कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि वह पार्टी की सेवा करना जारी रखेंगे। सिद्धू ने जुलाई में पार्टी आलाकमान पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाते हुए अमरिंदर सिंह के साथ नेतृत्व की खींचतान के बीच जुलाई में राज्य पार्टी प्रमुख के रूप में पदभार संभाला था, जबकि 10 दिन पहले अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री के रूप में पद छोड़ दिया था।
क्रिकेटर से नेता बने सिद्धू यह नहीं बताया कि उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया। उन्होंने सोनिया गांधी को लिखे अपने पत्र में कहा, एक आदमी के चरित्र का पतन समझौता करने से होता है, मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब के कल्याण के एजेंडे से कभी समझौता नहीं कर सकता।
सूत्रों के मुताबिक इसके लिए जिम्मेदार छह कारण हो सकते हैं
1. सिद्धू के विरोध के बावजूद राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाना।
2. सुखजिंदर रंधावा को गृह विभाग देना।
3. एपीएस देओल को महाधिवक्ता नियुक्त करना।
4. कुलजीत नागरा को कैबिनेट में शामिल नहीं करना।
5. मंत्रिमंडल के गठन से पहले सिद्धू से सलाह न लेने और मंत्रियों को विभागों का आवंटन करने के लिए भी सलाह न लेना और।
6. मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने पर नाराजगी भी थी।
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