नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर पर J&K राज्य दर्जा बहाली के लिए धरने की घोषणा की है। फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने BJP समेत 52 दलों को आमंत्रित किया है और आरोप लगाया है कि इस विरोध-प्रदर्शन को 'तोड़फोड़' से कमज़ोर किया जा रहा है।
बात कश्मीर की हो रही है, लेकिन रणभूमि दिल्ली है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर पर J&K के राज्य दर्जे की बहाली के लिए जो धरना बुलाया है, वह महज़ एक विरोध-प्रदर्शन नहीं — यह भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील तार को दिल्ली के बीचोंबीच छेड़ने की कोशिश है। और इसकी जो ताइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ भव्यता गढ़ी गई है — 52 दलों को न्योता, ख़ुद BJP को भी बुलावा — वह किसी क्षेत्रीय शिकायत का स्वर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गठबंधन-निर्माण का दावा-पत्र है।
फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने जो चाल चली है, वह पुरानी दिल्ली दरबार की परंपरा में है — सत्ता से बेदख़ल नेता अपनी शिकायत को राजधानी के सबसे प्रतीकात्मक चौराहे पर ले जाता है ताकि उसकी गूँज संसद भवन तक पहुँचे। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, NC ने BJP को भी इस धरने का 'खुला न्योता' भेजा है — जानते हुए कि BJP कभी नहीं आएगी, लेकिन उसका इनकार ही NC का असली हथियार बन जाएगा।
यहाँ 'तोड़फोड़' का आरोप सबसे दिलचस्प है। NC का कहना है कि इस विरोध-प्रदर्शन को कमज़ोर किया जा रहा है। सवाल यह है — किसके द्वारा? ऊपरी तौर पर उँगली BJP-NDA की तरफ़ उठती है, लेकिन सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह भी है कि INDIA ब्लॉक के कुछ साथी ही इस मुद्दे पर खुलकर मंच साझा करने से बच रहे हैं। कांग्रेस का कश्मीर पर इतिहास उलझा हुआ है — अनुच्छेद 370 पर उसकी आधिकारिक स्थिति कभी एकदम स्पष्ट नहीं रही, और 2029 के चुनावी गणित में कश्मीर मुद्दा हिंदी बेल्ट में बोझ बन सकता है। ऐसे में कांग्रेस जंतर मंतर पर आएगी या सिर्फ़ ट्वीट से काम चलाएगी — यही देखने लायक़ होगा।
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पॉलिटिकल पल्स
परदे के पीछे की चर्चा कुछ और ही कहानी बयान करती है। ट्रेड-पंडितों और विश्लेषकों की नज़र में ओमर अब्दुल्ला दरअसल दो शतरंजें एक साथ खेल रहे हैं। पहली: J&K की जनता को दिखाना कि NC ही उनकी असली आवाज़ है — PDP की महबूबा मुफ़्ती को हाशिये पर धकेलना, और इंजीनियर रशीद जैसे नए खिलाड़ियों को 'दिल्ली तक पहुँच' के मामले में बौना साबित करना। दूसरी और ज़्यादा अहम शतरंज: 2029 के आम चुनावों से पहले INDIA ब्लॉक में 'मोरल लीडरशिप' का दावा ठोकना।
सोचिए — 52 दलों को एक मंच पर बुलाना छोटा काम नहीं। यह वही काम है जो कभी जयप्रकाश नारायण करते थे, जो वी.पी. सिंह ने किया था। NC का तर्क सीधा है: अगर मैं कश्मीर जैसे 'कठिन' मुद्दे पर 52 दलों को इकट्ठा कर सकता हूँ, तो विपक्षी एकता की कमान कौन सँभालेगा? इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यही है कि यह धरना जितना J&K के दर्जे के बारे में है, उतना ही 2029 में विपक्षी गठबंधन की 'कन्वीनर की कुर्सी' के बारे में भी है।
(यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
NDA का गणित और BJP की चुप्पी
BJP के लिए यह स्थिति ट्रैप जैसी है। अगर वह जंतर मंतर पर ध्यान देती है, तो NC को वैधता मिलती है। अगर अनदेखा करती है, तो विपक्ष का यह कहना आसान हो जाता है — 'देखो, BJP कश्मीर से डरती है।' टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने BJP को 'कास्ट अ वाइड नेट' की तर्ज़ पर बुलाया है — यह जानते हुए कि यह निमंत्रण दरअसल एक सार्वजनिक चुनौती है।
उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 20 जुलाई की तारीख़ पक्की करते हुए कहा कि यह 'लोकतांत्रिक अधिकार' की लड़ाई है — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार। लेकिन क्या लोकतांत्रिक अधिकार की यह माँग सचमुच दिल्ली के जंतर मंतर से पूरी होगी, या यह उस माँग को एक राष्ट्रीय ब्रांड में बदलने की कवायद है — फ़र्क़ पतला है, और NC उसी पतली लकीर पर चल रही है।
कांग्रेस का कशमकश — साथ आए या किनारा करे?
52 दलों में सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस का है। राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो' यात्रा कश्मीर से गुज़री थी, लेकिन अनुच्छेद 370 पर पार्टी की ज़ुबान हमेशा सधी रही है। हिंदी बेल्ट में — जहाँ 2029 की असली जंग होगी — 'कश्मीर को राज्य का दर्जा दो' नारा BJP के 'राष्ट्रवाद' के सामने राजनीतिक ज़हर बन सकता है। ऐसे में कांग्रेस की दुविधा साफ़ है: जंतर मंतर पर खड़े हों तो BJP हमला करेगी, न खड़े हों तो NC और क्षेत्रीय दल नाराज़ होंगे। विश्लेषकों का अनुमान है कि कांग्रेस शायद किसी वरिष्ठ नेता को भेजे, लेकिन राहुल गांधी ख़ुद न आएँ — यही 'सुरक्षित दूरी' की रणनीति होगी।
आगे क्या — 20 जुलाई के बाद की तस्वीर
अगर 20 जुलाई को सचमुच 52 में से 30-35 दल भी जंतर मंतर पर पहुँचे, तो यह 2024 के बाद विपक्षी एकता का सबसे बड़ा शक्ति-प्रदर्शन होगा। लेकिन अगर गिनती 10-15 पर अटकी, तो NC का 'तोड़फोड़' वाला आरोप ख़ुद उसके ख़िलाफ़ पलट जाएगा — लोग कहेंगे, दल आए ही नहीं तो तोड़फोड़ कैसी?
देखने वाली बात यह होगी: क्या AAP, TMC, DMK, RJD जैसे INDIA ब्लॉक के बड़े चेहरे ख़ुद आते हैं या सिर्फ़ प्रतिनिधि भेजते हैं? क्या PDP अलग रास्ता चुनती है? और सबसे अहम — क्या BJP इस धरने को अनदेखा करती है या संसद में 'जवाब' देकर NC को वह मंच दे देती है जो वह चाहती है?
जंतर मंतर पर 20 जुलाई को जो तस्वीर बनेगी, वह बताएगी कि कश्मीर का दर्द 2026 में भी राष्ट्रीय राजनीति की मुद्रा है — या सिर्फ़ अब्दुल्ला ख़ानदान की विरासत की ढाल।
आरोप रिपोर्ट में नामित स्रोतों के हवाले से हैं और जब तक अदालत का फ़ैसला न हो, अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- NC ने 20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर पर J&K राज्य दर्जा बहाली के लिए धरने का ऐलान किया है और BJP समेत 52 दलों को न्योता भेजा है — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
- फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि इस विरोध-प्रदर्शन को 'तोड़फोड़' से कमज़ोर किया जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि निशाना BJP पर है या INDIA ब्लॉक के ढुलमुल साथियों पर।
- यह धरना जितना J&K के दर्जे की माँग है, उतना ही 2029 आम चुनावों से पहले विपक्षी एकता में NC की 'मोरल लीडरशिप' का दावा ठोकने की कवायद भी है।
- कांग्रेस की दुविधा सबसे बड़ी है — हिंदी बेल्ट में कश्मीर मुद्दा BJP के 'राष्ट्रवाद' कार्ड के सामने राजनीतिक रूप से जोखिम भरा है।
- 20 जुलाई को जंतर मंतर पर कितने दल आते हैं, यह तय करेगा कि NC की चाल कामयाब हुई या 'तोड़फोड़' का आरोप ख़ुद उन पर पलट गया।
आँकड़ों में
- NC ने BJP समेत 52 राजनीतिक दलों को जंतर मंतर धरने का न्योता भेजा — टाइम्स ऑफ़ इंडिया
- 20 जुलाई 2026: जंतर मंतर पर J&K राज्य दर्जा बहाली धरने की तारीख़ — उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी द्वारा पुष्ट, टाइम्स ऑफ़ इंडिया
- अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद J&K का राज्य दर्जा केंद्र शासित प्रदेश में बदला गया
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने इस धरने का नेतृत्व किया है — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
- क्या: J&K को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग को लेकर जंतर मंतर पर सिट-इन प्रदर्शन का आयोजन, जिसमें BJP सहित 52 राजनीतिक दलों को न्योता — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
- कब: 20 जुलाई 2026 को — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
- कहाँ: नई दिल्ली का जंतर मंतर — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
- क्यों: अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद J&K को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था; NC का कहना है कि पूर्ण राज्य दर्जे के बिना लोकतंत्र अधूरा है — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
- कैसे: NC ने 52 दलों को पत्र लिखकर सिट-इन में शामिल होने का न्योता दिया; उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तारीख़ और जगह की पुष्टि की — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
NC का जंतर मंतर धरना कब और कहाँ होगा?
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर J&K राज्य दर्जा बहाली के लिए सिट-इन धरने का ऐलान किया है — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
NC ने कितने दलों को जंतर मंतर धरने के लिए बुलाया है?
फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने BJP समेत 52 राजनीतिक दलों को इस धरने में शामिल होने का न्योता दिया है — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार।
NC ने 'तोड़फोड़' का आरोप किस पर लगाया है?
NC ने कहा है कि उनके विरोध-प्रदर्शन को 'सैबोटाज' किया जा रहा है, हालाँकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आरोप सीधे BJP पर है या INDIA ब्लॉक के भीतर के ढुलमुल साथियों पर।
क्या BJP जंतर मंतर धरने में शामिल होगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP का शामिल होना लगभग असंभव है, क्योंकि J&K को केंद्र शासित प्रदेश बनाना उसकी ही नीति थी — NC का निमंत्रण दरअसल BJP के इनकार को एक सार्वजनिक चुनौती में बदलने की रणनीति है।



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