वेलकम टू द जंगल ने दूसरे हफ़्ते लगभग ₹30 करोड़ की कमाई की, कुल भारतीय कलेक्शन ₹100 करोड़ पार पहुँचा। टाइम्स ऑफ़ इंडिया और कोईमोई के अनुसार यह अक्षय कुमार की पोस्ट-COVID सातवीं सेंचुरी है, लेकिन Week 2 का तेज़ गिरावट वाला ट्रेंड उनकी 'कम बजट-जल्दी मुनाफ़ा' रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
₹100 करोड़ की 'सेंचुरी' — बॉलीवुड में यह शब्द अब जश्न का नहीं, बचाव का हथियार बन चुका है। वेलकम टू द जंगल ने दो हफ़्तों में यह आँकड़ा पार किया, अक्षय कुमार ने पोस्ट-COVID अपनी सातवीं सेंचुरी मार ली — कोईमोई के मुताबिक़ किसी भी भारतीय स्टार से ज़्यादा। लेकिन ज़रा रुकिए और नंबरों को सीधा देखिए: दूसरे हफ़्ते में यह फ़िल्म सिर्फ़ ₹30 करोड़ के आसपास सिमट गई। पहले हफ़्ते की ₹70 करोड़+ रफ़्तार के मुक़ाबले यह 55-60% गिरावट है। सवाल सीधा है — क्या यह 'हिट' है, या सिर्फ़ एक और 'सस्ती सेंचुरी'?
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की Day 14 की लाइव रिपोर्ट बताती है कि फ़िल्म Week 2 को ₹30 करोड़ के क़रीब बंद कर रही है। ज़ी न्यूज़ के अनुसार वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹129 करोड़ तक पहुँचा, जो ठीक-ठाक दिखता है — लेकिन इसमें ओवरसीज़ का हिस्सा काफ़ी बड़ा है, जो बॉलीवुड में अक्सर प्रोड्यूसर की जेब में उतना नहीं पहुँचता जितना दिखता है। कोईमोई के हिसाब से यह फ़िल्म अक्षय की पोस्ट-COVID छठी सबसे ज़्यादा कमाने वाली बन चुकी है, जॉली एलएलबी 3 को पीछे छोड़ चुकी है — लेकिन यहाँ भी एक कड़वा सच छिपा है।
इनसाइड टॉक
ट्रेड हलकों में एक बात खुलेआम हो रही है जो कोई प्रेस रिलीज़ नहीं कहेगी: अक्षय कुमार ने पिछले तीन-चार सालों में अपना पूरा बॉक्स ऑफ़िस मॉडल ही बदल दिया है। पहले ₹150-200 करोड़ बजट, बड़ा स्टेक, बड़ा रिस्क। अब? ₹50-70 करोड़ का कम बजट, कॉमेडी फ़ॉर्मूला, मल्टी-स्टार कास्ट, ओपनिंग वीकेंड में ₹40-50 करोड़ खींचो, ₹100 करोड़ का टैग लगाओ, और 'हिट' बोलकर अगली फ़िल्म की डील पक्की करो। इंडस्ट्री सूत्रों की मानें तो प्रोड्यूसर्स को इस मॉडल से शॉर्ट-टर्म में कोई शिकायत नहीं — सस्ती फ़िल्म में मुनाफ़ा दिख जाता है। लेकिन असली सवाल यह है: क्या यह स्टारडम है या सिर्फ़ अकाउंटेंसी?
(यह इंडस्ट्री चर्चा और ट्रेड अनुमानों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
भूत बंगला का उदाहरण देखिए — पिंकविला के अनुसार अक्षय की उसी साल की फ़िल्म भूत बंगला ने तीसरे हफ़्ते तक ₹143 करोड़ कमाए, और तीसरे गुरुवार को भी ₹1.40 करोड़ जोड़े। यानी भूत बंगला में 'लेग्स' थीं — दर्शक बार-बार गए। वेलकम टू द जंगल में यह पकड़ दिख नहीं रही। Week 2 का ₹30 करोड़ वाला ठहराव साफ़ बताता है कि फ़िल्म ने ओपनिंग तो ली, लेकिन वर्ड-ऑफ़-माउथ ने रिपीट ऑडियंस नहीं खींची।
और यहीं वह कड़वा पैटर्न दिखता है जो अक्षय के हाल के करियर की सबसे बड़ी समस्या है। खेल खेल में, बेबी जॉन, सेल्फ़ी — ये सब फ़िल्में ओपनिंग के बाद इसी तरह बैठ गईं। ख़ुद सुनील शेट्टी ने वेलकम टू द जंगल को 'ब्रेन रॉट सिनेमा' कहा — एक वेटरन एक्टर जो इसी फ़्रेंचाइज़ी का हिस्सा रहा, उसका ऐसा बयान कंटेंट की क्वालिटी पर सबसे तीखी टिप्पणी है।
कोईमोई की स्टार रैंकिंग में अक्षय ने शाहरुख़ ख़ान को पीछे छोड़कर तीसरा नंबर हासिल किया — लेकिन इस रैंकिंग को भी ज़रा समझिए। यह कुल कलेक्शन पर आधारित है, और अक्षय साल में 3-4 फ़िल्में करते हैं जबकि शाहरुख़ एक या दो। वॉल्यूम से रैंकिंग जीतना और एक फ़िल्म से सिनेमा हॉल हिला देना — दोनों में फ़र्क़ है। पठान और जवान जिस तरह ₹500-1000 करोड़ तक गईं, वह 'इवेंट' था। वेलकम टू द जंगल एक 'ट्रांज़ैक्शन' है — आई, गिनी, चली गई।
असली गेम: प्रोड्यूसर्स का भरोसा कहाँ है?
इंडिया हेराल्ड का रीड यह है कि अक्षय कुमार ने एक बहुत चालाक लेकिन ख़तरनाक रास्ता चुना है। कम बजट में ₹100 करोड़ की 'सेंचुरी' मारना प्रोड्यूसर को तात्कालिक मुनाफ़ा देता है — लेकिन हर ऐसी फ़िल्म अक्षय के 'ब्रांड प्रीमियम' को थोड़ा-थोड़ा घिसती जाती है। हेरा फेरी 3 से प्रियदर्शन के निकलने की ख़बर ने पहले ही बता दिया था कि अक्षय की फ़्रेंचाइज़ीज़ में क्रिएटिव दरारें कितनी गहरी हैं।
ट्रेड विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर वेलकम टू द जंगल तीसरे हफ़्ते में ₹10-12 करोड़ से ज़्यादा नहीं जोड़ पाई, तो लाइफ़टाइम ₹115-120 करोड़ पर अटकेगी — जो ₹60-70 करोड़ के बजट पर 'एवरेज' से 'सेमी-हिट' के बीच गिनी जाएगी। असली हिट वह होती है जो ₹200 करोड़ पार करे, जो अक्षय ने पोस्ट-COVID में शायद ही की है।
आने वाले महीनों में देखने की बात यह होगी कि प्रोड्यूसर्स अक्षय को ₹100 करोड़+ बजट वाली फ़िल्में देने को तैयार हैं या नहीं। अगर वे सिर्फ़ कम बजट कॉमेडीज़ में ही कास्ट करते रहे, तो यह साफ़ सिग्नल होगा कि इंडस्ट्री ने अक्षय को 'सेफ़ बेट' की जगह 'सस्ती बेट' मान लिया है। यही वह लाइन है जो 'सुपरस्टार' और 'रिलायबल बिज़नेस मॉडल' के बीच खिंची है — और इस वक़्त अक्षय उस लाइन के ग़लत तरफ़ खड़े दिख रहे हैं।
₹100 करोड़ की सेंचुरी अब वह बैज नहीं रही जो पाँच साल पहले थी — टिकट के दाम बढ़े हैं, स्क्रीन काउंट बढ़ा है, और ₹100 करोड़ अब वह आँकड़ा है जो एक बड़े स्टार को बिना मेहनत के मिल जाना चाहिए। असली सवाल यह नहीं कि अक्षय ₹100 करोड़ कमा लेते हैं — सवाल यह है कि क्या कोई उनकी फ़िल्म दोबारा देखने जाता है। और इस वक़्त, वेलकम टू द जंगल के नंबर कह रहे हैं — नहीं।
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मुख्य बातें
- वेलकम टू द जंगल ने Week 2 में सिर्फ़ ₹30 करोड़ कमाए — पहले हफ़्ते से 55-60% गिरावट, जो कमज़ोर वर्ड-ऑफ़-माउथ का संकेत है
- यह अक्षय की पोस्ट-COVID 7वीं सेंचुरी है — किसी भी भारतीय स्टार से ज़्यादा — लेकिन वॉल्यूम से रैंकिंग जीतना और इवेंट फ़िल्म बनाना दो अलग बातें हैं
- अक्षय का 'कम बजट-जल्दी सेंचुरी' मॉडल प्रोड्यूसर्स को शॉर्ट-टर्म मुनाफ़ा देता है लेकिन उनके ब्रांड प्रीमियम को लगातार घिसता है
- ₹100 करोड़ अब 2026 में वह मील का पत्थर नहीं रहा — बढ़े टिकट दाम और स्क्रीन काउंट ने इसे सुपरस्टार के लिए न्यूनतम अपेक्षा बना दिया है
आँकड़ों में
- वेलकम टू द जंगल: भारत में ₹100 करोड़+, वर्ल्डवाइड ₹129 करोड़ (ज़ी न्यूज़)
- Week 2 कलेक्शन: लगभग ₹30 करोड़ — Week 1 से 55-60% गिरावट (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
- अक्षय की पोस्ट-COVID 7वीं सेंचुरी — किसी भी भारतीय स्टार से सर्वाधिक (कोईमोई)
- भूत बंगला ने तीसरे हफ़्ते तक ₹143 करोड़ कमाए, तीसरे गुरुवार को भी ₹1.40 करोड़ जोड़े (पिंकविला)
- अक्षय ने कोईमोई स्टार रैंकिंग में शाहरुख़ ख़ान को पछाड़कर #3 नंबर हासिल किया (कोईमोई)





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