पीएम मोदी ने राजस्थान के पचपदरा (बाड़मेर) में ₹72,937 करोड़ की रिफाइनरी और जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन कर दिया। यह वही प्रोजेक्ट है जिसे अशोक गहलोत बरसों से अपना 'ड्रीम' बताते रहे — अब भाजपा ने क्रेडिट पर कब्ज़ा करके कांग्रेस के मारवाड़ी वोटबैंक को सीधा निशाना बनाया है।
₹72,937 करोड़ — यह सिर्फ एक रिफाइनरी की कीमत नहीं है। यह वह रकम है जो बाड़मेर के रेगिस्तान में दशकों के सपनों, दो दर्जन चुनावी वादों और एक पूरी पार्टी की मारवाड़ी साख को तौलती है। और आज जब पीएम नरेंद्र मोदी ने पचपदरा में इस रिफाइनरी का रिबन काटा, तो वह कैंची सिर्फ फीते पर नहीं चली — कांग्रेस के उस सबसे बड़े दावे पर चली जिसे अशोक गहलोत बरसों से 'मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट' कहकर सीने से लगाए बैठे थे।
द हिंदू के अनुसार, मोदी ने जोधपुर में ₹480 करोड़ के नए एयरपोर्ट टर्मिनल का भी उद्घाटन किया और संशोधित UDAN योजना लॉन्च की। एक ही दिन, दो बड़े उद्घाटन — पश्चिमी राजस्थान में भाजपा का यह 'विकास-बमबारी' अभियान कोई संयोग नहीं है। यह एक सुनियोजित सियासी चाल है जिसे समझने के लिए मारवाड़ की ज़मीन और गहलोत के इतिहास, दोनों को पढ़ना ज़रूरी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि यह राजस्थान की पहली रिफाइनरी है — 9 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) की क्षमता वाली। HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) के इस प्लांट की नींव तो UPA दौर में रखी गई थी, लेकिन ज़मीन अधिग्रहण से लेकर पर्यावरण मंज़ूरी तक के अनगिनत पड़ावों ने इसे दो दशकों तक अटकाए रखा। गहलोत ने अपने दोनों कार्यकालों में इसे आगे बढ़ाने का दावा किया — और राजस्थान की हर रैली में इसे 'अशोक गहलोत की रिफाइनरी' के तौर पर पेश किया।
अब यही बात उनके गले की हड्डी बन गई है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, मोदी ने इसी दौरे में जयपुर मेट्रो फ़ेज-2 की आधारशिला भी रखी — यानी पश्चिमी राजस्थान का विकास और राजधानी का इन्फ्रा, दोनों एक ही झटके में। कांग्रेस के लिए यह दोहरा झटका है: पहला, प्रोजेक्ट पूरा हुआ तो श्रेय भाजपा सरकार को जाएगा; दूसरा, अगर अब गहलोत कहें 'यह मेरा सपना था', तो जवाब तैयार है — 'सपना आपका था, पूरा हमने किया'।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि भाजपा ने बाड़मेर-जोधपुर बेल्ट को 2028 के विधानसभा चुनाव की 'ड्रेस रिहर्सल' की तरह ट्रीट किया है। मारवाड़ क्षेत्र की करीब 40-45 विधानसभा सीटें हैं — यहाँ बिश्नोई, राजपूत, जाट और ओबीसी वोटर्स का मिश्रण है। गहलोत का मारवाड़ में जो भावनात्मक कनेक्ट था, वह इस रिफाइनरी के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' नैरेटिव पर टिका था। अब वह नैरेटिव भाजपा ने अपने नाम कर लिया है।
ट्रेड हलकों में यह भी चर्चा है कि रिफाइनरी से बाड़मेर-जालोर बेल्ट में सीधे-अप्रत्यक्ष हज़ारों रोज़गार बनेंगे — NDTV के अनुसार यह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी है, यानी सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि पॉलिमर और केमिकल इंडस्ट्री की पूरी चेन यहीं खड़ी होगी। जिस इलाके में कभी रोज़गार के लिए गुजरात-मुंबई पलायन होता था, वहाँ अगर फ़ैक्ट्री खड़ी हो तो वोटर का मिज़ाज बदलने में देर नहीं लगती। (यह इंडस्ट्री चर्चा और विश्लेषण पर आधारित है, पुष्ट आँकड़े सामने आने बाकी हैं।)
कांग्रेस की असली मुश्किल यह है कि 'क्रेडिट वॉर' लड़ना इतना आसान नहीं। जब कोई प्रोजेक्ट सरकार बदलने के बाद पूरा होता है, तो जनता के ज़ेहन में वह चेहरा रहता है जिसने फीता काटा — वह नहीं जिसने नींव रखी। यह राजनीतिक मनोविज्ञान है जो भाजपा बखूबी समझती है। इसीलिए मोदी ने सिर्फ दिल्ली से बधाई नहीं भेजी — खुद पचपदरा गए, खुद कैंची चलाई, खुद भाषण दिया।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि मोदी के इस दौरे का मतलब सिर्फ रिफाइनरी नहीं है — यह 2028 राजस्थान चुनाव के लिए मारवाड़ बेल्ट की 'प्री-बुकिंग' है। भाजपा जानती है कि भीलवाड़ा-उदयपुर में आदिवासी-ओबीसी राजनीति अनिश्चित है, पूर्वी राजस्थान में बीएसपी-कांग्रेस की त्रिकोणीय लड़ाई है — ऐसे में पश्चिमी राजस्थान को 'सुरक्षित ज़ोन' बनाना भाजपा की इलेक्टोरल स्ट्रैटेजी का स्तंभ है। रिफाइनरी और एयरपोर्ट ठीक उसी स्तंभ की ईंटें हैं।
NDTV के अनुसार जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल ₹480 करोड़ का है और इसकी क्षमता सालाना 48 लाख यात्रियों की है — यानी पश्चिमी राजस्थान को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी। यह सिर्फ टूरिज़्म की बात नहीं — बाड़मेर-जैसलमेर के तेल-गैस सेक्टर के लिए लॉजिस्टिक्स हब बनने की ज़मीन तैयार हो रही है।
गहलोत के लिए अब रास्ता बहुत सँकरा है। अगर वे कहें 'यह हमारी शुरुआत थी' तो भाजपा कहेगी 'दस साल में क्यों नहीं पूरा किया?' अगर चुप रहें तो मारवाड़ का वोटर मान लेगा कि मोदी ने दिया, गहलोत ने सिर्फ बोला। और अगर विरोध करें तो 'विकास-विरोधी' का तमगा लगेगा — जो किसी भी राजनेता के लिए ज़हर है।
आने वाले हफ्तों में देखने लायक बात यह होगी कि कांग्रेस इस 'क्रेडिट वॉर' में कोई नया काउंटर-नैरेटिव खड़ा कर पाती है या नहीं। क्या गहलोत कोई और 'अधूरा वादा' निकालकर भाजपा पर हमला करेंगे? या फिर सचिन पायलट खेमा इसे गहलोत की 'विफलता' बताकर अपनी अंदरूनी लड़ाई में इस्तेमाल करेगा? मारवाड़ की रेत पर यह सियासी दंगल अभी शुरू हुआ है — और दाँव पर सिर्फ एक रिफाइनरी नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान का वोट-मैप है।
आरोपों और दावों को यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से प्रस्तुत किया गया है और जब तक कोई अदालत निर्णय नहीं देती, ये अप्रमाणित रहते हैं; न्यायाधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना किसी पूर्वाग्रह के की गई है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
More from India Herald
मुख्य बातें
- ₹72,937 करोड़ की पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान की पहली रिफाइनरी है — 9 MMTPA क्षमता, पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स सहित (टाइम्स ऑफ इंडिया)
- गहलोत ने इसे 'ड्रीम प्रोजेक्ट' बताया था, लेकिन उद्घाटन मोदी ने किया — क्रेडिट पूरी तरह भाजपा के खाते में गया
- ₹480 करोड़ का जोधपुर एयरपोर्ट टर्मिनल (48 लाख यात्री/वर्ष क्षमता) पश्चिमी राजस्थान को लॉजिस्टिक्स हब बनाने की ओर कदम (NDTV)
- मारवाड़ बेल्ट की 40-45 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने 2028 से पहले 'विकास-ब्रांडिंग' शुरू कर दी है
- कांग्रेस के पास 'क्रेडिट वॉर' में काउंटर-नैरेटिव खड़ा करने का रास्ता अब बेहद सँकरा है
आँकड़ों में
- ₹72,937 करोड़ — पचपदरा (बाड़मेर) रिफाइनरी की कुल लागत (टाइम्स ऑफ इंडिया)
- 9 MMTPA — रिफाइनरी की वार्षिक शोधन क्षमता (टाइम्स ऑफ इंडिया)
- ₹480 करोड़ — जोधपुर एयरपोर्ट नए टर्मिनल की लागत, 48 लाख यात्री/वर्ष क्षमता (NDTV)
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: पीएम नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया; अशोक गहलोत ने परियोजना को अपना सपना बताया था (टाइम्स ऑफ इंडिया)
- क्या: पचपदरा (बाड़मेर) में ₹72,937 करोड़ की HPCL राजस्थान रिफाइनरी और ₹480 करोड़ के जोधपुर एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन (द हिंदू, NDTV)
- कब: जनवरी 2026, आज (हिंदुस्तान टाइम्स)
- कहाँ: पचपदरा, बाड़मेर और जोधपुर, राजस्थान (टाइम्स ऑफ इंडिया)
- क्यों: राजस्थान की पहली रिफाइनरी — रोज़गार, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिमी राजस्थान के विकास के लिए दशकों से प्रतीक्षित (हिंदुस्तान टाइम्स)
- कैसे: HPCL और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के तहत 9 MMTPA क्षमता की रिफाइनरी बनी; मोदी ने संशोधित UDAN योजना भी लॉन्च की (द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बाड़मेर रिफाइनरी की कुल लागत और क्षमता कितनी है?
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पचपदरा (बाड़मेर) स्थित HPCL राजस्थान रिफाइनरी की कुल लागत ₹72,937 करोड़ है और इसकी वार्षिक शोधन क्षमता 9 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) है। यह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी है।
बाड़मेर रिफाइनरी पर गहलोत और भाजपा के बीच क्रेडिट वॉर क्यों है?
रिफाइनरी की नींव UPA दौर में रखी गई थी और अशोक गहलोत ने इसे अपना 'ड्रीम प्रोजेक्ट' बताया। लेकिन उद्घाटन भाजपा सरकार के कार्यकाल में पीएम मोदी ने किया, जिससे राजनीतिक श्रेय भाजपा को मिला।
जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल की क्या ख़ासियत है?
NDTV के अनुसार, ₹480 करोड़ के इस टर्मिनल की क्षमता सालाना 48 लाख यात्रियों की है और यह पश्चिमी राजस्थान को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।






click and follow Indiaherald WhatsApp channel