सियत के फ़ैन्स हैं, वो तो देखेंगे ही), और अवॉर्ड सर्किट पर चमकने का मौका। स्टार के लिए यह 'प्रेस्टीज प्रोजेक्ट' है — बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन, प्रोस्थेटिक्स, 'मैंने कितनी मेहनत की' वाले इंटरव्यूज़ — सब मिलाकर एक पैकेज बनता है जो फ़िल्मफ़ेयर से ऑस्कर तक की राह दिखाता है। विक्की कौशल का 'सैम बहादुर' (2023) और रणवीर सिंह का '83' — दोनों ने साबित किया कि एक अच्छी बायोपिक स्टार की इमेज ही बदल सकती है।
लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है। जब एक ही साल में दर्जन भर बायोपिक्स आएँ, तो दर्शक के पास विकल्पों की भरमार हो जाती है — और 'बायोपिक फ़टीग' एक सच्चा ख़तरा है। हॉलीवुड में यह पहले हो चुका है: 2018-19 में बायोपिक्स की बाढ़ आई, फिर ऑडियंस ने पीठ मोड़ ली। बॉलीवुड वही ग़लती दोहराने की कगार पर है।
असली सवाल — ओरिजिनलिटी का अकाल?
इंडिया हेराल्ड का मानना है कि बायोपिक्स की यह सुनामी दरअसल एक गहरी समस्या का लक्षण है — बॉलीवुड में ओरिजिनल स्क्रिप्ट्स पर भरोसे का संकट। जब तक 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर', 'अंधाधुन', 'तुम्बाड' जैसी ओरिजिनल फिल्में बनती रहीं, इंडस्ट्री ने साबित किया कि काल्पनिक कहानियाँ भी धमाल मचा सकती हैं। लेकिन जब बड़े बैनर्स ₹150-200 करोड़ का बजट लगाते हैं, तो वो 'ओरिजिनल' पर दाँव लगाने से डरते हैं — बायोपिक उनके लिए बीमा पॉलिसी है।
यह 'सेफ गेम' असल में उतना सेफ नहीं जितना लगता है। ट्रेड एनालिस्ट्स के अनुमान के मुताबिक अगर 2026-27 में ये 12 बायोपिक्स रिलीज़ हुईं, तो शायद तीन-चार ही अपना बजट वसूल कर पाएँगी — बाकी OTT पर 'शांत रिलीज़' का रास्ता पकड़ेंगी। वजह साफ है: दर्शक अब सिर्फ 'किसी बड़ी हस्ती की कहानी' नहीं देखना चाहता — वो कहानी कहने का तरीका, सिनेमैटिक विज़न और ईमानदारी माँगता है।
आगे क्या होगा — बायोपिक बबल फूटेगा?
आने वाले दिनों में देखने लायक यह होगा कि इनमें से कितनी बायोपिक्स असल में फ़्लोर पर जाती हैं और कितनी 'अनाउंसमेंट' बनकर रह जाती हैं। अगर 2026 की पहली दो-तीन बायोपिक्स बॉक्स ऑफिस पर फ़्लॉप हुईं, तो बाकी प्रोजेक्ट्स के प्रोड्यूसर रातोंरात रिलीज़ डेट आगे खिसका देंगे या OTT-डायरेक्ट का रास्ता चुनेंगे। फ़ैन्स का मूड पहले से ही मिला-जुला है — सोशल मीडिया पर 'बायोपिक थकान' एक रियल सेंटिमेंट है, जहाँ लोग पूछ रहे हैं कि 'क्या बॉलीवुड को अब नई कहानियाँ सोचने वाला कोई नहीं बचा?'
असली इम्तिहान यह है: क्या ये बायोपिक्स सिर्फ 'कॉस्ट्यूम ड्रामा + प्रोस्थेटिक्स शो' होंगी, या इनमें से कोई 'रांझणा' या 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' जैसी ऑथेंटिक सिनेमैटिक ताक़त दिखा पाएगी? अगर नहीं, तो 2027 तक बॉलीवुड का बायोपिक बबल वैसे ही फूट जाएगा जैसे एक दौर में रीमेक्स का बबल फूटा था — और दर्शक फिर वही सवाल पूछेगा: कहानी कहाँ है?
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मुख्य बातें
- Zee News के मुताबिक 2026-27 में बॉलीवुड में 12 से अधिक बायोपिक्स अनाउंस या प्रोडक्शन में हैं — अक्षय कुमार, विक्की कौशल, कार्तिक आर्यन, ऋतिक रोशन, रजनीकांत जैसे बड़े नाम शामिल।
- ट्रेड हलकों में चर्चा है कि बायोपिक्स का 'सक्सेस रेट' अब 30% से नीचे है — हर दस में से सात अपना बजट नहीं निकाल पातीं।
- कई बायोपिक्स में कास्टिंग विवाद और लाइफ राइट्स को लेकर कोर्ट-केस का ख़तरा मँडरा रहा है — इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार।
- बायोपिक्स की यह बाढ़ बॉलीवुड में ओरिजिनल स्क्रिप्ट पर भरोसे के संकट का लक्षण है — बड़े बजट वाले प्रोड्यूसर 'सेफ बेट' चुन रहे हैं।
- अगर 2026 की शुरुआती बायोपिक्स फ्लॉप हुईं, तो बाकी प्रोजेक्ट्स OTT-डायरेक्ट या शेल्फ़ का रास्ता पकड़ सकती हैं।
आँकड़ों में
- 2026-27 में बॉलीवुड में 12+ बायोपिक्स अनाउंस/प्रोडक्शन में — Zee News रिपोर्ट
- ट्रेड अनुमान: बायोपिक्स का सक्सेस रेट 30% से नीचे — 10 में से 7 बजट नहीं वसूल पातीं
- कई बायोपिक्स में लीड एक्टर 2-3 बार बदले गए — इंडस्ट्री सूत्र






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