महाराष्ट्र BJP का नौवाँ राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) की तैयारी का ऐलान किया है। केंद्र में NDA सहयोगियों नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की आपत्तियों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर UCC रुका हुआ है, इसलिए BJP ने राज्यों के रास्ते से अपना कोर हिंदुत्व एजेंडा आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

नौ। यह सिर्फ़ एक संख्या नहीं, BJP की उस चुपचाप चलती शतरंज का स्कोरकार्ड है जो दिल्ली की संसद से नहीं, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं से खेली जा रही है। महाराष्ट्र की देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित कर दी है — और इसी के साथ वह नौवाँ BJP शासित राज्य बन गया है जिसने UCC की ओर ठोस कदम बढ़ाया, द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार।

लेकिन असली कहानी इस ऐलान में नहीं है। असली कहानी उस सवाल में है जो कोई खुलकर नहीं पूछ रहा: जब BJP के पास लोकसभा में सत्ता है, प्रधानमंत्री का तीसरा कार्यकाल है, तो UCC जैसा 'कोर एजेंडा' संसद से क्यों नहीं आ रहा? जवाब दो नामों में छिपा है — नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू।

NDA गठबंधन की अंकगणित बेरहम है। 2024 के बाद से BJP को लोकसभा में बहुमत के लिए JD(U) और TDP की सीटों की ज़रूरत है। नीतीश कुमार ने बिहार के मुस्लिम वोटबैंक की नब्ज़ पकड़कर UCC पर खुली असहमति जताई है। चंद्रबाबू नायडू का आंध्र प्रदेश भी UCC को लेकर सहज नहीं — वहाँ ईसाई और मुस्लिम अल्पसंख्यक वोट TDP के गणित का हिस्सा हैं। नतीजा? दिल्ली में UCC बिल पेश करने का मतलब होगा गठबंधन को ख़तरे में डालना — और यह जोखिम BJP फ़िलहाल उठाने को तैयार नहीं।

राज्यों का रास्ता: मजबूरी या मास्टरप्लान?

यहीं BJP की रणनीतिक चतुराई सामने आती है। जब सामने का दरवाज़ा बंद हो तो पिछले दरवाज़े से निकलो — लेकिन इतने दरवाज़े खोलो कि लगे जैसे यही मुख्य प्रवेश द्वार है। उत्तराखंड ने 2024 में पहले UCC लागू किया। उसके बाद गुजरात, असम, मध्य प्रदेश — और अब महाराष्ट्र। हर राज्य में पैटर्न एक जैसा है: समिति गठन, मसौदा तैयारी, विधानसभा में पारित, और केंद्र को छुए बिना 'एक देश, एक कानून' का नैरेटिव ज़िंदा रखना।

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट है कि यह महज़ संयोग नहीं — BJP का केंद्रीय नेतृत्व हर राज्य इकाई को एक 'UCC टाइमलाइन' दे रहा है। फड़नवीस का यह कदम ऐसे वक़्त पर आया है जब महाराष्ट्र में 2024 की विधानसभा जीत के बाद BJP को अपने हिंदुत्व बेस को ठोस 'डिलीवरेबल' देने की ज़रूरत है। UCC वही डिलीवरेबल है — बिना दिल्ली का इंतज़ार किए।

पॉलिटिकल पल्स

ट्रेड हलकों और सियासी विश्लेषकों के बीच एक और गहरी बात चल रही है। क्या यह राज्य-दर-राज्य UCC दरअसल योगी आदित्यनाथ और मोहन यादव पर दबाव बनाने का भी टूल है? उत्तर प्रदेश — BJP का सबसे बड़ा राज्य — अभी तक UCC पर ठोस कदम नहीं उठा पाया है। मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार ने समिति तो बनाई पर मसौदा अभी अधूरा है। जब महाराष्ट्र जैसा राज्य, जहाँ मुस्लिम आबादी करीब 12% है, UCC की ओर बढ़ जाए — तो योगी पर सवाल और तीखे होंगे: 'हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे' के राज्य में UCC क्यों नहीं?

(यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

गठबंधन का गणित और हिंदुत्व की ज़िद

इस पूरी रणनीति में एक और परत है जिसे इंडिया हेराल्ड का सटीक पॉलिटिकल रीड सामने रख रहा है। राज्यों से UCC लागू करने का मतलब सिर्फ़ कानूनी बदलाव नहीं — यह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एक 'नैरेटिव इन्फ्रास्ट्रक्चर' तैयार करना है। अगर नौ-दस BJP राज्यों में UCC चल रहा होगा, तो 2029 में पार्टी कह सकती है: 'देखिए, जहाँ हमारी सरकार है वहाँ UCC चल रहा है — अब पूरे देश में चाहिए तो हमें पूर्ण बहुमत दीजिए।' गठबंधन की मजबूरी को चुनावी हथियार में बदलना — यही BJP की सबसे पुरानी और सबसे कारगर चाल है।

याद कीजिए — अनुच्छेद 370 हटाने से पहले भी BJP ने बरसों तक इसे 'अधूरा वादा' के रूप में ज़िंदा रखा था। UCC के साथ भी वही खेल दोहराया जा रहा है, बस इस बार राज्य-स्तरीय 'ट्रेलर' दिखाकर 'फ़ुल फ़िल्म' के लिए वोट माँगे जाएँगे।

आगे क्या होगा — वॉच लिस्ट

अगले छह महीने निर्णायक हैं। अगर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार UCC समिति का गठन करती है, तो समझिए कि BJP ने 2029 का चुनावी ब्लूप्रिंट फ़ाइनल कर लिया है। अगर नहीं करती, तो योगी और केंद्रीय नेतृत्व के बीच की खींचतान और गहरी होगी। मध्य प्रदेश में मोहन यादव पर भी दबाव बढ़ेगा कि मसौदा जल्दी पूरा करें। और सबसे दिलचस्प — नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की प्रतिक्रिया देखिए: क्या वे राज्य-स्तरीय UCC को भी 'गठबंधन धर्म' का उल्लंघन मानेंगे, या चुपचाप नज़रअंदाज़ करेंगे?

फड़नवीस की सात सदस्यीय समिति अभी सिर्फ़ शुरुआत है। असली सवाल यह नहीं कि महाराष्ट्र में UCC कब लागू होगा — असली सवाल यह है कि क्या BJP ने गठबंधन की लाचारी को अपनी सबसे बड़ी चुनावी ताक़त में बदलने का फ़ॉर्मूला ढूँढ़ लिया है? और अगर ढूँढ़ लिया है, तो विपक्ष के पास इसका जवाब क्या है?

यहाँ रिपोर्ट किए गए आरोप नामित स्रोतों से हैं और जब तक अदालत का फ़ैसला न हो, अप्रमाणित हैं; न्यायालय के अधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

मुख्य बातें

  • महाराष्ट्र नौवाँ BJP शासित राज्य बना जिसने UCC मसौदे के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की — द हिंदू के अनुसार
  • केंद्र में NDA सहयोगी JD(U) और TDP की आपत्तियों के कारण राष्ट्रीय UCC बिल फ़िलहाल संभव नहीं — गठबंधन अंकगणित आड़े आ रहा है
  • BJP की राज्य-दर-राज्य UCC रणनीति 2029 लोकसभा चुनाव से पहले 'नैरेटिव इन्फ्रास्ट्रक्चर' तैयार करने का मास्टरप्लान प्रतीत होती है
  • उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पर अब दबाव बढ़ेगा — योगी आदित्यनाथ और मोहन यादव की अगली चाल निर्णायक होगी
  • अनुच्छेद 370 की तरह BJP 'अधूरे वादे' को चुनावी हथियार बनाने की रणनीति दोहरा रही है

आँकड़ों में

  • महाराष्ट्र नौवाँ BJP शासित राज्य है जिसने UCC की तैयारी का ऐलान किया — द हिंदू
  • महाराष्ट्र में मुस्लिम आबादी लगभग 12% है — जो इसे UCC लागू करने वाले सबसे विविध राज्यों में से एक बनाता है
  • फड़नवीस सरकार ने सात सदस्यीय पैनल गठित किया है जो UCC मसौदा तैयार करेगा — द हिंदू

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: महाराष्ट्र की देवेंद्र फड़नवीस सरकार और BJP का केंद्रीय नेतृत्व
  • क्या: सात सदस्यीय समिति गठित कर UCC का मसौदा तैयार करने की घोषणा — महाराष्ट्र नौवाँ BJP शासित राज्य जिसने यह कदम उठाया
  • कब: जून 2026 — द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार
  • कहाँ: महाराष्ट्र, जो उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, असम समेत अन्य BJP शासित राज्यों की कतार में शामिल हुआ
  • क्यों: केंद्र में NDA सहयोगियों JD(U) और TDP की आपत्तियों के कारण राष्ट्रीय UCC विधेयक संभव नहीं, इसलिए राज्य-स्तरीय रणनीति अपनाई गई
  • कैसे: राज्य सरकार ने सात सदस्यीय पैनल गठित किया जो UCC का मसौदा तैयार करेगा — द हिंदू के अनुसार यह उत्तराखंड मॉडल पर आधारित प्रक्रिया है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

महाराष्ट्र में UCC कब लागू होगा?

अभी सात सदस्यीय समिति गठित हुई है जो मसौदा तैयार करेगी। लागू होने की कोई निश्चित तारीख़ नहीं है — उत्तराखंड मॉडल के आधार पर प्रक्रिया में कम से कम कई महीने लग सकते हैं, द हिंदू के अनुसार।

केंद्र में UCC बिल क्यों नहीं आ रहा?

NDA गठबंधन में JD(U) के नीतीश कुमार और TDP के चंद्रबाबू नायडू UCC पर सहमत नहीं हैं। BJP को लोकसभा में बहुमत के लिए इन दलों की सीटें चाहिए, इसलिए राष्ट्रीय UCC बिल लाना गठबंधन को ख़तरे में डाल सकता है।

कितने BJP शासित राज्यों ने UCC की तैयारी शुरू की है?

महाराष्ट्र नौवाँ BJP शासित राज्य है जिसने UCC की दिशा में ठोस कदम उठाया है। उत्तराखंड ने 2024 में पहले इसे लागू किया था।

क्या UCC से मुस्लिम पर्सनल लॉ ख़त्म हो जाएगा?

UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान कानून बनाना है — जिसका मतलब है कि धर्म-आधारित पर्सनल लॉ की जगह एक साझा क़ानूनी ढाँचा आएगा। हालाँकि हर राज्य का मसौदा अलग हो सकता है।

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