आमिर खान और कबीर खान फिर एक साथ आ रहे हैं — इस बार भारत के सबसे बड़े रेस्क्यू मिशन की अनकही कहानी पर। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रोजेक्ट सालों से होल्ड पर था। लाल सिंह चड्ढा और सितारे ज़मीन पर जैसी फ्लॉप्स के बाद यह आमिर के करियर का 'डू-ऑर-डाई' दाँव माना जा रहा है।
दो फ्लॉप्स, एक घायल ब्रांड, और अब एक ऐसी कहानी जिसे आमिर खान ने — इंडस्ट्री सूत्रों की मानें तो — सालों तक तिजोरी में बंद रखा। आमिर खान और कबीर खान की जोड़ी फिर साथ आ रही है, और इस बार निशाने पर है भारत का सबसे बड़ा रेस्क्यू मिशन। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रोजेक्ट अब आधिकारिक तौर पर आगे बढ़ रहा है।
सवाल यह नहीं कि कहानी क्या है — सवाल यह है कि यह कहानी अभी क्यों, और आमिर ने इसे इतने सालों तक क्यों रोके रखा।
कौन सा रेस्क्यू मिशन — और 'एयरलिफ्ट' का साया
जब भी बॉलीवुड में 'भारत का सबसे बड़ा रेस्क्यू मिशन' कहा जाता है, दिमाग सीधे 1990 के कुवैत संकट पर जाता है — जब भारत सरकार ने करीब 1,70,000 भारतीयों को युद्धग्रस्त कुवैत से निकाला था। यह दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक एयरलिफ्ट ऑपरेशन था, जिसे गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है। 2016 में अक्षय कुमार की 'एयरलिफ्ट' ने इसी कहानी को बॉक्स ऑफ़िस पर भुनाया — फिल्म ने करीब ₹225 करोड़ वर्ल्डवाइड कमाए थे (बॉक्स ऑफ़िस इंडिया के अनुसार)।
अब अगर आमिर-कबीर की जोड़ी भी इसी ऑपरेशन पर फिल्म बना रही है, तो बड़ा सवाल खड़ा होता है — अक्षय ने जो कहानी 'बता दी', उसे दोबारा बताने की ज़रूरत क्यों? और अगर यह कोई दूसरा मिशन है — जैसे 2015 का यमन ऑपरेशन राहत, जिसमें भारतीय नौसेना ने 4,640 भारतीयों और 26 देशों के नागरिकों को निकाला (रक्षा मंत्रालय के आँकड़े) — तो यह साफ़ क्यों नहीं किया गया? ट्रेड हलकों में चर्चा है कि आमिर ने जानबूझकर कहानी का ब्योरा अभी छिपाकर रखा है — ताकि 'एयरलिफ्ट' वाली तुलना से बचा जा सके।
इनसाइड टॉक
इंडस्ट्री की गलियारों में जो बात सबसे ज़्यादा घूम रही है, वह यह है कि आमिर के पास यह स्क्रिप्ट 'बजरंगी भाईजान' (2015) के तुरंत बाद से थी। तब कबीर खान ने कथित तौर पर यह आइडिया आमिर को पिच किया था, लेकिन आमिर ने 'दंगल' (2016) और फिर 'ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान' (2018) को प्राथमिकता दी। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि 'एयरलिफ्ट' की सफलता ने भी इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालने में भूमिका निभाई — कोई दूसरी 'कुवैत फिल्म' उस समय बनाना व्यावसायिक रूप से जोखिम भरा था।
लेकिन अब हालात बदले हैं। आमिर खान का ब्रांड 2022 के बाद से गिरावट में है। 'लाल सिंह चड्ढा' ने अनुमानित ₹120 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान दिया (Bollywood Hungama के अनुसार), और 'सितारे ज़मीन पर' भी बॉक्स ऑफ़िस पर उम्मीदों से काफ़ी पीछे रही। फ़ैन्स के बीच एक तीखा सवाल घूम रहा है — क्या 'मिस्टर परफ़ेक्शनिस्ट' का जादू ख़त्म हो गया?
(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
प्रोडक्शन पॉलिटिक्स — YRF बनाम परफेक्ट ऑक्टेव
एक और पहलू जो चर्चा में है — प्रोडक्शन हाउस का सवाल। आमिर की अपनी प्रोडक्शन कंपनी आमिर खान प्रोडक्शंस और कबीर खान की मिनी फ़िल्म्स के अलावा, ट्रेड सर्कल में यह अटकलें भी हैं कि क्या इस प्रोजेक्ट में YRF या कोई बड़ा स्टूडियो को-प्रोड्यूसर के तौर पर आएगा। 'ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान' के बाद YRF और आमिर के रिश्ते पेशेवर रूप से ठंडे पड़े थे — विश्लेषकों का कहना है कि उस फिल्म की विफलता ने दोनों पक्षों को सतर्क कर दिया। अभी तक प्रोडक्शन हाउस की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कबीर खान का पैट्रियॉटिक फ़ॉर्मूला बनाम आमिर का 'मैसेज' ब्रांड
इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताक़त — और सबसे बड़ा जोखिम — दोनों की कहानी कहने की शैली का टकराव है। कबीर खान ने 'बजरंगी भाईजान' (₹900+ करोड़ वर्ल्डवाइड, बॉक्स ऑफ़िस इंडिया), '83' और 'एक था टाइगर' से पैट्रियॉटिक ज़ॉनर में अपनी पहचान बनाई है — उनकी फिल्मों में भावुकता और राष्ट्रप्रेम का सीधा, दिल को छूने वाला मिश्रण होता है। दूसरी तरफ़ आमिर खान का ब्रांड हमेशा 'सोशल मैसेज' रहा है — 'तारे ज़मीन पर', 'PK', '3 इडियट्स' — जहाँ मनोरंजन के साथ एक सामाजिक सवाल उठाया जाता है।
रेस्क्यू मिशन की कहानी में यह दोनों रंग कैसे घुलेंगे? अगर कबीर खान की भावुक देशभक्ति हावी हुई, तो यह 'एयरलिफ्ट' का रीमेक लगेगा। अगर आमिर का 'सिस्टम पर सवाल' वाला तेवर ज़्यादा रहा, तो पैट्रियॉटिक दर्शक वर्ग नाराज़ हो सकता है — ठीक वैसे जैसे 'लाल सिंह चड्ढा' के समय हुआ था। इंडिया हेराल्ड की पढ़ यह है कि इस फिल्म की असली लड़ाई स्क्रिप्ट या बजट में नहीं, बल्कि टोन में होगी — और वही इसकी क़िस्मत तय करेगी।
क्या यह सच में 'डू-ऑर-डाई' है?
आँकड़ों पर नज़र डालें तो तस्वीर साफ़ है। आमिर खान की आख़िरी व्यावसायिक सफलता 2016 की 'दंगल' थी — यानी लगभग एक दशक पहले। इस बीच 'ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान' (2018), 'लाल सिंह चड्ढा' (2022) और 'सितारे ज़मीन पर' (2024) — तीनों ने निराश किया। बॉलीवुड में कोई भी स्टार तीन लगातार फ्लॉप्स के बाद चौथी बार उसी रुतबे से प्रोजेक्ट नहीं माँग सकता। आमिर की यह विशेषाधिकार उनकी पुरानी ट्रैक रिकॉर्ड के कारण अभी बची है — लेकिन ट्रेड हलकों में साफ़ कहा जा रहा है कि अगर यह फिल्म भी नहीं चली, तो आमिर का 'ओपनिंग वीकेंड गारंटी' का दर्ज़ा ख़त्म हो जाएगा।
कबीर खान के लिए भी दाँव कम नहीं है। '83' (2021) क्रिकेट पर बनी सबसे महँगी भारतीय फिल्मों में से एक थी, लेकिन कोविड और कमज़ोर ओपनिंग की वजह से बॉक्स ऑफ़िस पर लड़खड़ाई। उसके बाद से कबीर खान ने कोई बड़ी फिल्म रिलीज़ नहीं की है।
दो घायल करियर, एक साबित जोड़ी, और एक कहानी जो — अगर सही बताई गई — दर्शकों की रगों में गर्मी भर सकती है। यही इस प्रोजेक्ट को 'बस एक और फिल्म' से अलग करता है।
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आगे क्या देखना है
अगले कुछ हफ़्तों में सबसे अहम सवाल यह होगा कि प्रोडक्शन हाउस कौन सा है, बजट कितना है, और — सबसे ज़रूरी — यह कहानी 'एयरलिफ्ट' से किस तरह अलग है। अगर आमिर और कबीर ने कुवैत वाला वही मिशन उठाया है, तो उन्हें यह साबित करना होगा कि अक्षय कुमार वाली फिल्म ने जो नहीं दिखाया, वह इसमें है। और अगर यह कोई बिल्कुल अलग ऑपरेशन है, तो जितनी जल्दी वह स्पष्ट हो, उतना अच्छा — क्योंकि अभी 'एयरलिफ्ट' का साया इस प्रोजेक्ट पर भारी पड़ रहा है।
असली सवाल शायद यह नहीं है कि कहानी कितनी बड़ी है — असली सवाल यह है कि क्या आमिर खान के पास अब वह भरोसा बचा है जो दर्शक को थिएटर की कुर्सी तक खींच ले जाए? और अगर नहीं, तो क्या कोई भी रेस्क्यू मिशन ख़ुद आमिर को रेस्क्यू कर पाएगा?
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मुख्य बातें
- आमिर खान और कबीर खान 'बजरंगी भाईजान' के बाद पहली बार साथ आ रहे हैं — विषय है भारत का सबसे बड़ा रेस्क्यू मिशन, लेकिन सटीक मिशन की पुष्टि अभी नहीं हुई।
- आमिर की आख़िरी हिट 'दंगल' (2016) थी — करीब एक दशक और तीन फ्लॉप्स बाद यह उनके करियर का सबसे निर्णायक प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
- 'एयरलिफ्ट' (2016) ने कुवैत रेस्क्यू मिशन पर ₹225 करोड़+ कमाए थे — अगर आमिर-कबीर की फिल्म वही कहानी है, तो उन्हें अलग वैल्यू प्रपोज़िशन देना होगा।
- कबीर खान की पैट्रियॉटिक शैली और आमिर की 'सोशल मैसेज' शैली के बीच टोन का संतुलन इस फिल्म की क़िस्मत तय करेगा।
आँकड़ों में
- 1990 कुवैत एयरलिफ्ट: भारत ने करीब 1,70,000 नागरिकों को निकाला — गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक एयरलिफ्ट।
- 'एयरलिफ्ट' (2016, अक्षय कुमार) ने ₹225 करोड़+ वर्ल्डवाइड कमाए — बॉक्स ऑफ़िस इंडिया के अनुसार।
- 'लाल सिंह चड्ढा' (2022) ने अनुमानित ₹120 करोड़+ का नुकसान दिया — Bollywood Hungama रिपोर्ट।
- 'बजरंगी भाईजान' (2015) ने ₹900 करोड़+ वर्ल्डवाइड कमाए — बॉक्स ऑफ़िस इंडिया।








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