कोरियोग्राफर-डायरेक्टर अहमद खान ने दीपिका पादुकोण की 8 घंटे शिफ्ट डिमांड पर कहा कि 'जब ईगो आता है तो प्रॉब्लम होती है।' News18 की रिपोर्ट के मुताबिक अहमद का यह बयान बॉलीवुड में पुरानी पीढ़ी और नई फीमेल पावर के बीच की टकराहट का ताज़ा उदाहरण है।
बॉलीवुड की शूटिंग फ़्लोर पर एक अनकहा नियम दशकों से चला आ रहा था — डायरेक्टर बोलेगा, हीरो-हीरोइन सुनेगा, और शाम ढलते-ढलते 16-18 घंटे खड़े रहो तो भी मुँह मत खोलो। दीपिका पादुकोण ने वह अनकहा नियम तोड़ दिया। और तोड़ा तो ऐसे कि पूरी इंडस्ट्री का पुराना 'ग़ुरूर' दरक गया।
News18 की रिपोर्ट के मुताबिक कोरियोग्राफर और डायरेक्टर अहमद खान ने दीपिका की 8 घंटे शिफ्ट वाली डिमांड पर खुलकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। अहमद ने कहा — 'जब ईगो आ जाता है तब प्रॉब्लम होती है।' एक लाइन। बस इतनी लाइन, लेकिन इसमें बॉलीवुड के उस पूरे सिस्टम की चिड़चिड़ाहट छिपी है जो दशकों से 'डायरेक्टर इज़ गॉड' पर चलता रहा।
ज़रा सोचिए — अहमद खान उस दौर के फ़िल्ममेकर हैं जहाँ डायरेक्टर और कोरियोग्राफर का शेड्यूल सबसे ऊपर होता था। ऐक्टर्स सुबह 6 बजे सेट पर आते, रात 2 बजे तक शॉट देते, और किसी ने पूछा 'कब तक?' तो उसकी अगली फ़िल्म साइन होने में दो साल लग जाते। यही बॉलीवुड का अनलिखा क़ानून था। अब एक फ़ीमेल स्टार — जो इंडस्ट्री की सबसे ऊँची पेड एक्ट्रेसेज़ में है — ने सीधा कह दिया: 8 घंटे से ज़्यादा शूट नहीं करूँगी। पैक-अप।
इनसाइड टॉक
इंडस्ट्री के हलकों में इस बात की खूब चर्चा है कि दीपिका का यह 'रूल' सिर्फ़ वर्क-लाइफ़ बैलेंस का मामला नहीं है। ट्रेड सर्कल्स में सुनने को मिलता है कि दीपिका अपनी प्रोडक्शन कंपनी के ज़रिए प्रोजेक्ट्स में सह-प्रोड्यूसर की हैसियत रखती हैं, और जब आप प्रोड्यूसर भी हों और लीड एक्ट्रेस भी, तो शेड्यूल पर आपकी बात आख़िरी होती है। कुछ वरिष्ठ डायरेक्टर्स की शिकायत — जो नाम लिए बिना इंडस्ट्री गॉसिप में घूम रही है — यह है कि 'अब तो हम उनके शेड्यूल के हिसाब से फ़िल्म बनाएँ।' फ़ैन्स का मूड बिलकुल उलट है: सोशल मीडिया पर दीपिका के समर्थन में ट्रेंड चले, और लोगों ने पूछा कि क्या बॉलीवुड में 'प्रोफ़ेशनलिज़्म' का मतलब सिर्फ़ एक्टर्स को ग़ुलाम बनाए रखना है? (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
अब यहाँ एक बड़ा सवाल है जो कोई सीधे नहीं पूछ रहा: अहमद खान ने 'ईगो' शब्द क्यों चुना? ईगो — यानी अहंकार — यह शब्द बॉलीवुड में तब इस्तेमाल होता है जब कोई बड़ा स्टार डायरेक्टर की 'ऑथॉरिटी' को चुनौती दे। लेकिन जब कोई मेल स्टार — अक्षय कुमार, शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान — अपनी शर्तों पर शूटिंग करता है, शाम 7 बजे पैक-अप कहता है, या क्लॉज़ रखता है कि 'मेरा शॉट पहले' — तब उसे 'प्रोफ़ेशनल', 'डिसिप्लिन्ड', 'टाइम-कॉन्शस' कहा जाता है। एक महिला वही करे तो 'ईगो'? यह बॉलीवुड की भाषा का डबल स्टैंडर्ड है जो अहमद खान के एक शब्द में नंगा हो गया।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बॉलीवुड में 12-16 घंटे की शिफ्ट आम बात रही है — क्रू मेंबर्स से लेकर जूनियर आर्टिस्ट्स तक। FWICE (फ़ेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़) ने कई बार 12 घंटे की सीमा की बात उठाई है। लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं बदला — क्योंकि ऊपर से 'उदाहरण' नहीं आया। दीपिका का 8 घंटे का नियम इसलिए बड़ा है क्योंकि यह ऊपर से आ रहा है — एक ए-लिस्ट स्टार से, जो बॉक्स ऑफ़िस पर 300 करोड़+ की फ़िल्में दे चुकी हैं।
इंडिया हेराल्ड का पॉवर-रीड यह है कि अहमद खान की नाराज़गी असल में दीपिका से नहीं, बल्कि उस पूरी पावर-शिफ्ट से है जो बॉलीवुड में चुपचाप हो रही है। पिछले पाँच सालों में फ़ीमेल-लेड फ़िल्मों — पठान में दीपिका, ऑल्फ़ा में आलिया, क्वीन, गंगूबाई — ने साबित किया कि हीरोइन अकेले फ़िल्म खींच सकती है। जब बॉक्स ऑफ़िस पावर बदलती है तो सेट पर पावर भी बदलती है। अहमद खान और उनकी पीढ़ी के डायरेक्टर्स के लिए यह बदलाव पचाना मुश्किल है — क्योंकि दशकों तक 'मेरा सेट, मेरा शेड्यूल' उनकी पहचान का हिस्सा रहा।
और सबसे दिलचस्प बात यह है कि दीपिका ने खुद इस विवाद पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। कोई ट्वीट नहीं, कोई इंटरव्यू नहीं, कोई सफ़ाई नहीं। यह चुप्पी भी एक पावर-मूव है — जब आप इतने बड़े हों कि आपको जवाब देने की ज़रूरत ही न हो, तो चुप्पी सबसे तेज़ तमाचा है।
आगे क्या होगा? अगर दीपिका का यह नियम उनकी अगली बड़ी फ़िल्म में टिका रहा और फ़िल्म हिट हुई, तो देखिए — आलिया भट्ट, कंगना रनौत, श्रद्धा कपूर जैसी एक्ट्रेसेज़ भी अपने कॉन्ट्रैक्ट्स में वर्किंग-आवर्स क्लॉज़ डालेंगी। यह एक डोमिनो इफ़ेक्ट शुरू कर सकता है जो बॉलीवुड की वर्कफ़ोर्स पॉलिसी को हमेशा के लिए बदल दे। लेकिन अगर फ़िल्म फ़्लॉप हुई, तो वही लोग कहेंगे — 'देखा, ईगो की वजह से फ़िल्म डूबी।'
असली सवाल यह नहीं है कि दीपिका 8 घंटे काम करें या 18 — असली सवाल यह है कि जब एक महिला अपनी शर्त रखती है तो उसे 'प्रोफ़ेशनल' कहने में बॉलीवुड की ज़ुबान क्यों लड़खड़ाती है?
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मुख्य बातें
- अहमद खान ने दीपिका की 8 घंटे शिफ्ट डिमांड को 'ईगो' का मामला बताया — News18 रिपोर्ट
- बॉलीवुड में पुरुष सितारों की शूटिंग शर्तों को 'डिसिप्लिन' कहा जाता है, महिला स्टार की शर्तों को 'ईगो' — यही डबल स्टैंडर्ड है
- दीपिका का नियम सिर्फ़ वर्क-लाइफ़ बैलेंस नहीं, बल्कि ए-लिस्ट फ़ीमेल स्टार्स की बढ़ती बॉक्स ऑफ़िस पावर का सेट पर असर है
- अगर दीपिका का यह मॉडल कामयाब रहा तो बॉलीवुड में वर्किंग-आवर्स क्लॉज़ इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन सकता है
आँकड़ों में
- बॉलीवुड शूटिंग शिफ्ट अक्सर 12-16 घंटे तक चलती है — FWICE ने कई बार 12 घंटे की सीमा की माँग उठाई है (टाइम्स ऑफ़ इंडिया रिपोर्ट्स)
- दीपिका पादुकोण 300 करोड़+ बॉक्स ऑफ़िस क्लब वाली फ़ीमेल स्टार्स में शुमार हैं






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