आलिया भट्ट की YRF स्पाई फिल्म 'अल्फा' ने सात दिनों में वर्ल्डवाइड सिर्फ़ ₹79 करोड़ कमाए हैं, जो इस बजट की फिल्म के लिए निराशाजनक है। Zee News के अनुसार फिल्म लगातार गिरावट में है, और इस वैक्यूम का सीधा फ़ायदा अजय देवगन की 'धमाल 4' को मिल रहा है।
एक वक़्त था जब YRF का नाम किसी फिल्म के साथ जुड़ता था तो बॉक्स ऑफिस पर कम से कम ओपनिंग की गारंटी मानी जाती थी। लेकिन आलिया भट्ट की 'अल्फा' के नंबर देखकर लगता है कि वो ज़माना अब बीत चुका है। सात दिन, वर्ल्डवाइड सिर्फ़ ₹79 करोड़ — और हर गुज़रता दिन पिछले दिन से बदतर। Zee News की रिपोर्ट के मुताबिक़ फिल्म का पहला हफ़्ता 'डाउनवर्ड स्पाइरल' में ख़त्म हुआ है, और यह गिरावट रुकने का नाम नहीं ले रही।
अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं कि 'अल्फा' क्यों डूबी — असली कहानी यह है कि इस डूबने से किसकी नाव तैर गई।
₹79 करोड़ — ये नंबर बता रहे हैं पूरी कहानी
आलिया भट्ट, शर्वरी, YRF का स्पाई यूनिवर्स, और बड़ा बजट — कागज़ पर सब कुछ 'ब्लॉकबस्टर' चिल्ला रहा था। लेकिन Zee News के अनुसार फिल्म ने सातवें दिन तक वर्ल्डवाइड महज़ ₹79 करोड़ ही जुटाए। इसमें से डोमेस्टिक नंबर और भी चिंताजनक हैं। हिंदी बेल्ट के सिंगल स्क्रीन्स — जो किसी भी बॉलीवुड फिल्म की रीढ़ होते हैं — वहाँ 'अल्फा' पहले वीकेंड के बाद लगभग ग़ायब हो गई।
वीकडेज़ में गिरावट इतनी तीखी रही कि कई सिनेमाघरों ने शोज़ ही कम कर दिए। जब कोई फिल्म मंगलवार-बुधवार तक ₹3-4 करोड़ के आसपास सिमटने लगे, तो यह साफ़ संकेत है कि दर्शक ने फ़ैसला सुना दिया है।
स्पाई यूनिवर्स: फॉर्मूला जो अब थक चुका है
ट्रेड हलकों में एक बात ज़ोरों से कही जा रही है — दर्शक YRF के स्पाई यूनिवर्स से ऊब चुका है। 'एक था टाइगर' से शुरू हुआ यह सिलसिला 'पठान' तक तो चला, लेकिन 'टाइगर 3' ने पहली दरार दिखाई और 'वॉर 2' ने उसे चौड़ा किया। अब 'अल्फा' ने उस दरार को खाई बना दिया है।
समस्या सिर्फ़ 'फीमेल-लेड' होना नहीं है — 'गंगूबाई काठियावाड़ी' में आलिया ने साबित किया है कि वो अकेले फिल्म खींच सकती हैं। समस्या यह है कि स्पाई यूनिवर्स का फॉर्मूला अब बासी हो चुका है: वही स्लो-मोशन एंट्री, वही ग्लोब-ट्रॉटिंग लोकेशन्स, वही 'मिशन' जो कभी सच में ख़तरनाक नहीं लगता। दर्शक अब इस पैकेजिंग को देखकर पहचान लेता है कि अंदर क्या है — और वो उसे नहीं चाहिए।
फ़ैन्स सोशल मीडिया पर खुलकर कह रहे हैं कि ₹200+ करोड़ के बजट में असली कहानी पर ख़र्च करने की जगह VFX और लोकेशन्स पर पैसा बहाया गया। जब कंटेंट कमज़ोर हो तो स्टार पावर भी बचा नहीं पाती — यही 'अल्फा' का सबक़ है।
इनसाइड टॉक
इंडस्ट्री के गलियारों में फुसफुसाहट है कि YRF के भीतर भी अब स्पाई यूनिवर्स के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रेड सूत्रों का कहना है कि आदित्य चोपड़ा ने 'अल्फा' को स्पाई यूनिवर्स की 'गेम चेंजर' के तौर पर प्लान किया था — एक ऐसी फिल्म जो फ्रैंचाइज़ को नई दिशा दे। लेकिन हुआ उलटा — फिल्म ने फ्रैंचाइज़ की बची-खुची विश्वसनीयता भी ख़र्च कर दी।
एक और बात जो चर्चा में है: क्या आलिया भट्ट का स्टार पावर अब मल्टीप्लेक्स तक सीमित हो गया है? 'गंगूबाई' और 'रॉकी और रानी' — दोनों में मज़बूत कहानी थी। जहाँ कहानी कमज़ोर पड़ी, वहाँ दर्शक नहीं आया। इंडस्ट्री इनसाइडर्स मानते हैं कि यह आलिया की नाकामी नहीं, YRF के विज़न की नाकामी है — लेकिन नंबर तो आलिया के नाम दर्ज होंगे।
(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
'धमाल 4': बिना लड़े जीता हुआ जैकपॉट
और यहीं कहानी में अजय देवगन की एंट्री होती है — बिलकुल 'धमाल' स्टाइल में, बिना मेहनत किए। Bollywood Hungama के बॉक्स ऑफिस डेटा के अनुसार 'धमाल 4' सिंगल स्क्रीन्स पर मज़बूत पकड़ बनाए हुए है। जहाँ 'अल्फा' के शोज़ कटे, वहाँ 'धमाल 4' को अतिरिक्त स्क्रीन्स मिलीं।
इसमें विडंबना देखिए: 'धमाल 4' को लेकर ख़ुद दर्शकों में मिला-जुला रिएक्शन था — AI विज़ुअल्स पर नाराज़गी थी, ₹40 करोड़ की स्टार फ़ीस पर सवाल उठे थे। लेकिन जब विकल्प सिर्फ़ एक थकी हुई स्पाई फिल्म हो, तो फ़ैमिली ऑडियंस के लिए 'धमाल' की बेसिर-पैर कॉमेडी कहीं बेहतर चॉइस बन जाती है। सिंगल स्क्रीन का दर्शक ₹250 की टिकट में हँसना चाहता है — दिमाग़ लड़ाना नहीं।
इंडिया हेराल्ड का मानना है कि यह महज़ दो फिल्मों की टक्कर नहीं — यह बॉलीवुड में चल रही दो विपरीत धाराओं का टकराव है। एक तरफ़ YRF का महँगा, ग्लोबल-एम्बिशन वाला मॉडल जो भारतीय दर्शक को 'हॉलीवुड जैसा अनुभव' बेचना चाहता है। दूसरी तरफ़ अजय देवगन का पुराना, आज़माया हुआ फॉर्मूला — सस्ती हँसी, परिचित चेहरे, कोई 'यूनिवर्स' बनाने का दिखावा नहीं। और इस वक़्त, दर्शक दूसरे मॉडल को वोट दे रहा है।
अब आगे क्या?
'अल्फा' का दूसरा हफ़्ता और भी बेरहम होगा — नई रिलीज़ आएँगी, स्क्रीन्स और कम होंगे। ₹100 करोड़ का डोमेस्टिक आँकड़ा अब मुश्किल लगता है। YRF के लिए बड़ा सवाल यह है कि स्पाई यूनिवर्स को आगे ले जाना है या चुपचाप दफ़्न करना है। 'पठान 2' की स्क्रिप्ट पहले से तैयार बताई जाती है — लेकिन क्या 'अल्फा' के बाद स्टूडियो उस पर ₹300 करोड़ का दाँव लगाने की हिम्मत करेगा?
अजय देवगन के लिए रास्ता साफ़ है: 'धमाल 4' ₹100 करोड़ पार करती है तो यह उनका सबसे आसान शतक होगा — और वो भी बिना किसी 'यूनिवर्स' के बोझ के।
और सबसे बड़ा सवाल आलिया भट्ट के लिए: वो अब अगली फिल्म कैसे चुनेंगी? क्या वो फिर से किसी फ्रैंचाइज़ की सवारी करेंगी, या 'गंगूबाई' वाले रास्ते पर लौटेंगी जहाँ कहानी स्टार से बड़ी थी? 'अल्फा' ने एक बात तो साबित कर दी है — बॉलीवुड में अब सिर्फ़ नाम नहीं, कंटेंट बिकता है। जो स्टूडियो यह बात जल्दी समझ ले, वो बचेगा। बाक़ी के लिए… धमाल तो मचेगा ही — बस किसी और के ख़र्चे पर।
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मुख्य बातें
- आलिया भट्ट की 'अल्फा' ने 7 दिनों में वर्ल्डवाइड सिर्फ़ ₹79 करोड़ कमाए — Zee News के अनुसार फिल्म लगातार गिरावट में है
- YRF का स्पाई यूनिवर्स 'टाइगर 3' और 'वॉर 2' के बाद 'अल्फा' से तीसरी बार लड़खड़ाया — दर्शक फॉर्मूले से ऊब चुका है
- 'धमाल 4' को अल्फा के कटते शोज़ से सीधा फ़ायदा मिला — Bollywood Hungama के डेटा के अनुसार सिंगल स्क्रीन पर अजय देवगन की फिल्म मज़बूत है
- YRF को अब 'पठान 2' समेत स्पाई यूनिवर्स के भविष्य पर बड़ा फ़ैसला लेना होगा — ₹300 करोड़ का दाँव अब और जोखिम भरा है
- आलिया भट्ट का स्टार पावर कहानी-निर्भर साबित हुआ — मज़बूत स्क्रिप्ट में हिट, कमज़ोर में फ्लॉप
आँकड़ों में
- अल्फा का 7-दिन वर्ल्डवाइड कलेक्शन: ₹79 करोड़ (Zee News)
- धमाल 4 को अल्फा के घटते शोज़ से अतिरिक्त सिंगल स्क्रीन मिलीं (Bollywood Hungama)
- YRF स्पाई यूनिवर्स की लगातार तीसरी अंडरपरफॉर्मर: टाइगर 3, वॉर 2, अल्फा





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