विस्थापित कश्मीरी परिवारों को मिलेंगे 5.5 लाख
सरकार ने कश्मीर से विस्थापित होकर भारत के कई राज्यों में आ बसे 5300 कश्मीरी परिवारों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। अब इन परिवारों को केंद्र की ओर से 5.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि ये कश्मीर में बस सकें. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पीओके के विस्थापितों के लिए मुआवजे का ऐलान करते हुए कहा कि इससे ऐतिहासिक भूल सुधार का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा, कैबिनेट ने जम्मू—कश्मीर के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रकाश जावड़ेकर ने पीओके से विस्थापित हुए 5300 परिवार जो देश के दूसरे हिस्सों में बस गए और फिर जम्मू-कश्मीर में ही लौट गए उन्हें 5.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह विस्थापित हुए परिवारों के साथ हुई ऐतिहासिक गलती सुधारने के तौर पर लिया गया कदम है।
खाते को आधार से जोड़ने की समयसीमा बढ़ी
सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 6,000 रुपये सालाना लाभ लेने के लिये खाते को आधार से जोड़ने की समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ा दी है। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, मंत्रिमंडल ने एक अगस्त 2019 के बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत राशि जारी करने को लेकर खाते से आधार को अनिवार्य रूप से जोड़ने की समयसीमा 30 नवंबर 2019 करने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि रबी फसलों की बुवाई से पहले किसानों को राहत देने के मकसद से यह कदम उठाया गया है। मंत्री ने कहा कि 7 करोड़ किसान पहले ही पीएम-किसान योजना के तहत लाभान्वित हो चुके हैं। इसके तहत किसानों को तीन समान किस्तों पर 6,000 रुपये सालाना दिये जा रहे हैं।
रेडियो और टेलीविजन के क्षेत्र में भारत और विदेशी प्रसारकों के बीच समझौते को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेडियो और टेलीविजन के क्षेत्र में भारत और विदेशी प्रसारकों के बीच समझौते को पूर्व-प्रभाव से अपनी मंजूरी दे दी है। विदेशी प्रसारकों के साथ समझौते से सार्वजनिक प्रसारक को नए दृष्टिकोण तलाशने में, नई प्रौद्योगिकियों और कड़ी प्रतियोगिता से जुड़ी मांगों को पूरा करने के लिए नई रणनीतियों के संदर्भ में, समाचार माध्यम के उदारीकरण में और वैश्वीकरण में मदद मिलेगी। परस्पर आदान-प्रदान, सह-उत्पादक के माध्यम से तैयार किए गए कार्यक्रमों के प्रसारण से दूरदर्शन और आकाशवाणी के दर्शकों/श्रोताओं के बीच समता और समावेशन का वातावरण तैयार होगा। तकनीकी जानकारी, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और कामगारों के प्रशिक्षण से सार्वजनिक प्रसारकों को प्रसारण के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।
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