कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रनवे विस्तार के रास्ते में एक मस्जिद बाधा बन गई है। बीजेपी नेता समिक भट्टाचार्य ने इसे ममता सरकार का 'तुष्टिकरण' बताया है, जबकि TMC इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का हथकंडा कह रही है। यह विवाद अब विमानन विस्तार से ज़्यादा बंगाल की चुनावी ज़मीन का मसला बन चुका है।

एक रनवे जिसे लंबा होना था, एक मस्जिद जो रास्ते में खड़ी है, और दो पार्टियाँ जो इस एक ढाँचे को अपने-अपने झंडे की तरह लहरा रही हैं — कोलकाता एयरपोर्ट का यह विवाद अब सिर्फ़ विमानन इंजीनियरिंग का मसला नहीं रहा। यह बंगाल की सियासत का ताज़ा रणभूमि है, जहाँ 'विकास' और 'तुष्टिकरण' के नारे आमने-सामने हैं।

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रनवे का विस्तार करना चाहता है — यह योजना बढ़ते हवाई यातायात और पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए ज़रूरी मानी जा रही है। लेकिन रनवे के विस्तार मार्ग पर एक मस्जिद खड़ी है, और इसी बिंदु पर पूरा मामला तकनीकी से सियासी हो गया।

कोलकाता BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनाने की कोशिश की है। News18 के मुताबिक़ भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार जानबूझकर मस्जिद के स्थानांतरण में अड़चन डाल रही है क्योंकि उनकी पार्टी अल्पसंख्यक वोटबैंक को नाराज़ नहीं करना चाहती। उन्होंने इसे 'राष्ट्रीय हित बनाम तुष्टिकरण' के फ़्रेम में पेश किया — एक ऐसा शब्द जो BJP के राष्ट्रीय चुनावी शब्दकोश में सबसे धारदार हथियारों में शुमार है।

लेकिन ज़रा एक क़दम पीछे हटकर देखें। भारत में हवाईअड्डा विस्तार के लिए धार्मिक ढाँचों के स्थानांतरण का इतिहास नया नहीं है। मुंबई, चेन्नई, लखनऊ — कई शहरों में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे हटाए गए हैं, और ज़्यादातर मामलों में यह प्रशासनिक प्रक्रिया, मुआवज़े और पुनर्स्थापन की बातचीत से सुलझा है। सवाल यह नहीं कि मस्जिद हट सकती है या नहीं — भारतीय क़ानून में इसके लिए स्थापित तरीक़े हैं। असली सवाल यह है कि इसमें देरी क्यों है, और इस देरी को कौन अपने पक्ष में भुना रहा है।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में जो फुसफुसाहट है, वह कुछ यूँ है: BJP को बंगाल में एक ऐसे मुद्दे की तलाश थी जो 'विकास बनाम तुष्टिकरण' के उसके राष्ट्रीय नैरेटिव को बंगाल की ज़मीन पर उतार सके — और यह मस्जिद विवाद उस ख़ाली जगह में बिल्कुल फ़िट बैठ गया। दूसरी ओर, TMC के लिए यह रक्षात्मक स्थिति है: अगर वह मस्जिद हटवाती है तो अल्पसंख्यक नाराज़, और अगर नहीं हटवाती तो BJP का 'तुष्टिकरण' वाला आरोप और मज़बूत होता है। (यह इंडस्ट्री और पार्टी हलकों में चल रही चर्चा और अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

ट्रेड और पॉलिटिकल एनालिस्ट हलकों में यह भी चर्चा है कि समिक भट्टाचार्य को यह मुद्दा उठाने का 'ग्रीन सिग्नल' दिल्ली से मिला — क्योंकि राष्ट्रीय BJP नेतृत्व बंगाल में 2026 के नगरपालिका और पंचायत चुनावों से पहले एक ताज़ा पोलराइज़िंग एजेंडा चाहता था। संदीपानपुर से साल्ट लेक तक, बंगाल BJP के कार्यकर्ताओं में इस मुद्दे पर उत्साह साफ़ दिख रहा है।

TMC ने अपनी तरफ़ से इसे 'सांप्रदायिक एजेंडा' और 'केंद्र सरकार की नाकामी को छुपाने का बहाना' बताया है। हालाँकि, TMC की ओर से अब तक कोई स्पष्ट टाइमलाइन या एक्शन प्लान नहीं आया है कि मस्जिद स्थानांतरण पर राज्य सरकार की आधिकारिक स्थिति क्या है — और यही चुप्पी BJP को सबसे ज़्यादा हवा दे रही है।

इस पूरे विवाद में इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है: यह विवाद अब 'एयरपोर्ट बनाम मस्जिद' का नहीं रहा — यह 2026-27 के बंगाल चुनावी कैलेंडर का ट्रेलर है। BJP को एक ऐसा सिंबॉलिक इश्यू चाहिए था जो राष्ट्रीय मीडिया में भी चले और ज़मीन पर भी गूँजे — मस्जिद वाला एंगल दोनों बॉक्स टिक करता है। TMC के लिए ख़तरा यह है कि अगर वह इस मामले को लंबा खिंचने देती है, तो 'विकास-विरोधी' का ठप्पा लग सकता है — और अगर जल्दी सुलझाती है, तो BJP कहेगी कि 'दबाव में झुकी।'

आने वाले हफ़्तों में देखने लायक़ यह होगा: क्या AAI कोई अल्टीमेटम देती है, क्या केंद्र सरकार सीधे हस्तक्षेप करती है, या TMC चुपचाप मस्जिद कमेटी से बातचीत कर पुनर्स्थापन का रास्ता निकालती है। अगर मामला कोर्ट में पहुँचा — जो संभव है — तो यह महीनों खिंच सकता है, और दोनों पार्टियाँ उतने दिन इसे अपने चुनावी कैंपेन में बजाती रहेंगी।

एक बात तय है: न तो BJP को रनवे की चिंता उतनी है जितनी दिखाई जा रही है, न TMC को मस्जिद की — दोनों को असल चिंता सिर्फ़ उस वोट की है जो अगले चुनाव में गिनी जाएगी। कोलकाता का रनवे चाहे जब बने, सियासत का रनवे तो बन चुका है — सवाल बस यह है कि इस पर पहले कौन टेकऑफ़ करेगा।

आरोप यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से रिपोर्ट किए गए हैं और जब तक अदालत का फ़ैसला न हो, अप्रमाणित रहते हैं; न्यायालय में लंबित मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

मुख्य बातें

  • AAI को कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के रास्ते में मस्जिद हटाने या स्थानांतरित करने की ज़रूरत है — भारत में ऐसा पहले भी कई शहरों में हो चुका है, यह प्रशासनिक रूप से संभव है
  • BJP नेता समिक भट्टाचार्य ने इसे 'राष्ट्रीय हित बनाम तुष्टिकरण' का मुद्दा बनाया — यह BJP के राष्ट्रीय नैरेटिव को बंगाल की ज़मीन पर उतारने की कोशिश है
  • TMC ने अभी तक मस्जिद स्थानांतरण पर कोई स्पष्ट एक्शन प्लान नहीं दिया — यही चुप्पी BJP को सबसे ज़्यादा हवा दे रही है
  • यह विवाद 2026-27 के बंगाल चुनावी कैलेंडर का ट्रेलर है — दोनों पार्टियों के लिए यह एयरपोर्ट से ज़्यादा वोट का मसला है

आँकड़ों में

  • कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाईअड्डा पूर्वी भारत का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है और AAI की विस्तार योजना में प्राथमिकता सूची में है — News18 रिपोर्ट
  • भारत में मुंबई, चेन्नई, लखनऊ समेत कई शहरों में एयरपोर्ट विस्तार के लिए धार्मिक ढाँचों का सफल स्थानांतरण हो चुका है

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: AAI (भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण), कोलकाता BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, TMC और ममता बनर्जी सरकार
  • क्या: कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के रास्ते में स्थित एक मस्जिद को लेकर सियासी विवाद भड़का; BJP ने इसे तुष्टिकरण बताया
  • कब: 2026, हालिया हफ़्तों में विवाद तेज़ हुआ — News18 की रिपोर्ट के अनुसार
  • कहाँ: कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, पश्चिम बंगाल
  • क्यों: AAI की विस्तार योजना के तहत रनवे लंबा करने के लिए मस्जिद के स्थानांतरण या ध्वस्त करने की ज़रूरत; राज्य सरकार की अनुमति में देरी से सियासी आरोप-प्रत्यारोप शुरू
  • कैसे: BJP ने राज्य सरकार पर अल्पसंख्यक वोटबैंक के चलते मस्जिद हटाने से बचने का आरोप लगाया; TMC ने इसे सांप्रदायिक एजेंडा बताकर खारिज किया

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कोलकाता एयरपोर्ट विस्तार में मस्जिद कैसे बाधा बनी?

AAI की रनवे विस्तार योजना के मार्ग पर एक मस्जिद स्थित है जिसे हटाना या स्थानांतरित करना ज़रूरी है। राज्य सरकार की ओर से इस पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होने से विवाद पैदा हुआ — News18 की रिपोर्ट के अनुसार।

समिक भट्टाचार्य ने इस मुद्दे पर क्या कहा?

कोलकाता BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ममता सरकार पर अल्पसंख्यक वोटबैंक के कारण मस्जिद स्थानांतरण में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया और इसे 'राष्ट्रीय हित बनाम तुष्टिकरण' का मामला बताया।

क्या भारत में एयरपोर्ट विस्तार के लिए पहले धार्मिक ढाँचे हटाए गए हैं?

हाँ, मुंबई, चेन्नई और लखनऊ समेत कई शहरों में मंदिर, मस्जिद और अन्य धार्मिक ढाँचों का सफलतापूर्वक स्थानांतरण हो चुका है — यह प्रशासनिक प्रक्रिया, मुआवज़े और पुनर्स्थापन से संभव है।

इस विवाद का बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

यह मुद्दा 2026-27 के बंगाल चुनावों से पहले BJP के 'तुष्टिकरण बनाम विकास' एजेंडे का हिस्सा बन चुका है, जबकि TMC के लिए यह दोधारी तलवार है — हर विकल्प में सियासी जोखिम है।

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