रिपोर्ट्स के अनुसार गौतम गंभीर हेड कोच के पद पर सुरक्षित हैं, लेकिन इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वनडे सीरीज़ के बाद टीम इंडिया के सहायक कोचिंग स्टाफ़ में से दो कोचों को हटाया जा सकता है। यह BCCI का एक बड़ा संकेत है कि नतीजे न आने पर जवाबदेही सिर्फ़ खिलाड़ियों की नहीं, कोचिंग सेटअप की भी होगी।

हेड कोच की कुर्सी बचती है — लेकिन उसके ठीक नीचे की दो कुर्सियाँ हिल रही हैं। भारतीय क्रिकेट में जब भी कोचिंग स्टाफ़ पर गाज गिरती है, सबकी निगाहें सबसे ऊपर वाले नाम पर जाती हैं। लेकिन इस बार कहानी उलटी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गौतम गंभीर को हेड कोच पद पर कोई ख़तरा नहीं है — ख़तरा उनके नीचे काम करने वाले दो सहायक कोचों पर है, जिन्हें इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वनडे सीरीज़ के बाद बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

NewsX की रिपोर्ट के अनुसार, BCCI इंग्लैंड सीरीज़ को एक 'रिव्यू पॉइंट' की तरह देख रही है। सीरीज़ के नतीजे, मैच की तैयारी, और ड्रेसिंग रूम की डायनामिक्स — इन तीनों पैमानों पर कोचिंग स्टाफ़ का मूल्यांकन हो रहा है। और इस मूल्यांकन में दो सहायक कोचों का रिपोर्ट कार्ड सबसे कमज़ोर बताया जा रहा है।

सवाल यह है कि आख़िर BCCI का निशाना सहायक कोचों पर क्यों? इसका जवाब भारतीय क्रिकेट की हालिया परफ़ॉर्मेंस में छिपा है। पिछले कुछ समय से टीम इंडिया की फ़ील्डिंग, बल्लेबाज़ी रणनीति और मिडल-ऑर्डर कोलैप्स पर लगातार सवाल उठे हैं। जब भी मैच का रुख बदलता है, कैमरा डगआउट की तरफ़ जाता है — और वहाँ की बॉडी लैंग्वेज से लेकर रणनीतिक टाइम-आउट तक, हर चीज़ स्क्रूटनी में आती है।

ध्यान रखें, गंभीर ने जब से कोचिंग की कमान सँभाली है, उन्होंने अपनी शैली — सीधी, बेलाग, बिना लाग-लपेट — से ड्रेसिंग रूम को अपने हिसाब से ढालने की कोशिश की है। लेकिन हर हेड कोच अकेले नहीं चलता। बैटिंग कोच, बॉलिंग कोच, फ़ील्डिंग कोच — ये सब मिलकर वह मशीन बनाते हैं जो मैदान पर दिखती है। अगर मशीन के दो पुर्ज़े ठीक से काम नहीं कर रहे, तो इंजीनियर को नहीं, पुर्ज़ों को बदला जाता है — कम से कम BCCI की नज़र में तो यही फ़ॉर्मूला है।

इनसाइड टॉक

क्रिकेट के गलियारों में जो बात घूम रही है, वह यह है कि गंभीर ख़ुद इस बदलाव के पक्ष में हो सकते हैं। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि गंभीर को कुछ सहायक कोचों के साथ 'वेवलेंथ मैच' नहीं हो पा रहा — रणनीतिक बैठकों में सहमति कम और टकराव ज़्यादा दिख रहा है। एक वरिष्ठ क्रिकेट पत्रकार ने कहा कि "ड्रेसिंग रूम में दो कैंप बनते दिख रहे थे — एक गंभीर का, एक पुराने सेटअप का। ऐसे में BCCI को बीच का रास्ता निकालना ज़रूरी था।" यह इंडस्ट्री की बात है, पुष्ट तथ्य नहीं — लेकिन जो पैटर्न दिख रहा है, वह इस कहानी से मेल खाता है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि यह सिर्फ़ परफ़ॉर्मेंस का मामला नहीं है — यह गंभीर को पूरी ताक़त देने का BCCI का मास्टरस्ट्रोक हो सकता है। जब आप हेड कोच को उसके अपने लोग चुनने देते हैं, तो आप उससे नतीजों की पूरी ज़िम्मेदारी भी माँग सकते हैं। पिछले कुछ सालों में भारतीय क्रिकेट में कोचिंग स्टाफ़ के बदलाव अक्सर रिएक्टिव रहे हैं — हार के बाद हड़बड़ी में बदलाव। लेकिन अगर यह बदलाव सीरीज़ से पहले या तुरंत बाद होता है, तो यह प्रोएक्टिव कदम माना जाएगा — और यही BCCI का संदेश है।

अब ज़रा पीछे मुड़कर देखें। भारतीय क्रिकेट में कोचिंग स्टाफ़ के बदलाव का इतिहास बताता है कि जब भी सहायक कोच बदले गए, उसके पीछे या तो हेड कोच की माँग रही है या फिर BCCI सेक्रेटरी लेवल पर कोई बड़ा रिव्यू। 2017 में रवि शास्त्री के आने के बाद लगभग पूरा सपोर्ट स्टाफ़ बदला गया था। 2023 में राहुल द्रविड़ के कार्यकाल में भी फ़ील्डिंग कोच की भूमिका पर सवाल उठे थे। अब गंभीर के दौर में यही साइकिल दोहराई जा रही है — बस इस बार BCCI का तरीक़ा ज़्यादा कैलकुलेटेड दिख रहा है।

इंग्लैंड सीरीज़ इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सिर्फ़ तीन या पाँच मैचों का मामला नहीं है। आगे चैंपियंस ट्रॉफ़ी और वर्ल्ड कप साइकिल की तैयारी का दबाव है। BCCI जानती है कि अगर कोचिंग सेटअप में दरार अभी नहीं भरी गई, तो बड़े टूर्नामेंट में यही दरार खाई बन जाएगी। इसीलिए इंग्लैंड सीरीज़ को 'कटऑफ़ पॉइंट' बनाया गया है — जो टिकेगा, वही आगे जाएगा।

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एक और पहलू जो कोई नहीं बोल रहा — कोचों का कॉन्ट्रैक्ट स्ट्रक्चर। BCCI के सहायक कोचों के कॉन्ट्रैक्ट अक्सर हेड कोच के कार्यकाल से जुड़े होते हैं, लेकिन उनमें 'परफ़ॉर्मेंस रिव्यू क्लॉज़' होता है जो बोर्ड को बीच में बदलाव का अधिकार देता है। अगर BCCI इस क्लॉज़ का इस्तेमाल करती है, तो यह पहली बार नहीं होगा — लेकिन इस तरह खुलकर लीक होना ज़रूर पहली बार है। यह लीक अपने-आप में एक संदेश है — बाक़ी स्टाफ़ के लिए भी।

आगे देखें तो तस्वीर और साफ़ होती है। अगर दो कोच सचमुच बाहर होते हैं, तो गंभीर के पास मौक़ा होगा कि वे अपनी पसंद के लोगों को लाएँ — वे लोग जो उनकी भाषा बोलते हैं, उनकी intensity मैच करते हैं। इसका सीधा असर ड्रेसिंग रूम के माहौल पर पड़ेगा। खिलाड़ियों को एक क्लियर कमांड चेन मिलेगी — कोई मिक्स्ड सिग्नल नहीं, कोई दो कैंप नहीं। लेकिन ख़तरा भी उतना ही बड़ा है: अगर गंभीर के चुने हुए लोगों के बावजूद नतीजे नहीं आए, तो फिर बहाना किसका?

यही वह सवाल है जो BCCI ने चुपचाप गंभीर के सामने रख दिया है — तुम्हारी टीम, तुम्हारे लोग, तुम्हारे नतीजे। और यही वह मोड़ है जहाँ एक कोचिंग असाइनमेंट एक इम्तिहान बन जाता है।

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मुख्य बातें

  • गौतम गंभीर हेड कोच पद पर सुरक्षित हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार दो सहायक कोचों को इंग्लैंड वनडे सीरीज़ के बाद हटाया जा सकता है।
  • BCCI इंग्लैंड सीरीज़ को कोचिंग स्टाफ़ के लिए 'रिव्यू पॉइंट' के रूप में देख रही है — नतीजे, तैयारी और ड्रेसिंग रूम डायनामिक्स तीनों पैमानों पर मूल्यांकन हो रहा है।
  • यह बदलाव गंभीर को पूरी कमान देने की BCCI की रणनीति हो सकती है — अपने लोग चुनो, फिर पूरी ज़िम्मेदारी भी लो।
  • कॉन्ट्रैक्ट में 'परफ़ॉर्मेंस रिव्यू क्लॉज़' BCCI को बीच कार्यकाल में बदलाव का अधिकार देता है।
  • आगे चैंपियंस ट्रॉफ़ी और वर्ल्ड कप साइकिल को देखते हुए BCCI कोचिंग सेटअप में दरार अभी भरना चाहती है।

आँकड़ों में

  • 2017 में रवि शास्त्री के आने के बाद लगभग पूरा सपोर्ट स्टाफ़ बदला गया था — कोचिंग ओवरहॉल का सबसे बड़ा उदाहरण।
  • BCCI के सहायक कोचों के कॉन्ट्रैक्ट में परफ़ॉर्मेंस रिव्यू क्लॉज़ बोर्ड को मिड-टर्म बदलाव का अधिकार देता है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: टीम इंडिया के दो सहायक कोच जिनके नाम अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं, और हेड कोच गौतम गंभीर जो सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
  • क्या: रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इंग्लैंड वनडे सीरीज़ के बाद कोचिंग स्टाफ़ में फेरबदल किया जा सकता है और दो कोचों को हटाया जा सकता है।
  • कब: भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीज़ 2026 के बाद यह बदलाव अपेक्षित है।
  • कहाँ: BCCI मुख्यालय और टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम — फ़ैसला बोर्ड स्तर पर लिया जाएगा।
  • क्यों: हाल के टूर्नामेंट्स और सीरीज़ में टीम के प्रदर्शन और रणनीतिक तैयारी पर सवाल उठे हैं, जिससे BCCI कोचिंग सेटअप की समीक्षा कर रही है।
  • कैसे: BCCI सीरीज़ के नतीजों और टीम की तैयारी की समीक्षा के बाद कोचिंग स्टाफ़ में बदलाव का अंतिम फ़ैसला लेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इंग्लैंड सीरीज़ के बाद टीम इंडिया के कौन से कोच बाहर हो सकते हैं?

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दो सहायक कोचों को हटाया जा सकता है। आधिकारिक नाम अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन BCCI सीरीज़ के नतीजों और ड्रेसिंग रूम डायनामिक्स के आधार पर फ़ैसला लेगी।

क्या गौतम गंभीर को हेड कोच पद से हटाया जा रहा है?

नहीं। रिपोर्ट्स के अनुसार गौतम गंभीर हेड कोच पद पर पूरी तरह सुरक्षित हैं। बदलाव सहायक कोचिंग स्टाफ़ में होने की संभावना है।

BCCI कोचिंग स्टाफ़ में बदलाव क्यों कर रही है?

हालिया सीरीज़ में टीम की रणनीतिक तैयारी, फ़ील्डिंग और मिडल-ऑर्डर परफ़ॉर्मेंस पर सवाल उठे हैं। साथ ही ड्रेसिंग रूम में कमांड चेन को एकीकृत करने और आगामी बड़े टूर्नामेंट्स की तैयारी के लिए BCCI यह कदम उठा रही है।

टीम इंडिया में कोचिंग स्टाफ़ बदलने का इतिहास क्या रहा है?

2017 में रवि शास्त्री के हेड कोच बनने के बाद लगभग पूरा सपोर्ट स्टाफ़ बदला गया था। 2023 में राहुल द्रविड़ के कार्यकाल में भी फ़ील्डिंग कोच की भूमिका पर चर्चा हुई थी। सहायक कोचों का बदलाव BCCI में असामान्य नहीं है।

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