DRDO ने चांदीपुर से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया है। 60 किमी+ की न्यूनतम रेंज और GPS-आधारित गाइडेंस वाला यह सिस्टम पुराने अनगाइडेड पिनाका से मूलतः अलग है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे 'मेजर माइलस्टोन' बताया है।
साठ किलोमीटर। यह कोई मामूली आँकड़ा नहीं — यह वह दूरी है जो एक अनगाइडेड रॉकेट और एक 'स्मार्ट' हथियार के बीच की खाई को पाट देती है। DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का जो परीक्षण किया, वह महज़ एक और मिसाइल टेस्ट नहीं था — यह LAC और LoC पर भारत की ज़मीनी ताक़त के पूरे समीकरण को बदलने वाला क़दम है।
Times of India के अनुसार इस रॉकेट की न्यूनतम रेंज 60 किलोमीटर है — मतलब अधिकतम रेंज इससे काफ़ी ज़्यादा होगी। NDTV ने बताया कि परीक्षण 'टेक्स्टबुक प्रिसिशन' से सफल रहा और रॉकेट ने तय पैरामीटर्स पर खरा उतरते हुए लक्ष्य को सटीक भेदा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे 'मेजर माइलस्टोन' करार दिया और DRDO वैज्ञानिकों को बधाई दी — News18 की रिपोर्ट के मुताबिक़।
लेकिन असली कहानी सिर्फ़ रेंज में नहीं छिपी — असली कहानी 'गाइडेड' शब्द में है।
पुराना पिनाका बनाम नया पिनाका — फ़र्क़ आसमान-ज़मीन का
पिनाका सिस्टम भारतीय सेना में 1990 के दशक के अंत से है। शुरुआती वर्ज़न अनगाइडेड था — मतलब रॉकेट दागो, एक तय इलाक़े में गिरेगा, पर ठीक किस बिंदु पर — यह बता पाना मुश्किल। 37 किमी तक की रेंज, और 'एरिया सैचुरेशन' का काम — दुश्मन की पूरी पोज़िशन पर बारिश कर दो, कुछ तो लगेगा।
नया लॉन्ग रेंज गाइडेड वर्ज़न पूरी तरह अलग जानवर है। Telangana Today के अनुसार इसमें GPS-आधारित गाइडेंस और एडवांस्ड नेविगेशन सिस्टम लगाया गया है। इसका मतलब — अब यह रॉकेट किसी ख़ास बंकर, तोपख़ाने की पोज़िशन, या लॉजिस्टिक हब को 'पॉइंट टारगेट' कर सकता है। रेंज 37 किमी से कूदकर 60 किमी+ हो गई। सीधे शब्दों में कहें तो पिनाका अब 'रॉकेट' कम और 'सस्ती सटीक मिसाइल' ज़्यादा हो गया है — और यही बात इसे ख़तरनाक बनाती है।
LAC और LoC — कहाँ बदलता है खेल
LAC पर चीन की PLA ने तिब्बत में PCL-191 और PHL-03 जैसे लॉन्ग रेंज MLRS सिस्टम तैनात कर रखे हैं, जिनकी रेंज 70-350 किमी तक मानी जाती है। अब तक भारत के पास इस श्रेणी में सटीक जवाब नहीं था — पुराना पिनाका रेंज में कम पड़ता था। नया गाइडेड वर्ज़न इस खाई को काफ़ी हद तक भरता है।
LoC पर पाकिस्तान के पास A-100 (चीनी मूल) और तुर्की के T-300 कासिरगा सिस्टम हैं — इनकी रेंज 100 किमी तक है, पर सटीकता और 'सैल्वो रेट' (एक बार में कितने रॉकेट दागे जा सकते हैं) में पिनाका का 12-रॉकेट लॉन्चर पैक काफ़ी बढ़त देता है। 90 सेकंड में 12 गाइडेड रॉकेट — इसका मतलब एक बैटरी मिनट भर में दुश्मन की पूरी ब्रिगेड-स्तरीय पोज़िशन को तबाह कर सकती है।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि 2027 के आम चुनाव से पहले 'आत्मनिर्भर रक्षा' का नैरेटिव मोदी सरकार के सबसे बड़े कार्ड्स में से एक होगा। पिनाका का यह परीक्षण उसी कड़ी में फिट बैठता है — तेजस MK2, S-400 की तैनाती, और अब पिनाका का लॉन्ग रेंज अवतार। रक्षा विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि सरकार 2027 तक कम से कम 6-8 नई पिनाका रेजिमेंट्स को इस अपग्रेडेड सिस्टम से लैस करने का लक्ष्य रख सकती है — हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं है।
(यह इंडस्ट्री चर्चा और रक्षा विश्लेषकों के अनुमानों पर आधारित है, पुष्ट सरकारी घोषणा नहीं।)
विपक्ष के लिए यहाँ एक अजीब स्थिति है — रक्षा उपलब्धियों पर सवाल उठाना जनता के बीच 'देश-विरोधी' पढ़ा जाता है। कांग्रेस और अन्य दल HAL, BEL, या DRDO की उपलब्धियों पर श्रेय का सवाल उठा सकते हैं (कि ये प्रोजेक्ट दशकों से चल रहे हैं), पर मतदाता के ज़ेहन में 'किसके कार्यकाल में हुआ' वाला फ़्रेम हावी रहता है।
चीन-पाकिस्तान के पास जवाब है भी?
सीधा जवाब: है, पर हर जवाब की क़ीमत है। चीन के पास PHL-16 जैसे सिस्टम हैं जो पिनाका से कहीं आगे हैं — पर वे LAC पर 3,500+ मीटर ऊँचाई पर तैनात करने में लॉजिस्टिक चुनौतियों से जूझते हैं। पाकिस्तान के पास NASR (हत्फ़-9) टैक्टिकल न्यूक्लियर मिसाइल है — जो एक तरह से 'अंतिम विकल्प' है, कॉन्वेंशनल MLRS में पाकिस्तान पिनाका की बराबरी का कोई स्वदेशी सिस्टम नहीं बना पाया।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि पिनाका लॉन्ग रेंज का असली महत्व सिर्फ़ हार्डवेयर में नहीं, बल्कि उस 'डिटरेंस इकोनॉमिक्स' में है जो यह पैदा करता है — एक गाइडेड पिनाका रॉकेट की लागत किसी ब्रह्मोस मिसाइल का दसवाँ हिस्सा है, पर यह वही काम कर सकता है जो पहले सिर्फ़ महँगी मिसाइलों से होता था। यही 'कॉस्ट-इम्पोज़िशन स्ट्रैटेजी' है — दुश्मन को जवाब में दस गुना ख़र्च करने पर मजबूर करो।
आगे क्या — 2027 तक का रोडमैप
DRDO ने पिनाका के और उन्नत वर्ज़न पर काम जारी रखा है — रिपोर्ट्स के अनुसार 90 किमी+ रेंज वाला वर्ज़न भी विकास में है। सेना में पिनाका रेजिमेंट्स की संख्या पहले ही बढ़ाई जा चुकी है और उत्पादन का ठेका निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी मिला है — यह 'आत्मनिर्भर भारत' फ़्रेमवर्क का अहम हिस्सा है।
पर सवाल वही है जो हर भारतीय हथियार कार्यक्रम में रहा है — 'लैब से लैंड' में कितना वक़्त लगेगा? अर्जुन टैंक, तेजस फ़ाइटर, इन सबकी कहानी बताती है कि सफल परीक्षण और सेना में बड़े पैमाने पर तैनाती के बीच का फ़ासला अक्सर एक दशक का होता है। क्या पिनाका लॉन्ग रेंज यह लानत तोड़ पाएगा?
अगर तोड़ पाया, तो LAC पर खड़ा चीनी जवान और LoC पर बैठा पाकिस्तानी फ़ौजी — दोनों को अपने बंकर की छत दोबारा नापनी पड़ेगी। और अगर नहीं तोड़ पाया, तो यह एक और शानदार परीक्षण बनकर रह जाएगा जो प्रेस रिलीज़ में चमकता है, ज़मीन पर नहीं।
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मुख्य बातें
- पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट की न्यूनतम रेंज 60 किमी+ है — पुराने 37 किमी अनगाइडेड वर्ज़न से मूलतः अलग (Times of India)।
- GPS-गाइडेड सटीकता ने पिनाका को 'एरिया वेपन' से 'पॉइंट टारगेट वेपन' बना दिया — अब ख़ास ठिकानों पर सटीक वार संभव।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे 'मेजर माइलस्टोन' बताया — 2027 चुनाव से पहले 'आत्मनिर्भर रक्षा' नैरेटिव का अहम कार्ड (News18)।
- पाकिस्तान के पास समतुल्य स्वदेशी MLRS नहीं; चीन के सिस्टम बेहतर पर LAC की ऊँचाई पर तैनाती में लॉजिस्टिक चुनौती।
- असली परीक्षा 'लैब से लैंड' की गति है — भारतीय रक्षा कार्यक्रमों में यही सबसे कमज़ोर कड़ी रही है।
आँकड़ों में
- पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट की न्यूनतम रेंज 60 किमी — पुराने वर्ज़न की 37 किमी से 62% अधिक (Times of India)
- एक पिनाका लॉन्चर 90 सेकंड में 12 गाइडेड रॉकेट दाग सकता है — ब्रिगेड-स्तरीय पोज़िशन पर विनाशकारी 'सैल्वो'
- गाइडेड पिनाका रॉकेट की अनुमानित लागत ब्रह्मोस मिसाइल का लगभग दसवाँ हिस्सा — 'कॉस्ट-इम्पोज़िशन' का नया हथियार
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: DRDO और भारतीय सेना — रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण को 'मेजर माइलस्टोन' बताया (News18 के अनुसार)।
- क्या: पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) के लॉन्ग रेंज गाइडेड वर्ज़न का सफल उड़ान परीक्षण — 60 किमी+ न्यूनतम रेंज के साथ (Times of India के अनुसार)।
- कब: जून 2026 में, ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से (Telangana Today के अनुसार)।
- कहाँ: चांदीपुर, ओडिशा — भारत की प्रमुख मिसाइल व रॉकेट परीक्षण स्थली।
- क्यों: सेना को LAC और LoC पर लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता देना और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को आगे बढ़ाना (NDTV के अनुसार)।
- कैसे: रॉकेट को GPS-आधारित गाइडेंस सिस्टम और एडवांस्ड नेविगेशन तकनीक से लैस किया गया, जिससे यह 'टेक्स्टबुक प्रिसिशन' से लक्ष्य भेद सका (NDTV रिपोर्ट)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट की रेंज कितनी है?
Times of India के अनुसार इसकी न्यूनतम रेंज 60 किलोमीटर है। अधिकतम रेंज इससे काफ़ी अधिक मानी जाती है, हालाँकि सटीक आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया। पुराने अनगाइडेड पिनाका की रेंज लगभग 37 किमी थी।
पिनाका का नया वर्ज़न पुराने से कैसे अलग है?
पुराना पिनाका अनगाइडेड था — एक इलाक़े पर रॉकेट बरसाता था। नए वर्ज़न में GPS-आधारित गाइडेंस और एडवांस्ड नेविगेशन है, जिससे यह किसी ख़ास ठिकाने को 'पॉइंट टारगेट' कर सकता है। रेंज भी 37 किमी से 60 किमी+ हो गई है।
क्या चीन और पाकिस्तान के पास पिनाका जैसा सिस्टम है?
चीन के पास PCL-191 और PHL-03 जैसे उन्नत MLRS हैं जिनकी रेंज 70-350 किमी है, पर LAC की ऊँचाई पर तैनाती में लॉजिस्टिक चुनौतियाँ हैं। पाकिस्तान के पास A-100 (चीनी) और T-300 कासिरगा (तुर्की) हैं, पर समतुल्य स्वदेशी सिस्टम नहीं।
पिनाका लॉन्ग रेंज भारतीय सेना में कब तक तैनात होगा?
आधिकारिक टाइमलाइन सार्वजनिक नहीं है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार सेना 2027 तक कई रेजिमेंट्स को अपग्रेडेड सिस्टम से लैस करने का लक्ष्य रख सकती है, पर भारतीय रक्षा कार्यक्रमों में 'लैब से लैंड' का फ़ासला ऐतिहासिक रूप से लंबा रहा है।






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