'दादा — द सौरव गांगुली स्टोरी' का फर्स्ट लुक जारी हो गया है और फ़िल्म 2027 में रिलीज़ होगी। लेकिन असल सवाल यह है कि क्या मेकर्स ग्रेग चैपल विवाद, BCCI की कैप्टेंसी पॉलिटिक्स और गांगुली की बेदख़ली जैसे विस्फोटक अध्याय दिखाने का जोख़िम उठाएँगे।

2002, लॉर्ड्स का बालकनी। शर्ट उतारकर लहराता एक बंगाली लड़का — और पूरे हिंदुस्तान की छाती चौड़ी। वो एक तस्वीर भारतीय क्रिकेट की सबसे आइकॉनिक इमेज बन गई। अब उसी 'दादा' पर बायोपिक आ रही है — 'दादा — द सौरव गांगुली स्टोरी' का फर्स्ट लुक जारी हो चुका है और रिपोर्ट्स के मुताबिक फ़िल्म 2027 में रिलीज़ होगी।

फर्स्ट लुक में वो जुझारूपन दिखता है जो गांगुली का ट्रेडमार्क रहा — ऑफ़-साइड के शॉट्स, वो भरे स्टेडियम, वो तनी हुई गर्दन। लेकिन एक बायोपिक का फर्स्ट लुक तो ट्रेलर का ट्रेलर होता है। असली कहानी तो उन फ़्रेम्स में है जो अभी नहीं दिखाए गए।

क्रिकेट बायोपिक्स का स्कोरकार्ड — 'दादा' के लिए पिच कैसी है?

हिंदी सिनेमा ने क्रिकेट बायोपिक्स की पूरी पिच कवर कर ली है। 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' (2016) ने ₹216 करोड़ से ज़्यादा कमाए — रिपोर्ट्स के अनुसार यह अब तक की सबसे सफल क्रिकेट बायोपिक रही। '83' (2021) ने कपिल देव की 1983 विश्वकप जीत को दिखाया, लेकिन बॉक्स ऑफ़िस पर अपेक्षाओं से कम रही। 'अज़हर' (2016) विवादों में उलझकर रह गई। 'सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स' (2017) डॉक्यूमेंट्री-स्टाइल बनी और भावनात्मक रही, पर ड्रामा कम था।

इस भीड़ में 'दादा' को अपनी जगह बनानी है। और सच कहें तो, गांगुली की कहानी में वो कच्चा माल है जो किसी भी फ़िल्ममेकर के लिए सोने की खान है — बशर्ते वो उसे छूने की हिम्मत रखे।

इनसाइड टॉक

इंडस्ट्री हलकों में सबसे बड़ी चर्चा यही है: क्या फ़िल्म ग्रेग चैपल चैप्टर दिखाएगी? 2005 में जब कोच ग्रेग चैपल ने गांगुली को कप्तानी से हटाने की चिट्ठी BCCI को लिखी, उसके बाद का घटनाक्रम भारतीय क्रिकेट की सबसे कड़वी राजनीतिक लड़ाई थी। गांगुली को न सिर्फ़ कप्तानी से बल्कि टीम से ही बाहर कर दिया गया। ट्रेड पंडितों का कहना है कि अगर मेकर्स इस चैप्टर को 'सॉफ्ट-वॉश' करते हैं — यानी बस इशारों में दिखाकर निकल जाते हैं — तो फ़िल्म वो धार खो देगी जो गांगुली की कहानी को धोनी या सचिन से अलग बनाती है।

फ़ैन्स के बीच अटकलें ज़ोरों पर हैं कि लीड रोल में कौन होगा। सोशल मीडिया पर कुछ नाम घूम रहे हैं, लेकिन आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। इंडस्ट्री की बात यह है कि कास्टिंग में सबसे बड़ी चुनौती गांगुली की बॉडी लैंग्वेज पकड़ना है — वो आलसी एलिगेंस, गर्दन का वो तिरछापन, ऑफ़-साइड की वो लापरवाह महारत। ट्रेड सर्कल्स में यह भी सुनाई देता है कि गांगुली ख़ुद प्रोजेक्ट में कंसल्टेंट की भूमिका में हैं — जिसका मतलब यह भी हो सकता है कि कहानी पर उनकी 'एडिटोरियल' पकड़ कुछ ज़्यादा ही हो।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

वो तीन अध्याय जो 'दादा' को हिट या मिस बनाएँगे

पहला — ग्रेग चैपल और कैप्टेंसी पॉलिटिक्स: यह सिर्फ़ कोच-कप्तान विवाद नहीं था, यह BCCI के भीतर सत्ता-संतुलन की लड़ाई थी। जगमोहन डालमिया बनाम शरद पवार गुट, और गांगुली इसके बीच पिसते हुए। अगर फ़िल्म ने इसे स्किप किया, तो वो 'दादा' की कहानी का दिल ही निकाल देगी।

दूसरा — वापसी: 2006 में टीम से बाहर किए जाने के बाद गांगुली की घरेलू क्रिकेट में वापसी और फिर 2006-07 में टेस्ट टीम में दोबारा चुना जाना — यह किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। ऑस्ट्रेलिया में उनकी आख़िरी सीरीज़ में शतक — वो सिनेमाई सोना है।

तीसरा — BCCI अध्यक्ष से पद-मुक्ति: 2019 में BCCI अध्यक्ष बने, लेकिन 2022 में जब जय शाह का कार्यकाल बढ़ाने के लिए नियम बदले गए, तो गांगुली को किनारे कर दिया गया। यह अध्याय भी उतना ही विस्फोटक है — क्योंकि यह आज के BCCI की सत्ता-संरचना पर सीधा सवाल उठाता है।

इंडिया हेराल्ड का आकलन यह है कि इन तीनों में से कम से कम दो अध्याय अगर फ़िल्म ने ईमानदारी से नहीं उठाए, तो 'दादा' बायोपिक एक और 'सेफ़ क्रिकेट ड्रामा' बनकर रह जाएगी — जैसे एक मैच जहाँ बल्लेबाज़ जानबूझकर सिंगल्स लेता रहे और बाउंड्री न मारे।

2027 का बॉक्स ऑफ़िस — बायोपिक थकान या ताज़ा भूख?

ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि 2027 तक भारतीय दर्शकों में बायोपिक थकान और गहरी हो सकती है। 2016-2024 के बीच दर्जनों स्पोर्ट्स बायोपिक्स आईं — 'दंगल', 'मैरी कॉम', 'पान सिंह तोमर' से लेकर 'शाबाश मिट्ठू' तक। लेकिन एक बात गांगुली की कहानी के पक्ष में है: दर्शक ने हर क्रिकेटर को परदे पर देख लिया है — धोनी, कपिल, सचिन, अज़हर — लेकिन गांगुली को नहीं। और गांगुली वो क्रिकेटर है जिसकी कहानी में सबसे ज़्यादा राजनीतिक बारूद है।

अगर मेकर्स ने 'धोनी' वाला फ़ॉर्मूला अपनाया — यानी भावनात्मक सफ़र, गाँव से ग्राउंड तक — तो यह एक और 'फ़ील-गुड' बन जाएगी। लेकिन अगर उन्होंने 'दादा' को वो बनाया जो वो सचमुच थे — एक ऐसा कप्तान जिसने सिस्टम से लड़ाई मोल ली और कई बार हारा भी — तो यह हिंदी सिनेमा की सबसे ताक़तवर स्पोर्ट्स फ़िल्म हो सकती है।

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मुख्य बातें

  • 'दादा — द सौरव गांगुली स्टोरी' का फर्स्ट लुक जारी, 2027 में रिलीज़ तय — रिपोर्ट्स के अनुसार।
  • क्रिकेट बायोपिक्स की भीड़ (धोनी ₹216 करोड़+, '83', सचिन, अज़हर) में 'दादा' को अपनी अलग जगह बनानी होगी।
  • फ़िल्म की सफलता तीन चैप्टर्स पर टिकी है: ग्रेग चैपल विवाद, टीम से बेदख़ली के बाद वापसी, और BCCI अध्यक्ष पद से किनारे किया जाना।
  • इंडस्ट्री चर्चा के अनुसार गांगुली ख़ुद कंसल्टेंट भूमिका में हो सकते हैं — जो कहानी की ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है।
  • लीड कास्टिंग की आधिकारिक घोषणा अभी बाक़ी है — फ़ैन्स और ट्रेड दोनों में अटकलें जारी।

आँकड़ों में

  • 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' ने ₹216 करोड़ से अधिक कमाए — अब तक की सबसे सफल क्रिकेट बायोपिक (बॉक्स ऑफ़िस रिपोर्ट्स)
  • गांगुली ने 2005 में ग्रेग चैपल विवाद के बाद कप्तानी और टीम दोनों गँवाई — भारतीय क्रिकेट का सबसे विवादास्पद अध्याय (ESPNcricinfo)
  • 2016-2024 के बीच हिंदी सिनेमा में एक दर्जन से ज़्यादा स्पोर्ट्स बायोपिक्स रिलीज़ हुईं

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