हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ ने कैमरे पर स्वीकार किया कि कश्मीर में कोई कब्रिस्तान ऐसी नहीं जहाँ पाकिस्तानी आतंकी दफ़न न हों। टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार यह वीडियो ISI-प्रॉक्सी रिश्ते में दरार और भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक हथियार बन सकता है।
कश्मीर की हर कब्रिस्तान में पाकिस्तानी आतंकी दफ़न हैं — यह बात किसी भारतीय जनरल ने नहीं, बल्कि ख़ुद हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ ने कैमरे पर कबूल की है। एक पल के लिए इस वाक्य को डूबने दीजिए: जिस संगठन ने तीन दशक तक ISI की कठपुतली बनकर कश्मीर में ख़ून बहाया, उसी का दूसरा सबसे बड़ा कमांडर अब अपने आक़ा की पोल खोल रहा है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार यह वीडियो हाल ही में सामने आया है जिसमें हिजबुल का डिप्टी चीफ़ साफ़ शब्दों में कहता है कि कश्मीर में पाकिस्तान का 'फुटप्रिंट' हर जगह है। हिंदुस्तान टाइम्स ने इस बयान को और विस्तार से रिपोर्ट करते हुए बताया कि कमांडर ने कहा — 'कश्मीर में कोई कब्रिस्तान ऐसी नहीं जहाँ पाकिस्तानी आतंकी दफ़न न हों।' यह सिर्फ़ एक वाक्य नहीं, यह इस्लामाबाद के तीन दशक के 'मोरल सपोर्ट' वाले झूठ पर लगा कुल्हाड़ी का वार है।
अब सवाल यह नहीं कि उसने क्या कहा — सवाल यह है कि यह कबूलनामा अभी क्यों आया। और इसका जवाब कश्मीर की कब्रिस्तानों में नहीं, रावलपिंडी के दफ़्तरों में दबी हुई तनख़्वाह की फ़ाइलों में छिपा है।
ISI-हिजबुल रिश्ते में दरार कहाँ से आई?
पिछले कुछ सालों में FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आने की जद्दोजहद में पाकिस्तान ने — कम से कम काग़ज़ पर — आतंकी फंडिंग के नल कसे हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ISI की फंडिंग पाइपलाइन में आई कमी ने ज़मीनी स्तर पर प्रॉक्सी गुटों के कमांडरों में गहरा असंतोष पैदा किया है। जब पैसा आता था तो वफ़ादारी भी आती थी — जब पैसा सूखा, तो ज़ुबान खुली।
हिजबुल मुजाहिदीन पहले ही संगठनात्मक रूप से कमज़ोर हो चुका है। भारतीय सुरक्षा बलों ने पिछले एक दशक में इसके शीर्ष नेतृत्व को लगभग ख़त्म कर दिया है। ऐसे में जो बचे हैं, वे दो तरफ़ा निचोड़ में हैं — एक तरफ़ भारतीय फ़ोर्सेज़ का दबाव, दूसरी तरफ़ ISI की सिकुड़ती मदद। इस दोहरी मार ने वफ़ादारी की चूलें हिला दी हैं।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट है कि यह वीडियो 'अचानक' नहीं लीक हुआ — बल्कि इसका सामने आना एक कैलकुलेटेड मूव हो सकता है। ट्रेड हलकों में चर्चा है कि भारतीय एजेंसियों के पास ऐसे कई कबूलनामे हो सकते हैं, और उन्हें सही 'डिप्लोमैटिक मौसम' में सामने लाया जा रहा है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
दिल्ली के लिए इस वीडियो की क़ीमत सिर्फ़ घरेलू नहीं है। जो बात भारत बरसों से UN और FATF के मंचों पर कहता आया है — कि पाकिस्तान सीमापार आतंकवाद का स्टेट स्पॉन्सर है — वही बात अब पाकिस्तान के अपने 'एसेट' की ज़ुबान से निकल रही है। यह किसी भारतीय दस्तावेज़ से ज़्यादा ताक़तवर सबूत है, क्योंकि इसमें 'स्रोत की विश्वसनीयता' पर कोई सवाल नहीं उठा सकता — आरोपी ख़ुद गवाह बन गया है।
दिल्ली के हाथ में 'ब्रह्मास्त्र' — और उसका सही निशाना
इस कबूलनामे के कूटनीतिक इस्तेमाल की संभावनाएँ कई हैं। FATF की अगली समीक्षा में, UN के काउंटर-टेररिज़्म फ़ोरम में, और द्विपक्षीय बातचीत में भारत इस वीडियो को 'एग्ज़िबिट A' की तरह पेश कर सकता है। जब पाकिस्तान का अपना प्रॉक्सी कमांडर कह रहा है कि हर कब्रिस्तान में पाकिस्तानी लड़ाके दफ़न हैं, तो इस्लामाबाद का 'नॉन-स्टेट एक्टर्स' वाला बहाना ध्वस्त हो जाता है।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि आने वाले हफ़्तों में नई दिल्ली इस वीडियो को कई स्तरों पर इस्तेमाल करेगी — पहला, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करने के लिए; दूसरा, कश्मीर में अभी भी सक्रिय स्लीपर सेल्स पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए — कि अगर तुम्हारा अपना कमांडर तुम्हें बेच रहा है, तो ISI तुम्हारी क्या परवाह करता है; और तीसरा, घरेलू राजनीति में उन आवाज़ों को ख़ामोश करने के लिए जो कश्मीर में 'पाकिस्तान का हाथ' बताने को प्रोपेगंडा कहती थीं।
बड़ा सवाल — बगावत या ट्रैप?
लेकिन एक और कोण है जिसे नज़रअंदाज़ करना ख़तरनाक होगा। क्या यह कबूलनामा सचमुच 'बगावत' है, या ISI की ही कोई नई चाल? ख़ुफ़िया जगत में 'कंट्रोल्ड लीक' कोई नई बात नहीं — कभी-कभी एजेंसियाँ अपने ही एजेंट से ऐसा बयान दिलवाती हैं ताकि दूसरा पक्ष ग़लत दिशा में दौड़े। हालाँकि इस मामले में कमांडर की भाषा में जो कड़वाहट और हताशा झलकती है, वह स्क्रिप्टेड कम और असली ज़्यादा लगती है।
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पाकिस्तान की तरफ़ से इस वीडियो पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है — और शायद आएगी भी नहीं, क्योंकि हर जवाब इस कबूलनामे को और ज़्यादा वैधता देगा। इस्लामाबाद के लिए चुप रहना भी मुश्किल है और बोलना भी — यही दिल्ली की असली जीत है।
कश्मीर की उन कब्रिस्तानों में दफ़न पाकिस्तानी लड़ाकों को कभी इस्लामाबाद ने 'शहीद' कहा, कभी 'मुजाहिद', कभी 'ग़ैर-सरकारी तत्व'। अब उनका अपना कमांडर उन्हें 'पाकिस्तानी आतंकी' कह रहा है। जब अपने ही गवाह पलट जाएँ, तो मुक़दमा जीतना मुश्किल हो जाता है — और ISI का यह मुक़दमा अब बुरी तरह कमज़ोर पड़ चुका है। सवाल बस इतना है: क्या दिल्ली इस गवाही का इस्तेमाल सिर्फ़ प्रेस कॉन्फ्रेंस में करेगी, या जिनीवा और न्यूयॉर्क के उन कमरों में जहाँ फ़ैसले होते हैं?
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मुख्य बातें
- हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ ने कैमरे पर माना कि कश्मीर की हर कब्रिस्तान में पाकिस्तानी आतंकी दफ़न हैं — पाकिस्तान के 'मोरल सपोर्ट' वाले दावे को उसके अपने प्रॉक्सी ने ध्वस्त किया (टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स)
- FATF दबाव और ISI की सिकुड़ती फंडिंग ने प्रॉक्सी गुटों में असंतोष पैदा किया है — वफ़ादारी पैसे के साथ सूखी
- भारत इस वीडियो को UN, FATF और द्विपक्षीय मंचों पर 'एग्ज़िबिट A' के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है
- पाकिस्तान के लिए चुप रहना भी मुश्किल और जवाब देना भी — हर प्रतिक्रिया कबूलनामे को और वैधता देगी
- कश्मीर में सक्रिय स्लीपर सेल्स पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव गहरा होगा — अपने ही कमांडर का भरोसा टूटने का संदेश
आँकड़ों में
- हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ के अनुसार कश्मीर में कोई कब्रिस्तान ऐसी नहीं जहाँ पाकिस्तानी आतंकी दफ़न न हों (हिंदुस्तान टाइम्स)
- हिजबुल मुजाहिदीन भारत में प्रतिबंधित संगठन है जिसने तीन दशकों से अधिक समय तक ISI-समर्थित प्रॉक्सी युद्ध चलाया (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: प्रतिबंधित संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का डिप्टी चीफ (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
- क्या: कैमरे पर कबूल किया कि कश्मीर की हर कब्रिस्तान में पाकिस्तानी आतंकी दफ़न हैं — पाकिस्तान की सीधी भूमिका का स्वीकारोक्ति (हिंदुस्तान टाइम्स)
- कब: जुलाई 2026 में वीडियो सार्वजनिक हुआ (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
- कहाँ: कश्मीर, जहाँ हिजबुल मुजाहिदीन सक्रिय रहा है (हिंदुस्तान टाइम्स)
- क्यों: ISI की फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट में कमी से प्रॉक्सी गुटों में असंतोष बढ़ा है — विश्लेषकों का मानना है कि यह आंतरिक बगावत का संकेत है
- कैसे: हिजबुल कमांडर ने वीडियो में खुलकर पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी और उनकी मौतों का ज़िक्र किया, जो ISI के दशकों के इनकार को सीधे काटता है (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ ने वीडियो में क्या कहा?
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा कि कश्मीर में कोई कब्रिस्तान ऐसी नहीं जहाँ पाकिस्तानी आतंकी दफ़न न हों — यह पाकिस्तान की सीधी भूमिका का स्वीकारोक्ति है।
यह वीडियो अभी क्यों सामने आया?
विश्लेषकों का मानना है कि FATF दबाव से ISI की फंडिंग सिकुड़ी है जिससे प्रॉक्सी गुटों में असंतोष बढ़ा है। कुछ सुरक्षा हलकों में यह भी चर्चा है कि इसका सामने आना कैलकुलेटेड हो सकता है।
भारत इस कबूलनामे का कूटनीतिक इस्तेमाल कैसे कर सकता है?
भारत इसे FATF समीक्षा, UN काउंटर-टेररिज़्म फ़ोरम और द्विपक्षीय वार्ता में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ठोस सबूत के तौर पर पेश कर सकता है — क्योंकि यह पाकिस्तान के अपने प्रॉक्सी की ज़ुबान से निकला है।
क्या पाकिस्तान ने इस वीडियो पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।







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