उत्तर प्रदेश पर पिछले 13 वर्षों से नेतृत्व कर रही माजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए 2017 का चुनाव अब “तुम चलो, मैं आया” से अलग होता हुआ दिखाई दे रहा है| मायावती को जहाँ कुछ महीने पहले तक बसपा सत्ता का प्रबल दावेदार माना जा रहा था वहीँ कांग्रेस के आगमन के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए कठिन चुनौती कड़ी होती नज़र आ रही है|
इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी भी तगड़ा वार करने के लिए तैयार है| ऐसे में सवाल उठता है की क्या अखिलेश यादव अपनी साफ़ छवि और तेज़ काम करने के अंदाज़ के बावजूद दूसरी पारी जीतने में कामयाब हो पाएंगे? या फिर अपराध व कानून-व्यवस्था के वजह से अखिलेश पीछे रह जाएंगे? क्या राहुल गांधी भाजपा को निशाने पर लेने के साथ अखिलेश को भी कमजोर मुख्यमंत्री साबित कर पाएंगे?
क्या अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनावी समर में दो वरिष्ठ युवा नेताओं के बीच असली में जंग होगी? समाजवादी पार्टी इस बार भी अखिलेश यादव को आगे रखने का निर्णय ले चुकी है और उन्हें ही प्रदेश के 'युवा ह्रदय सम्राट' के तौर पर पेश किया जायेगा| उनके नेतृत्त्व को पार्टी में तो कोई चुनौती होने की उम्मीद नहीं है, परंतु कांग्रेस के उपाध्यक्ष और अमेठी के सांसद राहुल गांधी इस बार जिस तरह काम कर रहे है, उससे अखिलेश के लिए एक नया मोर्चा खुल गया है इसमें संदेह नहीं है|
अखिलेश यादव राजनीति में लगभग 16 साल पुराना है और इस वर्ष 43 वर्ष के हुए है– उन्होंने 2009 में कन्नौज से लोक सभा चुनाव जीतने के बाद अपनी पारी की शुरुआत की थी|