पूर्व मुख्यमंत्री प्रित्विराज चव्हाण ने स्वीकार किया कि शिवसेना UBT में हुई टूट के बाद NCP (SP) के 5 से 6 सांसद बेचैन हैं और दलबदल के दबाव में हैं। यह खुलासा MVA गठबंधन में गहरी दरार का संकेत है, जबकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर किसी मतभेद से इनकार किया है।
शरद पवार की राजनीतिक ज़िंदगी में ऐसे मोड़ पहले भी आए हैं जब उनके सबसे भरोसेमंद साथियों ने रातोंरात पाला बदल लिया। लेकिन इस बार अलार्म भीतर से बज रहा है — और बटन दबाने वाला कोई विरोधी नहीं, बल्कि MVA गठबंधन का अपना ही एक वरिष्ठ चेहरा है।
पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता प्रित्विराज चव्हाण ने खुलकर कहा है कि NCP (SP) के 5 से 6 सांसद शिवसेना (UBT) में हुई ताज़ा टूट के बाद 'गहरी बेचैनी' में हैं और दलबदल का दबाव झेल रहे हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ चव्हाण ने यह बयान किसी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नहीं, बल्कि एक ऐसे सार्वजनिक मंच पर दिया जहाँ यह बात 'स्लिप' की तरह नहीं, बल्कि सोची-समझी चेतावनी की तरह गिरी।
अब इसे ज़रा रुककर समझिए। जब कोई सीनियर गठबंधन नेता खुद माने कि उसके साथी दल के आधा दर्जन सांसद कमज़ोर कड़ी हैं — तो यह सिर्फ़ ईमानदारी नहीं है। यह या तो मदद की पुकार है, या फिर अपने दल को कवर देने की चाल — कि 'देखो, हमने तो पहले ही बता दिया था।'
शिवसेना UBT की टूट ने खोला पेंडोरा का पिटारा
शिवसेना (UBT) में हाल ही में जो विभाजन हुआ, उसने महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति में भूकंप ला दिया। उद्धव ठाकरे पहले ही 2022 में एकनाथ शिंदे के विद्रोह से टूटे हुए थे — अब उनके बचे-खुचे गुट में भी दरारें आ गईं। डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, इस टूट ने MVA गठबंधन के दूसरे साझेदारों — ख़ासकर NCP (SP) — में गहरी असुरक्षा पैदा कर दी है। तर्क सीधा है: अगर उद्धव अपनी पार्टी नहीं बचा सके, तो शरद पवार कैसे बचाएँगे?
इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया है कि NCP (SP) ने आधिकारिक तौर पर किसी भी आंतरिक मतभेद से इनकार किया है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि 'सभी सांसद शरद पवार साहब के साथ हैं और किसी तरह की बेचैनी की बात निराधार है।' लेकिन जब आग न हो तो धुआँ कहाँ से उठता है? और वह भी खुद गठबंधन के एक स्तंभ की ज़बान से?
पॉलिटिकल पल्स — परदे के पीछे क्या चल रहा है?
सियासी गलियारों में जो बात फुसफुसाहट में चल रही है, वह कुछ यूँ है: सत्ता पक्ष — यानी भाजपा और महायुति गठबंधन — पिछले कई महीनों से विपक्षी सांसदों पर 'ऑपरेशन लोटस' जैसी रणनीति चला रहा है। इसमें ED और CBI की जाँच का दबाव, चुनावी फ़ंडिंग का सूखना, और सत्ता का लालच — तीनों हथियार एक साथ इस्तेमाल होते हैं। चव्हाण ने ख़ुद इस दबाव की तरफ़ इशारा किया है, हालाँकि उन्होंने कोई नाम नहीं लिया।
ट्रेड हलकों में चर्चा है कि जिन 5-6 सांसदों का ज़िक्र है, वे ज़्यादातर पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के उन क्षेत्रों से हैं जहाँ 2024 के चुनाव बेहद कम अंतर से जीते गए थे। ऐसे सांसदों के लिए अगले चुनाव की गणित बहुत साफ़ है — बिना सत्ता के समर्थन के दोबारा जीतना लगभग असंभव दिखता है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
शरद पवार का 'चाणक्य' इमेज बनाम ज़मीनी हक़ीक़त
शरद पवार को भारतीय राजनीति का चाणक्य कहा जाता है — वह शख़्स जो हर चाल पहले से भाँप लेता है। लेकिन 2023 में अजित पवार के विद्रोह ने इस छवि में जो सेंध लगाई, वह अभी भरी नहीं है। NCP का विभाजन शरद पवार की राजनीतिक ज़िंदगी का सबसे बड़ा झटका था — और अब अगर शेष बचे सांसद भी डगमगाने लगें, तो 85 साल के इस नेता के पास दोबारा खड़ा होने का वक़्त बहुत कम बचता है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार चव्हाण ने यह भी कहा कि इस दबाव का सीधा असर MVA गठबंधन की एकजुटता पर पड़ रहा है। जब एक घटक दल टूटता है, तो बाक़ी में भी भरोसा हिलता है — यह डॉमिनो इफ़ेक्ट है जिसे सत्ता पक्ष बख़ूबी समझता है और इसी पर दाँव लगा रहा है।
भाजपा की 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' रणनीति
इसे सिर्फ़ दलबदल की सीधी-सादी कोशिश मत समझिए। इंडिया हेराल्ड की पॉलिटिकल रीड यह है कि भाजपा और महायुति की असली रणनीति 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' है। ज़रूरी नहीं कि ये 5-6 सांसद सचमुच दलबदल करें — बस इतना काफ़ी है कि यह ख़बर चले, यह धारणा बने, और NCP (SP) का नेतृत्व अपने ही लोगों पर शक करने लगे। जब कोई पार्टी अपने सांसदों को संदेह से देखने लगती है, तो वही सांसद सचमुच दूर हो जाते हैं — यह आत्मपूर्ण भविष्यवाणी (self-fulfilling prophecy) है और यही 'ऑपरेशन लोटस' का सबसे ख़तरनाक हिस्सा है।
डेक्कन क्रॉनिकल ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सत्ता पक्ष द्वारा विपक्षी सांसदों पर जाँच एजेंसियों का दबाव बढ़ाना एक सुनियोजित पैटर्न है — गोवा, बंगाल, और बिहार में यही फ़ॉर्मूला आज़माया गया है। महाराष्ट्र इसका अगला मोर्चा है।
MVA का भविष्य — गठबंधन बचेगा या बिखरेगा?
अगर आने वाले हफ़्तों में NCP (SP) से कोई बड़ा दलबदल होता है, तो MVA का ढाँचा बुरी तरह लड़खड़ा जाएगा। कांग्रेस पहले ही महाराष्ट्र में कमज़ोर स्थिति में है — उसके पास न ज़मीनी नेतृत्व है और न क्षेत्रीय करिश्मा। अगर NCP (SP) भी सिकुड़ गई, तो MVA नाम की ही चीज़ रह जाएगी।
लेकिन दूसरा पहलू भी है। शरद पवार ने अपने जीवन में कई बार ऐसी स्थिति से वापसी की है। 2023 में अजित पवार के जाने के बाद सबने पवार को ख़त्म मान लिया था — लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में NCP (SP) ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। सवाल यह है कि क्या 85 साल की उम्र में पवार के पास एक और लड़ाई लड़ने की ऊर्जा और संगठनात्मक ताक़त बची है — या इस बार डॉमिनो गिरने के बाद कोई उन्हें रोक नहीं पाएगा।
आने वाले दिनों में देखने वाली बात यह होगी कि शरद पवार अपने सांसदों से कैसे संवाद करते हैं — क्या वे दिल्ली में एक-एक से मिलकर भरोसा बँधाते हैं, या फिर सार्वजनिक बयानों से काम चलाते हैं। अगर पवार ने अगले दो हफ़्तों में कोई बड़ी 'लॉयल्टी रैली' या संसदीय दल की बैठक नहीं बुलाई, तो समझिए कि हालात उनके क़ाबू से बाहर जा रहे हैं।
चव्हाण का यह बयान सिर्फ़ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं है — यह MVA की नींव में पड़ी दरार की पहली सार्वजनिक स्वीकृति है। और राजनीति में जब दरार सार्वजनिक हो जाती है, तो वह बंद नहीं होती — और चौड़ी होती है।
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मुख्य बातें
- चव्हाण ने स्वीकार किया कि NCP (SP) के 5-6 सांसद सेना UBT की टूट के बाद दलबदल के दबाव में हैं — यह MVA के भीतर से आया पहला सार्वजनिक अलार्म है (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
- NCP (SP) ने आधिकारिक तौर पर किसी मतभेद से इनकार किया, लेकिन चव्हाण का बयान पार्टी के आधिकारिक रुख़ से सीधा टकराता है (इंडियन एक्सप्रेस)
- सत्ता पक्ष की रणनीति 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' है — दलबदल न भी हो, सिर्फ़ अफ़वाह से भीतरी भरोसा टूट जाता है
- शरद पवार को अगले दो हफ़्तों में कोई ठोस 'लॉयल्टी सिग्नल' देना होगा — वरना डॉमिनो इफ़ेक्ट रुकना मुश्किल
आँकड़ों में
- NCP (SP) के 5 से 6 सांसद दलबदल के दबाव में — चव्हाण का बयान (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
- शरद पवार की उम्र 85 वर्ष — और यह उनके राजनीतिक जीवन का दूसरा बड़ा संगठनात्मक संकट है, 2023 के NCP विभाजन के बाद
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता प्रित्विराज चव्हाण, NCP (SP) प्रमुख शरद पवार, और 5-6 अनाम NCP (SP) सांसद (टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार)
- क्या: चव्हाण ने कहा कि शिवसेना UBT में टूट के बाद NCP (SP) के 5-6 सांसद दलबदल के दबाव में हैं और बेचैनी महसूस कर रहे हैं (डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार)
- कब: जुलाई 2026 में यह बयान सामने आया (टाइम्स ऑफ़ इंडिया रिपोर्ट)
- कहाँ: महाराष्ट्र — जहाँ MVA गठबंधन की राजनीति केंद्रित है
- क्यों: शिवसेना UBT में हुई टूट ने MVA के अन्य घटक दलों — ख़ासकर NCP (SP) — में असुरक्षा पैदा कर दी है (इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार)
- कैसे: सत्ता पक्ष द्वारा विपक्षी सांसदों पर दलबदल का दबाव बनाया जा रहा है, जिसे चव्हाण ने 'ऑपरेशन लोटस' जैसी रणनीति बताया (डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
NCP (SP) के कितने सांसद दलबदल के दबाव में हैं?
पूर्व मुख्यमंत्री प्रित्विराज चव्हाण के अनुसार NCP (SP) के 5 से 6 सांसद शिवसेना UBT में टूट के बाद बेचैन हैं और दलबदल का दबाव झेल रहे हैं (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)।
NCP (SP) ने इन दलबदल की ख़बरों पर क्या कहा?
NCP (SP) ने आधिकारिक तौर पर किसी भी आंतरिक मतभेद से इनकार किया है और कहा है कि सभी सांसद शरद पवार के साथ हैं (इंडियन एक्सप्रेस)।
ऑपरेशन लोटस क्या है और इसका MVA पर क्या असर हो रहा है?
ऑपरेशन लोटस भाजपा की वह रणनीति मानी जाती है जिसमें विपक्षी दलों के विधायकों/सांसदों को सत्ता पक्ष में लाने के लिए दबाव और प्रलोभन का इस्तेमाल किया जाता है। MVA में इसका असर यह है कि गठबंधन के भीतर आपसी भरोसा कमज़ोर हो रहा है (डेक्कन क्रॉनिकल)।
शरद पवार इस संकट से कैसे निपट सकते हैं?
विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार को जल्द से जल्द अपने सांसदों से व्यक्तिगत संवाद करना होगा और कोई बड़ी लॉयल्टी रैली या संसदीय दल बैठक बुलानी होगी — वरना मनोवैज्ञानिक दबाव से सांसद सचमुच दूर हो सकते हैं।





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