लेजेंडरी संगीतकार प्यारेलाल की पत्नी सुनीला शर्मा का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। ज़ी न्यूज़ के अनुसार यह ख़बर मिली। सुनीला ने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की 600 से ज़्यादा फिल्मों की संगीत यात्रा के पीछे वो भूमिका निभाई जो कभी परदे पर नहीं आई — अब 84 वर्षीय प्यारेलाल अकेले हैं।
600 से ज़्यादा फिल्में। 'मेरे नैना सावन भादों', 'एक प्यार का नग़मा', 'तेरे मेरे बीच में' जैसी धुनें जो आज भी हर भारतीय शादी में बजती हैं। और इन सब के पीछे — दो नाम: लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल। लेकिन एक तीसरा नाम था जो कभी क्रेडिट्स में नहीं आया — सुनीला शर्मा। ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, संगीतकार प्यारेलाल की पत्नी सुनीला शर्मा का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके जाने के साथ एक ऐसी ताकत चली गई जिसने बॉलीवुड के सबसे सफल संगीतकार जोड़े को उन तूफानों में खड़ा रखा, जिनकी कहानी कभी किसी फिल्मी पत्रिका में नहीं छपी।
यहाँ बात सिर्फ एक 'संगीतकार की पत्नी' के निधन की नहीं है। बात उस अनकहे अध्याय की है जिसे बॉलीवुड की चमक-दमक ने हमेशा अनदेखा किया।
वो तूफान जो सुनीला ने अकेले झेले
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी बॉलीवुड के इतिहास की सबसे कामयाब संगीतकार जोड़ी थी — गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज, 600 से ज़्यादा फिल्मों का संगीत। लेकिन 1998 में लक्ष्मीकांत के निधन के बाद यह जोड़ी टूटी, और प्यारेलाल लगभग इंडस्ट्री से ग़ायब हो गए। वो दौर था जब बॉलीवुड तेज़ी से बदल रहा था — 90 के दशक के अंत में ए.आर. रहमान, जतिन-ललित जैसे नए नामों ने पुरानी पीढ़ी को हाशिए पर धकेल दिया। प्यारेलाल जैसे दिग्गज के लिए फ़ोन बजने बंद हो गए।
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, उस दौर में प्यारेलाल ने अवसाद जैसी स्थिति का सामना किया। जब चारों तरफ़ से दरवाज़े बंद हुए, तो वो ताकत जिसने उन्हें रोज़ सुबह उठने की वजह दी — वो सुनीला थीं। न कोई इंटरव्यू, न कोई सोशल मीडिया पोस्ट, न कोई 'मैंने कैसे सँभाला' वाली किताब। चुपचाप, बिना किसी क्रेडिट के।
इनसाइड टॉक
इंडस्ट्री हलकों में यह चर्चा पुरानी है कि लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल के बीच आखिरी सालों में रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। ट्रेड के जानकारों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच भी दूरियाँ आईं। ऐसी फुसफुसाहट रही है कि लक्ष्मीकांत के निधन के बाद रॉयल्टी और क्रेडिट को लेकर कुछ अनसुलझे मसले थे, जिनका बोझ प्यारेलाल ने झेला और सुनीला ने उस दबाव को परिवार से दूर रखा। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
फ़ैन्स के बीच भी सवाल उठ रहा है — प्यारेलाल साहब 84 के हैं, अब सुनीला जी भी नहीं रहीं, तो इस अमूल्य विरासत को आगे कौन ले जाएगा? सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के ओरिजिनल स्कोर्स, हस्तलिखित नोटेशन और अनरिलीज़्ड कंपोज़िशन्स को डिजिटाइज़ करने की कोई योजना है।
बॉलीवुड संगीतकारों की 'अनसंग' पत्नियाँ
सुनीला का जाना एक बड़ा सवाल उठाता है जो बॉलीवुड ने कभी नहीं पूछा: उन पत्नियों का क्या, जिन्होंने इन दिग्गजों को दिग्गज बनाए रखा? आशा भोसले ने ख़ुद कई इंटरव्यू में कहा है कि आर.डी. बर्मन के आख़िरी सालों में जब इंडस्ट्री ने उन्हें भुला दिया, तो वो टूट गए थे — और परिवार ने वो बोझ उठाया। लता मंगेशकर ने एक बार कहा था कि संगीत के पीछे जो ज़िंदगी है, वो लोग कभी नहीं देखते। मदन मोहन की पत्नी, नौशाद की पत्नी — इन नामों को कोई नहीं जानता, लेकिन बिना इनके वो संगीत संभव नहीं था जिस पर पूरा देश झूमा।
यह बॉलीवुड की सबसे पुरानी और सबसे असुविधाजनक सच्चाई है — कि इसके सबसे बड़े कलाकार अकेले नहीं रचते थे। उनकी रचनात्मकता के पीछे एक पूरा इकोसिस्टम था जिसमें पत्नी, परिवार, और वो लोग थे जिन्हें न कोई अवॉर्ड मिला, न कोई फ़िल्मफ़ेयर स्पीच में ज़िक्र।
अब विरासत का सवाल
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने 35 साल की साझेदारी में जो धरोहर बनाई, वो सिर्फ गानों की सूची नहीं — वो भारतीय सिनेमाई संगीत का DNA है। 'बॉबी' से 'तेज़ाब' तक, 'सत्यम शिवम सुंदरम' से 'राम लखन' तक — हर दशक की पहचान इनकी धुनों में है। ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट में सुनीला शर्मा के निधन की पुष्टि के साथ-साथ यह भी रेखांकित किया गया है कि प्यारेलाल अब अपने जीवन के 84वें वसंत में अकेले हैं।
इंडिया हेराल्ड का आकलन यह है कि सुनीला के जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल विरासत-संरक्षण का है। भारत में फ़िल्म संगीत के आर्काइव की हालत दयनीय है — एस.डी. बर्मन, ओ.पी. नैय्यर जैसे संगीतकारों के ओरिजिनल स्कोर्स पहले ही खो चुके हैं। अगर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की 600+ फिल्मों की ओरिजिनल शीट म्यूज़िक और नोटेशन्स को व्यवस्थित रूप से डिजिटाइज़ नहीं किया गया, तो यह विरासत भी वक़्त की धूल में दब सकती है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि प्यारेलाल का परिवार, फ़िल्म इंडस्ट्री और सरकारी संस्थाएँ इस दिशा में कोई ठोस क़दम उठाती हैं या नहीं।
बॉलीवुड अक्सर अपने दिग्गजों को श्रद्धांजलि में 'अतुलनीय योगदान' कहता है। लेकिन असली सवाल यह है — क्या वो योगदान सिर्फ श्रद्धांजलि के दो पैराग्राफ़ में सिमटकर रह जाएगा, या कोई इसे ज़िंदा रखने की ज़िम्मेदारी लेगा?
सुनीला शर्मा ने वो ज़िम्मेदारी बिना किसी क्रेडिट के, बिना किसी शिकायत के, दशकों तक उठाई। अब जब वो नहीं हैं — तो वो सवाल उनके जाने के साथ और तीखा हो गया है: 600 फिल्मों की इस धरोहर का असली वारिस कौन?
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आरोप और विवाद जो इस रिपोर्ट में उल्लेखित हैं, वे नामित स्रोतों को श्रेय दिए गए हैं और जब तक कोई न्यायालय निर्णय न दे, अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- सुनीला शर्मा (78) का निधन — प्यारेलाल की पत्नी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की 600+ फिल्मों की विरासत की परदे के पीछे की संरक्षक (ज़ी न्यूज़)
- लक्ष्मीकांत के 1998 में निधन के बाद प्यारेलाल लगभग इंडस्ट्री से ग़ायब हो गए — सुनीला ने उस सबसे कठिन दौर में परिवार और विरासत दोनों सँभाले
- बॉलीवुड संगीतकारों की पत्नियाँ — आर.डी. बर्मन से लेकर मदन मोहन तक — कभी क्रेडिट्स में नहीं आईं, लेकिन बिना उनके वो संगीत संभव नहीं था
- सबसे बड़ा सवाल: 84 वर्षीय प्यारेलाल अब अकेले — क्या लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के ओरिजिनल स्कोर्स और नोटेशन डिजिटाइज़ होंगे या खो जाएंगे?
आँकड़ों में
- लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने 35 साल की साझेदारी में 600 से ज़्यादा फिल्मों का संगीत दिया — गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज (सार्वजनिक रिकॉर्ड)
- सुनीला शर्मा का 78 वर्ष की आयु में निधन (ज़ी न्यूज़)
- प्यारेलाल वर्तमान में 84 वर्ष के हैं (सार्वजनिक रिकॉर्ड)




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