राजकुमार हिरानी अपने बेटे वीर हिरानी को डायरेक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन रणबीर कपूर ने 'प्रीतम एंड पेड्रो' की शूटिंग के दौरान वीर की एक्टिंग क्षमता पहचानी और उन्हें कैमरे के सामने ला खड़ा किया — TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार ख़ुद राजकुमार हिरानी ने इस बात का ख़ुलासा किया है।
एक पिता जिसने '3 इडियट्स', 'पीके' और 'मुन्नाभाई' जैसी फ़िल्में बनाकर पूरे देश को हँसाया-रुलाया — वह अपने बेटे को अपने ही पेशे में तैयार कर रहा था। कैमरे के पीछे। निर्देशक की कुर्सी पर। लेकिन एक शख़्स ने यह प्लान ऐसे पलट दिया जैसे स्क्रिप्ट का क्लाइमैक्स ही बदल गया हो। वह शख़्स हैं रणबीर कपूर — और वह बेटा है वीर हिरानी।
TV9 भारतवर्ष की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ ख़ुद राजकुमार हिरानी ने ख़ुलासा किया है कि उनकी हमेशा से इच्छा थी कि वीर फ़िल्म-मेकिंग सीखें, असिस्टेंट डायरेक्शन करें, और आगे चलकर निर्देशक बनें। वीर ने वह राह पकड़ी भी — उन्होंने अपने पिता की फ़िल्मों में बतौर असिस्टेंट काम किया। लेकिन 'प्रीतम एंड पेड्रो' की शूटिंग के दौरान रणबीर कपूर ने कुछ ऐसा देखा जो पिता की आँखों से छूट गया था।
रणबीर ने वीर की नैचुरल स्क्रीन प्रेज़ेंस पहचानी — वह सहजता जो एक्टिंग स्कूलों में सिखाई नहीं जाती, बल्कि या तो होती है या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार रणबीर ने राजकुमार हिरानी को समझाया कि वीर को कैमरे के सामने होना चाहिए, पीछे नहीं। और नतीजा सामने है — वीर हिरानी अब 'प्रीतम एंड पेड्रो' में प्रीतम का किरदार निभा रहे हैं।
इनसाइड टॉक
यहाँ असली कहानी शुरू होती है — वह कहानी जो प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नहीं बताई जाती। इंडस्ट्री हलकों में चर्चा है कि राजकुमार हिरानी शुरू में इस आइडिए से बिलकुल सहमत नहीं थे। एक बड़े फ़िल्मकार के लिए अपने ही बेटे को लॉन्च करना एक तरह का ज़ोखिम है — 'नेपोटिज़्म' का तमग़ा तुरंत लग सकता है, ख़ासकर सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण के बाद जब बॉलीवुड में स्टार-किड्स को लेकर जनता की नज़र और तल्ख़ हो गई है।
ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि रणबीर का यह दख़ल सिर्फ़ एक दोस्ताना सलाह नहीं था — यह बॉलीवुड की बदलती पावर स्ट्रक्चर का संकेत है। एक दौर था जब बड़े निर्देशक तय करते थे कि कौन हीरो बनेगा और कौन नहीं। अब एक टॉप एक्टर किसी निर्देशक के बेटे की क़िस्मत बदल रहा है। फ़ैन्स के बीच सवाल घूम रहा है: क्या 'संजू' की बम्पर सफलता (₹586 करोड़ से ज़्यादा वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफ़िस, बॉक्स ऑफ़िस इंडिया के अनुसार) के बाद रणबीर ने हिरानी परिवार पर एक ऐसा एहसान जताया है जिसे मना करना मुश्किल था?
(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
बाप-बेटे का फ़ासला और रणबीर की भूमिका
इस किस्से में एक और परत है जो ध्यान खींचती है। राजकुमार हिरानी ने अपना पूरा करियर 'आम आदमी की असाधारण कहानी' बताने में लगाया — मुन्ना, रैंचो, पीके, संजू — हर किरदार में एक ऐसा इंसान जो व्यवस्था से टकराता है। लेकिन जब बात अपने बेटे की आई, तो वह ख़ुद उसी 'व्यवस्था' बन गए जो तय कर रही थी कि बच्चा क्या बनेगा।
रणबीर कपूर — जो ख़ुद एक फ़िल्मी ख़ानदान से आते हैं, जिनके पिता ऋषि कपूर और दादा राज कपूर थे — शायद इस दबाव को किसी और से बेहतर समझते हैं। ऋषि कपूर ने कई इंटरव्यूज़ में बताया था कि उन्होंने रणबीर को कभी एक्टिंग के लिए फ़ोर्स नहीं किया, बल्कि रणबीर ने ख़ुद चुना। शायद रणबीर ने वीर में वही देखा — एक लड़का जो पिता की छाया में एक भूमिका निभा रहा था जो उसकी अपनी नहीं थी।
बॉलीवुड का 'गॉडफादर सिंड्रोम' — इंडिया हेराल्ड का विश्लेषण
इंडिया हेराल्ड का मानना है कि यह किस्सा जितना प्यारा लगता है, उतना सीधा नहीं है। बॉलीवुड में 'गॉडफादर' की भूमिका हमेशा से रही है — सलमान ख़ान ने कई करियर बनाए और बिगाड़े, शाहरुख़ ख़ान की सिफ़ारिश पर कई नाम लॉन्च हुए। लेकिन रणबीर कपूर अलग ब्रीड हैं। वे प्रोडक्शन हाउस नहीं चलाते, लेकिन उनकी 'क्रिएटिव करेंसी' इतनी ऊँची है कि राजकुमार हिरानी जैसा निर्देशक भी उनकी बात पर अपने बेटे का करियर-पाथ बदल दे।
अगर 'प्रीतम एंड पेड्रो' में वीर हिरानी का परफ़ॉर्मेंस दर्शकों को पसंद आता है, तो रणबीर की यह 'आँख' एक लीजेंड बन जाएगी — वह एक्टर जो सिर्फ़ अभिनय नहीं करता, बल्कि प्रतिभा ख़ोजता है। लेकिन अगर वीर का डेब्यू औसत रहा, तो यही किस्सा एक और नेपोटिज़्म डिबेट का ईंधन बनेगा — 'देखो, रणबीर ने अपने दोस्त के बेटे को ठेल दिया।'
आने वाले हफ़्तों में देखना होगा कि 'प्रीतम एंड पेड्रो' के ट्रेलर और प्रमोशन में वीर को कैसे पोज़ीशन किया जाता है। अगर मेकर्स उन्हें 'राजकुमार हिरानी के बेटे' की जगह एक स्वतंत्र एक्टर के तौर पर पेश करते हैं, तो समझिए कि रणबीर की सलाह सिर्फ़ कास्टिंग तक सीमित नहीं थी — ब्रांडिंग तक पहुँच गई थी। लेकिन अगर हर प्रमोशनल मटीरियल में हिरानी का नाम पहले आया, तो जनता अपना हिसाब ख़ुद लगा लेगी।
बॉलीवुड में एक पुरानी कहावत है — 'बाप का नाम दरवाज़ा खोलता है, लेकिन अंदर अकेले जाना पड़ता है।' वीर हिरानी के लिए दरवाज़ा खोला उनके पिता ने नहीं, रणबीर कपूर ने। सवाल यह है कि अंदर जाकर वे क्या कर पाते हैं — और क्या बॉलीवुड का नया 'गॉडफादर' वाक़ई प्रतिभा पहचानता है, या बस एक और एहसान चुका रहा है?
रिपोर्ट और लेखन AI सहायता से इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- राजकुमार हिरानी अपने बेटे वीर को डायरेक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन रणबीर कपूर ने उनकी एक्टिंग प्रतिभा पहचानकर कैमरे के सामने ला खड़ा किया — TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार।
- 'संजू' की ₹586 करोड़+ वर्ल्डवाइड सफलता ने रणबीर-हिरानी रिश्ते को एक नई ताक़त दी — अब रणबीर की 'क्रिएटिव करेंसी' इतनी है कि बड़े निर्देशक भी उनकी कास्टिंग राय मानें।
- वीर हिरानी 'प्रीतम एंड पेड्रो' में प्रीतम का किरदार निभा रहे हैं — उनका परफ़ॉर्मेंस तय करेगा कि रणबीर का दख़ल 'विज़न' था या 'फ़ेवर'।
- बॉलीवुड की पावर डायनैमिक्स बदल रही है — अब सिर्फ़ निर्देशक या प्रोडक्शन हाउस नहीं, बल्कि टॉप एक्टर भी नए चेहरे लॉन्च करने की स्थिति में आ गए हैं।
आँकड़ों में
- 'संजू' (2018) ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफ़िस पर ₹586 करोड़ से अधिक कमाए — बॉक्स ऑफ़िस इंडिया के आँकड़ों के अनुसार।




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