केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर Meta को नोटिस भेजकर जवाब माँगा है। सरकार की चिंता है कि फ़ोन नंबर छुपाकर चैट करने से साइबर अपराधियों को ट्रैक करना मुश्किल होगा। Meta ने जवाब दिया है जिसकी जाँच जारी है, और अब Telegram व Signal को भी नोटिस भेजे गए हैं।
दो अरब से ज़्यादा यूजर्स का प्लेटफ़ॉर्म, और भारत उसका सबसे बड़ा बाज़ार — करीब 50 करोड़ लोग। जब WhatsApp ने कहा कि अब आप अपना फ़ोन नंबर छुपाकर सिर्फ़ यूजरनेम से चैट कर सकेंगे, तो करोड़ों लोगों ने सोचा — वाह, प्राइवेसी का नया दौर! लेकिन नई दिल्ली में एक अलग ही फ़ाइल खुली: साइबर क्राइम सेल की।
केंद्र सरकार ने WhatsApp की मूल कंपनी Meta को नोटिस भेजकर इस फीचर पर जवाब माँगा है। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IT Act के प्रावधानों के तहत यह नोटिस जारी किया। ThePrint के मुताबिक, Meta ने अपना जवाब दाख़िल भी कर दिया है और सरकार फ़िलहाल उसकी जाँच कर रही है।
लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। News18 के अनुसार, सरकार ने अब Telegram और Signal को भी इसी मुद्दे पर नोटिस भेजा है — यानी सवाल सिर्फ़ WhatsApp का नहीं, पूरी मैसेजिंग इंडस्ट्री का है।
यूजरनेम फीचर है क्या — और Meta इसे क्यों लाना चाहता है?
सीधी बात: अभी अगर आप किसी अजनबी से WhatsApp पर बात करना चाहते हैं, तो आपको अपना मोबाइल नंबर देना पड़ता है। यूजरनेम फीचर में आप एक यूनीक नाम चुनेंगे — जैसे @rahul_delhi — और कोई भी आपको इस नाम से मैसेज कर सकेगा, बिना आपका नंबर जाने। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, Meta ने कहा है कि इसमें एंटी-इम्पर्सनेशन और स्कैम प्रोटेक्शन फीचर्स भी होंगे — यानी कोई आपके नाम की नकली ID नहीं बना पाएगा।
Meta का तर्क है कि यह फीचर यूजर की प्राइवेसी मज़बूत करता है — ख़ासकर महिलाओं और ऐसे लोगों के लिए जो ऑनलाइन मार्केटप्लेस या ग्रुप्स में अपना नंबर शेयर नहीं करना चाहते। बात सुनने में अच्छी है।
सरकार का डर: प्राइवेसी की आड़ में अपराध का अंधेरा
लेकिन सरकार का सवाल बिलकुल उलटा है: अगर नंबर ही नहीं दिखेगा, तो साइबर अपराधी को पकड़ेगा कौन? Telangana Today के अनुसार, केंद्र सरकार की मुख्य चिंता यह है कि यूजरनेम फीचर से ऑनलाइन फ़्रॉड, फ़िशिंग, और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में अपराधी का ट्रैक पूरी तरह टूट जाएगा। जब किसी स्कैमर का फ़ोन नंबर ही रिकॉर्ड में न हो, तो FIR से लेकर ट्रैकिंग तक — सब बेमतलब।
Zee News Hindi की रिपोर्ट बताती है कि WhatsApp ने फ़िलहाल इस फीचर को होल्ड पर रखा है और सरकार के सवालों का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय लिया है। यह 'होल्ड' अपने-आप में बताता है कि दबाव कितना गंभीर है।
सिर्फ़ WhatsApp नहीं — पूरी इंडस्ट्री निशाने पर
यहाँ कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ आता है। News18 के मुताबिक, केंद्र सरकार ने Telegram और Signal को भी यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा है। Telangana Today की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब सभी मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए एक यूनिफ़ॉर्म पॉलिसी बनाने पर विचार कर रही है — ताकि कोई एक ऐप नियम तोड़कर बाज़ार में बढ़त न ले सके।
इसका मतलब साफ़ है: सरकार एक ऐसा फ़्रेमवर्क चाहती है जहाँ हर मैसेजिंग ऐप को भारत में काम करने के लिए एक जैसे नियमों का पालन करना पड़े — चाहे वह अमेरिकी कंपनी हो या रूसी।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में इस नोटिस को लेकर जो फुसफुसाहट है, वह सिर्फ़ साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं। चर्चा यह भी है कि 2024 के आम चुनावों में WhatsApp ग्रुप्स और फ़ॉरवर्ड्स जिस तरह सियासी हथियार बने, उसके बाद सरकार नहीं चाहती कि कोई ऐसा सिस्टम आए जहाँ फ़र्ज़ी अकाउंट्स का जाल बिछाना और भी आसान हो जाए। यूजरनेम फीचर का मतलब है — एक इंसान, दस नाम, और कोई वेरिफ़ायबल ट्रेल नहीं। चुनावी प्रचार से लेकर दंगों की अफ़वाहों तक, यह ज़मीन ख़तरनाक है। (यह राजनीतिक हलकों की चर्चा और विश्लेषण पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
आम यूजर के लिए क्या बदलेगा?
फ़िलहाल कुछ नहीं — फीचर होल्ड पर है। लेकिन अगर यूनिफ़ॉर्म पॉलिसी बनती है, तो भविष्य में यूजरनेम फीचर आए भी तो शर्तों के साथ: शायद KYC-लिंक्ड यूजरनेम, शायद सरकारी एजेंसियों के लिए बैकडोर ट्रेसेबिलिटी, या शायद यूजरनेम और फ़ोन नंबर दोनों सर्वर पर स्टोर होंगे भले ही दूसरे यूजर को सिर्फ़ यूजरनेम दिखे। The Hindu की रिपोर्ट बताती है कि सरकार Meta के जवाब का अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई इसी पर निर्भर करेगी।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि यह टकराव सिर्फ़ एक फीचर का नहीं है — यह 2026 के भारत में डिजिटल संप्रभुता की लड़ाई का ताज़ा अध्याय है। IT Act 2000 और उसके संशोधन, डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023, और अब मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए यूनिफ़ॉर्म रूल्स — सरकार धीरे-धीरे वह ढाँचा खड़ा कर रही है जहाँ कोई भी टेक कंपनी बिना सरकारी सहमति के भारतीय यूजर्स को कोई नया फीचर नहीं दे पाएगी।
सवाल यह है: क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत है, या डिजिटल निगरानी का विस्तार? जवाब शायद दोनों है — और यही इस कहानी को इतना पेचीदा बनाता है। आने वाले हफ़्तों में देखिए कि Meta झुकता है या अड़ता है — क्योंकि 50 करोड़ यूजर्स का बाज़ार छोड़ना कोई आसान फ़ैसला नहीं, और उनकी निगरानी का रास्ता खोलना कोई आसान समझौता नहीं।
More from India Herald
मुख्य बातें
- केंद्र सरकार ने WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर Meta को IT Act के तहत नोटिस भेजा; Meta ने जवाब दिया जिसकी जाँच जारी है।
- Telegram और Signal को भी इसी मुद्दे पर नोटिस — सरकार सभी मैसेजिंग ऐप्स के लिए यूनिफ़ॉर्म पॉलिसी बनाने पर विचार कर रही है।
- यूजरनेम फीचर फ़िलहाल होल्ड पर है — अगर आता भी है तो KYC या ट्रेसेबिलिटी शर्तों के साथ आने की संभावना।
- यह टकराव सिर्फ़ एक फीचर का नहीं, भारत में डिजिटल संप्रभुता बनाम टेक कंपनियों की स्वतंत्रता की बड़ी लड़ाई का हिस्सा है।
आँकड़ों में
- भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाज़ार है — करीब 50 करोड़ यूजर्स — News18 के अनुसार
- केंद्र ने WhatsApp के अलावा Telegram और Signal को भी यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा — News18 के अनुसार
- WhatsApp ने यूजरनेम फीचर फ़िलहाल होल्ड पर रखा है — Zee News Hindi के अनुसार
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta (WhatsApp की मूल कंपनी) को नोटिस भेजा — The Hindu के अनुसार।
- क्या: WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया गया, जिसमें यूजर्स बिना फ़ोन नंबर साझा किए चैट कर सकते — News18 के अनुसार।
- कब: जून 2026 के पहले सप्ताह में नोटिस भेजा गया और Meta ने जवाब दाख़िल किया — ThePrint के अनुसार।
- कहाँ: भारत — केंद्र सरकार का नोटिस नई दिल्ली से जारी हुआ।
- क्यों: सरकार को चिंता है कि यूजरनेम फीचर से साइबर अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग लगभग असंभव हो जाएगी — Telangana Today के अनुसार।
- कैसे: MeitY ने IT Act के तहत Meta को नोटिस भेजा, जवाब माँगा, और अब सभी मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए एक यूनिफ़ॉर्म पॉलिसी पर विचार कर रहा है — News18 के अनुसार।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
WhatsApp यूजरनेम फीचर क्या है?
यह एक प्रस्तावित फीचर है जिसमें आप @rahul_delhi जैसा यूनीक नाम चुनकर बिना अपना फ़ोन नंबर साझा किए चैट कर सकते हैं। News18 के अनुसार, Meta ने इसमें एंटी-इम्पर्सनेशन और स्कैम प्रोटेक्शन की व्यवस्था का दावा किया है।
सरकार ने WhatsApp यूजरनेम फीचर पर नोटिस क्यों भेजा?
Telangana Today के अनुसार, सरकार की मुख्य चिंता यह है कि फ़ोन नंबर छुपने से साइबर अपराधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा — ऑनलाइन फ़्रॉड, फ़िशिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में।
क्या Telegram और Signal को भी नोटिस भेजा गया?
हाँ, News18 के अनुसार केंद्र सरकार ने Telegram और Signal को भी यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा है और सभी मैसेजिंग ऐप्स के लिए यूनिफ़ॉर्म पॉलिसी पर विचार कर रही है।
क्या WhatsApp यूजरनेम फीचर अभी उपलब्ध है?
नहीं। Zee News Hindi के अनुसार, WhatsApp ने इस फीचर को फ़िलहाल होल्ड पर रखा है और सरकार के सवालों का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय लिया है।






click and follow Indiaherald WhatsApp channel