वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने ट्विटर पर यह लिखा कि "पांच साल में मलेरिया से पहली मौत, चिकनगुनिया से पहली मौत...जबकि दिल्ली सरकार इस खतरे से सुरक्षित बाहर है पंजाब, गोवा और गुजरात जीतने के लिए|" बस फिर क्या था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ना कोई जवाब सूझा, न ही जुबान काबू में रही, सीधा आरोप मढ़ा और हमला बोल दिया. उन्होंने ट्वीट करके कहा, "राजनीति करनी है, खुलकर सामने आओ| पहले कांग्रेस की दलाली करते थे, अब मोदी की? ऐसे लोगों ने पत्रकारिता को गंदा किया|" 
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मुख्यमंत्री की बात पर मंत्री भी साथ हैं| दिल्ली के जल मंत्री कपिल मिश्रा ने एक इंटरव्यू में कहा, "अगर आप पत्रकार की तरह हमसे सवाल पूछेंगे तो हम पत्रकार की तरह जवाब देंगे| अगर आप दलाल की तरह सवाल पूछेंगे, तो हम दलाल की तरह जवाब देंगे|" केजरीवाल के इस व्यवहार पर कई संपादक भी हैरान हैं| हिन्दी के संपादक आलोक मेहता ने एक इंटरव्यू में कहा, "केजरीवाल का आरोप दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है|
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मीडिया ने केजरीवाल को बनाने में अहम भूमिका निभाई है| राष्ट्रपति को इस पर हस्तक्षेप करना चाहिए|" प्रश्न ये भी है कि जब बीमारियां बड़ा रूप ले रही  हों तो बजाय आवश्यक कदम उठाने के केजरीवाल की बेलगाम बोली कितनी उचित है| वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह कहते हैं, "शेखर गुप्ता ने ऐेसा कुछ भी नहीं कहा जो पत्रकारिता के स्थापित मूल्यों के विपरित है| 
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केजरीवाल के जवाब से ये ज़रा भी नहीं लगता कि उनका प्रजातंत्र के प्रति सम्मान है|" केजरीवाल की बोली पर बार बार सवाल उठते रहे हैं| इससे पहले भी कई बार वो मीडिया पर प्रहार कर चुके हैं, लेकिन इस बार कठिनाई ये है कि उन्होंने ये हमला ऐसे वक्त पर किया है, जब दिल्ली में बीमारियां महामारी का रूप लेती जा रही हैं और एक वरिष्ठ पत्रकार ने एक उचित सवाल उठाया|


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