हैदराबाद। आंध्र प्रदेश में इस बार सिर्फ और सिर्फ जगनमोहन की आंधी चली है। विधानसभा में 175 में से 151 और लोकसभा में 25 में से 22 सीटें लाने वाली जगन की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस को खुद इस प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी। राज्य में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की सीधी टक्कर मानी जा रही थी, मगर कांग्रेस और बीजेपी राज्य में इतना खराब प्रदर्शन करेंगे इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।

आंकड़े भी इनके खराब प्रदर्शन की कहानी बयान कर रहे हैं। वोट प्रतिशत के हिसाब से देखें तो कांग्रेस और बीजेपी से ज्यादा वोट राज्य में 'इनमें से कोई नहीं' यानी नोटा वाले विकल्प पर पड़े हैं।

राज्य में लोकसभा चुनाव में 1.5 फीसदी वोटरों ने जहां नोटा का बटन दबाया, वहीं बीजेपी को सिर्फ 0.96 फीसदी वोट मिले। एक समय प्रदेश की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस पार्टी भी जगन की आंधी में उड़ गई। कांग्रेस को सिर्फ 1.29 फीसदी वोट ही मिले।

बीजेपी-कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त

यही हाल विधानसभा में भी था, जहां नोटा के 1.28 फीसदी वोट प्रतिशत के मुकाबले कांग्रेस को 1.17 फीसदी और बीजेपी को 0.84 फीसदी वोट ही मिले। दोनों दलों के सभी उम्मीदवार लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। नारासरावपेट सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के. लक्ष्मीनारायण और कल्याणदुर्ग से विधानसभा चुनाव लड़ रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एन. रघुवीर रेड्डी भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए।


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