सीएम पुष्कर सिंह धामी ने ₹594 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाएँ लॉन्च कर और कार्यकर्ता रैलियों का सिलसिला शुरू कर 2027 उत्तराखंड चुनाव के लिए 'मिशन मोड' का ऐलान कर दिया है — लेकिन असली मक़सद पार्टी के भीतर अपनी कुर्सी पक्की करना है।
₹594 करोड़। यही वह आँकड़ा है जो उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पिछले कुछ दिनों में मेज़ पर पटका है — ₹495 करोड़ की परियोजनाओं को हरी झंडी एक दिन, ₹99 करोड़ की मंजूरी अगले दिन। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये परियोजनाएँ सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में हैं। ABP न्यूज़ बताता है कि इसी के समानांतर धामी ने कार्यकर्ता सम्मेलनों का एक ज़बरदस्त सिलसिला शुरू कर दिया है और खुलकर कहा है कि BJP 2027 के लिए 'मिशन मोड' में है।
ऊपर से देखें तो यह एक मुख्यमंत्री का रूटीन काम लगता है — विकास कार्य, जनसंपर्क, पार्टी का मोर्चाबंदी। लेकिन अगर आप उत्तराखंड की अंदरूनी राजनीति की परतें उधेड़ें तो तस्वीर बिल्कुल अलग निकलती है। धामी का यह 'विकास ब्लिट्ज़' दरअसल हाईकमान को भेजा गया सबसे महँगा रिज़्यूमे है — एक ऐसा सीएम जो कह रहा है: "देखिए, ज़मीन पर काम हो रहा है, चेहरा बदलने की ज़रूरत नहीं।"
याद कीजिए 2022 — उत्तराखंड में BJP ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई, जो राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व था। लेकिन वह जीत त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर, तीरथ सिंह रावत को बिठाकर और फिर धामी को लाकर — यानी एक ही कार्यकाल में तीन सीएम बदलकर आई थी। हाईकमान ने एंटी-इनकम्बेंसी को बेअसर करने के लिए चेहरा बदलने का फॉर्मूला अपनाया। सवाल यह है: क्या 2027 में वही फॉर्मूला फिर चलेगा — इस बार धामी के ख़िलाफ़?
गढ़वाल-कुमाऊं का पुराना ज़ख़्म
उत्तराखंड की राजनीति का सबसे संवेदनशील तार गढ़वाल और कुमाऊं के बीच का क्षेत्रीय संतुलन है। धामी कुमाऊं (खटीमा) से हैं। गढ़वाल के नेताओं में हमेशा यह भावना रही है कि उन्हें हाशिए पर रखा जाता है। सियासी गलियारों में फुसफुसाहट है कि गढ़वाल के कई वरिष्ठ विधायक और संगठन के लोग ऊपर तक अपनी नाराज़गी पहुँचा चुके हैं। धामी का हर ज़िले में दौरा और विकास कार्यों की बमबारी इसी नाराज़गी को शांत करने की कोशिश है — गढ़वाल को दिखाना है कि "मैं सिर्फ़ कुमाऊं का नहीं, पूरे उत्तराखंड का सीएम हूँ।"
तीन गुट, एक कुर्सी
ABP न्यूज़ की रिपोर्ट से एक बात साफ़ है — BJP ने 2027 को लेकर जल्दी शुरुआत की है। लेकिन जो रिपोर्ट नहीं बताती, वह यह है कि पार्टी के भीतर कम से कम तीन स्पष्ट धाराएँ हैं। पहली धामी समर्थक — जो मानती है कि पूर्ण कार्यकाल देकर 2027 में जाना सबसे सुरक्षित दाँव है। दूसरी वह धारा जो मानती है कि 2022 वाला 'चेहरा बदलो' फॉर्मूला फिर ज़रूरी होगा, क्योंकि उत्तराखंड में पाँच साल पूरा करने वाला सीएम अगला चुनाव हारता रहा है। और तीसरी — वे चुपचाप महत्वाकांक्षी नेता जो दिल्ली में अपने 'अल्टरनेटिव' होने का केस बना रहे हैं।
पॉलिटिकल पल्स
इंडस्ट्री — बल्कि कहें सियासी गलियारों — की बात यह है कि धामी की कार्यकर्ता रैलियाँ सिर्फ़ 2027 का प्रचार नहीं हैं। ये दरअसल 'लॉयल्टी काउंट' है — कौन मंच पर आता है, कौन गायब रहता है, कौन ज़ोर से नारे लगाता है और कौन पीछे की क़तार में बैठकर फ़ोन देखता है। पार्टी सूत्रों में चर्चा है कि हर सम्मेलन की रिपोर्ट संगठन के ज़रिए सीधे दिल्ली जाती है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
एक और दिलचस्प बात — कांग्रेस की चुप्पी। उत्तराखंड कांग्रेस ने अभी तक न कोई सीएम फ़ेस प्रोजेक्ट किया है, न कोई काउंटर-कैम्पेन छेड़ा है। हरीश रावत का क़द वैसा नहीं रहा, और नई पीढ़ी का कोई चेहरा राज्यव्यापी स्वीकार्यता नहीं रखता। यह कांग्रेस की रणनीतिक चुप्पी है या असली ख़ालीपन — यह 2027 का सबसे अनकहा सवाल है।
इस सियासी बिसात के पीछे की असली चाल को इंडिया हेराल्ड ने क़रीब से देखा है: धामी का असली मुक़ाबला कांग्रेस से नहीं, अपनी ही पार्टी के भीतर से है। ₹594 करोड़ का विकास पैकेज, बूथ-लेवल रैलियाँ, हर ज़िले में दौरे — यह सब 'वोटर के लिए' जितना है, उससे कहीं ज़्यादा 'दिल्ली के लिए' है। हर परियोजना एक बुलेट पॉइंट है उस प्रेज़ेंटेशन में जो कहता है: "मुझे बदलने की ज़रूरत नहीं।"
लेकिन यहाँ वह पेच है जो धामी के हिसाब-किताब को उलट सकता है। 2022 में BJP ने 47 सीटें जीतीं — लेकिन उनमें से कई 1,000-2,000 वोटों के मार्जिन से आई थीं। एक छोटा सा एंटी-इनकम्बेंसी स्विंग पूरा गणित बिगाड़ सकता है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट्स से यह साफ़ है कि धामी इन्हीं नाज़ुक सीटों पर विकास कार्यों की बौछार कर रहे हैं — यह आँकड़ों की राजनीति है, और इसमें सोची-समझी चालाकी दिखती है।
आने वाले महीनों में दो चीज़ें देखने लायक़ होंगी। पहला — क्या RSS और BJP संगठन धामी को 2027 का चेहरा घोषित करते हैं या 'सामूहिक नेतृत्व' की भाषा बोलते रहते हैं। दूसरा — क्या गढ़वाल से कोई ऐसा नाम सामने आता है जिसे दिल्ली 'प्लान B' के तौर पर तैयार कर रही हो। जब तक ये दोनों सवाल खुले हैं, धामी का मिशन मोड दरअसल सर्वाइवल मोड है — चाहे मंच से कितनी भी ज़ोर से 2027 की विजय का नारा लगे।
उत्तराखंड की जनता के लिए ₹594 करोड़ की परियोजनाएँ अच्छी ख़बर हैं — सड़कें बनेंगी, पानी आएगा, स्कूल खुलेंगे। लेकिन राजनीति के खेल में हर करोड़ एक चाल है। और इस चाल में सबसे बड़ा दाँव धामी की अपनी कुर्सी पर लगा है। सवाल यह नहीं है कि BJP 2027 जीतेगी या नहीं — सवाल यह है कि जीत का चेहरा किसका होगा। और यही वह सवाल है जिसका जवाब देहरादून में नहीं, दिल्ली में तय होगा।
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मुख्य बातें
- सीएम धामी ने ₹594 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी — यह चुनाव से डेढ़ साल पहले असामान्य रूप से आक्रामक शुरुआत है, दैनिक जागरण के अनुसार।
- 2022 में BJP ने एक कार्यकाल में तीन सीएम बदलकर एंटी-इनकम्बेंसी तोड़ी थी — 2027 में यही फॉर्मूला धामी के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है।
- गढ़वाल-कुमाऊं का क्षेत्रीय तनाव अब भी ज़िंदा है और BJP के अंदर कम से कम तीन अलग-अलग गुट सक्रिय हैं।
- कांग्रेस ने अभी तक कोई सीएम फ़ेस या काउंटर-कैम्पेन तैयार नहीं किया — यह BJP के लिए राहत और चिंता दोनों है।
- धामी की असली लड़ाई विपक्ष से नहीं बल्कि पार्टी के भीतर अपनी कुर्सी बचाने की है — हर विकास परियोजना दिल्ली को भेजा गया संदेश है।
आँकड़ों में
- ₹594 करोड़+ — धामी द्वारा हाल के दिनों में मंजूर की गई विकास परियोजनाओं का कुल मूल्य (दैनिक जागरण)
- ₹495 करोड़ — एक ही दौर में स्वीकृत परियोजनाओं का आँकड़ा (दैनिक जागरण)
- 47 सीटें — 2022 में BJP की जीत, कई सीटें बेहद कम मार्जिन से
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और BJP संगठन, दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार।
- क्या: ₹495 करोड़ और ₹99 करोड़ — कुल ₹594 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी और 2027 चुनाव के लिए कार्यकर्ता सम्मेलनों की शुरुआत की।
- कब: जून 2026 में, ABP न्यूज़ और दैनिक जागरण की ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार।
- कहाँ: उत्तराखंड के विभिन्न ज़िलों में, गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में।
- क्यों: 2027 विधानसभा चुनाव से डेढ़ साल पहले ज़मीन तैयार करने और एंटी-इनकम्बेंसी को रोकने के लिए, ABP न्यूज़ के अनुसार।
- कैसे: विकास परियोजनाओं की तेज़ मंजूरी, बूथ-स्तर तक कार्यकर्ता सम्मेलन और सीधे जनता से संवाद अभियान के ज़रिए, दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक़।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धामी ने 2027 चुनाव के लिए क्या तैयारी शुरू की है?
दैनिक जागरण के अनुसार धामी ने ₹594 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है और ABP न्यूज़ के मुताबिक़ बूथ-स्तर तक कार्यकर्ता सम्मेलनों की शृंखला शुरू की है।
क्या 2027 में भी BJP उत्तराखंड में सीएम का चेहरा बदल सकती है?
2022 में BJP ने एक कार्यकाल में तीन सीएम बदलकर एंटी-इनकम्बेंसी तोड़ी थी। पार्टी के भीतर एक धारा मानती है कि यही फॉर्मूला 2027 में भी ज़रूरी हो सकता है, हालाँकि अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं है।
उत्तराखंड में गढ़वाल-कुमाऊं विवाद 2027 चुनाव को कैसे प्रभावित करेगा?
धामी कुमाऊं से हैं और गढ़वाल के नेताओं में प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष रहा है। धामी की हर ज़िले में विकास परियोजनाएँ इसी क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश मानी जा रही है।
उत्तराखंड में कांग्रेस की 2027 रणनीति क्या है?
अभी तक कांग्रेस ने कोई सीएम फ़ेस प्रोजेक्ट नहीं किया है और कोई काउंटर-कैम्पेन शुरू नहीं किया — यह रणनीतिक चुप्पी है या नेतृत्व का संकट, यह अभी स्पष्ट नहीं है।






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